AVINASH SINGH THAKUR


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5 Comments

Reply AVINASH SINGH THAKUR
10:23 AM on October 28, 2013 
चलता रहा हु अग्निपथ पर..
चलता चला जाऊँगा
हिन्दू बन कर जन्म लिया मैंने.
.हिन्दू बन कर ही मर जाऊंगा
श्री राम की संतान हूँ.
रुकना मैंने सिखा नहीं
महाकाल का भक्त हूँ
झुकना मैंने सिखा नहीं
ह्रदय में जो धड़क रहा है.
वो धड़कन तेरे नाम का
रगों में जो बह रहा है..
वो लहू है श्री राम का.
जय राम जी की ।
Reply AVINASH SINGH THAKUR
11:20 AM on September 24, 2013 
?» 'शेर' कभी छूपकर
शिकार नही करते...
बुझदिल कभी खुलकर वार
नही करते...
अरे ! हम तो है
यौद्धा राजपुत कोम
के,,,
मरकर भी जो हार
स्वीकार नही करते...॥
Reply AVINASH SINGH THAKUR
7:55 AM on January 16, 2013 
?» "उठो क्षत्रियो जागो तुम ; समाज की ये पुकार है !
एक साथ फिर जुट जाओ तुम; राणा की ललकारहै ....!!
बरसोंसे की है हमने ; इस वतन की रक्षा......,
त्याग और बलिदानों की है; विरासत में दीक्षा......,
देश धरम हित देह त्यागकर, मिलाती है मुमुक्षा...,
मिटटी पर मर मिटनेवाले ; हम ही सच्चे सरदार है !
एक साथ फिर जुट जाओ तुम; राणा की ललकारहै ....! !
?» कुप्रथासे छेड़े जंग हम, यही मांगते है भिक्षा....,
सबलता और एकता की ; है हमें तितिक्षा.....,
करनी है अब हम को ही ; संस्कृति की सुरक्षा...,
भेदभाव को भुलाकर आओ; क्षात्र शक्ति का एल्गार है ....!
एक साथ फिर जुट जाओ तुम; राणा की ललकारहै ....! !
Reply AVINASH SINGH THAKUR
3:07 AM on January 2, 2013 
फिर से ललकारें उठ जानेदो
एक बार फिर क्राँति हो जाने दो
महाराणा फिर स्वच्छंद घूमेगा
चेतक की टापो से आकाश गूँजेगा
आज़ाद जी भी देश्द्रोहिओं को ललकारेगे
हम भी आतंकियो को घर मेँ घुसकर मारेगे
गुरु गोविन्द सिह को भीस्वाभिमान सिखानेदो
एक बार फिर कुछ देशद्रोही कट जाने दो
एक बार फिर राम मारेगे रावण को
एक बार कंस को कृष्ण के हाथो कट जाने दो
एक बार फिर ललकारें लगाने दो
वन्दे मातरम
Reply CA. SUDHIR PARIHAR
9:02 AM on April 22, 2011 
bhai sab namskar