शक्ति सर्वत्र पूज्यते    Shakti Sarvatra Poojyate

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अपने पूरे परिवार को स्वाईन फ़्लू की बिमारी से होम्योपैथिक औषधी के माध्यम से सुरक्षित रखे 
लक्षण :- बुखार , खांसी , गले मे दर्द , नाक बहना , नाक मे जलन होना , सांस लेने मे कठिनाई 
अन्य लक्षण :- बदन मे दर्द , सिर मे दर्द , थकान , ठंड के साथ कंपकंपी दस्त एवं उल्टी 
दवाई का नाम :- आर्सेनिकम एल्बम 30
वयस्क           :- 4 गोली खाली पेट तीन दिन तक 
बच्चो             :- 2 गोली खाली पेट तीन दिन तक 
नोट               :- दवाई उपयोग के पूर्व किसी योग्य होम्यो   
                         चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेवें 
जनहित मे जारी 
केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद ,भारत सरकार नई दिल्ली 

23 फ़रवरी 2015
बैंको मे बहुप्रतिक्षित वेतन समझौता संपन्न 
बैंक कार्मिको को 1 नवम्बर 2012 से 15 % वेतन वृद्धि देने तथा दुसरे एवं चौथे शनिवार को अवकाश तथा शेष शनिवार को पुरा दिन बैंकिंग कार्य होने की समझौता को आई बी ए द्वारा सहमती दी गई । बैंको मे प्रस्तावित हडताल समाप्त हो गया है  

19 फ़रवरी 2015

छत्रपति शिवा जी महाराज की 385 वीं जयंती की  हार्दिक शुभकामनाएं 

माता :- जीजाबाई

पिता :- शाहजी भोंसले

पूरा नाम  :- शिवाजी राजे भोंसले

जन्म :-19 फ़रवरी, 1630

जन्म भूमि :- शिवनेरी, महाराष्ट्र

मृत्यु तिथि :- 3 अप्रैल, 1680

मृत्यु स्थान :- दुर्ग रायगढ़

पत्नी :- साइबाईं निम्बालकर

संतान :- सम्भाजी

उपाधि :- छत्रपति

शासन काल 1642 - 1680 ई.

शासन . अवधि :- 38 वर्ष

राज्याभिषेक :- 6 जून, 1674 ई.

धार्मिक मान्यता :- हिन्दू धर्म

युद्ध :- मुग़लों के विरुद्ध अनेक युद्ध हुए

निर्माण :- अनेक क़िलों का निर्माण और पुनरुद्धार

सुधार-परिवर्तन :- हिन्दू राज्य की स्थापना

राजधानी :- दुर्ग राजगढ़

पूर्वाधिकारी :- शाहजी भोंसले

उत्तराधिकारी :- सम्भाजी

राजघराना मराठा साम्राज्य

वंश :- भोंसले

स्मारक :- महाराष्ट्र

संबंधित  :- लेख ताना जी, महाराष्ट्र, रायगढ़, समर्थ गुरु रामदास, पूना

अन्य जानकारी :- "शिव सूत्र" (गुरिल्ला युद्ध) 

भागवत सिंह  बघेल 

जीवन परिचय


छत्रपति शिवाजी महाराज का पूरा नाम 'शिवाजी राजे भोंसले' था। शिवाजी का जन्म 19 फ़रवरी, 1630 ई. को शिवनेरी, महाराष्ट्र राज्य में हुआ। इनके पिता का नाम शाहजी भोंसले और माता का नाम जीजाबाई था। शिवाजी भारत में मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे। सेनानायक के रूप में शिवाजी की महानता निर्विवाद रही है। शिवाजी ने अनेक क़िलों का निर्माण और पुनरुद्धार करवाया। उनके निर्देशानुसार सन 1679 ई. में अन्नाजी दत्तों ने एक विस्तृत भू-सर्वेक्षण करवाया, जिसके परिणामस्वरूप एक नया राजस्व निर्धारण हुआ।

इनके पिताजी शाहजी भोंसले ने शिवाजी को जन्म के उपरान्त ही अपनी पत्नी जीजाबाई को प्रायः त्याग दिया था। उनका बचपन बहुत उपेक्षित रहा और वे सौतेली माँ के कारण बहुत दिनों तक पिता के संरक्षण से वंचित रहे। उनके पिता शूरवीर थे और अपनी दूसरी पत्नी तुकाबाई मोहिते पर आकर्षित थे। जीजाबाई उच्च कुल में उत्पन्न प्रतिभाशाली होते हुए भी तिरस्कृत जीवन जी रही थीं। जीजाबाई यादव वंश से थीं। उनके पिता एक शक्तिशाली और प्रभावशाली सामन्त थे। बालक शिवाजी का लालन-पालन उनके स्थानीय संरक्षक दादाजी कोणदेव तथा जीजाबाई के समर्थ गुरु रामदास की देखरेख में हुआ। माता जीजाबाई तथा गुरु रामदास ने कोरे पुस्तकीय ज्ञान के प्रशिक्षण पर अधिक बल न देकर शिवाजी के मष्तिष्क में यह भावना भर दी थी कि देश, समाज, गौ तथा ब्राह्मणों को मुसलमानों के उत्पीड़न से मुक्त करना उनका परम कर्तव्य है। शिवाजी स्थानीय लोगों के बीच रहकर शीघ्र ही उनमें अत्यधिक सर्वप्रिय हो गये। उनके साथ आस-पास के क्षेत्रों में भ्रमण करने से उनको स्थानीय दुर्गों और दर्रों की भली प्रकार व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त हो गयी। कुछ स्वामिभक्त लोगों का एक दल बनाकर उन्होंने उन्नीस वर्ष की आयु में पूना के निकट तीरण के दुर्ग पर अधिकार करके अपना जीवन-क्रम आरम्भ किया। उनके हृदय में स्वाधीनता की लौ जलती थी। उन्होंने कुछ स्वामिभक्त साथियों को संगठित किया। धीरे धीरे उनका विदेशी शासन की बेड़ियाँ तोड़ने का संकल्प प्रबल होता गया। शिवाजी का विवाह साइबाईं निम्बालकर के साथ सन् 1641 में बंगलौर में हुआ था। उनके गुरु और संरक्षक कोणदेव की 1647 में मृत्यु हो गई। इसके बाद शिवाजी ने स्वतंत्र रहने का निर्णय लिया।

आरंभिक जीवन और उल्लेखनीय सफलताएँ

शिवाजी प्रभावशाली कुलीनों के वंशज थे। उस समय भारत पर मुस्लिम शासन था। उत्तरी भारत में मुग़लों तथा दक्षिण में बीजापुर और गोलकुंडा में मुस्लिम सुल्तानों का, ये तीनों ही अपनी शक्ति के ज़ोर पर शासन करते थे और प्रजा के प्रति कर्तव्य की भावना नहीं रखते थे। शिवाजी की पैतृक जायदाद बीजापुर के सुल्तान द्वारा शासित दक्कन में थी। उन्होंने मुसलमानों द्वारा किए जा रहे दमन और धार्मिक उत्पीड़न को इतना असहनीय पाया कि 16 वर्ष की आयु तक पहुँचते-पहुँचते उन्हें विश्वास हो गया कि हिन्दुओं की मुक्ति के लिए ईश्वर ने उन्हें नियुक्त किया है। उनका यही विश्वास जीवन भर उनका मार्गदर्शन करता रहा। उनकी विधवा माता, जो स्वतंत्र विचारों वाली हिन्दू कुलीन महिला थी, ने जन्म से ही उन्हें दबे-कुचले हिंदुओं के अधिकारों के लिए लड़ने और मुस्लिम शासकों को उखाड़ फैंकने की शिक्षा दी थी। अपने अनुयायियों का दल संगठित कर उन्होंने लगभग 1655 में बीजापुर की कमज़ोर सीमा चौकियों पर कब्ज़ा करना शुरू किया। इसी दौर में उन्होंने सुल्तानों से मिले हुए स्वधर्मियों को भी समाप्त कर दिया। इस तरह उनके साहस व सैन्य निपुणता तथा हिन्दुओं को सताने वालों के प्रति कड़े रूख ने उन्हें आम लोगों के बीच लोकप्रिय बना दिया। उनकी विध्वंसकारी गतिविधियाँ बढ़ती गई और उन्हें सबक सिखाने के लिए अनेक छोटे सैनिक अभियान असफल ही सिद्ध हुए। जब 1659 में बीजापुर के सुल्तान ने उनके ख़िलाफ़ अफ़ज़ल ख़ाँ के नेतृत्व में 10,000 लोगों की सेना भेजी तब शिवाजी ने डरकर भागने का नाटक कर सेना को कठिन पहाड़ी क्षेत्र में फुसला कर बुला लिया और आत्मसमर्पण करने के बहाने एक मुलाकात में अफ़ज़ल ख़ाँ की हत्या कर दी। उधर पहले से घात लगाए उनके सैनिकों ने बीजापुर की बेख़बर सेना पर अचानक हमला करके उसे खत्म कर डाला, रातों रात शिवाजी एक अजेय योद्धा बन गए। जिनके पास बीजापुर की सेना की बंदूकें, घोड़े और गोला-बारूद का भंडार था।

शक्ति में वृद्धि

शिवाजी की बढ़ती हुई शक्ति से चिंतित हो कर मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब ने दक्षिण में नियुक्त अपने सूबेदार को उन पर चढ़ाई करने का आदेश दिया। उससे पहले ही शिवाजी ने आधी रात को सूबेदार के शिविर पर हमला कर दिया। जिसमें सूबेदार के एक हाथ की उंगलियाँ कट गई और उसका बेटा मारा गया। इससे सूबेदार को पीछे हटना पड़ा। शिवाजी ने मानों मुग़लों को और चिढ़ाने के लिए संपन्न तटीय नगर सूरत पर हमला कर दिया और भारी संपत्ति लूट ली। इस चुनौती की अनदेखी न करते हुए औरंगज़ेब ने अपने सबसे प्रभावशाली सेनापति मिर्जा राजा जयसिंह के नेतृत्व में लगभग 1,00,000 सैनिकों की फ़ौज भेजी। इतनी बड़ी सेना और जयसिंह की हिम्मत और दृढ़ता ने शिवाजी को शांति समझौते पर मजबूर कर दिया।

शिवाजी और जयसिंह

शिवाजी को कुचलने के लिए राजा जयसिंह ने बीजापुर के सुल्तान से संधि कर पुरन्दर के क़िले को अधिकार में करने की अपने योजना के प्रथम चरण में 24 अप्रैल, 1665 ई. को 'व्रजगढ़' के क़िले पर अधिकार कर लिया। पुरन्दर के क़िले की रक्षा करते हुए शिवाजी का अत्यन्त वीर सेनानायक 'मुरार जी बाजी' मारा गया। पुरन्दर के क़िले को बचा पाने में अपने को असमर्थ जानकर शिवाजी ने महाराजा जयसिंह से संधि की पेशकश की। दोनों नेता संधि की शर्तों पर सहमत हो गये और 22 जून, 1665 ई. को 'पुरन्दर की सन्धि' सम्पन्न हुई।

इतिहास प्रसिद्ध इस सन्धि की प्रमुख शर्तें निम्नलिखित थीं-

शिवाजी को मुग़लों को अपने 23 क़िले, जिनकी आमदनी 4 लाख हूण प्रति वर्ष थी, देने थे।

सामान्य आय वाले, लगभग एक लाख हूण वार्षिक की आमदनी वाले, 12 क़िले शिवाजी को अपने पास रखने थे।

शिवाजी ने मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब की सेवा में अपने पुत्र शम्भाजी को भेजने की बात मान ली एवं मुग़ल दरबार ने शम्भाजी को 5000 का मनसब एवं उचित जागीर देना स्वीकार किया।

मुग़ल सेना के द्वारा बीजापुर पर सैन्य अभियान के दौरान बालाघाट की जागीरें प्राप्त होती, जिसके लिए शिवाजी को मुग़ल दरबार को 40 लाख हूण देना था।

आगरा यात्रा

अपनी सुरक्षा का पूर्ण आश्वासन प्राप्त कर शिवाजी आगरा के दरबार में औरंगज़ेब से मिलने के लिए तैयार हो गये। वह 9 मई, 1666 ई को अपने पुत्र शम्भाजी एवं 4000 मराठा सैनिकों के साथ मुग़ल दरबार में उपस्थित हुए, परन्तु औरंगज़ेब द्वारा उचित सम्मान न प्राप्त करने पर शिवाजी ने भरे हुए दरबार में औरंगज़ेब को 'विश्वासघाती' कहा, जिसके परिणमस्वरूप औरंगज़ेब ने शिवाजी एवं उनके पुत्र को 'जयपुर भवन' में क़ैद कर दिया। वहाँ से शिवाजी 13 अगस्त, 1666 ई को फलों की टोकरी में छिपकर फ़रार हो गये और 22 सितम्बर, 1666 ई. को रायगढ़ पहुँचे। कुछ दिन बाद शिवाजी ने मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब को पत्र लिखकर कहा कि "यदि सम्राट उसे (शिवाजी) को क्षमा कर दें तो वह अपने पुत्र शम्भाजी को पुनः मुग़ल सेवा में भेज सकते हैं।" औरंगज़ेब ने शिवाजी की इन शर्तों को स्वीकार कर उसे 'राजा' की उपाधि प्रदान की। जसवंत सिंह की मध्यस्थता से 9 मार्च, 1668 ई. को पुनः शिवाजी और मुग़लों के बीच सन्धि हुई। इस संधि के बाद औरंगज़ेब ने शिवाजी को बरार की जागीर दी तथा उनके पुत्र शम्भाजी को पुनः उसका मनसब 5000 प्रदान कर दिया।

सन्धि का उल्लंघन

1667-1669 ई. के बीच के तीन वर्षों का उपयोग शिवाजी ने विजित प्रदेशों को सुदृढ़ करने और प्रशासन के कार्यों में बिताया। 1670 ई. में शिवाजी ने 'पुरन्दर की संधि' का उल्लंघन करते हुए मुग़लों को दिये गये 23 क़िलों में से अधिकांश को पुनः जीत लिया। तानाजी मालसुरे द्वारा जीता गया 'कोंडाना', जिसका फ़रवरी, 1670 ई. में शिवाजी ने नाम बदलकर 'सिंहगढ़' रखा दिया था, सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण क़िला था।

13 अक्टूबर, 1670 ई. को शिवाजी ने तीव्रगति से सूरत पर आक्रमण कर दूसरी बार इस बन्दरगाह नगर को लूटा। शिवाजी ने अपनी इस महत्त्वपूर्ण सफलता के बाद दक्षिण की मुग़ल रियासतों से हीं नहीं, बल्कि उनके अधीन राज्यों से भी 'चौथ' एवं 'सरदेशमुखी' लेना आरम्भ कर दिया। 15 फ़रवरी, 1671 ई. को 'सलेहर दुर्ग' पर भी शिवाजी ने क़ब्ज़ा कर लिया। शिवाजी के विजय अभियान को रोकने के लिए औरंगज़ेब ने महावत ख़ाँ एवं बहादुर ख़ाँ को भेजा। इन दोनों की असफलता के बाद औरंगज़ेब ने बहादुर ख़ाँ एवं दिलेर ख़ाँ को भेजा। इस तरह 1670-1674 ई. के मध्य हुए सभी मुग़ल आक्रमणों में शिवाजी को ही सफलता मिली और उन्होंने सलेहर, मुलेहर, जवाहर एवं रामनगर आदि क़िलों पर अधिकार कर लिया। 1672 ई. में शिवाजी ने पन्हाला दुर्ग को बीजापुर से छीन लिया। मराठों ने पाली और सतारा के दुर्गों को भी जीत लिया।

राजनीतिक स्थिति

दक्षिण की तत्कालीन राजनीतिक स्थिति भी एक सशक्त मराठा आंदोलन के उदय में सहायक हुई। अहमद नगर राज्य के बिखराव और अकबर की मृत्यु के पश्चात दक्षिण में मुग़ल साम्राज्य के विस्तार की धीमी गति ने महत्त्वाकांक्षी सैन्य अभियानों को प्रोत्साहित किया। यह भी उल्लेखनीय है कि इस समय तक मराठे अनुभवी लड़ाके जाति के रूप में ख्याति प्राप्त कर चुके थे। दक्षिणी सल्तनतों एवं मुग़लों, दोनों ही पक्षों की ओर से वे सफलतापूर्वक युद्ध कर चुके थे। उनके पास आवश्यक सैन्य प्रशिक्षण और अनुभव तो था ही, जब समय आया तो उन्होंने इसका उपयोग राज्य की स्थापना के लिए किया। यह कहना तो कठिन है कि मराठों के उत्थान में उपर्युक्त तथ्य कहाँ तक उत्तरदायी थे और इसमें अपना स्वतंत्र राज्य स्थापित करने की दृढ़ इच्छा शक्ति का कितना हाथ था। फिर भी, यदि शिवाजी की नीतियों के सामाजिक पहलुओं और उनका साथ देने वाले लोगों की सामाजिक स्थिति का विश्लेषण किया जाए तो स्थिति बहुत सीमा तक स्पष्ट हो सकती है।

किसानों के साथ सीधा संबंध

इतिहासकार बड़े उत्साहपूर्वक शिवाजी के क्रांतिकारी भू-कर सुधारों की बात करते हैं, जिन्होंने उदीयमान राज्य को एक विस्तृत सामाजिक आधार प्रदान किया। रानाडे लिखते हैं,

