संविधान का संशोधित स्वरूप
राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ रहटादाह
पोस्ट धमधा जिला दुर्ग ( छ. ग .)
धारा (1 ) नामकरण :- यह संविधान राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ रहटादाह का संविधान कहलायेगा .
धारा (2 ) परिक्षेत्र :- यह संविधान उन समस्त राजपूत क्षत्रिय पर लागू होगा जो राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ रहटादाह पं .क्र .1282 के अनुशासन एवं ब्यवस्था को स्वीकार करते है
धारा (3) विशिष्टिकरण :- हम संविधान में प्रयुक्त अध्यक्ष , वरिष्ठ उपाध्यक्ष , उपाध्यक्ष , महासचिव सह सचिव , उप सचिव , संगठन सचिव , प्रसार सचिव , कोषाध्यक्ष तथा सदस्य का अर्थ प्रत्येक बार राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ रहटादाह के ही पदाधिकारी होंगे .
धारा (4) वर्षारंभ :- महासभा का वर्षारंभ एक अप्रेल से ही प्रारम्भ होगा .
धारा (5) बजट :- महा सभा का बजट वार्षिक अधिवेशन के पूर्व कार्यकारिणी समिति द्वारा पारित होकर वार्षिक अधिवेशन में ( महासभा द्वारा ) स्वीकृत होगा .
धारा (6) आदर्श ( लक्ष्य )
उपधारा (1) शारीरिक विकास बलवान शरीर में ही बलवान आत्मा निवास करती है . प्रत्येक सदस्य का शरीर स्वस्थ एवं सुगठित हो इसे प्राप्त करने हेतु ब्यायाम शाला एवं क्रीडा स्थल की ब्यवस्था करने तथा प्रतियोगिताओं का आयोजन करना .
उपधारा (2) नैतिक विकास :- प्रत्येक सदस्य का आचरण पूर्णत: नैतिक होना चाहिए इसके लिए धार्मिक ग्रंथ एवं श्रेष्ठ साहित्य के अध्ययन के लिए ग्रंथालय की ब्यवस्था करना एवं महापुरुषों के प्रवचन का आयोजन करना .
उपधारा (3) शैक्षणिक विकास :- अज्ञान अन्धकार है . समाज में सद विद्या की व्यवस्था करना , होनहार छात्राओं को छात्रवृति देना . बोर्ड की परीक्षाओ में प्रावीण्य सूचि में आने वाले को तथा विश्व-विद्यालय परीक्षा में प्रथम श्रेणी प्राप्त करने वाले छात्र - छात्राओ को सम्मानित करना . शिक्षा के विकास के लिए शैक्षणिक संस्थाए खोलना एवं संचालन करना .
उपधारा (4) सांस्कृतिक विकास :- समाज का रहन-सहन , आचार - विचार , कला कौशल,एवं आमोद प्रमोद इस प्रकार हो की समाज के दुर्गुण दूर होकर स्वस्थ परम्परा का निर्माण हो सके .
उपधारा (5) आर्थिक विकास :- भौतिकवादी वैज्ञानिक युग में आर्थिक विकास समस्त विकास की आधारशिला है .
उपधारा (6) राष्ट्रीयता :- ब्यक्ति पहले राष्ट्र की संपत्ति है अत: राष्ट्र हित ब्याक्तिगत तथा सामाजिक हित से श्रेष्ठ है . समाज में राष्ट्र प्रेम तथा भातृत्व भावना का विकास करना . इस हेतु सक्रीय राजनैतिक चेतना जागृत करना .
उपधारा (7)अध्यात्मिकता :- ब्यक्ति के जीवन का परम लक्ष्य आत्म ज्ञान प्राप्त करना है, इस हेतु प्रयास करना .
उपधारा (8)समाज में ब्याप्त कुरीतियों जैसे दहेज़ प्रथा , बेमेल विवाह,मृत्यु भोज आदि को दूर करने का सामूहिक प्रयास करना .
उपधारा (9)भावी पीढ़ी के सर्वांगीण विकास हेतु समाज की महिलाओं को सुशिक्षित एवं सुसंस्कृत करना . समाज के स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त महिलाओं को सम्मानित करना
उपधारा(10) समाज के सांसद , विधायक , मंत्री , राजपत्रित अधिकारी , राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित प्रत्याशी एवं क्षेत्र विशेष में ख्याति प्राप्त सदस्यों को सम्मानित करना
धारा (7) समाज का संगठन
उप धारा (1) इस महासभा की सदस्यता उन सभी लोगो को प्राप्त होगी जो राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ पंजीयन क्रमांक 1282 के द्वारा संचालित व् नियंत्रित होंगे .
उप धारा (2) सदस्यों के लिए आयु सीमा 18 वर्ष से कम नहीं होगी .
उप धारा (3) सामान्य सदस्यता के लिए 4 /- मात्र वार्षिक शुल्क लिया जावेगा . परन्तु केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति समय-समय पर सदस्यता शुल्क में वृद्धि कर सकेगी .
उप धारा (4) अपने सहित दस लोगों को सदस्य बनाने पर सक्रीय सदस्यता प्राप्त होगी . उम्मीदवार होने होने के ठीक पहले 3 वर्ष तक लगातार सक्रीय सदस्य ही उप समितियों तथा केंद्र के पदाधिकारी बनने के पात्र होंगे .
