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कार्तिक पूर्णिमा एवं मासोत्तमे मार्ग शीरî
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21 नवम्बर 2010
गुरुनानक देव जी की 541 वीं प्रकट दिवस (प्रकाश पर्व ) पर समस्त सिख समाज को लख - लख बधाई कार्तिक पूर्णिमा को सृष्टि के रचियता ब्रम्हा का आविर्भाव अथवा सृष्टि रचना दिवस के रूप में जाना जाता है ,आज के ही दिन आज से 540 वर्ष पूर्व सिख पंथ के संस्थापक महान संत गुरुनानक देव जी का जन्म नानक सर में हुआ था . ब्रम्हा जी ने सृष्टि की रचना के लिए कार्तिक शुक्ल एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक यज्ञ का आयोजन किया था .यज्ञ स्थल के लिए पवित्र तीर्थ स्थल पुष्कर को चुना था इसलिए पुष्कर को ब्रम्हा का आदितिर्थ पुष्कर के नाम से जाना जाता है . भगवान ब्रम्हा अत्यंत उदार तथा दयालु तथा विश्व की भरण पोषण एवं सुरक्षा करने वाले है .
कार्तिक पूर्णिमा की समाप्ति के साथ ही मासों में उत्तम मॉस मार्गशीर्ष का महीना अगहन प्रारम्भ होता है.
अगहन (मार्गशीर्ष;)) ज्योतिष एवं वास्तुशास्त्र के लिए सर्वोत्तम मॉस कहा गया है ,इस माह में गुरूवार को माता लक्ष्मी की पूजन का विशेष महत्त्व होता है .
इस माह में स्नान एवं अन्न दान का विशेष महत्त्व है .
मार्ग शीर्ष महीना में मकान बनवाने से धन धान्य की प्राप्ति होती है मार्ग शीर्ष महीना में जन्म लेने वाले जातक प्रकृति प्रिय , परोपकारी , सज्जन ,तीर्थ यात्री होता है .
बघेल बी.एस.
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thanks for response
SUSHIL RAJPUT,
PRAGYA CHOICE CENTRE, DURG
9303294275
( All kaind of online govt. services)

Thanks.
६-८ दिस.१० ;मिनी स्टेडियम, पद्मनाभपुर,दुर्ग
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