'शिवाजी ने दृढ़ निश्चय कर लिया था कि वे किसी भी नागरिक या सैन्य प्रमुख को जागीरें नहीं देंगे। भारत में केंद्र विमुख एवं बिखराव की प्रवृत्तियाँ सदा ही बलवान रही हैं, और जागीरें देने की प्रथा, जागीरदारों को भू-कर से प्राप्त धन द्वारा अलग से अपनी सेना रखने की अनुमति देने से यह प्रवृत्ति इतनी प्रबल हो जाती है कि सुव्यवस्थित शासन लगभग असंभव हो जाता है––अपने शासन काल में शिवाजी ने केवल मंदिरों को एवं दान धर्म की दिशा में ही भूमि प्रदान की थी।'

जदुनाथ सरकार ने भी उपर्युक्त मत का ही समर्थन किया है और कहा है कि शिवाजी किसानों को अपनी ओर इसीलिए कर सके कि उन्होंने ज़मीदारी और जागीरदारी प्रथा को बंद किया और राजस्व प्रशासन के माध्यम से किसानों के साथ सीधा संबंध स्थापित किया।

 सभासद का ध्यानपूर्वक अध्ययन करने से ज्ञात होता है कि शिवाजी के राजस्व प्रशासन के संबंध में ऐसे बड़े-बड़े दावे करना निराधार है और इसे जल्दबाज़ी में बनाई गई धारणा ही कहा जाएगा। उनका कहना है कि शिवाजी ने देसाईयों के दुर्गों और सुदृढ़ जमाव को नष्ट किया और जहाँ कहीं मज़बूत क़िले थे वहाँ अपनी दुर्ग-सेना रखी। उनका यह भी कहना है कि शिवाजी ने मिरासदारों द्वारा मनमाने ढंग से वसूल किए जाने वाले उपहारों या हज़ारे को बंद करवाया और नक़द एवं अनाज के रूप में गाँवों से जमींदारों का हिस्सा निश्चित किया। साथ ही उन्होंने देशमुखों, देशकुलकर्णियों, पाटिलों और कुलकर्णियों के अधिकार एवं अनुलाभ भी तय किए, इन्हीं कथनों से प्रेरित होकर आधुनिक इतिहासकार कहते हैं कि शिवाजी ने भूमि प्रदान करने की प्रथा को समाप्त कर दिया था। यह सत्य है कि सभासद ऐसी संभावना की बात करता है किंतु कदाचित यह शिवाजी या स्वयं सभासद का अपेक्षित आदर्श रहा हो, क्योंकि वह स्वयं एकाधिक स्थानों पर शिवाजी द्वारा भूमि प्रदान किए जाने की बात कहता है। यही लक्ष्य एक अन्य तत्कालीन रचना आज्ञापत्र में ध्वनित होता है, जिसमें कहा गया है कि वर्तमान वतन वैसे ही चलते रहेंगे और उनके पास जो भी है उसमें थोड़ी भी वृद्धि नहीं की जाएगी और न ही उसे रत्ती भर कम किया जाएगा। इसमें यह चेतावनी भी दी गई है कि 'किसी वृत्ति (वतन) का प्रत्यादान करना पाप है---भले ही वह कितनी ही छोटी क्यों न हो।' उचित संदर्भ में रखे जाने पर सभासद के कथन का अर्थ स्पष्ट हो जाता है। पाटिल, कुलकर्णी और देशमुख राजस्व एकत्र करते थे और उसमें से राज्य को अपनी इच्छानुसार अंश देते थे जो प्रायः बहुत कम होता था। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी स्थिति अत्यंत सुदृढ़ कर ली, दुर्ग इत्यादि बनवा लिए, और प्यादे एवं बंदूकची लेकर चलने लगे। वे सरकारी राजस्व अधिकारी की परवाह नहीं करते थे और यदि वह अधिक राजस्व की माँग करता था तो लड़ाई-झगड़े पर उतर आते थे। यह वर्ग विद्रोही हो उठा था। इन्हीं की गढ़ियों और दुर्गों पर शिवाजी ने धावा बोला था।

राजस्व वसूली

स्पष्ट है कि शिवाजी शांतिप्रिय ज़मीदारों के नहीं अपितु केवल उन्हीं के विरुद्ध थे जो उनके राजनीतिक हितों के लिए गंभीर ख़तरा बन गए थे। स्पष्ट है कि वे राजस्व वसूली की संपूर्ण मशीनरी को समाप्त नहीं कर सकते थे। इसलिए ऐसा नहीं है कि इसके स्थान पर नई व्यवस्था लाने के लिए उनके पास प्रशिक्षित व्यक्ति नहीं थे। वे केवल इतना चाहते थे कि राजस्व की गड़बड़ी दूर हो और राज्य को उचित अंश मिले। यह भी स्पष्ट है कि शिवाजी को बड़े देशमुखों के विरोध का सामना करना पड़ा। ये देशमुख स्वतंत्र मराठा राज्य के पक्ष में नहीं थे और बीजापुर के सांमत ही बने रहना चाहते थे जिससे अपने वतनों के प्रशासन में अधिक स्वायत्त रह सकें। यही शिवाजी का धर्मसंकट था। देशमुखों के समर्थन के बिना वे स्वतंत्र मराठा राज्य की स्थापना नहीं कर सकते थे। अतः शिवाजी ने इस नाज़ुक राजनीतिक स्थिति का सामना करने के लिए भय और प्रीति की नीति अपनाई। कुछ बड़े देशमुखों को तो उन्होंने सैन्य शक्ति से पराजित किया और कुछ के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित किए। बड़े देशमुखों के साथ शिवाजी की इस अनोखी लड़ाई में छोटे देशमुखों ने शिवाजी का साथ दिया। बड़े देशमुख छोटे देशमुखों को सताते थे और ज़मीन की बंदोबस्ती और कृषि को बढ़ावा देने की शिवाजी की नीति छोटे देशमुखों के लिए हितकर थी। संपूर्ण दक्षिण पर शिवाजी के सरदेशमुखी के दावे को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त मोरे, शिर्के और निंबालकर देशमुखों के परिवारों में विवाह संबंध करके भी शिवाजी ने अपना सामाजिक रुतबा बढ़ाया। इससे मराठा समाज में उनकी सम्मानजनक स्वीकृति सरल हो गई।

मुग़लों और दक्षिणी राज्यों के साथ संबंध

यद्यपि मराठे पहले ही अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने के प्रति सचेत होने लगे थे फिर भी उन्हें संगठित करने और उनमें एक राजनीतिक लक्ष्य के प्रति चेतना जगाने का कार्य शिवाजी ने ही किया। शिवाजी की प्रगति का लेखा मराठों के उत्थान को प्रतिबिंबित करता है। 1645-47 के बीच 18 वर्ष की अवस्था में उन्होंने पूना के निकट अनेक पहाड़ी क़िलों पर विजय प्राप्त की। जैसे- रायगढ़, कोडंना और तोरना। फिर 1656 में उन्होंने शक्तिशाली मराठा प्रमुख चंद्रराव मोरे पर विजय प्राप्त की और जावली पर अधिकार कर लिया, जिसने उन्हें उस क्षेत्र का निर्विवाद स्वामी बना दिया और सतारा एवं कोंकण विजय का मार्ग प्रशस्त कर दिया। शिवाजी की इन विस्तारवादी गतिविधियों से बीजापुर का सुल्तान शंकित हो उठा किंतु उसके मंत्रियों ने सलाह दी कि वह फिलहाल चुपचाप स्थिति पर निगाह रखे। किंतु जब शिवाजी ने कल्याण पर अधिकार कर लिया और कोंकण पर धावा बोल दिया तो सुल्तान आपा खो बैठा और उसने शाहजी को क़ैद करके उनकी जागीर छीन ली। इससे शिवाजी झुकने के लिए विवश हो गए और उन्होंने वचन दिया कि वे और हमले नहीं करेंगे। किंतु उन्होंने बड़ी चतुराई से मुग़ल शाहजादा मुराद, जो मुग़ल सूबेदार था, से मित्रता स्थापित की और मुग़लों की सेवा में जाने की बात कही। इससे बीजापुर के सुल्तान की चिंता बढ़ गई और उसने शाहजी को मुक्त कर दिया। शाहजी ने वादा किया कि उसका पुत्र अपनी विस्तारवादी गतिविधियाँ छोड़ देगा। अतः अगले छः वर्षों तक शिवाजी धीरे-धीरे अपनी शक्ति सृदृढ़ करते रहे। इसके अतिरिक्त मुग़लों के भय से मुक्त बीजापुर मराठा गतिविधियों का दमन करने में सक्षम था—इस कारण भी शिवाजी को शांति बनाए रखने के लिए विवश होना पड़ा। किंतु जब औरंगज़ेब उत्तर चला गया तो शिवाजी ने अपनी विजयों का सिलसिला फिर आरंभ कर दिया। जिसकी कीमत चुकानी पड़ी बीजापुर को।

अफ़ज़ल ख़ाँ के साथ युद्ध

उन्होंने समुद्र और घाटों के बीच तटीय क्षेत्र कोंकण पर धावा बोल दिया और उसके उत्तरी भाग पर अधिकार कर लिया। स्वाभाविक था कि बीजापुर का सुल्तान उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करता। उसने अफ़ज़ल ख़ाँ के नेतृत्व में 10,000 सैनिकों की टुकड़ी शिवाजी को पकड़ने के लिए भेजी। उन दिनों छल-कपट और विश्वासघात की नीति अपनाना आम बात थी और शिवाजी और अफ़ज़ल ख़ाँ दोनों ने ही अनेक अवसरों पर इसका सहारा लिया। शिवाजी की सेना को खुले मैदान में लड़ने का अभ्यास नहीं था, अतः वह अफ़ज़ल ख़ाँ के साथ युद्ध करने से कतराने लगा। अफ़ज़ल ख़ाँ ने शिवाजी को निमंत्रण भेजा और वादा किया कि वह उन्हें सुल्तान से माफ़ी दिलवा देगा। किंतु ब्राह्मणदूत कृष्णजी भाष्कर ने अफ़ज़ल ख़ाँ का वास्तविक उद्देश्य शिवाजी को बता दिया। सारी बात जानते हुए शिवाजी किसी भी धोखे का सामना करने के लिए शिवाजी तैयार होकर गए और अरक्षित होकर जाने का नाटक किया। गले मिलने के बहाने अफ़ज़ल ख़ाँ ने शिवाजी का गला दबाने का प्रयास किया किंतु शिवाजी तो तैयार होकर आए थे—उन्होंने बघनख से उसका काम तमाम कर दिया। इस घटना को लेकर ग्रांट डफ़ जैसे यूरोपीय इतिहासकार शिवाजी पर विश्वासघात और हत्या का आरोप लगाते हैं जो सरासर ग़लत है क्योंकि शिवाजी ने आत्मरक्षा में ही ऐसा किया था। इस विजय से मित्र और शत्रु दोनों ही पक्षों में शिवाजी का सम्मान बढ़ गया। दूरदराज़ के इलाकों से जवान उनकी सेना में भरती होने के लिए आने लगे। शिवाजी में उनकी अटूट आस्था थी। इस बीच दक्षिण में मराठा शक्ति के इस चमत्कारी उत्थान पर औरंगज़ेब बराबर दृष्टि रखे हुए था। पूना और उसके आसपास के क्षेत्रों, जो अहमद नगर राज्य के हिस्से थे और 1636 की संधि के अंतर्गत बीजापुर को सौंप दिए गए थे, को अब मुग़ल वापस माँगने लगे। पहले तो बीजापुर ने मुग़लों की इस बात को मान लिया था कि वह शिवाजी से निपट लेगा और इस पर कुछ सीमा तक अमल भी किया गया किंतु बीजापुर का सुल्तान यह भी नहीं चाहता था कि शिवाजी पूरी तरह नष्ट हो जाएँ। क्योंकि तब उसे मुग़लों का सीधा सामना करना पड़ता। 

शिवाजी को चार लाख हूण वार्षिक आमदनी वाले तेईस क़िले मुग़लों को सौंपने पड़े और उन्होंने अपने लिए सामान्य आय वाले केवल बारह क़िले रखे।

मुग़लों ने शिवाजी के पुत्र सम्भाजी को पंज हज़ारी मन्सुबदारी एवं उचित जागीर देना स्वीकर किया।

मुग़लों ने शिवाजी के विवेकरहित और बेवफ़ा व्यवहार को क्षमा करना स्वीकार कर लिया।

शिवाजी को कोंकण और बालाघाट में जागीरें दी जानी थी जिनके बदले उन्हें मुग़लों को तेरह किस्तों में चालीस लाख हूण की रक़म अदा करनी थी। साथ ही उन्हें बीजापुर के ख़िलाफ़ मुग़लों की सहायता भी करनी थी।

शाही नौकरी

यह संधि राजा जयसिंह की व्यक्तिगत विजय थी। वह न केवल शक्तिशाली शत्रु पर काबू पाने में सफल रहा था अपितु उसने बीजापुर राज्य के विरुद्ध उसका सहयोग भी प्राप्त कर लिया था। किंतु उसका परिणाम अच्छा नहीं हुआ। दरबार में शिवाजी को पाँच हज़ारी मनसुबदारों की श्रेणी में रखा गया। यह ओहदा उनके नाबालिग पुत्र को पहले ही प्रदान कर दिया गया था। इसे शिवाजी ने अपना अपमान समझा। बादशाह का जन्मदिन मनाया जा रहा था और उसके पास शिवाजी से बात करने की फुर्सत भी नहीं थी अपमानित होकर शिवाजी वहाँ से चले आए और उन्होंने शाही नौकरी करना अस्वीकार कर दिया। तुरंत मुग़ल अदब के ख़िलाफ़ कार्य करने के लिए उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया। दरबारियों का गुट उन्हें दंड दिए जाने के पक्ष में था किंतु जयसिंह ने बादशाह से प्रार्थना की कि मामले में नरमी बरतें। किंतु कोई भी निर्णय लिए जाने से पूर्व ही शिवाजी क़ैद से भाग निकले।

उच्चकुल क्षत्रिय

इसमें कोई संदेह नहीं कि शिवाजी की आगरा यात्रा मुग़लों के साथ मराठों के संबंधों की दृष्टि से निर्णायक सिद्ध हुई। औरंगज़ेब शिवाजी को मामूली भूमिस समझता था। बाद की घटनाओं ने सिद्ध किया कि शिवाजी के प्रति औरंगज़ेब का दृष्टिकोण, शिवाजी के महत्त्व को अस्वीकार करना और उनकी मित्रता के मूल्य को न समझना राजनीतिक दृष्टि से उसकी बहुत बड़ी भूल थी। शिवाजी के संघर्ष की तार्किक पूर्णाहूति हुई 1647 ई. में छत्रपति के रूप में उनका औपचारिक राज्याभिषेक हुआ। स्थानीय ब्राह्मण शिवाजी के राज्यारोहण के उत्सव में भाग लेने के इच्छुक नहीं थे क्योंकि उनकी दृष्टि में शिवाजी उच्च कुल क्षत्रिय नहीं थे। अतः उन्होंने वाराणसी के एक ब्राह्मण गंगा भट्ट को इस बात के लिए सहमत किया कि वह उन्हें उच्चकुल क्षत्रिय और राजा घोषित करे। इस एक व्यवस्था से होकर शिवाजी दक्षिणी सुल्तानों के समकक्ष हो गए और उनका दर्जा विद्रोही का न रहकर एक प्रमुख़ का हो गया। अन्य मराठा सरदारों के बीच भी शिवाजी का रुतबा बढ़ गया। उन्हें शिवाजी की स्वाधीनता स्वीकार करनी पड़ी और मीरासपट्टी कर भी चुकाना पड़ा। राज्यारोहण के पश्चात शिवाजी की प्रमुख उपलब्धि थी 1677 में कर्नाटक क्षेत्र पर उनकी विजय जो उन्होंने कुतुबशाह के साथ मिलकर प्राप्त की थी। जिन्जी, वेल्लेर और अन्य दुर्गों की विजय ने शिवाजी की प्रतिष्ठा में वृद्धि की।

दुर्गों पर नियंत्रण

शिवाजी ने कई दुर्गों पर अधिकार किया जिनमें से एक था सिंहगढ़ दुर्ग, जिसे जीतने के लिए उन्होंने ताना जी को भेजा था। और वे वहाँ से विजयी हुए। ताना जी शिवाजी के बहुत विश्वासपात्र सेनापति थे। जिन्होंने सिंहगढ़ की लड़ाई में वीरगति पाई थी। ताना जी के पास बहुत अच्छी तरह से सधाई हुई गोह थी। जिसका नाम यशवन्ती था। शिवाजी ने ताना जी की मृत्यु पर कहा था-

गढ़ आला पण सिंह गेला (गढ़ तो हमने जीत लिया पर सिंह हमें छोड़ कर चला गया)।

बीजापुर के सुल्तान की राज्य सीमाओं के अंतर्गत रायगढ़ (1646) में चाकन, सिंहगढ़ और पुरन्दर सरीखे दुर्ग भी शीघ्र उनके अधिकारों में आ गये। 1655 ई. तक शिवाजी ने कोंकण में कल्याण और जाबली के दुर्ग पर भी अधिकार कर लिया। उन्होंने जाबली के राजा चंद्रदेव का बलपूर्वक वध करवा दिया। शिवाजी की राज्य विस्तार की नीति से क्रुद्ध होकर बीजापुर के सुल्तान ने 1659 ई. में अफ़ज़ल ख़ाँ नामक अपने एक वरिष्ठ सेनानायक को विशाल सैन्य बल सहित शिवाजी का दमन करने के लिए भेजा। दोनों पक्षों को अपनी विजय का पूर्ण विश्वास नहीं था। अतः उन्होंने संधिवार्ता प्रारम्भ कर दी। दोनों की भेंट के अवसर पर अफ़ज़ल ख़ाँ ने शिवाजी को दबोच कर मार डालने का प्रयत्न किया। परन्तु वे इसके प्रति पहले से ही सजग थे। उन्होंने अपने गुप्त शस्त्र बघनखा का प्रयोग करके मुसलमान सेनानी का पेट फाड़ डाला। जिससे उसकी तत्काल मृत्यु हो गई। तदुपरान्त शिवाजी ने एक विकट युद्ध में बीजापुर की सेनाओं को परास्त कर दिया। इसके बाद बीजापुर के सुल्तान ने शिवाजी का सामना करने का साहस नहीं किया।