उप धारा (5) सदस्यता शुल्क के लिए केंद्र से प्राप्त रसीद बुक सदस्यता मान्य होगी . सदस्यता शुल्क से प्राप्त राशि का 50 प्रतिशत क्षेत्रीय उप समितियों की तथा 50 प्रतिशतकेंद्र की होगी .
उप धारा (6) केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति के पदाधिकारियों के चुनाव के लिए समस्त क्षेत्रीय उप समितियों के पदाधिकारी गण मतदाता होंगे
उप धारा (7) क्षेत्रीय उप समितियों के लिए निम्नलिखित पदाधिकारी होंगे . अध्यक्ष , उपाध्यक्ष , सचिव , उप सचिव , कोषाध्यक्ष , केन्द्रीय कार्यकारिणी तथा केन्द्रीय निर्णायक समिति के एक एक प्रतिनिधि सदस्य निर्वाचित होंगे . उपरोक्त सभी पदाधिकारी क्षेत्रीय उप समिति के सक्रीय सदस्यों में से चुने जावेंगे . उप समिति के आम जलसे में चुनाव होगा . उपरोक्त निर्वाचित सदस्यों के अतिरिक्त क्षेत्रीय उप समितियों के निर्वाचित महिला मंडल एवं निर्वाचित युवा समिति के अध्यक्ष और सचिव उप समिति के पदेन सदस्य होंगे , उप समितियों के उपरोक्त पदाधिकारीयो की संख्या में वृद्धि या कमी करने का अधिकार कार्यकारिणी समिति होगा .
धारा (8 ) केन्द्रीय कार्यकारिणी का गठन :-
उप धारा (1) केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति के निम्न लिखित पदाधिकारी होंगे . अध्यक्ष , वरिष्ठ उपाध्यक्ष ,उपाध्यक्ष ,महासचिव , सहसचिव , उप सचिव ,संगठन सचिव , प्रचार सचिव , कोषाध्यक्ष तथा प्रत्येक उपसमिति से एक निर्वाचित प्रतिनिधि सदस्य होंगे इनके अतिरिक्त पिछले अनुभव तथा सेवाओं के आधार पर अध्यक्ष द्वारा मनोनीत चार सदस्य होंगे जिसमे से एक महिला होगी . केन्द्रीय पदाधिकारियों के उपरोक्त संख्या में वृद्धि या कमी करने का अधिकार केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति को होगा .
उप धारा (2) उप समितियों की संख्या 30 होगी . परन्तु इसमे समय-समय पर वृद्धि या कमी करने का अधिकार केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति को होगा .
धारा (9 ) केन्द्रीय पदाधिकारियों की योग्यता :-
उप धारा (1) महासभा का कोई भी सदस्य जिसकी आयु 35 वर्ष से कम नहो तथा किसी क्षेत्रीय उप समितियों , केन्द्रीय समिति का कम से कम एक कार्यकाल 3 वर्ष तक पदाधिकारी रहा हो . उम्मीदवार होने के ठीक पहले लगातार 3 वर्षों तक सक्रीय सदस्य रहा हो . अध्यक्ष , वरिष्ठ उपाध्यक्ष ,उपाध्यक्ष तथा महासचिव पद का उम्मीदवार हो सकेगा किन्तु जिनके विरुद्ध भ्रष्टाचार , अनैतिक आचरण तथा सामाजिक नियमों के विरोधी होने का ठोस सबूत हो पदों के उम्मीदवार नहीं हो सकेगा .
उप धारा (2) सहसचिव , कोषाध्यक्ष ,संगठन सचिव , प्रचार सचिव के लिए उम्मीदवार होने के ठीक पहले लगातार 3 वर्षों तक सक्रीय सदस्य होना आवश्यक है. जिनके विरुद्ध भ्रष्टाचार , अनैतिक आचरण तथा सामाजिक नियमों के विरुद्ध होने का ठोस सबूत होगा उपरोक्त किसी भी पद की पात्रता नहीं होगी . ऐसे आचरण के लिए किसी भी समिति के लिए पदाधिकारी नहीं हो सकेंगे .
उप धारा (3) केन्द्रीय पदाधिकारियों का चुनाव बहुमत के आधार पर होगा .
धारा (10 ) निर्वाचन प्रक्रिया :-
उप धारा (1 ) क्षेत्रीय उप समितियों के पदाधिकारियों का चुनाव केन्द्रीय कार्यकारिणी द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक की उपस्थिति एवं मार्गदर्शन में होगा .(उप समिति का उप नियम देखे ).
उप धारा (2 ) केन्द्रीय पदाधिकारियों के निर्वाचन के लिए एक निर्वाचन मंडल का केन्द्रीय कार्यकारिणीसमिति द्वारा किया जावेगा . जिसके सदस्य संख्या 3 होगी . इन्ही में से एक निर्वाचन मंडल का अध्यक्ष होगा . जिसका कार्यकाल 3 वर्षो का होगा .
उप धारा (3 ) निर्वाचक मंडल का सदस्य केन्द्रीय पदाधिकारी पद के लिए उम्मीदवार नहीं हो सकता . गठन से पूर्व सदस्यों से अभिस्वीकृति केन्द्रीय कार्यकारिणी समीती को प्राप्त करनी होगी .
उप धारा (4 ) चुनाव प्रक्रिया के लिए केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति नियमावली बनाएगी .
उप धारा (5) केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति तथा क्षेत्रीय उपसमितियों के पदाधिकारियों का कार्यकाल 3 वर्षो का होगा जो निर्वाचन के उपरान्त महासभा के वर्षारम्भ 1 अप्रेल से प्रारम्भ होगा .
