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विचार वीथी - राजपूत क्षत्रिय महासभा का ब्लॉग.

कृपया यह ध्यान रखें कि यहां व्यक्त विचार इस ब्लॉग में लिखने वाले लेखकों के अपने विचार हैं . आवश्यक नहीं है कि, राजपूत क्षत्रीय महासभा की इन विचारों से सहमत ही  हो .. अपने विचार व्यक्त करते समय मर्यादा और शालीनता का ध्यान रखें और किसी पर व्यक्तिगत आक्षेप न करें .

 

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पर उपदेश कुशल बहुतेरे

Posted by bsbaghel on March 19, 2011 at 9:17 AM Comments comments (0)

                     पर उपदेश कुशल बहुतेरे 

मित्रो आप सभी को होलिकोत्सव की बधाई एवं शुभकामनाए ,

बासंती  रंगों से रंगी फगुवा की मदमाती बयार में सभी बौराए से नजर आते है . मनभावन रंगों की होली बच्चे तो बच्चे , युवा ,जवान , अधेड़ , बूढ़े  अंतिम पड़ाव की और बढ़ते अशक्त सभी को  अच्छा  लगता है .

वर्ष के बारह मॉस के 360 दिनों में होलिकोत्सव का एक दिन , होली ही एक ऐसा त्यौहार है जिसमे छोटे - बड़े , उंच - नीच , अमीर - गरीब का कोई भेद भाव नहीं होता और नहीं कोई किसी से मिलने में अथवा अपनी अभिब्यक्ति को ब्यक्त करने में हिचकिचाता नहीं  है , बल्कि आपसी प्रेम संबंध में मिठास बढ़ता है , साथ ही सभी मानव समाज आज के दिन पुराने बैर - भाव ,रंजिश ,शत्रुता को भुलाकर सच्चे मन से एक दुसरे को गले से लगा लेता है . होली ही एक ऐसा त्योहार है जिसमे कोई दिखावा नहीं होता और नहीं कोई विशेष महंगे मिठाई की आवश्यकता होती है , और सबसे बड़ी बात बच्चो के मन में कोई बराबरी करने , अथवा हिन् भावना भी नहीं पनपती और नहीं वे किसी विशेष चीज की फरमाइश अथवा  जिद्द भी नहीं करते है.

मित्रो आजकल पानी बचाने के नाम पर समाचार पत्रों में तिलक होली का पुरे पन्ने में बड़े - बड़े विज्ञापन का भरमार दिखाई देता है .

कोमल एवं चंचल मन को अपने अहम की तुष्टि  एवं मिडिया में छपने के लिए तिलक होली का स्वांग रचा जा रहा है,

पानी के संरक्षण के लिए आज सबसे ज्यादा जरुरी पेड़ को काटने से रोका जाना जरुरी है , एक पेड़ साल भर में लाखों लीटर पानी को संरक्षित करता है साथ ही उर्वरा माटी को समुद्र में ब्यर्थ बहने से रोक कर मृदा संरक्षण का काम करता है .

समाचार पत्र मालिको से मेरा विनम्र आग्रह वे कृपया बाताये की उनके द्वारा पुर्रे वर्ष भर में कितने टन पेपर , समाचार पत्र छापने के लिए उपयोग करते है , उतने पेपर के निर्माण के लिए कितना पेड़ काटा जाता है तत्पश्चात उस पेड़ से पेपर के निर्माण में कुल कितना पानी बहाया जाता है .इसका मतलब ये है की एक पेड़ के काटने से बचाने पर लाखो लीटर पानी संरक्षित होगा साथ ही पेपर के निर्माण में कमी आने से पेपर निर्माण में उपभोग किए जाने वाले पानी की भी बचत होगी .

