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DAHEJ - dowari

Posted by bsbaghel on February 23, 2013 at 7:35 AM

दहेज प्रथा

नन्ही सी कली

एक नन्ही सी कली, धरती पर खिली

लोग कहने लगे, पराई है पराई है !

जब तक कली ये डाली से लिपटी रही

आँचल मे मुँह छिपा कर, दूध पीती रही

फूल बनी, धागे मे पिरोई गई

किसी के गले में हार बनते ही

टूट कर बिखर गई

ताने सुनाये गये दहेज में क्या लाई है

पैरों से रौन्दी गई

सोफा मार कर, घर से निकाली गई

कानून और समाज से माँगती रही न्याय

अनसुनी कर उसकी बातें

धज्जियाँ उड़ाई गई

अंत में कर ली उसने आत्महत्या

दुनिया से मुँह मोड़ लिया

वह थी, एक गरीब माँ बाप की बेटी ।

(अज्ञात)

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1 Comment

Reply Kamlesh Singh Rajput
5:09 AM on August 16, 2013 
बेटियों के वास्तविक स्थिति की अनुभूति कराई है