उप धारा (6) क्षेत्रीय उप समितियों के चुनाव अंतिम वर्ष 31 जनवरी तक , केन्द्रीय कार्यकारिणी का चुनाव 31 मार्च तक अनिवार्य होगा विशेष परिस्थितियों में केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति समय में वृद्धिकर सकेगी जो एक माह से अधिक नहीं होगा .
उप धारा (7) संस्थापक समिति के सदस्य आजीवन सम्मानीय सदस्य होंगे .
उप धारा (8) आम सभा :- प्रति वर्ष आमसभा का वार्षिक अधिवेशन 31 मार्च के पूर्व होगा. विशेष परिस्थितियों में केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति समय में वृद्धि कर सकेगी जो एक माह से अधिक नहीं होगा .आमसभा में साधारण सदस्य भी सम्मिलित होंगे . बैठक की तिथि ,स्थान व समय केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति निश्चित करेगी जिसकी सूचना 15 दिनों पूर्व सदस्यों को भेजी जावेगी .
धारा ( 11 ) निर्णायक समिति :-
उप धारा(1 ) सामाजिक विवादो के निपटारे के लिए एक निर्णायक समिति का गठन किया जावेगा जिसमे केन्द्रीय पदाधिकारी गण प्रत्येक उप समिति के एक एक निर्वाचित प्रतिनिधि तथा अध्यक्ष द्वारा मनोनीत चार सदस्य होंगे जिसमे से एक महिला होगी .
उप धारा(2 ) निर्णायक समिति के सदस्यों की आयु 35 वर्ष से कम नहीं होगा .
उप धारा(3 ) वरिष्ठ उपाध्यक्ष इस समिति का अध्यक्ष होगा इनका कार्यकाल 3 वर्ष का होगा .
धारा ( 12 ) अध्यक्ष का अधिकार व कर्तब्य :-
उप धारा(1 ) महासभा की बैठक का अध्यक्षता करेगा .
उप धारा(2) कार्यकारिणी समिति की बैठक का अध्यक्षता करेगा .
उप धारा(3 ) सामान्य स्थिति में 15 दिन पूर्व तथा आकस्मिक स्थिति में 3 दिन पूर्व सूचना देकर किसी भी समिति या उप समिति की बैठक बुला सकता है .
उप धारा(4) निर्णायक समिति के निर्णयों को अपनी स्वीकृति देगा किन्तु आवश्यक होने पर किसी निर्णय पर पुनर्विचार के लिए निर्णायक समिति के पास वापस भेज सकता है .पुनर्विचार के बाद लिया गया निर्णय अध्यक्ष को मान्य होगा .
उप धारा (5) केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति के किसी विषय के निर्णय में पक्ष और विपक्ष में बराबर मत होने से निर्णायक मत देने का अधिकार होगा .
उप धारा (6) महासभा के कोष से कोषाध्यक्ष का महासचिव के साथ संयुक्त हस्ताक्षर से 5000 .00 पांच हजार तक राशि निकाल सकेगा . इससे अधिक की राशि निकालने के लिए कार्यकारिणी की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी .
उप धारा (7) केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति या महासभा की बैठक में किसी सदस्य या ब्यक्ति का ब्यवहार आपत्तिजनक पाया गया तो अध्यक्ष उसे वहां से उठाकर जाने के लिए कह सकता है.
उप धारा (8) केन्द्रीय निर्णायक समिति तथा कार्यकारिणी समिति में चार चार सदस्य मनोनीत कर सकता जिसमे एक - एक महिला प्रतिनिधि होगी .
उप धारा (9) आर्थिक दृष्टी से कमजोर ब्यक्ति की आवेदन शुल्क को कम या माफ़ करने क्षेत्रीय उप समिति के अध्यक्ष को अनुशंसा कर सकता है.
उप धारा (10) केन्द्रीय पदाधिकारियों के कार्यो का विभाजन करेगा .
उप धारा (11) एक हजार रुपये तक खर्च की स्वीकृति प्रदान करेगा . इससे अधिक की राशि खर्च करने के लिए कार्यकारिणी की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी .
उप धारा (12) किसी अपरिहार्य कारणों से किसी क्षेत्रीय समिति के भंग होने पर उसके स्थान पर तदर्थ समिति गठित कर सकेगा .
उप धारा (13) केन्द्रीय कार्यकारिणी एवं क्षेत्रीय समिति के वार्षिक आय - ब्याय के लेखा परिक्षण हेतु तीनलेखा परीक्षक मनोनीत कर सकेगा . जिसकी योग्यता किसी शासकीय कार्यालय के अंकेक्षक के पद पर हो या आयकर के पेशा का अनुभव हो .
धारा (13) उपाध्यक्ष के अधिकार और कर्तब्य :-
उप धारा ( 1 ) अध्यक्ष की अनुपस्थिति में वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष को अध्यक्ष के सम्पूर्ण अधिकार प्राप्त होंगे .
उप धारा ( 2 )वरिष्ठ उपाध्यक्ष , निर्णायक समिति की बैठक की अध्यक्षता करेगा . महासचिव निर्णायक समिति के कार्य का संचालन करेगा . तथा प्रचार सचिव सहयोग देगा .
