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सड़क सुरक्षा सप्ताह
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सड़क सुरक्षा सप्ताह
01 जनवरी से 07 जनवरी
हर वर्ष 1 जनवरी से 07 जनवरी तक सड़क सुरक्षा सप्ताह को सरकार की ओर से एक पर्व के रूप में मनाया जाता है ,पर क्या हम इस सुरक्षा का महत्त्व समझ पाए है या किसी को समझा पायें है . शायद इसका जवाब नहीं होगा .भले ही हम अपने आप को ट्राफिक नियम का पालन कर्ता साबित करने के लिए यह जरुर बतायेंगे की मै ट्रैफिक नियमो का पूरा पालन करता हु . सुबह समाचार पत्र पर नजर पड़ती है तो पहला पन्ना सुर्खियों भरा हमें मुह चिढ़ाता नजर आता है - तेज रफ़्तार ने फिर एक मासूम की जान ली , खुनी ट्रक ने घर के चिराग को रौंदा , तेज रफ़्तार बाइक सवार कालकवलित हुआ . अब हम ऐसे समाचार की ओर ध्यान नहीं देते क्योकि अब तो यह रोजमर्रा का समाचार हो गया है. परन्तु जब उक्त समाचार हमारे अपने घर , परिवार,नाते - रिश्तेदार , मित्र , कालोनी ,मोहल्ला अथवा शहर का हो तब हम सजगता दिखाते नजर आते है , और सड़क ,गड्ढे ,सरकार तथा ट्रैफिक ब्यवस्था को कोसते नजर आते है . आज की रफ़्तार एवं आपाधापी से भरी जिंदगी एक दुसरे से हमेशा आगे निकल जाने की ख्वाहिश तेज - तेज और तेज रफ़्तार एक जूनून सा दिमाग में छाया रहता है . तेज रफ़्तार से चलने की आदत केवल आज की टिन एजर्स , युवाओ में ही नहीं प्रौढ़ में भी देखने को मिलता है . कोई भी एक पल के लिए रुकना नहीं चाहता है . सुरक्षा नियमो का धज्जी उड़ाना युवा वर्ग अपनी बहादुरी समझता है . 90 प्रतिशत बाईक सवार बिना हेलमेट के चलता है . कार सवार अथवा चालक सुरक्षा बेल्ट बांधना अपना तौहीन समझता है . सरकार सड़क में चलने वाले भारी वाहन के माप दंड तय कर रखे है पर क्या उसका पालन होता है , शायद नहीं सभी भारी वाहन ओवर लोड चलते नजर आते है , सवारी गाडी, इनके संचालको की मर्जी चले तो ये सामान रखने के कैरियर में भी सवारी बैठाने से नहीं चुकेंगे रफ़्तार तो इनकी मर्जी पर निर्भर करता है , भले ही वाहन में कोई बीमार बैठा हो उन्हें दूर पगडंडी अथवा गली में सवारी नजर आ जाए तब ये बैल गाडी की तेजी को मात देते है , समय ज्यादा ब्यतित होने पर नम्बर चुक जाने के चक्कर में जेट को मात देते हुए आगे बढ़ते है .ये सब बाते तो केवल बाते है हमें स्वयं अपने घर , परिवार और पड़ोस को सड़क में चलने के लिए नियमो का पालन करने के लिए मना ले तभी सड़क सुरक्षा सप्ताह का प्रयोजन सिद्ध हो सकता है , अन्यथा यह केवल एक सरकारी आयोजन रह जाता है ,केवल सात दिन तक कुछ स्कूली बच्चो को चौक - चौराहे में खड़ा कराकर सिटी बजवाने से कोई फ़ायदा नहीं हो सकता , जबभी आप घर से बाईक में निकले हेलमेट पहन कर निकले कार में बैठे तो सुरक्षा बेल्ट अवश्य बांधे , कोई भी वाहन चलाते वक्त मोबाइल का उपयोग नहीं करे ,अनावश्यक ओवर -टेक न करे खली स्थान दिखने पर ही नियमानुसार आगे बढे , वाहन निर्धारित गति 40 से 50 किमी . प्रति घंटे की गति से चलाये , आप आपका वाहन सुरक्षित रहेगा इंधन खपत कम होगा आपका पाकेट भरा होगा , पर्यावरण भी स्वच्छ बना रहेगा और सबसे अच्छा आपका परिवार हमेशा खिलखिलाता एवं सुखी रहेगा .
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