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RAJPUT KSHATRIY SHAKTI & DHARM
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क्षत्रिय शक्ति और धर्म
राजपूत क्षत्रिय का स्वधर्म
नव वर्ष की स्वागत एवं शुभकामनाए ,
भारत की सभ्यता अति प्राचीन है। यह युगों-युगों से अनेक उत्थान-पतन की परिस्थितियों से गुजर चुकी है। हमनें उनसे प्रेरणाऐं भी लीं और सबक भी सीखे। यह मानवतावादी, विश्ववादी, न्याय ,प्रेम, करुणा का देश धर्म एवं जाति प्रधान है। यह देश बाहरी दुनिया के अनेक कौमों का राजनैतिक, आर्थिक गुलाम तो रहा लेकिन इसकी मूल आत्मा जो संस्कृति एवं आध्यात्म में थी इसलिए इसका अस्तित्व आज भी जिन्दा है लेकिन दुर्भाग्य से आजादी के बाद यह देश जिन यूरोपीय, अमेरिकी देशों की नीतियां को अपनाकर अपने ही हाथो अपना आत्मघात / आत्मविनाश कर रहा है, वे अब सहन नहीं की जा सकती । यूरोपीय नीतियों के सदियों पुराने प्रभाव के कारण एक बहुत बड़ा वर्ग उसका प्रवक्ता बन गया है। ऐसे लोग केवल आर्थिक लाभ के लिए स्वयं ही गुलामी की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन आज भी एक उपेक्षित क्षत्रिय बुद्धिजीवी वर्ग इन यूरोपीय नीतियों का घोर विरोधी है जो शक्ति हीनता के कारण लड़ने में सक्षम नहीं है। उसे नई शक्ति देने के लिए भारत की एक विशिष्ट राजनैतिक जाति क्षत्रिय राजपूत राष्ट्र और विश्व को धर्म, संस्कृति और राजनीति को नई दिशा देने के लिए जन्म ले रही है। अधोगति प्राप्त राजनैतिक चेतना से शून्य समाज में उपेक्षित तथा आजादी के बाद हर तरफ से पीडि़त इस महान जाति को एक महान उद्देश्य की पूर्ति के लिए जागृत करने और अपनी परंपरा के अनुसार देश धर्म के लिए बलिदान देने के लिए तैयार करने का यह छोटा सा प्रयास है। जिस प्रकार कभी विदेशी आक्रमणों के विरुद्ध आज के पंजाब प्रदेश की महान बलिदानी जातियों जाटों, सिक्खों, राजपूतों को महान गुरुओं ने अपना बलिदान देकर बलिदान देने के लिए तैयार किया था। जब-जब इस देश में जाति और धर्म के नाम पर अन्याय, अत्याचार हुए तब-तब इसी जाति में युग पुरुष पैदा हुए जैसे-भगवान बुद्ध, महावीर, गुरु गोविन्द सिंह आदि जिन्होंने मानव जाति को अन्याय अत्याचार से मुक्त कराया। हमें पुनः एक बार इस विकृत जाति एवं पंथवाद से मुक्त वेदान्त पर आधारित विश्व की पुर्नरचना के लिए इन जातियों और पंथों को मानवता की ओर मोड़ना होगा और अपने राष्ट्र तथा विश्व के अनेक धर्मों के साथ समन्वय स्थापित करना होगा।
वर्ण विज्ञान के अनुसार क्षत्रिय शक्ति का प्रतीक है। शक्ति के बिना ज्ञान नपुंसक है। दुर्भाग्य से भारत एक हजार वर्ष से श्री एवं शक्तिहीन हो गया है। इसके लिए कोई दूसरा जिम्मेदार नहीं है, हम स्वयं ही जिम्मेदार हैं। इसलिए पुनः शक्तिवान बनने के लिए किसी दूसरे की ओर ताकना नहीं है , बल्कि सिर्फ अपने क्षत्रिय धर्म का आचरण निर्वाह करना है। जब आप क्षत्रिय धर्म का पालन करेंगे तो सम्पूर्ण समाज आपको नेतृत्व भी सौपेंगा। धर्म और वर्ण धर्म के उदय का पूर्ण अवसर आ गया है। जो इसको पहचानेंगे और क्षात्र धर्म का आचरण करेंगे वे समाज में अपना स्थान बनायेंगे। जो युग धर्म नहीं पहचानेंगे, वे पिछड़ जायेंगे और स्वयं दलित हो जायेंगे। क्षत्रिय केवल सामान्य मानव नहीं बल्कि विशिष्ट मानव के रूप में पहचाने जाते हैं इसलिए हमें अपने राष्ट्रीय मानव कर्तव्य का ज्ञान होना चाहिए। हमें अपनी शक्ति को राष्ट्रहित में लगाने की तैयारी करनी है। अपनी युवा शक्ति को ज्ञान एवं शक्ति से सम्पन्न बनाकर प्रशिक्षित करना है ताकि ये अपने स्वधर्म का पहचाने।