उप धारा ( 3 ) उपाध्यक्ष कार्यकारिणी से संबंधित समस्त संगठनात्मक तथा रचनात्मक कार्य सह सचिव व् संगठन सचिव के सहयोग एवं अध्यक्ष के मार्गदर्शन में संपादित करेगा .
धारा 14 महासचिव के अधिकार व कर्तब्य :-
उप धारा ( 1 ) अध्यक्ष की अनुमति से केन्द्रीय निर्णायक समिति की बैठक एवं केन्द्रीय कार्य कारिणी समिति की बैठक बुलाना तथा संचालित करना .
उप धारा ( 2 ) अध्यक्ष तथा कोषाध्यक्ष के साथ महासभा के कोष से राशि आहरण करना .
उप धारा ( 3 ) अध्यक्ष की ओर से समस्त पत्र ब्यवहार करना तथा महासभा में वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करना .
उप धारा (4 ) अध्यक्ष के कार्यालय के सम्पूर्ण जिम्मेदारी वहन करना .
उप धारा (5 ) महासभा द्वारा पारित संकल्पों प्रस्तावों तथा आदेशो का पालन करना तथा कराना .
उप धारा (6 ) महासभा के कोष से रु. 1000 . 00 एक हजार अग्रिम ले सकता है तथा स्व विवेक से रु. 300 .00 ब्याय कर सकता है . इससे अधिक खर्च के लिए पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी .
उप धारा (7 ) कार्यकारिणी समिति के समस्त अभिलेखों व् आय- व्यय का लेखा रखना .
धारा 15 सहसचिव के अधिकार और कर्तब्य :-
उप धारा ( 1 ) अध्यक्ष के अनुमति से कार्यकारिणी समिति से संबंधित रिपोर्ट तैयार करना .
उप धारा ( 2 ) महासचिव के अनुपस्थिति में उसके समस्त कर्तब्यो का निर्वाह करना .
उप धारा ( 3 ) केन्द्रीय कोष से रु. 500 . 00 पांच सौ रुपये अग्रिम ले सकता है तथा स्व विवेक से रु .100 .00 सौ रुपये खर्च कर सकता है.
धारा 16 उपसचिव के अधिकार और कर्तब्य :-
उप धारा ( 1 ) सहसचिव की अनुपस्थिति में उसके कर्तब्यो का निर्वाह करना .
उप धारा ( 2 ) मिटिंग में उपस्थिति पंजी तथा सदस्यों की राय जो निर्णय के आधार बनाते है , संक्षिप्त विवरण तैयार लरना .
धारा 17 संगठन सचिव के कर्तब्य :-
उप धारा ( 1 ) संगठन सचिव महासचिव के कार्यो में सहयोग करेगा . उपस्थिति पंजी में हाजिरी लेगा तथा सदस्यों के विचार जो निर्णय के आधार बनाते है संक्षिप्त विवरण तैयार करेगा .
उप धारा ( 2 ) क्षेत्रीय उप समितियों संगठन या सीमा संबंधी विवाद के निपटारे में महासभा के उपाध्यक्ष को सहयोग करेगा
धारा 18 प्रचार सचिव के दायित्व :-
प्रचार सचिव महासभा के निर्णयों एवं लक्ष्यों का प्रचार उप समितियों में करेगा , कोषाध्यक्ष को उसके कार्य में सहयोग प्रदान करेगा
धारा 19 कोषाध्यक्ष के अधिकार और कर्तब्य :-
उप धारा ( 1 ) महासभा के सम्पूर्ण आय -ब्यय का हिसाब रखना तथा बजट तैयार करना .
उप धारा ( 2 ) आय -ब्यय का वार्षिक विवरण महासभा के समक्ष प्रस्तुत करना तथा श्रीमान पंजीयक महोदय फर्म्स एवं सोसायटीज को भी प्रतिवर्ष आय-ब्यय ब्यौरा भेजना .
उप धारा ( 3 ) अध्यक्ष या महासचिव के साथ संयुक्त हस्ताक्षर से महासभा के कोष से राशि निकालना . एक बार में रु. 5000 .00 पांच हजार रुपये तक निकाला जा सकता है , इससे अधिक की राशि निकालने के लिए कार्य कारिणी की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी .
उप धारा ( 4 ) महासभा की सदस्यता तथा अन्य मद हेतु रसीद बुक छापना , लेखा रखना तथा रोकड़ बही लिखना .
उप धारा ( 5 ) केन्द्रीय कोषाध्यक्ष , महासचिव को महासभा के कोष का त्रैमासिक विवरण देगा .
धारा 20 केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति के अधिकार और कर्तब्य :-
उप धारा ( 1 ) राजपूत क्षत्रिय समाज के समस्त आदर्शो एवं उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु कार्यक्रम तैयार करेगी तथा उसे महासभा की स्वीकृति मिलने पर कार्य रूप में परिणित करेगी .
उप धारा ( 2 ) समाज सुधार के नियम बनाएगी तथा उसका संचालन एवं नियंत्रण करेगी .
उप धारा ( 3 ) क्षेत्रीय उप समितियों के लिए उप नियम बनाएगी तथा उसका संचालन एवं नियंत्रण करेगी
उप धारा ( 4 ) केन्द्रीय कार्यकारिणी और निर्णायक समिति के किसी सदस्य का त्याग पत्र स्वीकार कर सकेगी .
उप धारा ( 5 ) क्षेत्रीय उप समितियों के सीमा तथा संगठनात्मक विवादों का निपटारा करेगी . उपसमितियों की संख्या में आवश्यकतानुसार वृद्धि या कमी कर सकेगी .
