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पर उपदेश कुशल बहुतेरे
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पर उपदेश कुशल बहुतेरे
मित्रो आप सभी को होलिकोत्सव की बधाई एवं शुभकामनाए ,
बासंती रंगों से रंगी फगुवा की मदमाती बयार में सभी बौराए से नजर आते है . मनभावन रंगों की होली बच्चे तो बच्चे , युवा ,जवान , अधेड़ , बूढ़े अंतिम पड़ाव की और बढ़ते अशक्त सभी को अच्छा लगता है .
वर्ष के बारह मॉस के 360 दिनों में होलिकोत्सव का एक दिन , होली ही एक ऐसा त्यौहार है जिसमे छोटे - बड़े , उंच - नीच , अमीर - गरीब का कोई भेद भाव नहीं होता और नहीं कोई किसी से मिलने में अथवा अपनी अभिब्यक्ति को ब्यक्त करने में हिचकिचाता नहीं है , बल्कि आपसी प्रेम संबंध में मिठास बढ़ता है , साथ ही सभी मानव समाज आज के दिन पुराने बैर - भाव ,रंजिश ,शत्रुता को भुलाकर सच्चे मन से एक दुसरे को गले से लगा लेता है . होली ही एक ऐसा त्योहार है जिसमे कोई दिखावा नहीं होता और नहीं कोई विशेष महंगे मिठाई की आवश्यकता होती है , और सबसे बड़ी बात बच्चो के मन में कोई बराबरी करने , अथवा हिन् भावना भी नहीं पनपती और नहीं वे किसी विशेष चीज की फरमाइश अथवा जिद्द भी नहीं करते है.
मित्रो आजकल पानी बचाने के नाम पर समाचार पत्रों में तिलक होली का पुरे पन्ने में बड़े - बड़े विज्ञापन का भरमार दिखाई देता है .
कोमल एवं चंचल मन को अपने अहम की तुष्टि एवं मिडिया में छपने के लिए तिलक होली का स्वांग रचा जा रहा है,
पानी के संरक्षण के लिए आज सबसे ज्यादा जरुरी पेड़ को काटने से रोका जाना जरुरी है , एक पेड़ साल भर में लाखों लीटर पानी को संरक्षित करता है साथ ही उर्वरा माटी को समुद्र में ब्यर्थ बहने से रोक कर मृदा संरक्षण का काम करता है .
समाचार पत्र मालिको से मेरा विनम्र आग्रह वे कृपया बाताये की उनके द्वारा पुर्रे वर्ष भर में कितने टन पेपर , समाचार पत्र छापने के लिए उपयोग करते है , उतने पेपर के निर्माण के लिए कितना पेड़ काटा जाता है तत्पश्चात उस पेड़ से पेपर के निर्माण में कुल कितना पानी बहाया जाता है .इसका मतलब ये है की एक पेड़ के काटने से बचाने पर लाखो लीटर पानी संरक्षित होगा साथ ही पेपर के निर्माण में कमी आने से पेपर निर्माण में उपभोग किए जाने वाले पानी की भी बचत होगी .
आज आप किसी भी समाचार पत्र को उठाकर देखे 75 प्रतिशत प्रकाशित समाचार कोई काम का नहीं होता नहीं कोई उसे पढ़ता है . पुरे पन्ने में विज्ञापन छापा जाता है जिसमे मात्र जन्म दिन,शोक सभा , शांति मिलन , विवाह , शिल्यान्यास , उदघाटन , उपभोक्ता सामग्री का विज्ञापन ही दिखाई देता है . आज पेड़ो के सबसे बड़े ग्राहक समाचार पात्र ही है , समाचार पत्र के स्वामियों से आग्रह है की वे दैनिक समाचार पत्र के स्थान पर साप्ताहिक समाचार का प्रकाशन करे एवं आपस में सभी समाचार पत्र के मालिक तय कर लेवे की साप्ताह के कौन से दिन उनके द्वारा समाचार पत्र का प्रकाशन किया जावेगा . शायद ऐसा संभव नहीं होगा क्योकि सभी को अपने समाचार पत्र की सर्कुलेशन बढाने की फ़िक्र है , सबसे पहले अपने समाचार पत्र के पृष्ठों की संख्या को सिमित करने का साहस दिखाए बारह - सोलह पृष्ठों के स्थान पर चार - छै पृष्ठों का प्रकाशन करे .
छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन सात बड़े दैनिक समाचार पत्र प्रकाशित होता है ,एक - एक समाचार पत्र समूह सप्ताह में केवल एक दिन ही प्रकाशन करने का साहस कर दिखाए , जिससे हजारो टन पेपर रोज बचेगा जिससे लाखो पेड़ काटने से बच सकता है , और हमारे पास पानी की अच्छी खासी बचत होगी .मेरा भारत के सभी समाचार पत्र के स्वामियों से आग्रह है की वे सबसे पहले आपस में बैठकर समाचार पत्रों की सर्कुलेशन की प्रतिद्वंदिता को कम करने के क्षेत्र में काम करे.
अंत में मै दैनिक भास्कर 19 मार्च 2011 पृष्ठ संख्या 6 अभिब्यक्ति - लेस्टर आर ब्राउन पर्यावरण चिंतक की लेख घटता पानी बढ़ती आबादी - पानी की हर बूंद मांगेगी हिसाब की ओर ध्यान आकृष्ट करना चाहता हुं , उनके इस लेख को जरुर पढ़े .
अन्यथा तिलक होली केवल स्वांग ही रह जावेगा और पर उपदेश कुशल बहुतेरे को ही चरितार्थ करेगा
यदि उक्त लेख से किसी की भावनाओं को ठेस पहुचता है तो मुझे भी कहना पडेगा बुरा न मानो होली
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