भोग परायण संस्कृति के विरुद्ध आम आदमी जो शोषण और दमन का शिकार हो रहा है के लिए क्षत्रियों को आगे आना होगा इससे पूरा विश्व क्षात्र धर्म को समझेगा और मानवता को शोषण से मुक्ति मिलेगी। आज क्षत्रिय राजनैतिक आर्थिक अधिकारों से भी वंचित है और संख्या की राजनीति में शक्तिहीन हो गये हैं। इसके अलावा क्षत्रियों के अस्तित्व पर राजनैतिक, आर्थिक, संस्कृतिक हमले हो रहे हैं। इससे क्षत्रिय शक्तिहीन एवं प्रताड़ित हो रहा है। राष्ट्र की रक्षा करने वाले ही यदि स्वयं शक्तिहीन हो जायेंगे तो समाज की रक्षा कौन करेगा। इसलिए जागो, उठो और अपनी एवं राष्ट्र की रक्षा के लिए संघर्ष और बलिदान की तैयारी करो। किसी कौम के सामने जब ऐसे संकट खड़े होते हैं तब या तो वो हमेशा के लिए दासत्व स्वीकार कर अपना अस्तित्व समाप्त कर लेती है अथवा इन चुनौतियों का जबाव देने के लिए फिर उठ खड़ी होती है। आज क्षत्रियों को पुनः उठ खड़ा होना है या अपने कुल, गौरव, मान मर्यादाओं एवं संस्कृति को छोड़कर नष्ट हो जाना है।
हम अपना एक नया इतिहास बना सकते हैं हमें सदैव आशावादी होना चाहिए। निराशा का नाम ही मृत्यु है यह किसी भी व्यक्ति अथवा समाज पर लागू होती है। हमें अन्तर्राष्ट्रीय क्षत्रिय महासभा द्वारा चलाये जा रहे मिशन राजपूत इन एक्शन के इस संघर्ष में अपने सजातीय बुद्धिजीवियों को मार्गदर्शन तथा व्यापारियों का आर्थिक सहयोग लेना है यही युगधर्म है।
वर्तमान युग परिवर्तन की घड़ी में क्षत्रियों को अपना राष्ट्रीय और मानवीय कर्तव्य समझना होगा। इतिहास और महापुरुषों से प्रेरणा लेनी होगी। हमारे यहां आदिकाल से लोक कल्याणकारी राजतन्त्र रहा है। उसकी अपनी मर्यादाऐं थीं। जिसे सामन्ती युग कहते हैं उस सामन्त शब्द का जन्म विदेशी बर्बर कौमों के गुलामी के काल में हुआ। सामन्त शब्द पश्चिम की देन है जब तक समाज रहेगा समाज की व्यवस्था के लिए एक संचालन सूत्र रहेगा। भारत के अतीत का समाज विज्ञान पूर्ण और धर्म आधारित है। इसीलिए हमें अपने अतीत मानव कल्याणकारी क्षत्रिय वर्ण धर्म के पुर्नउत्थान साहसपूर्वक अपने विचारों को जगत में रखना चाहिए। आधुनिक भारत में क्षत्रियों को क्षात्र धर्म अपनाना होगा यदि क्षत्रियों ने अपना स्वधर्म अपना लिया तो दुनिया की कोई ताकत नहीं जो राज्य व्यवस्था का संचालन सूत्र उनके हाथ से छीन सके। इतिहास में भगवानों के रूप में जिनकी पूजा हुई और हो रही है वे सब क्षत्रिय पुत्र ही हैं। बौद्ध और जैनों ने तो भावी युगों के लिए यह कहा है कि आगे आने वाले युगों में क्षत्रियों में ही भगवान बुद्ध और महावीर आयेंगे। आधुनिक युग के संदर्भ में पृथ्वीराज चैहान, राणा प्रताप, शिवाजी, दुर्गादास राठौर, गुरु गोविन्द सिंह जैसे क्षत्रिय आयेंगे। इतनी महान ऐतिहासिक पूंजी के वारिस अपने क्षत्रिय धर्म को पहचानें । भारत और विश्व जननी भारत माता की निगाहें इसी क्षत्रिय पुत्र के अवतरण की प्रतीक्षा कर रही हैं।
विराट क्षत्रिय समाजः-
वे सब सैनिक जातियां जो अपने आर्थिक पिछड़ेपन के कारण पिछड़े वर्ग में आती हैं वे सब जातियां जिनका चरित्र लड़ाकू है और जिनके राज्य भी रहे हैं विराट क्षत्रिय समाज का अभिन्न अंग है लेकिन ऐतिहासिक तथा आर्थिक कारणों से हम टूट गये हैं। हमको पुनः एकीकरण के लिए काम करना होगा स्मरण रहे कि इतिहास ने हमारे अनेक भाईयों को हमसे अलग किया है। हमें हाथ बढ़ाकर उन्हें अपने गले लगाना होगा तभी हमारी शक्ति बनेगी यदि वे सभी क्षत्रिय जातियां संगठित हो जायें तो क्षत्रिय संख्या की दृष्टि से भी शक्तिशाली हो जायेंगे। यदि क्षत्रिय शक्ति संघर्ष करे तो ये वर्ण अपने खोये हुए स्थान को पुनः प्राप्त कर सकते हैं क्योंकि अभी तक यह वर्ग पश्चिम के वैचारिक हथियारों से लड़ते रहे हैं, इसलिए विफल भी रहे हैं। अब ये शक्तियां जागृत हो रही हैं और वह अपने भारतीय विचारों के हथियारों से लड़ने को तैयार है। अन्तराष्ट्रीय महासभा द्वारा चलाया जा रहा मिशन राजपूत इन एक्शन इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए मानव कल्याण के लिए हितकर सिद्ध होगा।
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3 Comments
ठाकुर कमलेश सिंह राजपूत , रायपुर
सीने में जो आग है, वो ही काफी है भड़काने के लिए.!!
बहती हुई नदी का रास्ता, क्या रोकेगा पहाड़ भी ..!
डराने के लिए काफी है, सिंह की एक दहाड़ ही..!!
कोई साथ नही है तो भी, चलने का हुनर आता है हमें ....!
...अर्जुन हैं हम लड़ने का हुनर आता है हमें.....!!
सारथि नही कृष्ण सा.. फिर भी लड़ेगे हम...!
जज्बा चाहिए बस... अब आगे ही बढ़ेंगे हम....!!
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