उप धारा ( 6 ) निर्णायक समिति द्वारा किसी सदस्य का आचरण भ्रष्ट साबित होने पर उसे किसी समिति का पदाधिकारी होने से रोक सकती है.
उप धारा ( 7 ) प्रतिवर्ष महासभा के आम जलसे की तिथि, स्थान एवं कार्यक्रम का निर्धारण करेगी तथा उसका संचालन भी करेगी .
उप धारा ( 8 ) किसी मद में 5000 .00 पांच हजार रुपये से अधिक की राशि खर्च करने की अध्यक्ष को अनुमति देगी .
उप धारा (9 ) महासभा के सदस्यों के लिए सदस्यता शुल्क प्रतिनिधि शुल्क एवं अन्य शुल्कों का निर्धारण करेगी .
उप धारा (10 ) महासभा की संपत्ति को बढाने के लिए किसी ब्यक्ति से दान और उपहार स्वीकार करेगी .
उप धारा (11 ) महासभा के केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति निर्णायक समिति , क्षेत्रीय उपसमिति के किसी पदाधिकारी का आचरण संविधान , सामाजिक हित का अनुशासन के विरुद्ध होने पर पदमुक्त कर सकेगी .
उप धारा (12 ) अंकेक्षक -गणों की नियुक्ति करेगी एवं उनकी कार्यप्रणाली तय करेगी .
उप धारा (13 ) निर्वाचन मंडल का गठन करेगी एवं निर्वाचन से संबंधित कार्य प्राणाली के लिए उप नियम बनाएगी .
उप धारा (14) इस संविधान की धारा 6 में वर्णित आदर्शों ( लक्ष्य ) की प्राप्ति हेतु समय समय पर समितियों की गठन करेगी . तथा उप नियम बनाएगी .
उप धारा (15) केन्द्रीय पदाधिकारियों एवं क्षेत्रीय उप समितियों के पदाधिकारियों के नामो में एवं संख्या में परिवर्तन कर सकेगी .
धारा 21 निर्णायक समिति के अधिकार
उप धारा ( 1 ) विवाह , मृत्यु तथा आचरण संबंधी विवादों से संबंधित प्राप्त आवेदनों को जांच हेतु संबंधित उप समिति में भेज सकेगी .
उप धारा ( 2 ) क्षेत्रीय उप समितियों के विवाह , मृतक कार्य व् आचरण संबंधी उप समितियों से प्राप्त विवादों पर अपना निर्णय ले सकेगी .
उप धारा (3) कोई भी निर्णय महासभा के अध्यक्ष की स्वीकृति के बाद प्रभावशील होगा .
उप धारा (4) निर्णायक समिति के निर्णय महासभा के अध्यक्ष को मान्य होंगे ,किन्तु किसी प्रकरण को महासभा के अध्यक्ष द्वारा पुनर्विचार हेतु वापस भेजने पर पुनर्विचार करना होगा .
उप धारा (5 ) निर्णायक समिति को समाज के नियमो का पालन न करने वाले सदस्यों के विरुद्ध कार्यवाही करने का अधिकार होगा . यह निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जावेगा .
उप धारा (6 ) निर्णायक समिति के निर्णय के विरुद्ध महासभा के अध्यक्ष के पास अपील की जा सकती है . अपील के बाद निर्णायक समिति के द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम होगा .
उप धारा (7) सामाजिक विवादों के निपटारे में दोनों पक्षों को अपना पक्ष प्रस्तुत करने का मौका दिया जावेगा .
उप धारा (8) किसी विषय का निर्णय सर्व सम्मत न होने पर बहुमत के आधार पर लिया जावेगा .
उप धारा (9) निर्णायक समिति किसी प्रकरण की जांच के लिए समिति गठित कर सकेगी . जांच समिति के खर्च का वहन पक्षकार करेगा .
धारा 22 सभा संचालन एवं सामान्य नियम :-
उप धारा ( 1 ) राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ रहटादाह का वार्षिक अधिवेशन 31 मार्च के पूर्व संपन्न होगा .विशेष परिस्थिति आने पर केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति समय में वृद्धि कर सकेगी जो एक माह से अधिक नहीं होगा .
उप धारा ( 2 ) महासभा के वार्षिक सामान्य बैठक की सूचना और विज्ञापन कम से कम 15 दिन पूर्व दिया जावेगा . विशेष परिस्थिति में दस दिनों का समय भी पर्याप्त होगा .
उप धारा (3 ) महासभा के वार्षिक सामान्य बैठक की ब्यवस्था जोन में सम्मिलित उप समितियों के सम्मिलित सहयोग से करेगी.
उप धारा (4 ) महासभा की बैठक की तिथि एवं स्थान का निर्धारण केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति करेगी .
उप धारा (5) केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति तथा निर्णायक समिति को भेजने व जाने वाले सुझाव , प्रस्ताव , अर्जी या शिकायत अध्यक्ष को संबोधित होंगे .
उप धारा (6) मौखिक या गुमनाम शिकायत ,आवेदन या प्रस्ताव पर विचार नहीं होंगे .
उप धारा (7) किसी भी अपील या शिकायत पर विचार करते समय पक्ष और विपक्ष को अपना विचार प्रस्तुत करने का पूरा - पूरा समय दिया जावेगा .