छत्रपति शिवाजी महाराज का सिक्का

अब उन्हें एक और प्रबल शत्रु मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब का सामना करना पड़ा। 1660 ई. में औरंगजेब ने अपने मामा शायस्ता ख़ाँ नामक सेनाध्यक्ष शिवाजी के विरुद्ध भेजा। शायस्ता ख़ाँ ने शिवाजी के कुछ दुर्गों पर अधिकार करके उनके केन्द्र-स्थल पूना पर भी अधिकार कर लिया। किन्तु शीघ्र ही शिवाजी ने अचानक रात्रि में शायस्ता ख़ाँ पर आक्रमण कर दिया। जिससे उसको अपना एक पुत्र अपने हाथ की तीन अँगुलियाँ गँवाकर अपने प्राण बचाने पड़े। शायस्ता ख़ाँ को वापस बुला लिया गया। फिर भी औरंगज़ेब ने शिवाजी के विरुद्ध नये सेनाध्यक्षों की संरक्षा में नवीन सैन्यदल भेजकर युद्ध जारी रखा। शिवाजी ने 1664 ई. में मुग़लों के अधीनस्थ सूरत को लूट लिया, किन्तु मुग़ल सेनाध्यक्ष मिर्जा राजा जयसिंह ने उनके अधिकांश दुर्गों पर अधिकार कर लिया, जिससे शिवाजी को 1665 ई. में पुरन्दर की संधि करनी पड़ी। उसके अनुसार उन्होंने केवल 12 दुर्ग अपने अधिकार में रखकर 23 दुर्ग मुग़लों को दे दिये और राजा जयसिंह द्वारा अपनी सुरक्षा के प्रति आश्वस्त होकर आगरा में मुग़ल दरबार में उपस्थित होने के लिए प्रस्थान किया।

आगरा से बच निकलना

शिवाजी नहीं हारे और अपनी बीमारी का बहाना बनाया। उन्होंने मिठाई के बड़े-बड़े टोकरे ग़रीबों में बाँटने के लिए भिजवाने शुरू किए। 17 अगस्त 1666 को वह अपने पुत्र के साथ टोकरे में बैठकर पहरेदारों के सामने से छिप कर निकल गए। उनका बच निकलना, जो शायद उनके नाटकीय जीवन का सबसे रोमांचक कारनामा था, भारतीय इतिहास की दिशा बदलने में निर्णायक साबित हुआ। उनके अनुगामियों ने उनका अपने नेता के रूप में स्वागत किया और दो वर्ष के समय में उन्होंने न सिर्फ़ अपना पुराना क्षेत्र हासिल कर लिया, बल्कि उसका विस्तार भी किया। वह मुग़ल ज़िलों से धन वसूलते थे और उनकी समृद्ध मंडियों को भी लूटते थे। उन्होंने अपनी सेना का पुनर्गठन किया और प्रजा की भलाई के लिए अपेक्षित सुधार किए। अब तक भारत में पाँव जमा चुके पुर्तग़ाली और अंग्रेज़ व्यापारियों से सीख ले कर उन्होंने नौसेना का गठन शुरू किया। इस प्रकार आधुनिक भारत में वह पहले शासक थे, जिन्होंने व्यापार और सुरक्षा के लिए नौसेना की आवश्यकता के महत्त्व को स्वीकार किया। शिवाजी के उत्कर्ष से क्षुब्ध होकर औरंगज़ेब ने हिन्दुओं पर अत्याचार करना शुरू कर दिया, उन पर कर लगाना, ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन कराए और मंदिरों को गिरा कर उनकी जगह पर मस्जिदें बनवाई।

राज्याभिषेक

मई 1666 ई. में शाही दरबार में उपस्थित होने पर उनके साथ तृतीय श्रेणी के मनसुबदारों से सदृश व्यवहार किया गया और उन्हें नज़रबंद कर दिया गया। किन्तु शिवाजी चालाकी से अपने अल्पवयस्क पुत्र शम्भुजी और अपने विश्वस्त अनुचरों सहित नज़रबंदी से भाग निकले। संन्यासी के वेश में द्रुतगामी अश्वों की सहायता से वे दिसम्बर 1666 ई. में अपने प्रदेश में पहुँच गये। अगले वर्ष औरंगज़ेब ने निरुपाय होकर शिवाजी को राजा की उपाधि प्रदान की, और इसके बाद दो वर्षों तक शिवाजी और मुग़लों के बीच शान्ति रही। 

शिवाजी महाराज का सिंहासन, रायगढ़

शिवाजी ने इन वर्षों में अपनी शासन-व्यवस्था संगठित की। 1671 ई. में उन्होंने मुग़लों से पुनः संघर्ष प्रारंभ किया और खानदेश के कुछ भू-भागों के स्थानीय मुग़ल पदाधिकारियों को सुरक्षा का वचन देकर उनसे चौथ वसूल करने का लिखित इकारारनामा ले लिया और दूसरी बार सूरत को लूटा। 6 जून 1674 ई. में रायगढ़ के दुर्ग में महाराष्ट्र के स्वाधीन शासक के रूप में उनका राज्याभिषेक हुआ।

राज्याभिषेक के बाद शिवाजी का अन्तिम महत्त्वपूर्ण अभियान 'कर्नाटक का अभियान' (1676 ई.) था। गोलकुण्डा के 'मदन्ना' एवं 'अकन्ना' के सहयोग से शिवाजी ने बीजापुर और कर्नाटक पर आक्रमण करना चाहा, परन्तु आक्रमण के पूर्व ही शिवाजी एवं कुतुबशाह के बीच संधि सम्पन्न हुई, जिसकी शर्तें इस प्रकार थीं-शिवाजी को कुतुबशाह ने प्रति वर्ष एक लाख हूण देना स्वीकार किया।

दोनों ने कर्नाटक की सम्पत्ति को आपस में बांटने पर सहमति जताई।

शिवाजी ने जिंजी एवं वेल्लोर जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों पर क़ब्ज़ा कर लिया। जिंजी को उन्होंने अपने राज्य की राजधानी बनाया। शिवाजी का संघर्ष जंजीरा टापू के अधिपति अबीसीनियाई सिद्दकियों से भी हुआ। सिद्दकियों पर अधिकार करने के लिए उन्होंने नौसेना का भी निर्माण किया था, परन्तु वह पुर्तग़ालियों से गोवा तथा सिद्दकियों से चैल और जंजीरा नहीं छीन सके। सिद्दकी पहले अहमदनगर के अधिपत्य को मानते थे, परन्तु 1638 ई. के बाद वे बीजापुर की अधीनता में आ गए। शिवाजी के लिए जंजीरा को जीतना अपने कोंकण प्रदेश की रक्षा के लिए आवश्यक था। 1669 ई. में उन्होंने दरिया सारंग के नेतृत्व में अपने जल बेड़े को जंजीरा पर आक्रमण करने के लिए भेजा।

शिवाजी का प्रशासन

सेनानायक के रूप में शिवाजी की महानता निर्विवाद रही है। किंतु नागरिक प्रशासक के रूप में उनकी क्षमता आज भी स्पष्ट रूप से स्वीकार नहीं की जाती। यूरोपीय इतिहासकारों में दृष्टि में मराठा प्रभुत्व, जो लूट पर आधारित था, को किसी भी प्रकार का कर लेने का अधिकार नहीं था। कुछ अन्य इतिहासकारों की मान्यता है कि शिवाजी के प्रशासन के पीछे कोई आधारभूत सिद्धांत नहीं था और इसी कारण प्रशासन के क्षेत्र में उनका कोई स्थायी योगदान नहीं रहा। शिवाजी की प्रशासनिक व्यवस्था काफ़ी सीमा तक दक्षिणी राज्यों और मुग़लों की प्रशासनिक व्यवस्था से प्रभावित थी। शिवाजी की मृत्यु के समय उनका पुर्तग़ालियों के अधिकार क्षेत्र के अतिरिक्त लगभग समस्त (मराठा) देश में फैला हुआ था। पुर्तग़ालियों का आधिपत्य उत्तर में रामनगर से बंबई ज़िले में गंगावती नदी के तट पर करवार तक था। शिवाजी की पूर्वी सीमा उत्तर में बागलना को छूती थी और फिर दक्षिण की ओर नासिक एवं पूना ज़िलों के बीच से होती हुई एक अनिश्चित सीमा रेखा के साथ समस्त सतारा और कोल्हापुर के ज़िले के अधिकांश भाग को अपने में समेट लेती थी। इस सीमा के भीतर आने वाले क्षेत्र को ही मरी अभिलेखों में शिवाजी का "स्वराज" कहा गया है। पश्चिमी कर्नाटक के क्षेत्र कुछ देर बाद सम्मिलित हुए। स्वराज का यह क्षेत्र तीन मुख्य भागों में विभाजित था और प्रत्येक भाग की देखभाल के लिए एक व्यक्ति को नियुक्त किया गया था-


पूना से लेकर सल्हर तक का क्षेत्र कोंकण का क्षेत्र, जिसमें उत्तरी कोंकण भी सम्मिलित था, पेशवा मोरोपंत पिंगले के नियंत्रण में था।

उत्तरी कनारा तक दक्षिणी कोंकण का क्षेत्र अन्नाजी दत्तों के अधीन था।

दक्षिणी देश के ज़िले, जिनमें सतारा से लेकर धारवाड़ और कोफाल का क्षेत्र था, दक्षिणी पूर्वी क्षेत्र के अंतर्गत आते थे और दत्ताजी पंत के नियंत्रण में थे। इन तीन सूबों को पुनः परगनों और तालुकों में विभाजित किया गया था। परगनों के अंतर्गत तरफ़ और मौजे आते थे। हाल ही में जीते गए आषनी, जिन्जी, बैलोर, अन्सी एवं अन्य ज़िले, जिन्हें समयाभाव के कारण प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत नहीं लाया जा सका था, अधिग्रहण सेना की देखरेख में थे।

केंद्र में आठ मंत्रियों की परिषद् होती थी जिसे अष्ट प्रधान कहते थे जिसे किसी भी अर्थ में मंत्रिमडल नहीं कहा जा सकता था। शिवाजी अपने प्रधानमंत्री स्वयं थे और प्रशासन की बागडोर अपने ही हाथों में रखते थे। अष्ट प्रधान केवल उनके सचिवों के रूप में कार्य करते थे; वे न तो आगे बढ़कर कोई कार्य कर सकते थे और न ही नीति निर्धारण कर सकते थे। उनका कार्य शुद्ध रूप से सलाहकार का था। जब कभी उनकी इच्छा होती तो वे उनकी सलाह पर ध्यान देते भी थे अन्यथा सामान्यतः उनका कार्य शिवाजी के निर्दशों का पालन करना और उनके अपने विभागों की निगरानी करना मात्र होता था। संभव है कि शिवाजी पौरोहित्य एवं लेखा विभागों के काम-काज में दख़ल न देते हों किंतु इसका कारण उनकी प्रशासनिक अनुभवहीनता ही रही होगी। पेशवा का कार्य लोक हित का ध्यान रखना था। पंत आमात्य, आय-व्यय की लेखा परीक्षा करता था। मंत्री या वकनीस या विवरणकार राजा का रोज़नामचा रखता था। सुमंत या विदेश सचिव विदेशी मामलों की देखभाल करता था। पंत सचिव पर राजा के पत्राचार का दायित्व था। पंडितराव, विद्वानों और धार्मिक कार्यों के लिए दिए जाने वाले अनुदानों का दायित्व निभाता था। सेनापति एवं न्यायधीश अपना-अपना कार्य करते थे। वे क्रमशः सेना एवं न्याय विभाग के कार्यों की देखते थे।

सेना

शिवाजी ने अपनी एक स्थायी सेना बनाई थी और वर्षाकाल के दौरान सैनिकों को वहाँ रहने का स्थान भी उपलब्ध कराया जाता रहा था। शिवाजी की मृत्यु के समय उनकी सेना में 30-40 हज़ार नियमित और स्थायी रूप से नियुक्त घुड़सवार, एक लाख पदाति और 1260 हाथी थे। उनके तोपखानों के संबंध में ठीक-ठीक जानकारी उपलब्ध नहीं है। किंतु इतना ज्ञात है कि उन्होंने सूरत और अन्य स्थानों पर आक्रमण करते समय तोपखाने का उपयोग किया था। नागरिक प्रशासन की भाँति ही सैन्य-प्रशासन में भी समुचित संस्तर बने हुए थे। घुड़सवार सेना दो श्रेणियों में विभाजित थी-

बारगीर व घुड़सवार सैनिक थे जिन्हें राज्य की ओर से घोड़े और शस्त्र दिए जाते थे

सिल्हदार जिन्हें व्यवस्था आप करनी पड़ती थी।

घुड़सवार सेना की सबसे छोटी इकाई में 25 जवान होते थे, जिनके ऊपर एक हवलदार होता था। पाँच हवलदारों का एक जुमला होता था। जिसके ऊपर एक जुमलादार होता था; दस जुमलादारों की एक हज़ारी होती थी और पाँच हज़ारियो के ऊपर एक पंजहज़ारी होता था। वह सरनोबत के अंतर्गत आता था। प्रत्येक 25 टुकड़ियों के लिए राज्य की ओर से एक नाविक और भिश्ती दिया जाता था। मराठा सैन्य व्यवस्था के विशिष्ट लक्षण थे क़िले। विवरणकारों के अनुसार शिवाजी के पास 250 क़िले थे। जिनकी मरम्मत पर वे बड़ी रक़म खर्च करते थे। प्रत्येक क़िले को तिहरे नियंत्रण में रखा जाता था जिसमें एक ब्राह्मण, एक मरा, एक कुनढ़ी होता था। ब्राह्मण नागरिक और राजस्व प्रशासन देखता था, शेष दो सैन्य संचालन और रसद के पहलुओं को देखते थे। यह आम धारणा है कि शिवाजी के सैनिकों को वेतन नगद दिया जाता था। किंतु उस समय की परिस्थितियों और क्षेत्र की सामान्य स्थिति को देखते हुए यह व्यवस्था भी एक आदर्श थी जिसे शिवाजी साकार करना चाहते थे। सिपाहियों, हवलदारों इत्यादि का वेतन या तो ख़जाने से दिया जाता था या ग्रामीण क्षेत्रों की बारत (आज्ञा) द्वारा जिनका भुगतान कारकून करते थे। किंतु निश्चित रक़म के लिए भूमि या गाँव देने की पहले से चली आ रही प्रथा को भी पूर्णतः समाप्त नहीं किया गया था।

स्वतंत्र प्रभुसत्ता

1674 की ग्रीष्म ऋतु में शिवाजी ने धूमधाम से सिंहासन पर बैठकर स्वतंत्र प्रभुसत्ता की नींव रखी। दबी-कुचली हिन्दू जनता ने सहर्ष उन्हें नेता स्वीकार कर लिया। अपने आठ मंत्रियों की परिषद के ज़रिये उन्होंने छह वर्ष तक शासन किया। वह एक धर्मनिष्ठ हिन्दू थे। जो अपनी धर्मरक्षक भूमिका पर गर्व करते थे। लेकिन उन्होंने ज़बरदस्ती मुसलमान बनाए गए अपने दो रिश्तेदारों को हिन्दू धर्म में वापस लेने का आदेश देकर परंपरा तोड़ी। हालांकि ईसाई और मुसलमान बल प्रयोग के ज़रिये बहुसंख्य जनता पर अपना मत थोपते थे। शिवाजी ने इन दोनों संप्रदायों के आराधना स्थलों की रक्षा की। उनकी सेवा में कई मुसलमान भी शामिल थे। उनके सिंहासन पर बैठने के बाद सबसे उल्लेखनीय अभियान दक्षिण भारत का रहा, जिसमें मुसलमानों के साथ कूटनीतिक समझौता कर उन्होंने मुग़लों को समूचे उपमहाद्वीप में सत्ता स्थापित करने से रोक दिया।

राजस्व प्रशासन

शिवाजी ने भू-राजस्व एवं प्रशासन के क्षेत्र में अनेक क़दम उठाए। इस क्षेत्र की व्यवस्था पहले बहुत अच्छी नहीं थीं क्योंकि यह पहले कभी किसी राज्य का अभिन्न अंग नहीं रहा था। बीजापुर के सुल्तान, मुग़ल और यहाँ तक कि स्वयं मराठा सरदार भी अतिरिक्त उत्पादन को एक साथ ही लेते थे जो इजारेदारी या राजस्व कृषि की कुख्यात प्रथा जैसी ही व्यवस्था थी। मलिक अम्बर की राजस्व व्यवस्था में शिवाजी को आदर्श व्यवस्था दिखाई दी किंतु उन्होंने उसका अंधानुकरण नहीं किया। मलिक अम्बर तो माप की इकाइयों का मानकीकरण करने में असफल रहा था किंतु शिवाजी ने एक सही मानक इकाई स्थिर कर दी थी। उन्हारेंने रस्सी के माप के स्थान पर काठी और मानक छड़ी का प्रयोग आरंभ करवाया। बीस छड़ियों का एक बीघा होता है और 120 बीघे का एक चावर चवार होता था।