आज आप किसी भी समाचार पत्र को उठाकर देखे 75 प्रतिशत प्रकाशित समाचार कोई काम का नहीं होता नहीं कोई उसे पढ़ता है . पुरे पन्ने में विज्ञापन छापा जाता है जिसमे मात्र जन्म दिन,शोक सभा , शांति मिलन , विवाह , शिल्यान्यास , उदघाटन , उपभोक्ता सामग्री का विज्ञापन ही दिखाई देता है .  आज पेड़ो के सबसे बड़े ग्राहक समाचार पात्र ही है , समाचार पत्र के स्वामियों से आग्रह है की वे दैनिक समाचार पत्र के स्थान पर साप्ताहिक  समाचार का प्रकाशन करे एवं आपस में सभी समाचार पत्र के मालिक तय कर लेवे की साप्ताह के कौन से दिन उनके द्वारा समाचार पत्र  का प्रकाशन किया जावेगा . शायद ऐसा संभव नहीं होगा क्योकि सभी को अपने समाचार पत्र की सर्कुलेशन बढाने की फ़िक्र है , सबसे पहले अपने समाचार पत्र के पृष्ठों  की संख्या को सिमित करने का साहस दिखाए बारह - सोलह पृष्ठों के स्थान पर चार - छै पृष्ठों का प्रकाशन करे .

छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन सात बड़े दैनिक समाचार पत्र प्रकाशित होता है ,एक - एक समाचार पत्र समूह सप्ताह में केवल एक दिन ही प्रकाशन करने का साहस कर दिखाए , जिससे हजारो  टन पेपर रोज बचेगा जिससे लाखो पेड़ काटने से बच सकता है ,  और हमारे पास पानी की अच्छी खासी बचत होगी .मेरा भारत के सभी समाचार पत्र के स्वामियों से आग्रह है की वे सबसे पहले आपस में बैठकर समाचार पत्रों की सर्कुलेशन की प्रतिद्वंदिता को कम करने के क्षेत्र में काम करे.

अंत में मै दैनिक भास्कर 19 मार्च 2011 पृष्ठ संख्या 6 अभिब्यक्ति - लेस्टर आर ब्राउन पर्यावरण चिंतक की लेख घटता पानी बढ़ती आबादी - पानी की हर बूंद मांगेगी हिसाब की ओर ध्यान आकृष्ट करना चाहता हुं , उनके इस लेख को जरुर पढ़े .

अन्यथा तिलक होली केवल स्वांग ही रह जावेगा और  पर उपदेश कुशल बहुतेरे को ही चरितार्थ करेगा

यदि उक्त लेख से किसी की भावनाओं को ठेस पहुचता है तो  मुझे भी कहना पडेगा बुरा न मानो होली


युवा दिवस

Posted by bsbaghel on January 13, 2011 at 11:52 AM Comments comments (1)

12 जनवरी  2011

          स्वामी विवेकानंद जयंती की हार्दिक शुभकामनाए

            स्वामी जी के विचार युवा मन की आवाज के रूप में जाना जाता है तथा उनके जन्म दिन को युवा दिवस के रूप में

            मनाया जाता है .