उप धारा (8) अपील या शिकायत करने वाले को अपने लिखित पत्र के साथ 25 / रुपये आवेदन शुल्क कोषाध्यक्ष के पास जमा करना होगा . केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति आवश्यकतानुसार इसमे परिवर्तन कर सकेगी .
उप धारा (9) महासभा की बैठक में किसी सदस्य को बोलने या भाषण देने के लिए अध्यक्ष की पूर्व स्वीकृति लेनी होगी .
उप धारा (10) महासभा की कार्यवाही में बाधा डालने या अनुशासन भंग करने वाले सदस्य या ब्यक्ति को सभा स्थल से चले जाने या क्षमा याचना की आज्ञा अध्यक्ष दे सकता है .
उप धारा (11) किसी विषय में वाद - विवाद के समय वक्ताओं को वाणी पर संयम रखना होगा .
उप धारा ( 12 ) अध्यक्ष का अपमान गंभीर अपराध माना जावेगा तथा उस पर निर्णायक समिति विचार कर निर्णय ले सकती है , इस तरह का ब्यवहार करने वाला ब्यक्ति किसी क्षेत्रीय उप समिति या समिति का पदाधिकारी बनने की पात्रता खो देगा .
उप धारा ( 13 ) महासचिव महासभा की वार्षिक बैठक में समाज उपयोगी कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा . महासचिव का वार्षिक प्रतिवेदन कार्यकारिणी द्वारा पूर्व में पारित होगा .
उप धारा ( 14) कोषाध्यक्ष महासभा की बैठक में वार्षिक आय-ब्यय का लेखा प्रस्तुत करेगा .
उप धारा ( 15) केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति तथा केन्द्रीय निर्णायक समिति की समस्त कार्यवाही का लिखित रिकार्ड रखा जावेगा .
उप धारा ( 16) महासभा या समिति के किसी भी कार्यवाही को किसी पत्र पत्रिका में अध्यक्ष की बिना अनुमति के प्रकाशित होने पर अध्यक्ष जिम्मेदार नहीं होगा .
उप धारा ( 17) केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक हर तिमाही में होगी जिसका समय व् स्थान अध्यक्ष के निर्देशानुसार महासचिव निश्चित करेगा .
उप धारा ( 18) यदि कोई सदस्य केन्द्रीय कार्यकारिणी या निर्णायक समिति की बैठक में उपस्थित होने में असमर्थ है तो इसकी सूचना बैठक के पूर्व अध्यक्ष को लिखित रूप में भेजनी होगी . यदि कोई सदस्य लगातार तीन बैठकों में बिना सूचना दिए अनुपस्थित रहता है तो अध्यक्ष उसका स्थान रिक्त घोषित कर सकता है .
उप धारा ( 19) महासभा को प्राप्त होने वाले किसी भी प्रकार की रकम देने के लिए देने वाले को अधिकृत रसीद देनी होगी
उप धारा ( 20) कोई भी ब्यक्ति केन्द्रीय कार्यकारिणी और निर्णायक समिति का सदस्य एक साथ नहीं हो सकता .
उप धारा ( 21) किसी उप समिति का कोई पदाधिकारी केन्द्रीय कार्यकारिणी का कोई पदाधिकारी होता है तो उसका पहला पद रिक्त माना जावेगा .
उप धारा ( 22) महासभा द्वारा किसी भी मद में प्राप्त सम्पूर्ण राशि किसी मान्यता प्राप्त बैंक में जमा किया जावेगा .
धारा 23 गणपूर्ति ( कोरम ) :-
उप धारा ( 1) केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति के समस्त पदाधिकारियों की कुल सदस्यों की 50 प्रतिशत उपस्थिति होने पर गणपूर्ति मानी जावेगी . कम होने पर बैठक स्थगित हो जावेगी .
उप धारा ( 2) निर्णायक समिति के कुल सदस्यों की 50 प्रतिशत उपस्थित होने पर गणपूर्ति मानी जावेगी . कम होने पर बैठक स्थगित हो जावेगी .
उप धारा ( 3) महासभा की बैठक में केन्द्रीय पदाधिकारी एवं समस्त क्षेत्रीय उपसमितियों के पदाधिकारियों के दो तिहाई उपस्थिति में गणपूर्ति मानी जावेगी. यदि बैठक का कोरम पूर्ण नहीं होता तो बैठक 1 घंटे के लिए स्थगित की जाकर उसी स्थान पर उसी दिन पुन: की जा सकेगी ,जिसके लिए कोरम का कोई शर्त नहीं होगी .
धारा 24 संविधान के किसी धारा या उप धारा में संशोधन परिवर्तन केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति द्वारा पारित होकर महासभा की बैठक में कुल सदस्यों के 2 / 3 मतों से पारित होगा . यदि आवश्यक हुआ तो संस्था के हित में पंजीकृत विधान में संशोधन करने का अधिकार पंजीयक फर्म्स एवं संस्थाए को होगा जो प्रत्येक सदस्य को मान्य होगा .
धारा 25 महासभा की संपत्ति और उसकी ब्यवस्था :-
उप धारा ( 1) महासभा की आय चल एवं अचल संपत्ति जब कभी और जहां कहीं से प्राप्त हो पूर्णत: उसके उदेश्यों की पूर्ति के लिए लगाईं जावेगी .
