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MATI KA DIYA

Posted by bsbaghel on November 28, 2012 at 3:00 AM

माटी का दिया

मै हूँ माटी का दिया , काली रात का पीया .

मुझे जिसने जलाया मै वहा जल दिया

जल दिया जल दिया जल दिया जल दिया

मै तो झोपड़ी और महलों में रोशन किया

अँधेरा हर लिया और उजाला ही दिया

मैंने राजमहलो का सुख भी लिया मै हूँ माटी का दिया

पूजा पाठो में मैंने सब का साथ दिया

बिगड़ते काम को संभव किया

बिना दिया के भगवान् की पूजा किसने किया

मै हूँ माटी का दिया

घर महल से निकलकर शमशानों  का सफ़र किया

मुझे जहां भी जलाया रौशन किया

मै हूँ माटी का दिया,काली रात का पीया .

मुझे जहां जलाया मै वहा चल दिया

चल दिया चल दिया चल दिया चल दिया

सब के सुख और दुःख में साथ दिया

मुझे जिसने बुलाया मई वहा चल दिया

इस अँधेरे  को मैंने आँख दिया

मैंने तेल पिया और उजाला दिया मै हूँ माटी का दिया

जैसे  सूरज ने जग को सबेरा दिया

मैंने जल जल करके उजाला किया

मैंने अँधेरा पिया और रौशन दिया

मै जल जल करके सबको ज्ञान दिया

मै हूँ माटी का दिया

श्री  धनेश राम पटेल शिक्षक

राजनांदगांव

 

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