  • हर घर  परिवार में कोई न कोई युवक युवती है जो स्वामी विवेकानंद के विचारों का प्रतिनिधित्व करते है . माता ,पिता एवं  अभिभावक की चाहत होती है की उनके संतान उच्च शिक्षा प्राप्त करे . तत्पश्चात ब्यवसायी अपने ब्यवसाय अथवा कोई नया  ब्यवसाय  के लिए ,  माध्यम वर्गीय तथा नौकरी पेशा अच्छी नौकरी की ख्वाहिश करता है , उद्योग से संबंधित ब्यक्ति नया उद्योग लगवाना चाहता है, मजदूर वर्ग की कोई ख्वाहिश परिलक्षित नहीं होता.
  • एक वर्ग ऐसा है जो ब्यवसाय अथवा उद्योग के बारे में नहीं सोच पाता परन्तु उसकी सोच अपने बच्चे को केवल नौकरी पाने के लिए प्रेरित करता है चाहे नौकरी कैसी भी हो वह वर्ग है देश की सबसे बड़ी आबादी जिसके कंधे पर सबसे ज्यादा भार होता जो सबका पेट भरता है , जिसके नाम पर बड़ी - बड़ी योजनाए बनाया जाता है , जिसकी संपत्ति हर वर्ष बिकते जा रही  है और दिनों दिन गरीबी की ओर बढ़ते जा रहा है , कर्ज के दलदल में फसते जा रहा है  वह है इस देश का  किसान . आज युवाओं में सबसे बड़ी संख्या कृषक की युवा  संतानों की है . 
  • अधिकांश माता , पिता अभिभावक  अपनी सोंच को अपने युवा संतानों पर थोपने की कोशिश करते है , इसका सबसे बड़ा कारण उनके खुद की अधूरी इच्छा है  जो वे स्वयं पूरा नहीं कर पाए है उसे अपने संतान के माध्यम से पूरा करना चाहते है . युवा संतान की सोंच कुछ और होती है यही से टकराहट शुरू होती तथा युवा मन में विद्रोह शुरू हो जाता है . सभी माता पिता एक जैसे  नहीं होते और न ही  उनकी सोंच एक होती है . कुछ माता पिता अपने युवा संतान की सोंच को पूरा तव्वजो देते है , और अपने सन्तान की सही अथवा गलत फैसले के संबंध में उचित सलाह नहीं दे पाते परिणाम उलटा आता है .
  • अब मै युवा मन की बात करना चाहूँगा जो अपने आप  को सबसे ज्यादा ज्ञानी , जानकारी रखने वाला साबित करता है , इसमे कोई संदेह नहीं की आज की युवा पीढ़ी को तकनीकी जानकारी बहुत है , परन्तु वह तकनीकी ज्ञान उन्हें किस माध्यम से किनके द्वारा कैसे मिल पाया है , उस तकनीक के पीछे किनका हाथ है किनकी सोंच है कभी सोंचा है संभवत : नहीं . आज की उन्नत तकनीक धीरे धीरे परवान चढ़ा है आधार फिर वही पुराना जिनकी मेहनत . लग्न एवं सोंच ने आज दुनिया को इतना सक्षम बना दिया और लोग कहने लगे कर लो दुनिया मुट्ठी में .
  • आप एक स्वतन्त्र विचार धारा से ओत प्रोत नवयुवक / नवयुवती है आपकी सोंच संकीर्ण क्यों है आप केवल अपने तक ही क्यों सोंच रहे है ,अपने सोंच को विस्तार दीजिए . अनंत को कब्जे में लेने का कोशिश  तो करे .कोशिश  हमेशा कामयाब होती है . आप जो करना चाहते है उसे मूर्त रूप देने का प्रयास करें , आप जो चाहे कर सकते हो ,हार मत माने . अपना प्रेरणा श्रोत उन्हें बनाए जिनकी सफलता की कहानी बहुत पुरानी नहीं है जो अपने सफलता की चरम पर है फिर भी नम्र बने हुए है
  •  आप जिस क्षेत्र को चुनना चाहे आपके सामने है चाहे वह सफल उद्योगपति , सफल ब्यवसायी  , वैज्ञानिक ,  स्वरोजगारी , बड़े पदों में आसीन CEO कोई भी हो सकता है , उनकी सफलता के पीछे उनकी सकारात्मक सोंच ,लग्न मेहनत को क्या आप नकार सकते है , शायद नहीं केवल भाग्य के भरोसे कुछ नहीं हो सकता , हो सकता कुछ लोगो की सफलता के पीछे उनके पारिवारिक पृष्ठ भूमि भी रही है,परन्तु अधिकांश जमीं से ही उंठे हुए लोग  है .
  • आप उन से प्रेरणा ले जिन्होंने हार को जित में बदल दिया है जिन्होंने भूख , बिमारी एवं खुले आसमान को अपना साथी मानकर सफलता की सीढ़ी  को चढ़ा है .मै आप से कहना चाहूँगा की आप अपने माता , पिता  , अभिभावक से मित्र वत ब्यवहार करे उनसे खुलकर अपनी मन की बात करे वह आपकी बात को सहर्ष स्वीकार करेगा , कही कमी दिखेगा तो निश्चित ही उस कमी को इंगित करेगा क्योकि उनके  पास अथाह  अनुभव है , अनुभव की अवहेलना मत करे .
  •  आपकी प्रतिभा निखरेगी आपका हुनर ज्यादा प्रभावी साबित होगा  और आपका मेहनत रंग लाएगी सफलता आपका कदम चूमेगी , आपका सपना साकार होगा आपका नाम होगा आपका पूरा परिवार , समाज गौरव महसूस करेगा .बस अपनी सोंच को सकारात्मक रखे ,दूब की तरह नम्र बने कोई आंधी आपका कुछ बिगाड़ नहीं पायेगा .  स्वामी विवेकानंद की विचारो को ग्रहण करे यही आप सभी युवा साथी से आग्रह है.       
  • बी .एस. बघेल