उप धारा ( 2) यदि महासभा का समापन या विघटन होता है तो उस परिस्थिति में सभी ऋणों या दायित्वों का भुगतान करने के पश्चात भी कोई संपत्ति चाहे वह कुछ भी हो बच जावे तो उसे महासभा के सदस्यों को वितरित नहीं की जावेगी . किन्तु उसके संबंध में कार्यवाही छ.ग. समिति पंजीयन अधिनियम १९७३ के अंतर्गत की जावेगी .
धारा 26 संवैधानिक विवादों का निपटारा :-
इस संविधान की किसी धारा या उपधारा की परिभाषा संबंधी या अन्य किसी प्रकार का कोई विवाद उत्पन्न होता है तो श्रीमान पंजीयक फर्म्स एवं संस्थाए छ.ग. रायपुर का निर्णय अंतिम रूप से मान्य होगा .
धारा 27 संस्था की चल तथा अचल संपत्ति संस्था के नाम से रहेगी , संस्था की अचल संपत्ति ( स्थावर ) रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाए की लिखित अनुज्ञा के बिना विक्रय द्वारा , दान द्वारा या अन्य प्रकार से अर्जित या अंतरित नहीं की जा सकेगी .
धारा 28 पंजीयक को भेजी जाने वाली जानकारी संविधान की धारा 27 के अंतर्गत संस्था की वार्षिक आम सभा ( अधिवेशन ) होने के दिनांक से 14 दिनों के भीतर निर्धारित प्रारूप पर कार्यकारिणी समिति के सूची फ़ाइल की जावेगी .
धारा 29 अधिनियम की धारा 28 के अंतर्गत वार्षिक आम जलसा ( अधिवेशन ) होने के दिनांक से 14 दिनों के भीतर संस्था की परीक्षित लेखा भेजी जावेगी .
धारा 30 महासभा के इस संविधान की धाराओं की प्रतियां प्रमाणित है जैसा की छ.ग.समिति पंजीयन अधिनियम 1973 ( 1960 का ) क्रमांक 1 की धारा 5 की उप धारा 2 के अधीन अपेक्षित है .
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खंड दो
-: निर्वाचन प्रक्रिया :-
1 . सदस्यता अभियान :- सदस्यता वार्षिक होगी चुनाव वर्ष में सदस्यता कार्यक्रम निम्नानुसार होगी -
महासभा की सदस्यता उपसमिति के माध्यम से केंद्र से प्राप्त रसीद बुक से प्राप्त होगी . क्षेत्रीय उपसमिति में शामिल ग्रामों के सदस्यों को चुनाव वर्ष में 7 दिसंबर तक सदस्यता प्राप्त होगी . अपने सहित 10 लोगो को सदस्य बनाने वाले 3 वर्षों तक लगातार सक्रीय सदस्य बने सक्रीय सदस्य ही उप समिति के पदाधिकारी के चुनाव में भाग ले सकेंगे .
2 . मतदाता सूची :- 15 दिसंबर तक सक्रीय सदस्य तथा सदस्यों की सूची उप समिति के द्वारा तैयार की जावेगी जो मतदाता सूची कहलाएगी .
1 . उपसमिति के सचिव केन्द्रीय पर्यवेक्षक को उपसमिति के चुनाव स्थल की जानकारी 7 दिनों पूर्व भेजेंगे . यदि किसी कारणवश केन्द्रीय पर्यवेक्षक नहीं पहुच पाए तो निर्धारित तिथि में उप समिति के अध्यक्ष चुनाव संपन्न करा सकते है .
2 . केन्द्रीय पर्यवेक्षक को उसके निवास स्थान से निर्वाचन स्थल तक जाने आने का वास्तविक किराया केंद्र से प्राप्त होगा .
3 . सदस्यता शुल्क की राशि जो महासभा द्वारा जारी सदस्यता रसीद बुक से प्राप्त होगी कुल सदस्यता राशि का 50 प्रतिशत उपसमिति की होगी तथा 50 प्रतिशत राशि बुक काउंटर फ़ाइल के साथ पर्यवेक्षक उपसमिति से लेकर कोषाध्यक्ष महासभा के पास जमा करावेंगे .
4 . केन्द्रीय पर्यवेक्षक उपसमिति से ग्रामवार सक्रीय तथा सामान्य सदस्यों की सूचि एवं निर्वाचित पदाधिकारियों के नाम , पद तथा पत्र ब्यवहार का पूरा पता सहित पूर्ण विवरण लेकर महासचिव को देंगे .
5 . उप समिति के निर्वाचित पदाधिकारी ही महासभा के पदाधिकारी के चुनाव में मतदाता होंगे . सभी क्षेत्रीय उप समितियों की सूची प्राप्त होने के बाद 31 जनवरी तक महासभा की मतदाता सूची प्रकाशित की जावेगी .
6 . महासभा की मतदाता सूची प्रकाशन के बाद महासभा के पदाधिकारियों की निर्वाचन प्रक्रिया आरम्भ होगी .
7 . नामांकन की तिथि कार्यकारिणी तय करेगी तथा मतदान की स्थिति में वार्षिक अधिवेशन के अवसर पर मतदान होगा . संविधान की धारा 9 ( निर्वाचन प्रक्रिया ) के तहत चुनाव संपन्न होगा .
हम अनेक ब्यक्ति जिनके नाम और पते निचे लिखे है महासभा का निर्माण उपरोक्त संविधान के अनुसार करने के इच्छुक हैं तथा संविधान पर निम्नांकित साक्षी की उपस्थिथि में हस्ताक्षर किये है .