रायगढ़ क़िला, महाराष्ट्र

शिवाजी के निदेशानुसार सन् 1679 ई. में अन्नाजी दत्तों ने एक विस्तृत भू-सर्वेक्षण करवाया जिसके परिणामस्वरूप एक नया राजस्व निर्धारण हुआ। अगले ही वर्ष शिवाजी की मृत्यु हो गई, इससे यह तर्क निरर्थक जान पड़ता है कि उन्होंने भूरास्व विभाग से बिचौलियों का अस्तित्व समाप्त कर दिया था और राजस्व उनके अधिकारी ही एकत्र करते थे। कुल उपज का 33% राजस्व के रूप में लिया जाता था जिसे बाद में बढ़ाकर 40% कर दिया गया था। राजस्व नगद या वस्तु के रूप में चुकाया जा सकता था। कृषकों को नियमित रूप से बीज और पशु ख़रीदने के लिए ऋण दिया जाता था जिसे दो या चार वार्षिक किश्तों में वसूल किया जाता था। अकाल या फ़सल ख़राब होने की आपात स्थिति में उदारतापूर्वक अनुदान एवं सहायता प्रदान की जाती थी। नए इलाक़े बसाने को प्रोत्साहन देने के लिए किसानों को लगानमुक्त भूमि प्रदान की जाती थी।

यद्यपि निश्चित रूप से यह कहना कठिन है कि शिवाजी ने ज़मीदारी प्रथा को समाप्त कर दिया था। फिर भी उनके द्वारा भूमि एवं उपज के सर्वेक्षण और भूस्वामी बिचौलियों की स्वतंत्र गतिविधियों पर नियंत्रण लगाए जाने से ऐसी संभावना के संकेत मिलते हैं। उन्होंने बार-बार किए जाने वाले भू-हस्तांतरण पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास भी किया यद्यपि इसे पूरी तरह समाप्त करना उनके लिए संभव नहीं था। इस सबको देखते हुए कहा जा सकता है कि इस नई व्यवस्था से किसान प्रसन्न हुए होंगे और उन्होंने इसका स्वागत किया होगा क्योंकि बीजापुरी सुल्तानों के अत्याचारी मराठा देशमुखों की व्यवस्था की तुलना में यह बहुत अच्छी थी। शिवाजी के शासन काल में राज्य की आय के दो और स्रोत थे-सरदेशमुखी और चौथ। उनका कहना था कि देश के वंशानुगत (और सबसे बड़े भी) होने के नाते और लोगों के हितों की रक्षा करने के बदले उन्हें सरदेशमुखी लेने का अधिकार है। चौथ के संबंध में इतिहासकार एक मत नहीं हैं।

रानाडे के अनुसार यह 'सेना के लिए दिया जाने वाला अंशमात्र नहीं था जिसमें कोई नैतिक और क़ानूनी बाध्यता न होती, अपितु बाह्य शक्ति के आक्रमण से सुरक्षा प्रदान करने के बदले लिया जाने वाला कर था।' सरदेसाई इसे 'शत्रुता रखने वाले अथवा विजित क्षेत्रों से वसूल किया जाने वाला कर मानते हैं।' जदुनाथ सरकार के अनुसार 'यह मराठा आक्रमण से बचने की एवज़ में वसूले जाने वाले शुल्क से अधिक कुछ नहीं था। अतः इसे एक प्रकार का भयदोहन (दबावपूर्वक ऐंठना) ही कहा जाना चाहिए।' यह कहना भी अनुचित न होगा कि दक्षिण के सुल्तानों और मुग़लों ने मराठों को अपने इलाक़ों से ये दोनों कर वसूल करने का अधिकार दिया था जिसने इस उदीयमान राज्य को बड़ी सीमा तक वैधता प्रदान की थी। मराठा राज्य के संबंध में सतीशचंद्र के इस कथन से सहमत हुआ जा सकता है कि 'मराठा राज्य के अध्ययन से ज्ञात होता है कि मराठा आंदोलन, जो मुग़ल साम्राज्य के केंद्रीकरण के विरुद्ध क्षेत्रीय प्रतिक्रिया के रूप में आरंभ हुआ था, की परिणति शिवाजी द्वारा दक्षिण-मुग़ल प्रशासनिक व्यवस्था के मूलभूत सिद्धांतों को अपनाए जाने में हुई।"

अन्तिम समय

शिवाजी की कई पत्नियां और दो बेटे थे, उनके जीवन के अंतिम वर्ष उनके ज्येष्ठ पुत्र की धर्मविमुखता के कारण परेशानियों में बीते। उनका यह पुत्र एक बार मुग़लों से भी जा मिला था और उसे बड़ी मुश्किल से वापस लाया गया था। घरेलु झगड़ों और अपने मंत्रियों के आपसी वैमनस्य के बीच साम्राज्य की शत्रुओं से रक्षा की चिंता ने शीघ्र ही शिवाजी को मृत्यु के कगार पर पहुँचा दिया। 

मैकाले द्वारा 'शिवाजी महान' कहे जाने वाले शिवाजी की 1680 में कुछ समय बीमार रहने के बाद अपनी राजधानी पहाड़ी दुर्ग राजगढ़ में 3 अप्रैल को मृत्यु हो गई।

उपसंहार

इस प्रकार मुग़लों, बीजापुर के सुल्तान, गोवा के पुर्तग़ालियों और जंजीरा स्थित अबीसिनिया के समुद्री डाकुओं के प्रबल प्रतिरोध के बावजूद उन्होंने दक्षिण में एक स्वतंत्र हिन्दू राज्य की स्थापना की। धार्मिक आक्रामकता के युग में वह लगभग अकेले ही धार्मिक सहिष्णुता के समर्थक बने रहे। उनका राज्य बेलगांव से लेकर तुंगभद्रा नदी के तट तक समस्त पश्चिमी कर्नाटक में विस्तृत था। इस प्रकार शिवाजी एक साधारण जागीरदार के उपेक्षित पुत्र की स्थिति से अपने पुरुषार्थ द्वारा ऎसे स्वाधीन राज्य के शासक बने, जिसका निर्माण स्वयं उन्होंने ही किया था। उन्होंने उसे एक सुगठित शासन-प्रणाली एवं सैन्य-संगठन द्वारा सुदृढ़ करके जन साधारण का भी विश्वास प्राप्त किया। जिस स्वतंत्रता की भावना से वे स्वयं प्रेरित हुए थे, उसे उन्होंने अपने देशवासियों के हृदय में भी इस प्रकार प्रज्वलित कर दिया कि उनके मरणोंपरान्त औरंगज़ेब द्वारा उनके पुत्र का वध कर देने, पौत्र को कारागार में डाल देने तथा समस्त देश को अपनी सैन्य शक्ति द्वारा रौंद डालने पर भी वे अपनी स्वतंत्रता बनाये रखने में समर्थ हो सके। उसी से भविष्य में विशाल मराठा साम्राज्य की स्थापना हुई। शिवाजी यथार्थ में एक व्यावहारिक आदर्शवादी थे।

05/02/2015
श्री पवन सिंह राजपूत अध्यक्ष उप समिति भिलाई का दिनांक 04 फ़रवरी 2015 को  दोपहर 1.45 बजे सुयश अस्पताल रायपुर मे दुखद निधन हो गया , स्व पवन सिंह विगत कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे । 04 फ़रवरी 2015 को स्व पवन सिंह के समधी श्री प्रकाश सिंह भुवाल गोडमर्रा वाले का सांय 5 बजे महासमुंद मे दुखद निधन हो गया । स्व पवन सिंह राजपूत का शिवनाथ नदी मुक्तिधाम दुर्ग मे दिनांक 5 फ़रवरी 2015 को अंतिम संस्कार संपन्न हुआ । अग्नि संस्कार उनके पुत्र श्री मिलाप सिंह राजपूत ने किया ।  स्व पवन सिंह राजपूत की शव यात्रा उनके निवास राजपूत भवन नंदनी रोड पावर हाऊस भिलाई से प्रारंभ हुआ जिसमे हजारो की संख्या मे पारिवारिक , सामजिक , स्नेही स्वजन , तथा माध्यमिक शाला के सभी अध्यापक , अध्यापिकाओ के साथ स्कूल के पूरे बच्चे उनके  अंतिम दर्शन के लिए आये थे तथा उनको अपनी श्रद्धांजली अर्पित किया  . स्व पवन सिंह राजपूत की नश्वर शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उप समिति भिलाई के सामजिक भवन मे रखा गया था जहा उपसमिति के सभी सदस्यो ने अपनी श्रद्धांजली देकर अंतिम बिदाई दिया। 
मुक्ति धाम मे महा सभा की ओर से श्री अशोक सिंह ठाकुर सहसचिव एव्ं श्री अश्वनी सिंह लवायन प्रचार सचिव तथा आरन सिंह ठाकुर उप समिति डोंगरगढ के द्वारा अश्रुपूरित श्र्द्धांजली दी गई 
स्व श्री पवन सिंह राजपूत का मृतक कार्यक्रम निम्नानुसार रखा गया है 
दशगात्र  :- दिनांक 14 फ़रवरी  2015
तेरहवी :- दिनांक   16 फ़रवरी 2015 दोपहर 12 बजे से 5 बजे तक
कार्यक्रम स्थल राजपूत भवन नंदनी रोड पावर हाऊस भिलाई 
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स्व श्री प्रकाश सिंह भुवाल का मृतक कार्यक्रम महासमुंद मे उनके निवास स्थान त्रिमुर्ति कालोनी महासमुंद  मे निम्नानुसार रखा गया है 
शगात्र  :- दिनांक 14 फ़रवरी  2015
तेरहवी :- दिनांक   16 फ़रवरी 2015 

डेंगू बुखार का ईलाज पपीता के पत्ते से 
पपीता के पत्ते के रस से डेंगू बुखार का  ईलाज  एक चमत्कार  है।  सबसे अच्छी बात है कि आप इसे घर पर बना सकते है ।
डेंगू के बैक्टेरिया खून के प्लेट्लेट्स को अपने  गिरफ़्त मे लेकर समूल नष्ट कर देता है 
पपीता के कोमल पत्ते का रस डेंगू ग्रस्त मरीज को  मृत्यु से बचाता है ।   डेंगू के मौसम मे डेंगू के वायरस रक्त के  प्लेटलेट्स को अपने गिरफ़्त मे लेकर समूल नष्ट  कर विनाश  कर देता है । आयुर्वेद शोधकर्ताओं  ने पपीता के पत्ते में उपस्थित एंजाइम के सम्बम्ध मे शोध कर प्रतिपदित किया है कि पपीता के पत्ते मे उपस्थित एंजाइम न सिर्फ डेंगू ,एवं  वायरल संक्रमण से  लड़ सकते हैं बल्कि प्लेटलेट्स और सफेद रक्त कोशिकाओ को पुनर्जीवित करने में मदद करता है । 

रोगियों के लिए  पपीता हमेशा लाभ प्रद रहा है । चिकित्सक रोगियो को पपीता खाने का सलाह देते रहते है । पपीता सर्व सुलभ ,सस्ता सबका पसंदीदा फ़ल है जो बारहो महिना आसानी  से मिलता है 
पपीता हमारे शरीर के  पाचन तंत्र सुदृढ बनाता  है । पपीता मे  विटामिन और खनिज सामग्री बहुतायत मे पाया जाता है,
  पपीता मे  डेंगू -से लडने के  गुण की  हाल ही में खोज की गई है ।
 पपीता मे Chymopapin और PAPIN -नामक  एंजाईम पपीता के पत्ते में पाया जाता  है और ये एंजाइम - प्लेटलेट  को पुनर्जीवित करने में मदद करते है , 
पपीता के पत्ते का  रस तैयार करने की विधि 
 पपीता पेड़ की ताजा पत्तियों को अच्छे से धो लें और पत्थर मे पीस कर ,   रस निचोड़ लेंवे  । प्रतिदिन एक से दो गिलास रस डेंगू के मरीज को कम से कम चार दिन तक अवश्य पिलावे इसका स्वाद कडवा होता है । यह फ़ल का रस नहि है परन्तु इसे एक फ़ल का रस मानकर ग्रहण करे .
पपीता के रस के साथ दो चम्मच गिलोय का रस मिला कर दिन मे तीन बार  मरीज को पिलाने से प्लेट्लेट्स मे तेजी से वृद्धि होती है एवं शरीर का रोग प्रतिरोधक क्षमता मे वृद्धि होती है 

मधुमेह ( शुगर= डायबिटीज़ ) का सफल इलाज़
आप अपनी मधुमेह से परेशान है ? ताे आज ही इस विधि काे अपनाये !!
 केवल दो सप्ताह चलने वाला यह उपचार पूर्णतः प्राकृतिक तत्वों से घर में ही निर्मित होगा, अतः इसके कोई दुष्प्रभाव होने की रत्ती भर भी संभावना नहीं है ।मुम्बई के किडनी विशेषज्ञ डा. टोनी अलमैदा ने दृढ़ता और धैर्य के साथ इस औषधि के व्यापक प्रयोग किये हैं तथा इसे आश्चर्यजनक माना है ।
अतः आग्रह है कि इस उपयोगी उपचार को अधिक से अधिक प्रचारित करें, जिससे अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें |
देखिये कितना आसान है इस औषधि को घर में ही निर्मित करना |
आवश्यक वस्तुएं–
1 – गेंहू का आटा 100 gm.
2 – वृक्ष से निकली गोंद 100 gm.
3 - जौ 100 gm.
4 - कलुन्जी 100 gm.
निर्माण विधि
उपरोक्त चारो  सामग्री को ५ कप पानी में डालकर , आग पर इन्हें १० मिनट उबालें । इसे स्वयं ठंडा होने दें । ठंडा होने पर इसे छानकर पानी को किसी बोतल या जग में सुरक्षित रख दें ।
 उपयोग विधि
सात दिन तक एक छोटा कप पानी प्रतिदिन सुबह खाली पेट लेना ।
अगले सप्ताह एक दिन छोड़कर इसी प्रकार सुबह खाली पेट पानी लेना । मात्र दो सप्ताह के इस प्रयोग के बाद आश्चर्यजनक रूप से आप पायेंगे कि आप सामान्य हो चुके हैं ...और बिना किसी समस्या के अपना नियमित सामान्य भोजन ले सकते हैं ।जिस किसी को समस्या हो उपयोग करे । 

हृदयघात :: हार्ट अटैक
दिल के रोगी नही डरे
सहज सुलभ अचूक उपाय
पीपल का पत्ता
धमनी की 99 प्रतिशत ब्लॉकेज को खत्म  कर देता है
पीपल के पूर्ण विकसित हरे  15 पत्ते लें पानी से साफ कर लें
पत्तो के  ऊपर व नीचे का कुछ भाग काटकर अलग कर दें।
 इन्हें एक गिलास पानी में धीमी आँच मे पकने दें। जब पानी उबलकर एक तिहाई
रह जाए तब ठंडा होने पर साफ कपड़े से छान लें और उसे ठंडे
स्थान पर रख दें, दवा तैयार।
इस काढ़े की तीन खुराक बनाकर प्रत्येक तीन घंटे बाद पीये
 हृदयघात : हार्ट अटैक के बाद  भी  इस  काढा को
लगातार पंद्रह दिन तकपीने से हृदय पुनः स्वस्थ
हो जाता है और फिर दिल का दौरा हृदयघात आने
की संभावना नहीं रहती। दिल (हृदय ) के रोगी इस उपय  को एक बार अवश्य आजमा कर देखे।
* पीपल के पत्ते में हृदय  (दिल ) को बल और शांति देने की अद्भुत
क्षमता है।
* इस पीपल के काढ़े की तीन बार सुबह  8 बजे, 11 बजे व
दोपहर 2 बजे ली जा सकती हैं।
*  खाली पेट काढा  नहीं पिये ,काढा पीने से पहले सुपाच्य व हल्का नाश्ता  लेंवे ।
* प्रयोगकाल में तली चीजें, चावल , मांस, मछली,अंडे, शराब, धूम्रपान का प्रयोग बंद कर दें।
नमक, चिकनाई का प्रयोग बंद कर दें।
* अनार, पपीता, आंवला, बथुआ, लहसुन, मैथी दाना, सेब
का मुरब्बा, मुसंबी, रात में भिगोए काले चने, किशमिश,गुग्गुल, दही, छाछ आदि लें । ……
 भगवान ने पीपल के पत्तों को हृदयाकर बनाकर हृदय को स्वस्थ रखने के लिए इंगित किया है