सड़क सुरक्षा सप्ताह

Posted by bsbaghel on January 8, 2011 at 11:32 AM Comments comments (0)

                                                     सड़क सुरक्षा सप्ताह

                        01 जनवरी से 07 जनवरी

  हर वर्ष 1 जनवरी से 07 जनवरी तक सड़क सुरक्षा सप्ताह को सरकार की ओर से  एक  पर्व के रूप में मनाया जाता है ,पर क्या हम इस  सुरक्षा का महत्त्व समझ पाए है या किसी को समझा पायें है . शायद इसका जवाब नहीं होगा  .भले ही हम अपने आप को ट्राफिक नियम का पालन कर्ता साबित करने के लिए यह जरुर बतायेंगे की मै ट्रैफिक नियमो का पूरा  पालन करता हु .  सुबह समाचार पत्र पर  नजर पड़ती है तो पहला पन्ना सुर्खियों भरा हमें मुह चिढ़ाता नजर आता है - तेज रफ़्तार ने फिर एक मासूम की जान ली , खुनी ट्रक ने घर के चिराग को रौंदा , तेज रफ़्तार बाइक सवार कालकवलित हुआ . अब हम  ऐसे समाचार की ओर ध्यान नहीं देते क्योकि अब तो यह रोजमर्रा का समाचार हो गया है. परन्तु जब उक्त समाचार हमारे अपने घर , परिवार,नाते - रिश्तेदार , मित्र , कालोनी ,मोहल्ला अथवा शहर का हो तब हम सजगता दिखाते नजर आते है , और सड़क ,गड्ढे ,सरकार तथा ट्रैफिक ब्यवस्था को कोसते नजर आते है . आज की रफ़्तार एवं आपाधापी से भरी जिंदगी एक दुसरे से हमेशा आगे निकल जाने की ख्वाहिश तेज - तेज और तेज रफ़्तार एक जूनून सा दिमाग में छाया रहता है . तेज रफ़्तार से चलने की आदत केवल आज की टिन एजर्स , युवाओ में ही नहीं प्रौढ़ में भी देखने को मिलता है . कोई भी एक पल के लिए रुकना नहीं चाहता है . सुरक्षा नियमो का धज्जी उड़ाना युवा वर्ग अपनी बहादुरी समझता है . 90 प्रतिशत बाईक सवार बिना हेलमेट के चलता है . कार सवार अथवा चालक सुरक्षा बेल्ट बांधना अपना तौहीन समझता है . सरकार सड़क में चलने वाले भारी वाहन के माप दंड तय कर रखे है पर क्या उसका पालन होता है , शायद नहीं सभी भारी वाहन ओवर लोड चलते नजर आते है , सवारी गाडी, इनके संचालको की मर्जी चले तो ये सामान रखने के कैरियर में भी सवारी बैठाने से नहीं चुकेंगे रफ़्तार तो इनकी मर्जी पर निर्भर करता है , भले ही वाहन में कोई बीमार बैठा हो उन्हें दूर पगडंडी अथवा गली में सवारी नजर आ जाए तब ये बैल गाडी की तेजी को मात देते है ,  समय ज्यादा ब्यतित होने पर  नम्बर चुक जाने  के चक्कर में जेट को मात देते हुए आगे बढ़ते है .ये सब बाते तो केवल बाते है हमें स्वयं अपने घर , परिवार और पड़ोस को सड़क में चलने के लिए नियमो का पालन करने  के लिए मना ले तभी सड़क सुरक्षा सप्ताह का प्रयोजन सिद्ध हो सकता है , अन्यथा यह केवल एक सरकारी आयोजन रह जाता है ,केवल सात दिन तक कुछ स्कूली बच्चो को चौक - चौराहे में खड़ा कराकर सिटी बजवाने से कोई फ़ायदा नहीं हो सकता , जबभी आप घर से बाईक में निकले हेलमेट पहन कर  निकले कार में बैठे तो सुरक्षा बेल्ट अवश्य बांधे , कोई भी वाहन चलाते  वक्त मोबाइल का उपयोग नहीं करे ,अनावश्यक  ओवर -टेक न करे खली स्थान दिखने पर ही नियमानुसार आगे बढे , वाहन निर्धारित गति 40 से 50 किमी . प्रति घंटे की गति से चलाये , आप आपका वाहन सुरक्षित रहेगा इंधन खपत कम होगा आपका पाकेट भरा होगा , पर्यावरण भी स्वच्छ  बना रहेगा  और सबसे अच्छा आपका परिवार हमेशा खिलखिलाता एवं  सुखी रहेगा .

