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युवा दिवस

Posted by bsbaghel on January 13, 2011 at 11:52 AM

12 जनवरी  2011

          स्वामी विवेकानंद जयंती की हार्दिक शुभकामनाए

            स्वामी जी के विचार युवा मन की आवाज के रूप में जाना जाता है तथा उनके जन्म दिन को युवा दिवस के रूप में

            मनाया जाता है .

  • हर घर  परिवार में कोई न कोई युवक युवती है जो स्वामी विवेकानंद के विचारों का प्रतिनिधित्व करते है . माता ,पिता एवं  अभिभावक की चाहत होती है की उनके संतान उच्च शिक्षा प्राप्त करे . तत्पश्चात ब्यवसायी अपने ब्यवसाय अथवा कोई नया  ब्यवसाय  के लिए ,  माध्यम वर्गीय तथा नौकरी पेशा अच्छी नौकरी की ख्वाहिश करता है , उद्योग से संबंधित ब्यक्ति नया उद्योग लगवाना चाहता है, मजदूर वर्ग की कोई ख्वाहिश परिलक्षित नहीं होता.
  • एक वर्ग ऐसा है जो ब्यवसाय अथवा उद्योग के बारे में नहीं सोच पाता परन्तु उसकी सोच अपने बच्चे को केवल नौकरी पाने के लिए प्रेरित करता है चाहे नौकरी कैसी भी हो वह वर्ग है देश की सबसे बड़ी आबादी जिसके कंधे पर सबसे ज्यादा भार होता जो सबका पेट भरता है , जिसके नाम पर बड़ी - बड़ी योजनाए बनाया जाता है , जिसकी संपत्ति हर वर्ष बिकते जा रही  है और दिनों दिन गरीबी की ओर बढ़ते जा रहा है , कर्ज के दलदल में फसते जा रहा है  वह है इस देश का  किसान . आज युवाओं में सबसे बड़ी संख्या कृषक की युवा  संतानों की है . 
  • अधिकांश माता , पिता अभिभावक  अपनी सोंच को अपने युवा संतानों पर थोपने की कोशिश करते है , इसका सबसे बड़ा कारण उनके खुद की अधूरी इच्छा है  जो वे स्वयं पूरा नहीं कर पाए है उसे अपने संतान के माध्यम से पूरा करना चाहते है . युवा संतान की सोंच कुछ और होती है यही से टकराहट शुरू होती तथा युवा मन में विद्रोह शुरू हो जाता है . सभी माता पिता एक जैसे  नहीं होते और न ही  उनकी सोंच एक होती है . कुछ माता पिता अपने युवा संतान की सोंच को पूरा तव्वजो देते है , और अपने सन्तान की सही अथवा गलत फैसले के संबंध में उचित सलाह नहीं दे पाते परिणाम उलटा आता है .
  • अब मै युवा मन की बात करना चाहूँगा जो अपने आप  को सबसे ज्यादा ज्ञानी , जानकारी रखने वाला साबित करता है , इसमे कोई संदेह नहीं की आज की युवा पीढ़ी को तकनीकी जानकारी बहुत है , परन्तु वह तकनीकी ज्ञान उन्हें किस माध्यम से किनके द्वारा कैसे मिल पाया है , उस तकनीक के पीछे किनका हाथ है किनकी सोंच है कभी सोंचा है संभवत : नहीं . आज की उन्नत तकनीक धीरे धीरे परवान चढ़ा है आधार फिर वही पुराना जिनकी मेहनत . लग्न एवं सोंच ने आज दुनिया को इतना सक्षम बना दिया और लोग कहने लगे कर लो दुनिया मुट्ठी में .
  • आप एक स्वतन्त्र विचार धारा से ओत प्रोत नवयुवक / नवयुवती है आपकी सोंच संकीर्ण क्यों है आप केवल अपने तक ही क्यों सोंच रहे है ,अपने सोंच को विस्तार दीजिए . अनंत को कब्जे में लेने का कोशिश  तो करे .कोशिश  हमेशा कामयाब होती है . आप जो करना चाहते है उसे मूर्त रूप देने का प्रयास करें , आप जो चाहे कर सकते हो ,हार मत माने . अपना प्रेरणा श्रोत उन्हें बनाए जिनकी सफलता की कहानी बहुत पुरानी नहीं है जो अपने सफलता की चरम पर है फिर भी नम्र बने हुए है
  •  आप जिस क्षेत्र को चुनना चाहे आपके सामने है चाहे वह सफल उद्योगपति , सफल ब्यवसायी  , वैज्ञानिक ,  स्वरोजगारी , बड़े पदों में आसीन CEO कोई भी हो सकता है , उनकी सफलता के पीछे उनकी सकारात्मक सोंच ,लग्न मेहनत को क्या आप नकार सकते है , शायद नहीं केवल भाग्य के भरोसे कुछ नहीं हो सकता , हो सकता कुछ लोगो की सफलता के पीछे उनके पारिवारिक पृष्ठ भूमि भी रही है,परन्तु अधिकांश जमीं से ही उंठे हुए लोग  है .
  • आप उन से प्रेरणा ले जिन्होंने हार को जित में बदल दिया है जिन्होंने भूख , बिमारी एवं खुले आसमान को अपना साथी मानकर सफलता की सीढ़ी  को चढ़ा है .मै आप से कहना चाहूँगा की आप अपने माता , पिता  , अभिभावक से मित्र वत ब्यवहार करे उनसे खुलकर अपनी मन की बात करे वह आपकी बात को सहर्ष स्वीकार करेगा , कही कमी दिखेगा तो निश्चित ही उस कमी को इंगित करेगा क्योकि उनके  पास अथाह  अनुभव है , अनुभव की अवहेलना मत करे .
  •  आपकी प्रतिभा निखरेगी आपका हुनर ज्यादा प्रभावी साबित होगा  और आपका मेहनत रंग लाएगी सफलता आपका कदम चूमेगी , आपका सपना साकार होगा आपका नाम होगा आपका पूरा परिवार , समाज गौरव महसूस करेगा .बस अपनी सोंच को सकारात्मक रखे ,दूब की तरह नम्र बने कोई आंधी आपका कुछ बिगाड़ नहीं पायेगा .  स्वामी विवेकानंद की विचारो को ग्रहण करे यही आप सभी युवा साथी से आग्रह है.       
  • बी .एस. बघेल


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1 Comment

Reply TH. SUSHIL SINGH RAJPUT
10:21 PM on January 13, 2011 
Koshish karnay waalon ki haar nahin hoti

 
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती.

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,

चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है.

मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,

चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है.

आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती.

डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,

जा जा कर खाली हाथ
लौटकर
आता है.

मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,

बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में.

मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती.

असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,

क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो.

जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,

संघर्श का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम.

कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,

कोशिश करने वालों
की कभी हार नहीं होती

Wishing you all a Great New Year 2011 & viyekanand jayanti