मधुमेह ( डाइबटीज ) 
           भारत में 5 करोड़ 70 लाख से ज्यादा लोगों को मधुमेह है और 3 करोड़ से ज्यादा को हो जाएगी अगले कुछ सालों में (सरकार ऐसा कह रही है ) , हर 2 मिनट में एक आदमी मधुमेह से मर जाता हैं !किसी की किडनी खराब हो रही है ,किसी का लीवर खराब हो रहा है , किसी को paralisis हो रहा है किसी को brain stroke हो रहा है ,किसी को heart attack आ रहा है ! कुल मिलकर  diabetes के बहुत complications है !
           मधुमेह या चीनी की बीमारी एक खतरनाक रोग है। रक्त ग्लूकोज (blood sugar level ) स्तर बढा़ हूँआ मिलता है, यह रोग मरीजों के (रक्त मे गंदा कोलेस्ट्रॉल,) के अवयव के बढने के कारण होता है। इन मरीजों में आँखों, गुर्दों, स्नायु, मस्तिष्क, हृदय के क्षतिग्रस्त होने से इनके गंभीर, जटिल, घातक रोग का खतरा बढ़ जाता है।भोजन पेट में जाकर एक प्रकार के ईंधन में बदलता है जिसे ग्लूकोज कहते हैं। यह एक प्रकार की शर्करा होती है। ग्लूकोज हमारे रक्त धारा में मिलता है और शरीर की लाखों कोशिकाओं में पहुंचता है। pancreas (अग्न्याशय) ग्लूकोज उत्पन्न करता है इनसुलिन भी रक्तधारा में मिलता है और कोशिकाओं तक जाता है।
           मधुमेह बीमारी का असली कारण जब तक  नही समझेंगे आपकी मधुमेह कभी भी ठीक नही हो सकता है जब आपके रक्त में वसा (गंदे कोलेस्ट्रोल) की मात्रा बढ जाती है तब रक्त में मोजूद कोलेस्ट्रोल कोशिकाओ के चारों तरफ चिपक जाता है !और खून में मौजूद  इन्सुलिन  कोशिकाओं तक नही पहुँच पाता है । इंसुलिन की मात्रा तो पर्याप्त होती है किन्तु इससे द्वारो को खोला नहीं जा सकता है, अर्थात पूरे ग्लूकोज को ग्रहण कर सकने के लिए रिसेप्टरों की संख्या कम हो सकती है.वह इन्सुलिन शरीर के किसी भी काम में नही आता है, जिसके कारण जब हम शुगर level चैक करते हैं शरीर में हमेशा शुगर का स्तर हमेशा ही बढा हुआ होता है ,क्यूंकि वह कोशिकाओ तक नहीं पहुंची जबकि जब हम बाहर से इन्सुलिन लेते है तब वो इन्सुलिन नया-नया होता है और  वह कोशिकाओं के अन्दर पहुँच जाता है !अब आप समझ गये होगे कि मधुमेह का रिश्ता कोलेस्ट्रोल से है न कि शुगर से। 
          जब सम्भोग के समय पति पत्नी आपस में नही बना कर रख पाते है या सम्भोग के समय बहुत तकलीफ होती है समझ जाइये मधुमेह हो चूका है या होने वाला है क्योकि जिस आदमी को मधुमेह होने वाला हो उसे सम्भोग के समय बहुत तकलीफ होती है क्योकि मधुमेह से पहले जो बिमारी आती वह है सेक्स में समस्या होना, मधुमेह रोग में शुरू में तो भूख बहुत लगती है। लेकिन धीरे-धीरे भूख कम हो जाती है। शरीर सुखने लगता है, कब्ज की शिकायत रहने लगती है। बार बार बहुत अधिक प्यास लगती है अधिक पेशाब आना और पेशाब में चीनी आना शुरू हो जाती है और रोगी का वजन कम होता जाता है। शरीर में कहीं भी जख्म घाव होने पर वह जल्दी नहीं भरता।
ऐसी स्थिति मे हम क्या करें ??
एक छोटी सी सलाह है कि आप insulin पर ज्यादा निर्भर ना रहें ! क्यूंकि ये insulin मधुमेह से भी ज्यादा खराब है । इसके बहुत side effect हैं !!  
आप ये आयुर्वेद की दवा का फार्मूला लिखिये और जरूर इस्तेमाल करें !!
100 ग्राम (मेथी का दाना )ले ले इसे धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !
100 ग्राम (तेज पत्ता ) लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !
150 ग्राम (जामुन की गुठली )लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !
250 ग्राम (बेलपत्र के पत्ते ) लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !
इन सबका पाउडर बनाकर इन सबको एक दूसरे मे मिला लें ! बस दवा तैयार है !!
 सुबह -शाम (खाली पेट ) 1 से डेड चम्मच ले ( खाना खाने से एक घण्टा पहले गरम पानी के साथ लें )2 से 3 महीने लगातार इसका सेवन करें !! 
(सुबह उठे पेट साफ करने के बाद ले लीजिये )
कुछ लोग सीधा पाउडर नही खा सकते  !
एक चौथाई गिलास पानी को गर्म करे उसमे पाउडर मिलाकर अच्छे से हिलाएँ ! सिरप की तरह बन जाएगा उसे आप आसानी से एक सांस मे पी सकते है ! उसके बाद एक आधा गिलास अकेला गर्म पानी पी लीजिये !!
अगर आप इसके साथ एक और काम करे तो सोने पे सुहागा हो जाएगा ! और  दवा का असर बहुत ही जल्दी होगा !! जैसा कि आप जानते है शरीर की सभी बीमारियाँ वात,पित ,और कफ के बिगड़ने से होती हैं !! दुनिया मे सिर्फ दो ही ओषधियाँ है जो इन तीनों के स्तर को बराबर सामान्य रखती है !!
एक है गौ मूत्र , दूसरी है त्रिफला चूर्ण !!
अब आप ठहरे अँग्रेजी मानसिकता के लोग ! गौ मूत्र का नाम सुनते ही आपकी नाक चढ़ जायेगी !!
 आपको गौ मूत्र का महत्व बताना है  तो हमे अमेरिका का उदाहरण देना होगा !
क्यूंकि अंग्रेज़ मेकोले के बनाए indian education system मे पढ़ कर आपकी बुद्धि ऐसी हो गई है कि 
आपको सिर्फ अमेरिका(अंग्रेज़ो ) द्वारा किये गए काम मे ही विश्वास होता है ! आपको कहीं ना कहीं लगता है ये अमरीकी बहुत समझदार होते है जो करते है सोच समझ के करते हैं !!
तो खैर आपकी जानकरी के लिए बता दूँ कि अमेरिका ने गौ मूत्र पर 6 पेटेंट ले लिए हैं !! उसको इसका महत्व समझ आने लगा है !! और हमारे शास्त्रो मे करोड़ो वर्षो पहले से इसका महत्व बताया है ! लेकिन गौ मूत्र का नाम सुनते हमारी नाक चढ़ती है !
खैर जिसको पीना है वो पी सकता है ! गौ मूत्र बिलकुल ताजा पिये सबसे बढ़िया !! बाहरी प्रयोग के लिए जितना पुराना उतना अच्छा है लेकिन पीने के लिए ताजा सबसे बढ़िया !! हमेशा देशी गाय का ही मूत्र पिये (देशी गाय की निशानी जिसकी पीठ पर हम्प होता है ) ! 3 -4 घंटे से अधिक पुराना मूत्र ना पिये !!
और याद रखे गौ मूत्र पीना है अर्क नहीं ! आधे से एक कप  सुबह सुबह  पिये ! सारी बीमारियाँ दूर !
अब बात करते हैं त्रिफला चूर्ण की !
त्रिफला अर्थात तीन फल !
कौन से तीन फल !
(1) हरड़ (Terminalia chebula) 
(2) बहेडा (Terminalia bellirica)
(3) आंवला (Emblica officinalis)
एक बात याद रखें इनकी मात्रा हमेशा 1:2:3 होनी चाहिए ! 1 अनुपात 2 अनुपात 3 !
बाजार मे जितने भी त्रिफला चूर्ण मिलते है सब मे तीनों की मात्रा बराबर होती है ! बहुत ही कम बीमारियाँ होती है जिसमे त्रिफला बराबर मात्रा मे लेना चाहिए !!
इसलिए आप जब त्रिफला चूर्ण बनवाए तो 1 :2 :3 के अनुपात  मे ही बनवाए !!
सबसे पहले हरड़ 100 ग्राम , फिर बहेड़ा 200 ग्राम और अंत आंवला 300 ग्राम !!
इन तीनों को भी एक दूसरे मे मिलकर पाउडर बना लीजिये !! और रात को एक से डेड चमच गर्म पानी के साथ प्रयोग करें !!
सीधा पाउडर लिया नहीं जाता ! तो उसके लिए क्या करें ??
           एक चौथाई गिलास पानी को गर्म करे उसमे पाउडर मिलाकर अच्छे से हिलाएँ !! वो सिरप की तरह बन जाएगा ! उसे आप आसानी से एक दम पी सकते है ! उसके बाद एक आधा गिलास अकेला गर्म पानी पी लीजिये !!
!! सावधानियाँ !!
चीनी का प्रयोग कभी ना करें और जो sugar free गोलियां का तो सोचे भी नहीं !!
गुड़ खाये , फल खाये ! भगवान की बनाई गई कोई भी मीठी चीजे खा सकते हैं !!
रात का खाना सर्यास्त के पूर्व करना होगा !! मतलब सूर्य अस्त के बाद भोजन ना करें
ऐसी चीजे ज्यादा खाए जिसमे फाइबर हो रेशे ज्यादा हो, High Fiber Low Fat Diet घी तेल वाली डायेट कम हो और फाइबर वाली ज्यादा हो रेशेदार चीजे ज्यादा खाए। सब्जिया में बहुत रेशे है वो खाए, डाल जो छिलके वाली हो वो खाए, मोटा अनाज ज्यादा खाए, फल ऐसी खाए जिनमे रेशा बहुत है ।

आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खे 
1:-दही मथें माखन मिले, 
केसर संग मिलाय, 
होठों पर लेपित करें, 
रंग गुलाबी आय..
2:-बहती यदि जो नाक हो, 
बहुत बुरा हो हाल, 
यूकेलिप्टिस तेल लें, 
सूंघें डाल रुमाल..
 अजवाईन 
3 :-अजवाइन को पीसिये , 
गाढ़ा लेप लगाय, 
चर्म रोग सब दूर हो, 
तन कंचन बन जाय..
4:-अजवाइन को पीस लें , 
नीबू संग मिलाय, 
फोड़ा-फुंसी दूर हों, 
सभी बला टल जाय..
५:-अजवाइन-गुड़ खाइए, 
तभी बने कुछ काम, 
पित्त रोग में लाभ हो, 
पायेंगे आराम..
 6:-ठण्ड लगे जब आपको, 
सर्दी से बेहाल, 
नीबू मधु के साथ में, 
अदरक पियें उबाल..
7:-अदरक का रस लीजिए. 
मधु लेवें समभाग, 
नियमित सेवन जब करें, 
सर्दी जाए भाग..
8:-रोटी मक्के की भली, 
खा लें यदि भरपूर, 
बेहतर लीवर आपका, 
टी० बी० भी हो दूर..
9:-गाजर रस संग आँवला, 
बीस औ चालिस ग्राम, 
रक्तचाप हिरदय सही, 
पायें सब आराम..
10:-शहद आंवला जूस हो, 
मिश्री सब दस ग्राम, 
बीस ग्राम घी साथ में, 
यौवन स्थिर काम..
11:-चिंतित होता क्यों भला, 
देख बुढ़ापा रोय, 
चौलाई पालक भली, 
यौवन स्थिर होय..
12:-लाल टमाटर लीजिए, 
खीरा सहित सनेह, 
जूस करेला साथ हो, 
दूर रहे मधुमेह..
13:-प्रातः संध्या पीजिए, 
खाली पेट सनेह, 
जामुन-गुठली पीसिये, 
नहीं रहे मधुमेह..
14;-सात पत्र लें नीम के, 
खाली पेट चबाय, 
दूर करे मधुमेह को, 
सब कुछ मन को भाय..
15:-सात फूल ले लीजिए, 
सुन्दर सदाबहार, 
दूर करे मधुमेह को, 
जीवन में हो प्यार..
16:-तुलसीदल दस लीजिए, 
उठकर प्रातःकाल, 
सेहत सुधरे आपकी, 
तन-मन मालामाल..
17:-थोड़ा सा गुड़ लीजिए, 
दूर रहें सब रोग, 
अधिक कभी मत खाइए, 
चाहे मोहनभोग.
18:-अजवाइन और हींग लें, 
लहसुन तेल पकाय, 
मालिश जोड़ों की करें, 
दर्द दूर हो जाय..
19:-ऐलोवेरा-आँवला, 
करे खून में वृद्धि, 
उदर व्याधियाँ दूर हों, 
जीवन में हो सिद्धि..
20:-दस्त अगर आने लगें, 
चिंतित दीखे माथ, 
दालचीनि का पाउडर, 
लें पानी के साथ..
21:-मुँह में बदबू हो अगर, 
दालचीनि मुख डाल, 
बने सुगन्धित मुख, महक, 
दूर होय तत्काल..
22:-कंचन काया को कभी, 
पित्त अगर दे कष्ट, 
घृतकुमारि संग आँवला, 
करे उसे भी नष्ट..
23:-बीस मिली रस आँवला, 
पांच ग्राम मधु संग, 
सुबह शाम में चाटिये, 
बढ़े ज्योति सब दंग..
24:-बीस मिली रस आँवला, 
हल्दी हो एक ग्राम, 
सर्दी कफ तकलीफ में, 
फ़ौरन हो आराम..
25:-नीबू बेसन जल शहद , 
मिश्रित लेप लगाय, 
चेहरा सुन्दर तब बने, 
बेहतर यही उपाय..
26:-मधु का सेवन जो करे, 
सुख पावेगा सोय, 
कंठ सुरीला साथ में , 
वाणी मधुरिम होय.
27:-पीता थोड़ी छाछ जो, 
भोजन करके रोज, 
नहीं जरूरत वैद्य की, 
चेहरे पर हो ओज..
28:-ठण्ड अगर लग जाय जो 
नहीं बने कुछ काम, 
नियमित पी लें गुनगुना, 
पानी दे आराम..
29:-कफ से पीड़ित हो अगर, 
खाँसी बहुत सताय, 
अजवाइन की भाप लें, 
कफ तब बाहर आय..
30:-अजवाइन लें छाछ संग, 
मात्रा पाँच गिराम, 
कीट पेट के नष्ट हों, 
जल्दी हो आराम..
31:-छाछ हींग सेंधा नमक, 
दूर करे सब रोग, जीरा 
उसमें डालकर, 
पियें सदा यह भोग..।

उप समिति राजनांदगांव वार्षिक आम जलसा 


दिनांक :-08 फ़रवरी 2015 को


स्थान  :-   महाराणा प्रताप मंगल भवन राजनांदगांव 


समय :- प्रात:  10 बजे


केन्द्रिय निर्णायक समिति की बैठक राजनांदगांव मे 


दिनांक :- 18 जनवरी 2015


स्थान  :-   महाराणा प्रताप मंगल भवन राजनांदगांव


समय  :- दोपहर 12 बजे 


राजनांदगांव जोन क्रमांक 05 का बैठक 


उपसमिति डोंगरगढ मे 


दिनांक :- 11 जनवरी 2015 


स्थान :- उप समिति भवन डोंगरगढ


उप समिति राजनांदगांव
सामान्य सभा बैठक
दिनांक :- 04 जनवरी 2015
स्थान  :- महाराणा प्रताप मंगल भवन चिखली राजनांदगांव
समय :- दोपहर 1 बजे  से
दिन   :- रविवार
अध्यक्षता :- श्री नरेन्द्र सिंह बघेल अध्यक्ष उप समिति राजनांदगांव
विषय
1. महासभा से प्राप्त पत्र का वाचन / केन्द्रीय कार्यकरिणी समिति द्वारा पारित निर्ण्य की जानकारी
2. सक्रिय सद्स्यो की अनुमोदित सूची 2013 - 14
3. सदस्यो से प्राप्त सहयोग राशि  की जानकारी
4. शौर्य पत्रिका मे विग्यापन प्रकाशन की जानकारी
5. शौर्य त्रैमासिक मार्च - अक्टूबर मे प्रकाशित पृ क्र 59 मे उल्लेखित उपसमिति के पदाधिकारी का दुरभाष क्र एवं नामो खि जानकारी व आपत्ति
6. ठा अर्जुन सिंह राजपूत बनहरदी का आवेदन सामाजिक सदस्यता जारी रखने बाबत
7. पूना बाई ठाकुर कौरिनभाठा का आवेदन
8. उपसमिति का आगामी आम जलसा दिन तिथि निर्धारण
9. अध्यक्ष के अनुमति से अन्य विषय
 वर्ष 2014 - 15 का सदस्यता रसीद बुक मय सदस्यता शुल्क उपसमिति मे 31 दिसम्बर 2014 तक जमा करे.

2611/2014
A Historical Day in the History of RRBs, today The Supreme Court made a verdict in favour of all the RRBitians, in their long battle for right of Pension.
26 11 2014 :- Supreme Court in the Pension Case directed GOI to sit with Respondent & Intervenor Unions with figures to decide Payment of Pension. GOI also directed to make amicable settlement and submit report to Apex Court . AIRRBOF Zindabad
Que.1- is it favorable verdict. How to go forward with this judgment and settle the Pension issue amicably .
How Long would it take to find a solution with GOI .
Whether the Government woud agree with our views and suggestion.
Ans. :- it is favourable decision as Govt. Can take different stand  for different RRBs Hon'ble court has given three months time.
Que. If the Govt. does not agree to pension parity what would be our stand .
Ans.:-Than matter will be decide by court on the basis arguments of parities.