नेत्रदान महादान

Posted by bsbaghel on December 21, 2010 at 10:46 AM Comments comments (2)

  भारत की कुल जनसंख्या लगभग  118  करोड़ अनुमानित है . 

  भारत में प्रतिदिन  62389 ब्यक्तियो की मृत्यु होती है . 

  भारत में प्रतिदिन 86853 बच्चो का जन्म होता है . 

  भारत में नेत्रहीन ब्यक्तियो की कुल संख्या  682497 है . 

  यदि प्रत्येक मरने वाले ब्यक्ति अपने नेत्र दान करे तो 

  केवल 11 दिन में भारत के सभी नेत्रहीन देखने लगेंगे  

  और भारत में कोई भी नेत्रहीन नहीं रहेगा . 

  कृपया सोंचे , क्या यह संभव है ! 

  कृपया नेत्रदान करे और नेत्रदान के लिए अपने नजदीकी ब्यक्ति को प्रोत्साहित करे . 

 

   बघेल बी . एस.

कार्तिक पूर्णिमा एवं मासोत्तमे मार्ग शीर&#238

Posted by bsbaghel on November 21, 2010 at 12:20 AM Comments comments (4)

21 नवम्बर 2010 

गुरुनानक देव जी की 541 वीं प्रकट  दिवस (प्रकाश पर्व ) पर  समस्त सिख समाज को लख - लख बधाई कार्तिक पूर्णिमा को सृष्टि के रचियता ब्रम्हा का आविर्भाव अथवा सृष्टि रचना दिवस के रूप में जाना जाता है ,आज के ही दिन आज से 540 वर्ष पूर्व सिख पंथ के संस्थापक महान संत गुरुनानक देव जी का जन्म नानक सर में हुआ था . ब्रम्हा जी ने सृष्टि की रचना के लिए कार्तिक शुक्ल एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक यज्ञ का आयोजन किया था .यज्ञ स्थल के लिए पवित्र तीर्थ स्थल पुष्कर को चुना था इसलिए पुष्कर को ब्रम्हा का आदितिर्थ पुष्कर के नाम से जाना जाता है . भगवान ब्रम्हा अत्यंत उदार तथा दयालु तथा विश्व की भरण पोषण एवं सुरक्षा करने वाले है .

कार्तिक पूर्णिमा की समाप्ति के साथ ही मासों में उत्तम मॉस मार्गशीर्ष का महीना अगहन प्रारम्भ होता है.

अगहन (मार्गशीर्ष;)) ज्योतिष एवं वास्तुशास्त्र के लिए सर्वोत्तम मॉस कहा गया है ,इस माह में गुरूवार को माता लक्ष्मी की पूजन का विशेष महत्त्व होता है .

इस माह में स्नान एवं अन्न दान का विशेष महत्त्व है .

मार्ग शीर्ष महीना में मकान बनवाने से धन धान्य की प्राप्ति होती है मार्ग शीर्ष महीना में जन्म लेने वाले जातक प्रकृति प्रिय , परोपकारी , सज्जन ,तीर्थ यात्री होता है . 

बघेल बी.एस.

 


दीपोत्सव 2010

Posted by bsbaghel on November 4, 2010 at 1:49 PM Comments comments (0)

5 नवम्बर 2010

   पल पल से बनता है एहसास , एहसास से बनता है विश्वास .

   विश्वास  से बनता है  रिश्ते ,  रिश्ते से  बनता है कोई  ख़ास .

