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Mother - Father Worship Day
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मातृ-पितृ पूजन दिवस 14 फरवरी 2012
अच्छा संस्कार धर्म का , धर्म राष्ट्र का मेरुदंड होता है. बच्चो में संस्कार बचपन से ही बोया जा सकता है . संस्कार घर , स्कूल एवं कालेज से ही मिल सकता है . अच्छा संस्कार के लिए सर्वोत्तम स्थान प्राथमिक शाला से लेकर महाविद्यालय तक है . बच्चो में संस्कार के सृजन के लिए शिक्षक - शिक्षिकाए , प्रधानाचार्य , प्राध्यापक , प्राचार्य की ज्यादा जिम्मेदारी होती है बनिस्बत माता - पिता के क्योकि बच्चो एवं छत्रो के दिन का पूरा समय स्कूल एवं महाविद्यालय में ही ब्यतीत होता है. अच्छा संस्कार पुस्त दर पुस्त माता - पिता , अभिभावक एवं शिक्षको के माध्यम से ही बच्चो को मिलता है . संस्कार एक धरोहर है जिसका संरक्षण भी जरुरी है . मातृ-पितृ पूजन दिवस के आयोजन से मातृदेवो भव - पितृदेवो भव , आचार्यदेवो भव की भावना से संस्कार सुदृढ़ होगा , जो कोमल मन में शुभ संस्कार उज्जवल चरित्र निर्माण का आधारशिला साबित होगा . संस्कारित भावी पीढ़ी के बच्चे परिवार , समाज , राज्य के साथ ही राष्ट्र निर्माण में भागीदार होंगे .
मातृ-पितृ पूजन दिवस 14 फरवरी छत्तीसगढ़ के साथ ही पुरे राष्ट्रवासियों को बधाई एवं शुभकामनाए
भागवत सिंह बघेल
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