केन्द्रिय कार्यकरिणी समिति की बैठक
दिनांक  16 नवम्बर 2014 छात्रावास भवन कोटा रायपुर मे संपन्न
1. जोन क्रमांक 5 राजनांदगांव के उपसमिति डोंगरगढ मे 51वां महाधिवेशन 14 एवं 15 फ़रवरी 2015  संपन्न होगा
2 . उपसमितियो  के 2013 के सक्रिय सदस्यो की सूची अनुमोदित
3 .संविधान संशोधन कार्यकरिणी समिति के द्वारा संशोधित संविधान  पारित कर दिया गया है , संशोधित संविधान आगामी सामान्य सभा की बैठक
मे अनुमोदन हेतु रखा जावेगा

केन्द्रिय कार्यकरिणी समिति की बैठक
दिनांक :- 16 नवम्बर 2014
स्थान :- छात्रावास भवन कोटा रायपुर
समय :- दोपहर 12 बजे से
अध्यक्षता :- श्री भूपेन्द्र सिंह अध्यक्ष  महासभा
विषय
01 . राजनांदगांव जोन   मे प्रस्तावित 51 वां महाधिवेशन के सम्बम्ध मे जोन द्वारा ली गई निर्णय अनुमोदनार्थ
02 . सक्रिय सदस्य 2013 की सूची अनुमोदनार्थ
03 . संविधान संशोधन ( प्रतिस्थापन ) :- ठा, यशवंत सिंह उप महाधिवक्ता बिलासपुर द्वारा प्रस्तावित संविधान मसौदा की धारा 12 से चर्चा प्रारंभ कर निर्णय लेने बाबत 

30 सितम्बर 2014
केन्द्रीय कार्यकरिणी बैठक
दिनांक 12 अक्टूबर 2014
स्थान  महराणा प्रताप  भवन कोटा रायपुर
समय दोपहर 12 बजे से
विषय :- संविधान संशोधन विचार एवं निर्णय बिन्दु क्रमांक 11 से आगे

24 अगस्त 2014
ग्राम दैहान मे जोन क्रमांक 05 का बैठक संपन्न
आगामी 51 वां अधिवेशन उप समिति डोंगरगढ मे
उप समिति राजनांदगांव के ग्राम दैहान मे जोन क्रमांक 05 का बैठक रखा गया बैठक की अध्यक्षता श्री भूपेन्द्र सिंह चौहान की मुख्य आतिथ्य मे संपन्न हुआ । सर्व प्रथम महाराणा प्रताप के तैल चित्र मे माल्यर्पण के पश्चात उप्समिति राजनांदगांव के पदाधिकरियो को  श्री रमेश सिंह वरिष्ठ उपाध्यक्ष महासभा के द्वारा शपथ  ग्रहण कराया  गया .
महाधिवेशन  2015 के संबंध मे चर्चा किया गया जोन क्र 05 राजनांदगांव के उपसमिति डोंगरगढ  के द्वारा 51 वां अधिवेशन डोंगरगढ मे रखने का प्रस्ताव रखा गया जिसे शेष सभी पांचो उपसमितियो एवं केन्द्रिय पदाधिकरियो के द्वारा सहर्ष सहमिति दी गई
उप समिति राजनांदगांव के द्वारा अधिवेशन के लिए उपसमिति डोंगरगढ को रु एक लाख सहयोग राशि देने की घोषणा की गई इसी
प्रकार उपसमिति खैरागढ के द्वारा इनकवन हजार , उप समिति गंडई  इकतीस हजार , उपसमिति डोंगरगांव से पचीस हजार की सहयोग राशि दी जावेगी
श्री होरी सिंह डौड महासचिव के द्वारा जानकरी दी गई की आगामी
7 सितम्बर 2014 को कोटा मे केन्द्रिय कार्यकरिणी की बैठक रखी गई है जिसमे संविधान संशोधन के संबंध मे गहन चर्चा कर उचित निर्णय लिया जावेगा
14 सितम्बर 2014 को केन्द्रिय निर्णायक समिति की बैठक रखी गई  है
श्री भूपेन्द्र सिंह अध्यक्ष महासभा के उदबोधन पश्चात कार्यक्रम का समापन किया गया 

12 अगस्त 2014
जोन क्रमांक 5 राजनांदगांव का बैठक
दिनांक              :-    24 अगस्त 2014
दिन                 :-    रविवार
स्थान               :-   ठा प्यारे लाल सिंह  सामुदायिक भवन दैहान ठेलकाडीह
समय               :-   दोपहर 12 बजे से
मुख्य अतिथि     :- ठा भूपेन्द्र सिंह  अध्यक्ष महासभा
अध्यक्षता          :- श्रीमती मंजू सिंह महिला अध्यक्ष महसभा
विशिष्ठ अतिथि :- श्री होरी सिंह दौड  महासचिव महासभा
                           श्री अश्वनी सिंह  युवा अध्यक्ष महासभा
                                ====@=  विषय सूची  =@====
                                               ** ************
1   केन्द्रिय पदाधिकरियों का स्वागत
2   उपसमिति राजनांदगांव के पदाधिकरियो का शपथ ग्रहण
3   जोन क्रमांक 5 राजनांदगांव मे 51 वां वार्षिक अधिवेशन का आयोजन
     आयोजक उपसमिति , संयोजक , स्थान , तिथि का निर्धारण विषयक
     विचार विमर्ष , चर्चा एवं निर्णय
उपसमिति के अध्यक्ष एवं सचिव अपने अपने उपसमिति के केन्द्रिय कार्यकारिणी सदस्य , केन्द्रिय निर्णायक सदस्य , महिला अध्यक्ष , सचिव को बैठक की जानकारी देवें
समय का विशेष ध्यान रखकर अपनी सहभागिता प्रदान करें




 

03 अगस्त 2014
उप समिति राजनांदगांव मे सामान्य सभा का बैठक संपन्न
बैठक की  अध्यक्षता श्रीमती मंजू सिंह अध्यक्षा महासभा महिला द्वारा किया गया
महासभा के निर्देशनुसार उप समिति राजनांदगांव मे रिक्त पदो की पूर्ति कि प्रक्रिया पूरा किया गया
उपस्थित सदस्यो के द्वारा सर्व सम्मति से निम्नांकित पदाधिकरियो का चयन किया गया
अध्यक्ष :- श्री नरेन्द्र सिंह बघेल
उपाध्यक्ष :- श्री मन्नू सिंह बघेल
सचिव :- श्री लोकेन्द्र सिंह भुवाल
कार्यकारिणि सदस्य  :- श्री मोहन सिंह
जोन क्रमांक 5 राजनांदगांव का बैठक 24 अगस्त 2014 को राजनांदगांव मे  संभावित सभी 6 उपसमितियो के पदाधिकारियो को बैठक मे शामील होने के लिए आमंत्रित किया गया है । बैठक मे 51 वां अधिवेशन के संबंध मे चर्चा कर निर्णय लिया जावेगा ।

28 जुलाई 2014

उप समिति राजनांदगांव सामान्य सभा बैठक

दिनांक    :-                                        03 अगस्त 2014
स्थान     :-                महाराणा  प्रताप मंगल भवन चिखली
समय     :-                                       दोपहर  12 बजे  से
मुख्य अतिथि :- श्रीमती मंजू सिंह   अध्यक्षा महासभा महिला

20 मई 2014

श्री बी.एस.बघेल की माता श्रीमती केशर देवी का दिनांक 20 मई 2014 की अपरान्ह लगभग4.00 बजे दुखद निधन हो गया. वे लगभग 84 वर्ष की थीं.

उनका अंतिम संस्कार श्री बघेल के गृह ग्राम विचारपुर में दिनांक 21 मई 2014 को किया गया.

दुख: की इस गहन बेला में हम सभी श्री बघेल एवं उनके शोक संतप्त परिवार के साथ हैं, तथा प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्मा को शांति और  शोक संतप्त परिवार को इस गहन दुख: और अपूरणीय़ क्षति को सहन करनें की शक्ति मिले

22  फ़रवरी 2014
50 वां स्वर्ण जयंती महाधिवेशन का ध्वजरोहण के साथ  रंगारंग उदघाटन
हजारो की तदाद मे महिलाओ युवक युवती एवं बच्चो की उपस्थिति
कार्यक्रम
22 फ़रवरी 2014 शनिवार
* पंजीयन एवं कूपन वितरण  :-  प्रात: 8 बजे से
* ध्वजारोहण उदघाटन        :-  दोप 12 बजे
* महाराणा प्रताप ज्योती रथयात्रा स्वागत :- दोप 1 बजे
* शोभा यात्रा :- अपरान्ह 2 बजे से
* सामाजिक  पत्रिका शौर्य एवं दुरभाष पत्रिका का विमोचन
* केन्द्रिय पदाधिकारियो का स्वागत एवं स्वागत गान
* संयोजक का स्वागत भाषण
* महासभा अध्यक्ष का उदबोधन
* सचिव प्रतिवेदन
* केन्द्रिय कार्यकारिणी  समिति एवं उप समितियो के सचिवो का
संयुक्त बैठक रात्रि 9 बजे
* सांस्कृतिक कार्यक्रम
23 फ़रवरी 2014 रविवार
* रंगोली,मेंहन्दी सजाओ प्रतियोगिता :- प्रात: 9 बजे
* खूला अधिवेशन-महासचिव एवं कोषाध्यक्ष का वार्षिक प्रतिवेदन एवं चर्चा
* श्री राजू क्षत्री एवं श्री अवधेश सिंह चंदेल विधायक का स्वागत एवं सम्मान
* अतिथियो का उदबोधन / स्मृति चिन्ह भेंट
* प्रतिभावान छात्र - छात्राओ का सम्मान
* रंगोली,मेंहन्दी प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण
* विविध क्षेत्रों मे उत्कृष्ठ कार्य करने वाले का सम्मान
* सहसंयोजक द्वारा आभार प्रदर्शन/जोन प्रभारी द्वारा साधुवाद
* ध्वज अवरोहण के साथ अधिवेशन समापन की घोषणा

06.01.2014


उप समिति बिलासपुर


महाराणा प्रताप मंगल भवन के प्रथम तल भूमि पूजन संपन्न प्रात: 10.10 बजे


मुख्य अतिथि श्री अमर अग्रवाल

उप समिति राजनांदगांव का वार्षिक आम जलसा
स्थान  - ग्राम दैहान (सेम्हरा)
दिनांक - 02 फ़रवरी 2014
दिन - रविवार
मुख्य अतिथि- श्री मधुसुदन यादव सांसद राजनांदगांव  
अध्यक्षता - श्री भुपेन्द्र सिंह  अध्यक्ष महसभा

23.12.2013
शौर्य के नवें अंक का विमोचन संपन्न
50 वां स्वर्ण जयंती महाधिवेशन का स्थान एवं तिथि निर्धारित
स्थान :- रहटादाह
दिनांक :- 22 एवं  23 फ़रवरी 2014
संयोजक :- डा. जय सिंह बघेल
सहसंयोजक :- श्री चन्द्रशेखर सिंह बघेल

21 .12. 2013
शौर्य के 9 वें अंक का विमोचन
महासभा के त्रैमासिक पत्रिका शौर्य के 9 वें अंक का विमोचन 22 दिसम्बर 2013 को रखा गया है
दिनांक             :-  22 दिसम्बर 2013 रविवार
स्थान              :-  मां अम्बिका कृषि फ़ार्म बसनी धमधा
समय              :-  दोपहर 1 बजे
मुख्य अतिथि  :-  श्री भूपेन्द्र सिंह संरक्षक एवं अध्यक्ष महासभा
अध्यक्षता        :-  श्री बल्देव सिंह भारती अध्यक्ष साहित्य परिषद
साहित्य परिषद के द्वारा त्रैवार्षिक निर्वाचित पदाधिकारियों की दुरभाष निर्देशिका का प्रकाशन किया जा रहा है
1. निर्वाचित पदाधिकरी की रंगीन फ़ोटो , पदनाम , पता, मोबाईल क्रमांक के प्रकाशन हेतु सहयोग राशि रु.50 /
2. स्वजातिय बन्धुओ से प्रति मोबाईल क्रमांक के प्रकाशन हेतु सहयोग राशि रु 10/ नाम एवं पता भेज सकते है
3. साहित्य परिषद की आजीवन सदस्यता शुल्क रु.1000/
4.विवाह योग्य युवक युवती का लघु विज्ञापन प्रकाशन शुल्क रु.300/
5.नव दाम्पत्य को आशिर्वाद विज्ञापन प्रकाशन शुल्क रु.300/
6.ब्रम्ह्लीन आत्माओ के प्रति संवेदना प्रकाशन शुल्क रु.300/
7.शौर्य पत्रिका मे विज्ञापन प्रकाशन एक पूरा पृष्ठ रु. 3000/ , आधा पृष्ठ रु. 1500/, एक चौथाई पृष्ठ रु.800/,
अंतिम पृष्ठ रु.20000/, अंतिम भीतर पृष्ठ रु.15000/
विज्ञापन एवं वैवाहिक सूची प्रेषण की अंतिम तिथि 31 दिसम्बर 2013

19 दिसम्बर 2013
काकोरी कांड के अमर शहिदों स्व पंडित राम प्रसाद बिस्मिल्ल , स्व अशफ़क उल्लाह खान एवं स्व ठाकुर रोशन सिंह को उनकी 87 वीं शहिदि दिवस पर शत - शत नमन एवं  श्रद्धांजली अर्पित करते है । अमर शहिद स्व पंडित राम प्रसाद बिस्मिल्ल को गोरखपुर , स्व अशफ़क उल्लाह खान को फ़ैजाबाद  एवं स्व ठाकुर रोशन सिंह को इलाहाबाद जिला जेल मे 19 दिसम्बर 1927 को फ़ांसी दी गई थी  

14.12.2013

उप समिति राजनांदगांव सामान्य सभा की बैठक

दिनांक     :-   18.12.2013 बुधवार
समय       :-    दोपहर 1 बजे से
स्थान       :-    महाराणा प्रताप मंगल भवन चिखली
अध्यक्षता  :-    श्री नरेन्द्र सिंह बघेल प्रभारी अध्यक्ष
विषय  :-   1.   वार्षिक सदस्यता पर्ची 2013 एवं जनगणना फ़ार्म जमा करना
               2.   पुर्व कोषाध्यक्ष विजय सिंह द्वारा सदन हिसाब - किताब की जानकारी प्रस्तुत किया जाना
               3.   अन्य विषय अध्यक्ष महोदय की अनुमति से
उप समिति सामान्य सभा के सभी पदाधिकारी गण, क्रियाशील सदस्य, महिला मंडल , युवा मंडल , सभी वरिष्ठ जन एव्ं सामान्य सदस्य गण अधिक से अधिक संख्या मे बैठक मे अनिवार्यत: शामील होने का कष्ट करें .

24 नवम्बर 2013


दिपावली मिलन समारोह संपन्न


स्थान  :-   खौना
समय  :-  1 बजे  दोपहर
श्रीमती  मंजू सिंह महिला मंडल अध्यक्ष महसभा के द्वारा उप समिति रायपुर के ग्राम खौना मे दिपावली मिलन समारोह का आयोजन किया गया था । श्री भूपेन्द्र सिंह अध्यक्ष महासभा की अध्यक्षता मे दिपावली मिलन समारोह संपन्न हुआ । समारोह मे महिलाओ की अच्छी उपस्थिति रही , महासभा के पदाधिकारी एवं लगभग सभी उप समिति से प्रतिनिधि / पदाधिकारी  गण समारोह मे शामील हुए । 

प्रथम महिला भारत मे


प्रथम वीरांगना स्वतंत्रता संग्राम   -  झांसी की रानी लक्ष्मी बाई
प्रथम महिला क्रान्तिकारी  :- मैडम कामा
प्रथम महिला अध्यक्ष  भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस  :- श्रीमति एनी बेसेंट
प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस :- श्रीमति सरोजनी नायडू
प्रथम महिला मुख्यमंत्री  :-  श्रीमती सुचेता कृपलानी
प्रथम महिला प्रधानमंत्री :-  श्रीमती इंदिरा गांधी
प्रथम महिला केन्द्रीय मंत्री  :-  राजकुमारी अमृत कौर
प्रथम महिला अध्यक्ष संयुक्त राष्ट्र संघ साधारण सभा :-  विजयलक्ष्मी पंडित
प्रथम महिला अध्यक्ष संघ लोक सेवा आयोग :-  रोज मिलियन बेथ्यू
प्रथम महिला भारतरत्न   :- इंदिरा गांधी (1970)
प्रथम महिला विधान सभा अध्यक्ष (स्पीकर)  :- शन्नो देवी
प्रथम महिला विधायक         :-  मुत्त्तु लक्ष्मी रेड्डी
प्रथम महिला उपन्यासकार    :-  स्वर्ण कुमारी देवी
प्रथम रेमन मैग्सेसे पुरस्कार  :- मदर टरेसा
प्रथम महिला कुलपति         :-  हंसा मेहता
प्रथम भारतीय महिला मिस वर्ल्ड   -: रीता कुमारी
प्रथम महिला मजिस्ट्रेट  :-  श्रीमती ओमना कुजम्मा
प्रथम महिला सेशन जज  :-  न्यायामूर्ति अन्ना चांडी
प्रथम महिला मुख्य न्यायाधीश( उच्च न्यायालय) :- न्यायामूर्ति लीला सेठ
प्रथम महिला न्यायाधीश(सर्वोच्च न्यायालय):- न्यायमूर्ति मीरा साहिब फातिमा बीबी
प्रथम महिला एमबीबीएस की डिग्री   :- विद्यामुखी बोस और विर्जिनिया मित्रा
प्रथम महिला इंजीनियरिंग में डिग्री   :- इला मजुमदार
प्रथम महिला चीफ इंजीनियर  :-  श्रीमति पी के गेसिया
प्रथम महिला पशु पालन निदेशक :-  श्रीमति अन्ना जॉर्ज मल्होत्रा
प्रथम महिला एवरेस्ट विजेता  :- बचेन्द्री  पाल
प्रथम महिला एवरेस्ट पर दो बार चढ़ने वाली  :-  संतोष यादव
प्रथम भारतीय महिला ओलम्पिक   :- मेरी लाला रो
प्रथम महिला एशियाई स्वर्ण पदक  विजेता  :- कमलजीत संधु
प्रथम भारतीय महिला क्रिकेट टीम  कप्तान  :- शांता रंगास्वामी
प्रथम महिला रेलचालक  :- रेखा भोंसले
प्रथम महिला इंडियन एयरलाइसं पायलट  :- कैप्टन दुर्बा बनर्जी
प्रथम महिला आईपीएस :- किरण बेदी
प्रथम महिला आईएएस :- अन्ना जॉर्ज
प्रथम महिला अध्यक्ष भारतीय स्टेट बैंक़ :- अरुन्धंती भट्टाचार्या
प्रथम महिला प्रबंध निदेशक भारतीय जीवन बीमा निगम :- उषा सांगवन
 हृदयाघात की रामबाण औषधि  लौकी

प्रिय मित्रो

हमारे देश में  ह्रदय रोगी को दी जानी वाली अधिकांश  औषधि जो बहुत महंगी है अमेरिका मे 20 -20 साल से प्रतिबंधित है , अमेरिका की बड़ी बड़ी कंपनिया  उन दवाइयों को भारत मे बेच रही है

 भगवान न करे कि आपको कभी जिंदगी मे heart attack आए ! लेकिन अगर आ गया तो आप  डाक्टर के पास 
जायेंगे और डाक्टर आपको  Angioplasty  कराने का सलाह देंगे

 एक Spring डालते हैं ! उसको Stent कहते हैं ! और ये Stent अमेरिका से आता है और इसका Cost of Production  सिर्फ 3 डालर
मात्र 180 रुपये  का है ! और यहाँ भारत में आकर  180 रुपये  का stent spring  3 से 5 लाख रुपए मे  बेचा जाता है एक बार Attack मे एक Stent डालेंगे ! दूसरी बार Attack मे दूसरा डालेंगे ! डाक्टर का अच्छा खासा   Commission है इसलिए वे बार बार कहते  हैं Angioplasty करवाइये  आजकल बड़ा बड़ा विज्ञापन भी देखने को मिलता है

आयुर्वेद में बहुत सरल एवं सस्ता इलाज उपलब्ध है

 पहले आप एक बात जान लीजिये ! Angioplasty आपरेशन कभी किसी का सफल नहीं होता  डाक्टर जो Spring दिल  की नली मे डालता है वह  Spring बिलकुल pen के spring की तरह होता है ! और कुछ दिन बाद उस Spring की  दोनों भाग में (side) आगे और पीछे फिर Blockage जमा होनी शुरू हो जाती है  और फिर दूसरा Attack आता है ! और डाक्टर आपको फिर  आपको Angioplasty की सलाह देता है  और इस तरह आपके लाखो रूपये खर्च होते - होते  आपकी जिंदगी समाप्त हो जाती है 

आयुर्वेदिक इलाज


हमारे देश भारत मे 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे उनका नाम था महाऋषि वागवट जी !!