1 ठा . मनमोहन सिंह बघेल अध्यक्ष कृषि ग्राम - रहटादाह , पो .- धमधा , जिला - दुर्ग
2 ठा . झुमुक सिंह चंदेल उपाध्यक्ष कृषि ग्राम - सिंवार , पो .- सोंढ, जिला - दुर्ग
3 ठा . रनमत सिंह सचिव कृषि ग्राम - भरनी, पो. - देवरी , जिला - दुर्ग
4 ठा . जवाहर सिंह उपसचिव कृषि ग्राम - बोटेगांव , पो .- संबलपुर जिला - दुर्ग
5 ठा . भीखम सिंह सदस्य कृषि ग्राम - नवागांव , पो. - सोंढ जिला - दुर्ग
6 ठा. कृपाराम सिंह सदस्य कृषि ग्राम - टठिया , पो . - दारगांव , जिला - दुर्ग
7 ठा . नत्थू सिंह सदस्य कृषि ग्राम - धमधा , पो. - धमधा , जिला - दुर्ग
8 ठा . घनश्याम सिंह सदस्य कृषि ग्राम - लखेरवली , पो . रायपुर
9 ठा . शंकर सिंह सदस्य कृषि ग्राम - खौना , पो. - खौना , जिला रायपुर
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-: ज्ञापन पत्र :-
( प्रारूप क्रमांक देखिये नियम - 3 )
1 - समिति का नाम :- राजपूत क्षत्रिय महासभा ,छत्तीसगढ़ रहटादाह .
2 - समिति का कार्यालय :- रहटादाह पोस्ट - धमधा , तहसील दुर्ग , जिला दुर्ग (म . प्र. ) में स्थित होगा
3 - समिति के उद्देश्य निम्नलिखित होंगे :-
1 - क्षत्रिय समाज के सदस्यों का शारीरिक , नैतिक और शैक्षणिक विकास करना .
2 - आर्थिक विकास करना .
3 - आध्यात्मिक विकास करना .
4 - समिति के प्रबंध विनियमों द्वारा समितियों के कार्यो का प्रबंध शासन परिषद् ( संस्थापक समिति ) को सौंपा गया है . जिनके नाम, पता ,धन्धों का उल्लेख निम्नांकित है
2 ठा . झुमुक सिंह चंदेल ग्राम - सिंवार पो .- सोंढ, जिला - दुर्ग उपाध्यक्ष कृषि
7 ठा . नत्थू सिंह ग्राम - धमधा , पो. - धमधा जिला - दुर्ग सदस्य कृषि
10 ठा . रणदमन सिंह ग्राम - कोटगांव,पो . खम्हरिया सदस्य कृषि
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5 . समिति के इस ज्ञापन के साथ समिति के विनियमों की एक प्रमाणित प्रति जैसा की मध्यप्रदेश समिति पंजीयन अधिनियम 1959 ( 1960 ) की क्रमांक 1 की धारा 5 की उपधारा 2 के अधीन अपेक्षित है संलग्न है .
हम अनेक ब्यक्ति जिनके नाम और पते नीचे दिए है ,समिति का निर्माण उपरोक्त ज्ञापन पत्र के अनुसार करने के इच्छुक है तथा ज्ञापन पत्र निम्नांकित साक्षी की उपस्र्थिति में हस्ताक्षर किए है .
क्रमांक निर्माण कर्ताओं के नाम हस्ताक्षर निर्माण कर्ता स्वतंत्र साक्ष पत्र नाम पता हस्ताक्षर सहित
1 ठा . मनमोहन सिंह बघेल द: मनमोहन सिंह सही हरिशंकर सिंह
ग्राम - रहटादाह ,
पो .-धमधा ,जिला -दुर्ग
2 ठा . झुमुक सिंह चंदेल द: झुमुक लाल द: पल्टन सिंह
ग्राम - सिंवार ,
पो .- सोंढ, जिला -दुर्ग
3 ठा . रनमत सिंह द: रनमत सिंह द: बांके सिंह
ग्राम - भरनी,
पो. - देवरी जिला - दुर्ग
4 ठा . जवाहर सिंह द: ठा . जवाहर सिंह
ग्राम - बोटेगांव ,
पो .संबलपुर जिला -दुर्ग
5 ठा . भीखम सिंह द: भीखम सिंह द: रामनारायण सिंह
ग्राम - नवागांव ,
पो. - सोंढ जिला - दुर्ग
6 ठा. कृपाराम सिंह द: कृपाराम द: मेघराज सिंह
ग्राम - टठिया ,
पो दारगांव ,जिला -दुर्ग
7 ठा . नत्थू सिंह द: नत्थूसिंह ठाकुर द: मनीरामसिंह
ग्राम - धमधा ,
पो. धमधा,जिला - दुर्ग
FORM - II
( SEE RULE 5 )
GOVERNMENT OF MADHYAPRADESH
Seal
Certificate of Registration of the Society No. 1282
This is to certify that
the राजपूत क्षत्रिय महासभा , छत्तीसगढ़ रहटादाह society located at रहटादाह in the दुर्ग Tahsil of the दुर्ग District has been registerd under the MadhyaPradesh Societies Registration Act. 1959 ( No.1 of 1960 ) on the २६ day of फरवरी 1969
Seal सही गंगा प्रसाद २६ /२
(गंगा प्रसाद श्रीवास्तव )
सहायक पंजीयक
फर्म्स एवं संस्थाए ( म . प्र. )
ii सत्य प्रतिलिपि ii