   नए   वर्ष   में   आपका  आने वाला   हर  दिन  सुख  ,समृद्धि, 

    वैभव ,   मधुर     एवं     सुखद     यादों    से     परिपूर्ण    हो ,

   दीपमल्लिका  की  तरह आपका  जीवन सदैव  जगमगाता

    रहे   इस   दीपावली  में  हमारी  यही  मंगल   कामना   है .


   माँ लक्ष्मी की पूजन का शुभ मुहूर्त


   5 नवम्बर 2010   सायं 06 .10 से  07 . 50 मिनट तक

 


 


महाराणा प्रताप ज्योति रथ यात्रा

Posted by bsbaghel on August 21, 2010 at 8:35 AM Comments comments (0)

महाराणा प्रताप ज्योति रथ यात्रा

संस्कार धानी उप समिति राजनांदगाँव के द्वारा अपनी सोंच को एक कदम आगे बढाते हुए वर्ष 2006 में राजपूत समाज के आदर्श पुरुष महाराणा प्रताप की कुर्बानी एवं गौरव के प्रतिक मशाल को प्रज्ज्वलित रखने का बीड़ा उठाया और उप समिति राजनांदगाँव से पहला कारवां 11 - 12 फरवरी 2006 को 42 वां अधिवेशन स्थल तखतपुर को रवाना हो गया .महासभा एवं उप समिति तखतपुर के द्वारा महाराणा प्रताप ज्योति रथ यात्रा का भव्य स्वागत कर  एक नयी परम्परा की नींव रखी  गई .

पहला ज्योति रथ यात्रा      11 - 12  फरवरी 2006  राजनांदगाँव से              42 वां अधिवेशन स्थल तखतपुर

दूसरा ज्योति रथ यात्रा       21 - 22  अप्रेल 2007   तखतपुर से                     43 वां अधिवेशन स्थल    कांकेर

तीसरा  ज्योति रथ यात्रा    23 - 24  फरवरी  2008 कांकेर से                       44 वां अधिवेशन स्थल थान खम्हरिया

चौथा  ज्योति रथ यात्रा      21 - 22  फरवरी 2009 थान खम्हरिया से            45 वां अधिवेशन स्थल भिलाई

पांचवा  ज्योति रथ यात्रा    24 - 25  अप्रेल 2010 भिलाई से                          46 वां अधिवेशन स्थल डोंगरगाँव


18 जून 1576 हल्दी घाटी का एतिहासिक लड़ाई

Posted by bsbaghel on June 18, 2010 at 5:52 AM Comments comments (0)

18 जून 1576 हल्दी घाटी का एतिहासिक लड़ाई

            सम्पूर्ण भारत में सत्ता की मंसूबा पाले अकबर को मेवाड़ में सत्ता प्राप्ति के बिना अधूरा था . अकबर मेवाड़ पर सता हेतु अपनी कुटनीतिक असफलता , निराशा एवं नाराजगी के चलते मेंवाड में  सैनिक अभियान 17 फरवरी 1576 को फ़तेहपुर सीकरी से अजमेर की तीर्थ यात्रा के नाम पर प्रारम्भ किया था .

            जेठ की तपती दोपहरी 18 जून 1576 हल्दी घाटी का कण कण जगमगा रहा था एक ओर मांडलगढ़  अकबर की सेना का सेनापति आमेर के राजकुमार मान सिंह के नेतृत्व  में आधुनिक अस्त्र शास्त्र से सुसज्जित 10 हजार मुग़ल सैनिक  दूसरी ओर प्रताप सिंह के नेतृत्व में अपनी स्वाधीनता की रक्षा के लिए कृत संकल्पित मात्र  तीन हजार मेवाडियो की अश्वारोही सेना .