उन्होने एक पुस्तक लिखी थी जिसका नाम है अष्टांग हृदयम!! और इस पुस्तक मे उन्होने ने बीमारियो को ठीक करने  के लिए 7000 सूत्र लिखे थे  ये उनमे से ही एक सूत्र यहाँ बता रहे है 

वागवट जी लिखते है कि कभी भी  हृदयाघात हो रहा है !अर्थात दिल की नलियो मे Blockage होना शुरू हो रहा है इसका तात्पर्य है रक्त में  (Blood) मे Acidity (अम्लता ) बढ़ी हुई है !

अमलता दो तरह की होती है !

एक होती है पेट कि अम्लता ! और एक होती है रक्त (Blood) की अमलता !!

आपके पेट मे अम्लता जब बढ़ती है  तो  पेट मे जलन  होती है , खट्टी खट्टी डकार आती  है ,मुंह से पानी निकलता है ! और अगर ये अम्लता (Acidity) और बढ़ जाये तोHyperacidity होगी ! और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त मे आती है तो रक्त अम्लता (Blood acidity)   कहलाती है

जब Blood मे Acidity बढ़ती है तो ये अमलीय  रक्त  Blood) दिल की धमनियों  मे से निकल नहीं पाता ,और धमनियों  मे Blockage कर देता है और आपकोHeart Attack होता है ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको नहीं  बतायेंगे  क्यूंकि इसका इलाज सबसे सरल एवं सस्ता   है !

वागवट  जी लिखते है कि जब रक्त (Blood) मे अमलता (Acidty) बढ़ गई है  तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करे जो क्षारिय हो 

अमलीय और क्षारिय  (Acid and Alkaline )

अम्ल और क्षार Acid and Alkaline ) को आपस में मिला देने से Neutral होता है वागबट जी लिखते है ! कि रक्त कि अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारिय(Alkaline) चीजे खाओ ! तो रकत की अम्लता (Acidity) Neutral हो जाएगी और रक्त मे अम्लता Neutral हो गई तो Heart Attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं !
अब आप पूछेंगे  ऐसी  कौन सी चीजे है जो क्षारिय है जिसे  हम खाये ?
आपके रसोई घर मे सुबह से शाम तक ऐसी बहुत सी चीजे है जो क्षारिय है ! जिनहे आप खाये तो कभी heart attack न आए ! और अगर आ गया है ! तो दुबारा नही  आएगा

सबसे ज्यादा आपके घर मे सबसे ज्यादा क्षारिय चीज है वह है लौकी! जिसे दुधी  भी कहते है ! English मे  Bottle Gourd कहते है जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है ! इससे ज्यादा कोई क्षारिय चीज ही नहीं है, 
आप रोज
लौकी का रस निकाल-निकाल कर पिये ,  या कच्ची लौकी खाये

लौकी का  कितना रस पिये
रोज 200 से 300 मिलीग्राम रस पिये होता

कब पिये ?
सुबह खाली पेट (Toilet ) से  आने  के बाद पी सकते है या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते है
 

इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारिय बना सकते है  इसमे तुलसी के 7 से 10  पत्ती   डाल ले तुलसी बहुत क्षारिय है , इसके साथ आप पुदीने  के  7 से 10  पत्ती  मिला सकते है पुदीना भी  बहुत क्षारिय है .जिससे रस स्वादिष्ट भी हो जाएगा  इसके साथ आप थोडा सा काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले  ये भी बहुत क्षारिय  है लेकिन याद  रखे नमक काला या सेंधा ही डाले , दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले !  आयोडीन युक्त नमक अम्लीय होता  है.
मित्रो आप लौकी के जूस का सेवन जरूर करे लौकी रस  सेवन के 21  वे दिन से ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना  शुरू हो जाएगा एवं केवल  2 से 3 महीने में  आपकी सारी Heart  की Blockage ठीक कर देगा  कोई आपरेशन की  जरूरत नहीं पड़ेगी . घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा .
आपका अनमोल शरीर और लाखो रुपए आपरेशन के बच जाएँगे !


पैसे बच जाये तो किसी गरीब का   इलाज कराये ,अस्पताल , गौशाला मे दान कर दे !
३१.०८.२०१३

महिला मंडल उपसमिति राजनांदगाँव द्वारा जन्माष्टमी उत्सव का आयोजन

दिनांक             :-    ३१ अगस्त २०१३
समय                :-    २ बजे अपरान्ह
स्थान                :-   महाराणा प्रताप मंगल भवन चिखली
मुख्य अतिथि   :-   श्रीमती मंजू सिंह अध्यक्ष महासभा महिला मंडल
अध्यक्षता         :-   श्रीमती शशी बघेल अध्यक्ष महिला मंडल राजनांदगाँव
महिला मंडल के द्वारा निम्नांकित रोचक एवं उत्साहवर्धक कार्यक्रम रखा गया
१ . कृष्ण भजन
२ . कृष्ण राधा श्रृंगार
३ . दही लूट , मटकी फोड़
उक्त कार्यक्रम में भारी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति रही .श्रीमती सुनीता बघेल के द्वारा महिला मंडल राजनांदगाँव के वर्त्तमान क्रिया कलापों एवं गतिविधियों की जानकारी दी गई . कार्यक्रम के  सफल आयोजन में श्रीमती वीना सिंह सचिव, सभी सदस्य तथा रामायण मंडली के  सदस्यो का विशेस सहयोग रहा. कार्यक्रम के अंत में श्रीमती छाया ठाकुर के द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया. सभा का संचालन श्रीमती अपर्णा क्षत्री पूर्व अध्यक्ष के द्वारा किया गया .

28 अगस्त  2013

                                               श्री कृष्ण जन्माष्टमी 



हाथी घोडा पालकी
जय कन्हैया लाल की
श्री कृष्ण भगवान की जय 


 28 अगस्त  2013   बुधवार – अर्धरात्रिकालीन अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र , वृषभ राशि  योग महापुण्य प्रदायक जयंती
श्रीमद्भागवत , भविष्यपुराण, अग्नि पुराण के अनुसार  भगवान् श्रीकृष्ण  का जन्म दिन बुधवार, भादों माह  कृष्ण पक्ष , अष्टमी , रोहिणी नक्षत्र एवं वृष के चन्द्रमा कालीन अर्धरात्रि के समय हुआ था .
व्यास ऋषि  , मुनि नारद आदि ऋषियों के मतानुसार सप्तमी युक्त अष्टमी ही व्रत , पूजन आदि हेतु मान्य है .
वैष्णव संप्रदाय के  लोग उदयकालिक नवमी युक्त  श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को मान्य  करते हैं.
पूजन विधि
इस दिन केले के खंभे , आम अथवा अशोक के पत्ते के वन्दनवार से घरका द्वार सजाया जाता है । दरवाजे पर मंगल कलश एवं मूसल स्थापित करे । रात्रि में भगवान् श्रीकृष्ण की मूर्ति अथवा शालग्रामजी को विधिपूर्वक पंचामृत से स्नान कराकर षोडशोपचार से विष्णु पूजन करना चाहिऐ ।
‘ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ‘ – इस मन्त्र से पूजन कर तथा वस्त्रालंकर आदि से सुसज्जित करके भगवान् को सुन्दर सजे हुए हिंडोले में प्रतिष्ठित करे । धूप, दीप और अन्नरहित नैवेध तथा प्रसूति के समय सेवन होने वाले सुस्वाद मिष्ठान , जायकेदार नमकीन पदार्थो एवं उस समय उत्तपन्न होने वाले विभिन्न प्रकार के फल, पुष्पों और नारियल , छुहारे , अनार बिजौरे, पंजीरी, नारियल के मिष्ठान तथा नाना प्रकार के मेवे का प्रसाद सजाकर श्रीभगवान् को अर्पण करे ।
दिन में भगवान् की मूर्ति के सामने बैठकर कीर्तन करे तथा भगवान् का गुणगान करे और रात्रिको बारह बजे गर्भ से जन्म लेने के प्रतीक स्वरुप खीरा फोड़कर भगवान् का जन्म कराये एवं जन्मोत्सव मनाये । जन्मोत्सव के पश्चात कर्पूरादी प्रज्वलित कर समवेत स्वर से भगवान् की आरती स्तुति करे, पश्चात प्रसाद वितरण करे।
आरती कुंजबिहारी की
आरती कुंजबिहारी की ,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
गले में बैजन्तीमाला , बजावैं मुरलि मधुर बाला॥
श्रवण में कुंडल झलकाता, नंद के आनंद नन्दलाला की ।। आरती…।।
गगन सम अंग कान्ति काली, राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली ,भ्रमर-सी अलक कस्तूरी तिलक।
चंद्र-सी झलक ,ललित छबि श्यामा प्यारी ।। आरती…।।
कनकमय मोर मुकुट बिलसैं , देवता दरसन को तरसैं।
गगन से सुमन राशि बरसैं , बजै मुरचंग मधुर मृदंग।
ग्वालिनी संग-अतुल रति गोपकुमारी की ।। आरती…।।
जहाँ से प्रगट भई गंगा, कलुष कलिहारिणी गंगा।
स्मरण से होत मोहभंगा , बसी शिव शीश जटा के बीच।
हरै अघ-कीच , चरण छवि श्री बनवारी की ।। आरती…।।
चमकती उज्ज्वल तट रेनू,  बज रही बृंदावन बेनू।
चहुँ दिशि गोपी ग्वालधेनु , हँसत मृदुमन्द चाँदनी चंद।
कटत भवफन्द , टेर सुनु दीन भिखारी की ।। आरती…।।
आरती कुंजबिहारी की ,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।

    कस्तुरी तिलकम ललाटपटले
    गोविंद दामोदर माधवेति
    श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेवाय

उप समिति राजनांदगांव
सामान्य सभा का बैठक
दिनांक :- 25 अगस्त 2013
समय  :- 2 बजे
स्थान  :- महाराणा प्रताप मंगल भवन चिखली
अध्यक्षता :- नरेन्द्र सिंह बघेल उपाध्यक्ष उपसमिति राजनांदगांव
विषय सूची
1. वार्षिक सदस्यता बुक एवं जनगणना फ़ार्म वितरण
2. उपसमिति मे रिक्त पदो ( अध्यक्ष , सचिव, कार्यकारिणी सदस्य ) पर चर्चा एवं निर्णय
3. अन्य विषय अध्यक्ष की अनुमति से
१५ अगस्त २०१३

बिलासपुर के सांसद श्री दिलीप सिंह जूदेव का निधन

स्व. जूदेव विगत कुछ समय से किडनी की बिमारी से ग्रस्त थे तथा गुडगांव के मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा था , जहां कल १४ अगस्त को दुखद निधन हो गया . महासभा  स्व. श्री जूदेव के  निधन पर गहन शोक ब्यक्त करता है तथा दिवंगत आत्मा की  शांति की कामना करता है .
स्व . जूदेव के निधन से श्री जूदेव के परिवार एवं  राजपूत समाज को अपूर्णीय क्षति हुई है

13 अगस्त 13

श्रावण शुक्ल सप्तमी
राम चरित मानस के रचनाकार गोस्वामी तुलसी दास जी की
 515 वी जयंती पर शुभकामनाएं
गोस्वामी तुलसी दास की जयंति के अवसर पर श्री रामायण प्रचारक समिति राजनांदगाव के द्वारा स्कूली बच्चो के मध्य ज्ञान एवं भक्ति विषय पर कार्यशाला आयोजित किया गया था जिसमे राजनांदगांव के सभी स्कूलो से लगभग १०० छात्र एवं छात्राओं ने भाग लिया था . रायल किड्स कान्वेंट राजनांदगांव की छात्रा कु निदिशा श्रीवास्तव को प्रथम पुरस्कार तथा श्री यथार्थ सिंह बघेल को विशेस पुरस्कार से सम्मानित किया गया .सम्प्रति दोनों छात्र कक्षा ग्यारहवी अ रायल किड्स कान्वेंट राजनांदगांव में अध्ययनरत है 
21 जून 2013
केन्द्रिय कार्यकारिणी समिति की बैठक
दिनांक :-        07.07.2013
स्थान  :-        महाराणा प्रताप भवन धमधा
समय :-         दोपहर 1 बजे से 
अध्यक्षता     श्री  भूपेन्द्र सिंह  अध्यक्ष महासभा
विषय सूची
1. 50 वां वार्षिक अधिवेशन  " स्वर्ण जयंती "  महाधिवेशन दुर्ग जोन मे होना है । चर्चा एवं निर्णय
2. सदस्यता अभियान 2013 का कार्यक्रम निर्धारण
3 . सामाजिक  जनगणना कराये जाने बाबत  चर्चा एवं निर्णय
4 . सद्स्यता  रसीद बुक , विविध रसीद बुक ,एवं अन्य विविध रजिस्टर मुद्रण करने खि स्वीकृति
5. उप्समितियो के रिक्त पदो की पुर्ति हेतु चर्चा एवं निर्णय
6. उपसमितियो के आय ब्यय का अंकेक्षण ( आडिट ) एवं प्रभार हस्तांतरण की अद्यतन जानकारी  
   चर्चा एवं निर्णय

जोन प्रभारी मनोनयन - कार्य विभाजन
क्रमांक    जोन                       जोन प्रभारी
01        बिलासपूर           ठा अशोक ठाकुर  (सहसचिव ) , ठा ज्वाला सिंह राजपूत ( युवा सचिव )
02         रायपुर              डा आनंद गोतम ( संगठन सचिव ) , श्रीमती सुलोचना सिकरवार ( महिला सचिव )
03         बेमेतेरा              बजरंग सिंह ( कोषध्यक्ष )   ,  ठा अश्वनी सिंह ( प्रचार सचिव )
04         दुर्ग                   ठा उधम सिंह  ( उपाध्यक्ष ) , ठा महेश सिंह ( उप सचिव )
05        राजनांदगांव       ठा अश्वनी राजपूत (युवा अध्यक्ष ) ,  डा  श्रीमती मंजू सिंह ( महिला अध्यक्ष )
29  मई 2012
28 मई 2012   को  महासचिव श्री होरी सिंह  डौड़ एवं भोला सिंह  के पिताश्री तथा हमारे महासभा के वरिष्ठ सदस्य
श्री तुलसी सिंह डौड़ का दुखद निधन हो गया . स्व तुलसी सिंह डौड़ विगत कुछ समय से लगातार अस्वस्थ चल रहे थे उनके निधन पर महासभा हार्दिक संवेदना एवं शोक ब्यक्त करता है तथा डौड़ परिवार को हुई अपूर्णीय क्षति तथा दुःख को सहने की शक्ति मिले यही ईश्वर से कामना करता   है


12 मई 2013

मातृ दिवस की बधाई एवम् शुभकामनाए 

उप समिति राजनांदगाव के सम्मानित सदस्य श्री मुरली सिंह भारद्वाज की पुत्री कु. तृप्ति भारद्वाज ने महिला वर्ग मे पुलिस उप निरीक्षक परीक्षा मे पूरे छत्तीसगढ मे प्रथम स्थान प्राप्त किया है तथा श्री मुरली सिंह भारद्वाज के ही सुपुत्र श्री अंबर सिंह भारद्वाज ( कराते के चेम्पियन) पुलिस उप निरीक्षक मे चयनित हुए है जो हमारे समाज के लिए गौरव की बात है समाज के दोनो प्रतिभावान बच्चो एवम् माता पिता को बधाई शुभकामनाए  
08अप्रेल 2013

