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MAHASHIVRATRI
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20 फरवरी 2012
महाशिवरात्रि
भगवान् शिव फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी को रात्रि के समय अग्नि स्तम्भ के रूप में पंचमुखी प्रकट हुए जो पंच - तत्व : - पृथ्वी , जल , आकाश , अग्नि , वायु के रूप में थे .
सर्व प्रथम ॐ शब्द की उत्पति हुई तथा पंचो मुख से शेष पांच अक्षर नम: शिवाय की ब्युत्पति हुई . ॐ नम: शिवाय को सृष्टि का पहला महामंत्र माना जाता है
शिव का अर्थ आनंद देने वाला ,मंगलदाता ,जिसे सब चाहे, मंगलमय, पंच देवो का प्रधान , अनादी , परमेश्वर एवं आगम - निगम , शास्त्रों के अधिष्ठाता है . शिव सर्वशक्तिमान विधाता होने पर भी सहज , सरल , सौम्य , मृदुल , भोले भंडारी है .
शिव की आराधन सहज सरल एवं आसान है सच्चे मन से किसी भी मार्ग से आराधना कर शिव को प्रसन्न कर मनोकामना पूर्ण कर सकते है .
भगवान् शिव में परस्पर विरोधी दो स्वरूप साक्षात दिखाई देता है
1 गृहस्थ है , पर रहते है शमशान में
2 अर्धनारीश्वर है , पर है कामजित ,जितेन्द्रिय
3 सौम्य है , पर रौद्र भी .
4 माथे में चन्द्रमा है पर गले में सर्प विराजित .
5 नंदी है तो सिंह भी .
6 सर्प के साथ मयूर एवं मूषक भी.
7 परिवार के साथ भुत -प्रेत भी है अर्थात द्वंद का समागम है पर कही भेद भाव नहीं है
भगवान् शिव की पूजा गृहस्थो को विशेष रूप से करना चाहिए , भगवान् शिव कई रूपों में मनोकामना पूर्ण करते है , महामृत्युंजय के रूप में अनेक रोगों का नाश करने वाले है ,
शिव ऐसे परब्रम्ह है जो साधक की मनोकामना पल भर में पूरा कर देते है , महाशिवरात्रि साधना पर्व है . भगवान् शिव वे ही है जिन्होंने रावण को अपर बल , परशुराम को महाबलशाली , मार्कंडेय ऋषि को यमराज से मुक्ति तथा भश्मासुर जैसे राक्षस को भी मनचाहा वरदान दे दिया था .
भगवान् शिव की अराधना शिवरात्री के दिन सूर्योदय के पूर्व उठकर नित्यकर्मो से निबटकर स्नान कर उत्तर दिशा की ओर मुंह कर पुरे विधि विधान से पूजन करे .
पूजन में निम्न तीन मंत्रो का जाप करे .
1 . ओम नम: शिवाय , 2 . ओम रसे रसाय नम: 3 . ओम त्र्यंबकम यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम उर्वारुकमेव बन्धनात मृत्युमोक्षीयम मामृतात .
भगवान् भोले नाथ आपसभी की मनोकामना पूर्ण करे
बी . एस . बघेल
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