            मुग़ल सैनिकों ने  हल्दी घाटी के दर्रे में जैसे ही प्रवेश किया राजपूतो ने मुग़ल सैनिको पर हमला बोल दिया सैकड़ो मुग़ल सैनिक मारे गए . राणा प्रताप सिंह के एक बड़े दस्ते का नेतृत्व हाकिम खां सूरी कर  रहे थे (  शेर शाह सूरी के समय से सुरवंश एवं मुगलों में परम्परागत शत्रुता चली आ रही थी ) मुग़ल सेना में राजपूत सैनिक भी थे हाकिम खां के नेतृत्व में प्रताप की सेना मुग़ल सेना में  ऐसे घुलमिल गया की कौन राजपूत मुग़ल के साथ है और कौन प्रताप सिंह के साथ निर्णय करना मुश्किल हो गया . इस परिस्थिति में मुग़ल सैनिक बदायूनी  ने आसफ खां से विचार विमर्श किया इस पर आसफ खां ने निर्देश दिया की बिना इस बात की चिंता किए कौन किस दल का राजपूत है अंधा धुंध तीर गोले चलाओ राजपूत किसी ओर की मरे फ़ायदा इस्लाम का होगा ,और  वीर हाकिम खां सूरी प्रताप के लिए लड़ते लड़ते अपने प्राणों की आहुति दे दी .

         राजपूती रक्त बहते देखकर मुग़ल सेनापति मान सिंह हैरान , परेशान अजीब उधेड़ बुन में थे चेतक पर सवार प्रताप सिंह अचानक मान सिंह के सामने प्रकट हो गया , चेतक अपने आगे के दोनों पैर को मान सिंह की हाथी के सूड पर रखा दिया प्रताप ने तुरंत भाले से मान सिंह पर वार कर दिया , चैतन्य मानसिंह फुरती से हटकर अपना प्राण बचाया परन्तु महावत मारा गया

          हाथी के सूंड में बंधे तलवार से चेतक का दोनों पैर घायल हो गया , इसी बीच  शत्रु सेना से घिरे प्रताप को देखकर सरदार झाला प्रताप सिंह की रक्षा के लिए आ गया और राणा प्रताप का राज क्षत्र को अपने सर में रखकर प्रताप को वहां से जाने के लिए विवास कर दिया , मुग़ल सेना राज क्षत्र  पहने सरदार झाला को प्रताप समझकर अंधा धुंध तीर और भाला का बौक्षर कर दिया और सरदार झाला वीर गति को प्राप्त कर  अमर हो गया .

         हल्दी घाटी से तीन  मील दूर अपने स्वामी को  पहुंचाकर स्वामी भक्त चेतक प्राण त्याग दिया . दो मुग़ल सैनिक प्रताप के पीछे थे तभी प्रताप का छोटा भाई शक्ति सिंह वहा  पहुंचकर दोनों मुग़ल सैनिक को मार गिराया और अपने भाई को प्रताप ने अपने बाहुपास  में बांध लिया , शक्ति सिंह ने अपना घोड़ा देकर मेवाड़ केसरी  प्रताप को रवाना किया .

     रण क्षेत्र  से प्रताप के चले जाने के बाद भी वीर राजपूत मुग़ल सैनिको को गाजर मुली की तरह काटते रहे शाही सेना मैदान छोड़ भागने की स्थिति में आ गया तभी किसी ने शोर मचाया बादशाह आ गए , जिससे शाही फ़ौज का हौसला बुलंद हो गया और मेवाड़ की सेना के पांव उखड गया

         यद्यपि हल्दी घाटी में शाही सेना को तथाकथित विजय मिली , परन्तु अकबर जिस उद्देश्य / लक्ष्य को लेकर युद्ध लड़ा वह पूरा नहीं हो सका महाराणा प्रताप सिंह न मारा जा सका और नहीं मुग़ल  सेना के पकड़ में आया . इस युद्ध ने प्रताप के संकल्प को दृढ़ किया तथा अधिक संख्या वाले सेना से खुले मैदान में लड़ने के बजाय छापा मार प्रणाली अपनाया .


 

(इतिहास के पन्नो से)

कुछ भाग आगामी अंक में 

---- प्रतीक्षा करें 


शहीदों को श्रद्धांजलि

Posted by bsbaghel on May 24, 2010 at 7:32 AM Comments comments (0)

प्रिय मित्रों ,

सादर अभिवादन ,

विगत 25 दिनों में पुरे भारत ही नहीं बल्कि विश्व में उथल पुथल मची रही चाहे वह दंतेवाडा , बीजापुर की नक्सली हमला हो ,लैला की तबाही मचाता  सैलाब जो अपने पीछे पुनर्निर्माण के लिए पुन : संघर्सरत समुद्र तट के रहवासी ,सूर्य देव की आंख ततेरती 47 डिग्री की तपिश  , राजपूत क्षत्रिय समाज के पुरोधा वयोवृद्ध राजनेता भैरों सिंह शेखावत का निधन एवं मैंगलोर की हवाई जहाज दुर्घटना में मारे गए 158 ब्यक्ति की कराह क्या इन सब से आप विचलित नहीं हुए ,क्या आप के मन के किसी कोने में कोई दर्द नही उठता . क्या हमारा समाज एवं नौजवान साथी इन घटनाओं से उद्देलित नहीं होता , देश एवं समाज के लिए मर मिटने वाले जवान  शहीदों  के  उन अनाथ माता बहनों बच्चो  के लिए आपके पास प्यार एवं सांत्वना के दो शब्द तो होगा ही  मैं पुरे समाज की ओर से शहीदों को सादर प्रणाम कर श्रद्धांजलि अर्पित करता हुं ,

लैला से तबाह हुए परिवार को पुनर्निमाण के लिए शुभकामनाए , पूर्व उप राष्ट्रपति श्री शेखावत के निधन एवं हवाई दुर्घटना में मारे गए लोगो को श्रद्धांजली अर्पित करता हु .

मित्रो

उक्त घटनाओं के साथ ही हायर सेकेंडरी के परिणाम भी घोषित हो गया है , छत्तीसगढ़ बोर्ड में समाज के एक छात्र चिं. रुपेश ठाकुर खैरागढ़ ने प्रावीण्य सुंची में नवंम  स्थान प्राप्त कर समाज को गौरव प्रदान किया हम उअनके उज्जवल भविष्य की कामना करते है . 

हायर सेकेंडरी का परिणाम  आपके लाडले / लाडली की भविष्य का turning point होता है जहां से उनका भविष्य की दिशा एवं दशा निर्धारित होती यह बिंदु बहुत ही नाजुक एवं कमजोर होता है जहा आपको एवं आपके भविष्य को भ्रमित होने से बचने के लिए विभिन्न सूचना एवं सेवा केंद्र से सहयोग लिया जा सकता है

मै अपने नौजवान साथियो से आशा करता हु की वे एशो आराम की चाह को कम करें पैसे की मोह पाश में न जकडे तथा अपने आस पास कोई ऐसा रचनात्मक कार्य करे जिससे समाज को एक नई दिशा मिले .

जिंदगी तो राजपूत जिया करते है ,

दिग्गजों को पछाड़ कर राज किया करते है ,

कौन रखता है किसके सर पर ताज ,

राजपूत तो अपना राज तिलक खुद किया करते है .

चले आइये आप भी अपनी भावनाओ को ब्यक्त करने के लिए , आप एक कदम बढ़ाइए फिर देखीए आपके साथ एक नहीं ,सैकड़ो नहीं हजारो नहीं असंख्य कदम आपके साथ होगा .


भागवत सिंह बघेल

 

 


महासभा का 46 वां अधिवेशन संपन्न हुआ

Posted by bsbaghel on April 29, 2010 at 6:22 AM Comments comments (0)

दिनांक 24 एवं 25 अप्रेल 2010 को डोंगरगांव में   महासभा का 46 वां अधिवेशन एवं त्रै वार्षिक  चुनाव  निर्विघन्न एवं निर्विवाद संपन्न हुआ इसके लिए  महासभा के सभी  केन्द्रीय पदाधिकारियों एवं आयोजक उप समिति डोंगरगांव के सभी पदाधिकारियों  को कोटिष : धन्यवाद . आशा करता हुं की भविष्य में होने वाले सभी समारोह सोहार्द्र पूर्ण माहोल में संपन्न होगा . सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को पुन: मेरी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए तथा आशा करता हुं नए पदाधिकारी अपने कार्य काल में भेद भाव को मिटा कर  समाज को नई दिशा देकर  नई उंचाई में ले जाएंगे .

भागवत सिंह बघेल

उप महा सचिव  - अखिल भारतीय क्षेत्रिय  ग्रामीण बैंक अधिकारी फेडरेशन सिलीगुड़ी

अध्यक्ष -             दुर्ग राजनादगाँव ग्रामीण बैंक अधिकारी संगठन राजनादगाँव



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