महासभा का प्रथम बैठक संपन्न


           महासभा का प्रथम बैठक सौहर्द्रपूर्ण वातावरण   मे  07अप्रेल 2013 को अध्यक्ष श्री भूपेन्द्र सिंह चौहान की
अध्यक्षता मे नवागढ मे सम्पन्न  हुआ । सर्व प्रथम महाराणा प्रताप  के तैलचित्र की पूजा एवं माल्यार्पण किया गया
तत्पश्चात नवनिर्वाचित पदाधिकारियो का पुष्पहार से स्वागत किया गया .एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया ।
 सभा भवन  सदस्यो से पूरा भरा हुआ था सदस्यो एवं पदाधिकारियो एवं बुजुर्ग सदस्यो की अच्छी उपस्थिति रही ,
बैठक मे श्री ऋषी सिंह बघेल , श्री जय सिंह बघेल पूर्व अध्यक्ष  एवं श्री मोहन सिंह पूर्व महासचिव भी आये हुए थे एवं जितेन्द्र सिंह भुवाल अध्यक्ष नवागढ के द्वारा महासभा अध्यक्ष श्री भूपेन्द्र सिंह चौहान को अभिनन्दन पत्र समर्पित किया गया

अध्यक्ष द्वारा निम्नानुसार प्रस्ताव  बैठक मे प्रस्तुत कर विचार आमंत्रित किया गया

1. राजधानी रायपुर मे आधुनिक एवं सर्व सुविधा युक्त कार्यालय की स्थापना

2 . राजपूत क्षत्रिय हेल्पलाईन की स्थापना

3 . राजपूत क्षत्रिय वैवाहिकी की स्थापना

4 . सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 को महासभा मे लागू करना

5 . महासभा की पत्रिका के विषय वस्तु का निर्धारण

6 . राजपूत क्षत्रिय महसभा महिला मंच एवं युवा मंच का गठ

7 . महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर जोन स्तर पर भव्य कार्यक्रम

8 . युवक युवती परिचय  सम्मेल


  उक्त सभी प्रस्ताव पर सदस्यो एवं पदाधिकारियो के द्वारा विचार  रखा गया तथा उक्त सभी बिन्दु पर सहमति ब्यक्त किया गया श्री ऋषी सिंह बघेल , श्री जय सिंह बघेल पूर्व अध्यक्ष के द्वारा सभा को सम्बोधित किया गया तथा सभी पदाधिकारियो से आपस मे मिलजुलकर कार्य करने एवम महासभा को प्रगति की राह मे निरंतर अग्रसर करने का आव्हन किया गया । महासभा के पूर्व पदाधिकारियो की अधिवेशन स्थल मे निर्वाचन प्रक्रिया के पूर्ण होने से पहले सभा स्थल को छोड कर चले जाने  एवं शपथ ग्रहण समारोह मे  शामील नही होने को गंभीरता से लिया गया तथा पूर्व पदाधिकारियो के उक्त कृत्य पर गहरा असंतोष तथा क्षोभ ब्यक्त किया गया तथा  भविष्य मे एसी घटनाओ की पुनरवृति नही हो एसी आशा ब्यक्त कि गई

 अध्यक्ष श्री भूपेन्द्र सिंह के द्वारा सारगर्भित संबोधन मे विश्वास दिलाया गया की भविष्य मे केन्द्रिय पदाधिकारियो के द्वारा महासभा की प्रतिष्ठा मे किसी भी प्रकार का कोई आंच नही आने दिया जावेगा तथा सभी केन्द्रिय पदाधिकारी महासभा की गरिमा का पूरा ध्यान रखेंगे तथा सदस्यो  / पदाधिकारियो की भावनाओ को कोई ठेस नही पहुंचायेगे, सदस्यो की विचार  धारा को पूरी गंभिरता से सुन एवं समझकर  शालिनता पूर्वक प्रतिउत्तर दिया जावेगा .अध्यक्ष श्री भूपेन्द्र सिंह ने आश्वस्त किया  की भविष्य मे केन्द्रिय  कार्यकारिणी तथा केन्द्रिय निर्णायक समिति की  बैठक पृथक पृथक आयोजित किया जावेगा तथा सविधान  की ब्यवस्था के अनुसार केन्द्रिय  कार्यकारिणी के बैठक  की अध्यक्षता महासभा  के अध्यक्ष तथा केन्द्रिय निर्णायक समिति के   बैठक की अध्यक्षता महासभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के द्वारा किया जावेगा  ।

महासभा के बैठक मे चाहे केन्द्रिय  कार्यकारिणी की  बैठक हो अथवा केन्द्रिय निर्णायक समिति की बैठक हो अधिकतम  5 मद / बिन्दु/ विषय ( Agenda ) ही रखा जावेगा । बैठक निर्धा रित समय मे प्रारंभकर अधिकतम 5 बजे तक समाप्त कर दिया जावेगा । अन्त मे अध्यक्ष श्री भूपेन्द्र सिंह के द्वारा सदस्यो से आग्रह किया कि वे भी महासभा की बैठक मे शालिनता का परिचय दे तथा किसी भी ब्यक्ति , स्दस्य, अथवा पदाधिकारी पर ब्यक्तिगत आक्षेप नही लगाये  अध्यक्ष के उक्त सभी आठ प्रस्ताव पर विस्तृत जानकारी आगामी अंक मे दी  जावेगी
07 अप्रेल   विश्व स्वास्थ्य दिवस पर महासभा आपके अच्छे स्वास्थ्य
 एवं
दिर्घायु होने  की कामना करता  है

20.03.2013


महासभा का बैठक 


महासभा के संस्थापक सदस्यों , केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति , केन्द्रीय निर्णायक समिति  , एवं उपसमितियों के अध्यक्ष गण , सचिव , एवं वरिष्ठजनो की बैठक श्री भूपेन्द्र सिंह अध्यक्ष महासभा की अध्यक्षता में रखी गई है .


आप सभी की उपस्थिति स्वागतेय है .


स्थान      :-   गणेश मंदिर नवागढ़  


दिनांक     :-   07 अप्रेल 2013 


समय       :-  12 बजे दोपहर से 


विषय सूची 


1. समाज के संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा एवं निर्णय 


2. वित्त वर्ष 2013 - 14 के लिए कार्यक्रम की रुपरेखा का निर्धारण 


विशेष 


* समय का विशेष ध्यान रखे


* उपसमिति बेमेतेरा में सामूहिक विवाह का आयोजन 26 मई 2013 सुनिश्चित है सहभागी बने 

10.03.2013


महाशिवरात्रि  व्रत पूजन के शुभ मुहूर्त


1 . सुबह 8:10 से 9:40 बजे तक (चर) ,                         2 सुबह 9:40 से 11:08 बजे तक (लाभ)
3 .सुबह 11:08 से दोपहर 12:30 बजे तक (अमृत)        4 .दोपहर 2:06 से 3:35 बजे तक (शुभ)
5 .शाम 6:32 से रात 8:00 बजे तक(शुभ)                      6 .रात 8:00 से 9:30 बजे तक (अमृत)
7  . रात 9:30 से 11:00 बजे तक (चर)


 सुबह जल्दी उठकर स्नान-संध्या करके मस्तक पर भस्म का त्रिपुंड तिलक और गले में रुद्राक्ष की माला धारण कर शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग का विधिपूर्वक पूजन करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक व्रत का संकल्प इस प्रकार लें-


शिवरात्रिव्रतं ह्येतत् करिष्येहं महाफलम्।
निर्विघ्नमस्तु मे चात्र त्वत्प्रसादाज्जगत्पते।।


यह कहकर हाथ में फूल, चावल व जल लेकर उसे शिवलिंग पर अर्पित करते हुए यह श्लोक बोलें-


देवदेव महादेव नीलकण्ठ नमोस्तु ते।
कर्तुमिच्छाम्यहं देव शिवरात्रिव्रतं तव।।
तव प्रसादाद्देवेश निर्विघ्नेन भवेदिति।
कामाद्या: शत्रवो मां वै पीडां कुर्वन्तु नैव हि।।


रात्रिपूजा


दिनभर शिवमंत्र (ऊँ नम: शिवाय) का जप करे तथा पूरा दिन निराहार रहे। (रोगी, अशक्त और वृद्ध दिन में फलाहार लेकर रात्रि पूजा कर सकते हैं।) धर्मग्रंथों में रात्रि के चारों प्रहरों की पूजा का विधान है। सायंकाल स्नान करके किसी शिवमंदिर में जाकर अथवा घर पर ही (यदि नर्मदेश्वर या अन्य कोई उत्तम शिवलिंग हो) पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके तिलक एवं रुद्राक्ष धारण करके पूजा का संकल्प इस प्रकार लें-
ममाखिलपापक्षयपूर्वकसलाभीष्टसिद्धये शिवप्रीत्यर्थं च शिवपूजनमहं करिष्ये
व्रती को फल, पुष्प, चंदन, बिल्वपत्र, धतूरा, धूप, दीप और नैवेद्य से चारो प्रहर की पूजा करनी चाहिए। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अलग-अलग तथा सबको एक साथ मिलाकर पंचामृत से शिव को स्नान कराकर जल से अभिषेक करें। चारो प्रहर के पूजन में शिवपंचाक्षर (नम: शिवाय) मंत्र का जप करें। भव, शर्व, रुद्र, पशुपति, उग्र, महान्, भीम और ईशान, इन आठ नामों से पुष्प अर्पित कर भगवान की आरती व परिक्रमा करें। अंत में भगवान से प्रार्थना इस प्रकार करें-
नियमो यो महादेव कृतश्चैव त्वदाज्ञया।
विसृत्यते मया स्वामिन् व्रतं जातमनुत्तमम्।।
व्रतेनानेन देवेश यथाशक्तिकृतेन च।
संतुष्टो भव शर्वाद्य कृपां कुरु ममोपरि।।


           विभिन्न ग्रंथो में  भगवान  शिव के 19   अवतारों  का  विवरण मिलता है जो क्रमश : निम्नानुसार है     


   1- पिप्पलाद अवतार


 भगवान शिव के पिप्पलाद अवतार का बड़ा महत्व है। शनि पीड़ा का निवारण पिप्पलाद की कृपा से ही संभव हो सका। कथा है कि पिप्पलाद ने देवताओं से पूछा- क्या कारण है कि मेरे पिता दधीचि जन्म से पूर्व ही मुझे छोड़कर चले गए? देवताओं ने बताया शनिग्रह की दृष्टि के कारण ही ऐसा कुयोग बना। पिप्पलाद यह सुनकर बड़े क्रोधित हुए। उन्होंने शनि को नक्षत्र मंडल से गिरने का श्राप दे दिया। शाप के प्रभाव से शनि उसी समय आकाश से गिरने लगे। देवताओं की प्रार्थना पर पिप्पलाद ने शनि को इस बात पर क्षमा किया कि शनि जन्म से लेकर 16 साल तक की आयु तक किसी को कष्ट नहीं देंगे। तभी से पिप्पलाद का स्मरण करने मात्र से शनि की पीड़ा दूर हो जाती है। शिव महापुराण के अनुसार स्वयं ब्रह्मा ने ही शिव के इस अवतार का नामकरण किया था।
पिप्पलादेति तन्नाम चक्रे ब्रह्मा प्रसन्नधी:।
-शिवपुराण शतरुद्रसंहिता 24/61

अर्थात ब्रह्मा ने प्रसन्न होकर सुवर्चा के पुत्र का नाम पिप्पलाद रखा।


2- नंदी अवतार


भगवान शंकर सभी जीवों का प्रतिनिधित्व करते हैं। भगवान शंकर का नंदीश्वर अवतार भी इसी बात का अनुसरण करते हुए सभी जीवों में प्रेम का संदेश देता है। नंदी (बैल) कर्म का प्रतीक है, जिसका अर्थ है कर्म ही जीवन का मूल मंत्र है। इस अवतार की कथा इस प्रकार है- शिलाद मुनि ब्रह्मचारी थे। वंश समाप्त होता देख उनके पितरों ने शिलाद से संतान उत्पन्न करने को कहा। शिलाद ने अयोनिज और मृत्युहीन संतान की कामना से भगवान शिव की तपस्या की। तब भगवान शंकर ने स्वयं शिलाद के यहां पुत्र रूप में जन्म लेने का वरदान दिया। कुछ समय बाद भूमि जोतते समय शिलाद को भूमि से उत्पन्न एक बालक मिला। शिलाद ने उसका नाम नंदी रखा। भगवान शंकर ने नंदी को अपना गणाध्यक्ष बनाया। इस तरह नंदी नंदीश्वर हो गए। मरुतों की पुत्री सुयशा के साथ नंदी का विवाह हुआ।


3- वीरभद्र अवतार


यह अवतार तब हुआ था, जब दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में माता सती ने अपनी देह का त्याग किया था। जब भगवान शिव को यह ज्ञात हुआ तो उन्होंने क्रोध में अपने सिर से एक जटा उखाड़ी और उसे रोषपूर्वक पर्वत के ऊपर पटक दिया। उस जटा के पूर्वभाग से महाभंयकर वीरभद्र प्रकट हुए। शास्त्रों में भी इसका उल्लेख है-
क्रुद्ध: सुदष्टïोष्ठïपुट: स धूर्जटिर्जटां तडिद्वह्लिïसटोग्ररोचिषम्।
उत्कृत्य रुद्र: सहसोत्थितो हसन् गम्भीरनादो विससर्ज तां भुवि॥   
ततोऽतिकायस्तनुवा स्पृशन्दिवं।                    
श्रीमद् भागवत  -4/5/1


4- भैरव अवतार


शिव महापुराण में भैरव को परमात्मा शंकर का पूर्ण रूप बताया गया है। एक बार भगवान शंकर की माया से प्रभावित होकर ब्रह्मा व विष्णु स्वयं को श्रेष्ठ मानने लगे। तब वहां तेज-पुंज के मध्य एक पुरुषाकृति दिखलाई पड़ी। उन्हें देखकर ब्रह्माजी ने कहा- चंद्रशेखर तुम मेरे पुत्र हो। अत: मेरी शरण में आओ। ब्रह्मा की ऐसी बात सुनकर भगवान शंकर को क्रोध आ गया। उन्होंने उस पुरुषाकृति से कहा- काल की भांति शोभित होने के कारण आप साक्षात कालराज हैं। भीषण होने से भैरव हैं। भगवान शंकर से इन वरों को प्राप्त कर कालभैरव ने अपनी अंगुली के नाखून से ब्रह्मा के पांचवें सिर को काट दिया।
ब्रह्मा का पांचवां सिर काटने के कारण भैरव ब्रह्महत्या के पाप से दोषी हो गए। तब काशी में भैरव को ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिल गई। काशीवासियों के लिए भैरव की भक्ति अनिवार्य बताई गई है।


5- अश्वत्थामा


महाभारत के अनुसार पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा काल, क्रोध, यम व भगवान शंकर के अंशावतार हैं। आचार्य द्रोण ने भगवान शंकर को पुत्र रूप में पाने की लिए घोर तपस्या की थी और भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया था कि वे उनके पुत्र के रूप मे अवतीर्ण होंगे। समय आने पर सवन्तिक रुद्र ने अपने अंश से द्रोण के बलशाली पुत्र अश्वत्थामा के रूप में अवतार लिया। ऐसी मान्यता है कि अश्वत्थामा अमर हैं तथा वह आज भी धरती पर ही निवास करते हैं। इस विषय में एक श्लोक प्रचलित है-          अश्वत्थामा बलिव्र्यासो हनूमांश्च विभीषण:।
              कृप: परशुरामश्च सप्तएतै चिरजीविन:॥
              सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्।
              जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित।।
अर्थात अश्वत्थामा, राजा बलि, व्यासजी, हनुमानजी, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम व ऋषि मार्कण्डेय ये आठों अमर हैं।
शिवमहापुराण(शतरुद्रसंहिता-37) के अनुसार अश्वत्थामा आज भी जीवित हैं और वे गंगा के किनारे निवास करते हैं। वैसे, उनका निवास कहां हैं, यह नहीं बताया गया है।


6- शरभावतार


भगवान शंकर का छठे अवतार हैं शरभावतार। शरभावतार में भगवान शंकर का स्वरूप आधा मृग (हिरण) तथा शेष शरभ पक्षी (आख्यानिकाओं में वर्णित आठ पैरों वाला जंतु जो शेर से भी शक्तिशाली था) का था। इस अवतार में भगवान शंकर ने नृसिंह भगवान की क्रोधाग्नि को शांत किया था। लिंगपुराण में शिव के शरभावतार की कथा है, उसके अनुसार हिरण्यकश्पू का वध करने के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंहावतार लिया था।
हिरण्यकश्यपू के वध के पश्चात भी जब भगवान नृसिंह का क्रोध शांत नहीं हुआ तो देवता शिवजी के पास पहुंचे। तब भगवान शिव शरभ के रूप में भगवान नृसिंह के पास पहुंचे तथा उनकी स्तुति की, लेकिन नृसिंह की क्रोधाग्नि शांत नहीं हुई तो शरभ रूपी भगवान शिव अपनी पूंछ में नृसिंह को लपेटकर ले उड़े। तब भगवान नृसिंह की क्रोधाग्नि शांत हुई। उन्होंने शरभावतार से क्षमा याचना कर अति विनम्र भाव से उनकी स्तुति की।


7- गृहपति अवतार


भगवान शंकर का सातवां अवतार है गृहपति। इसकी कथा इस प्रकार है- नर्मदा के तट पर धर्मपुर नाम का एक नगर था। वहां विश्वानर नाम के एक मुनि तथा उनकी पत्नी शुचिष्मती रहती थीं। शुचिष्मती ने बहुत काल तक नि:संतान रहने पर एक दिन अपने पति से शिव के समान पुत्र प्राप्ति की इच्छा की। पत्नी की अभिलाषा पूरी करने के लिए मुनि विश्वनार काशी आ गए। यहां उन्होंने घोर तप द्वारा भगवान शिव के वीरेश लिंग की आराधना की।
एक दिन मुनि को वीरेश लिंग के मध्य एक बालक दिखाई दिया। मुनि ने बालरूपधारी शिव की पूजा की। उनकी पूजा से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने शुचिष्मति के गर्भ से अवतार लेने का वरदान दिया। कालांतर में शुचिष्मती गर्भवती हुई और भगवान शंकर शुचिष्मती के गर्भ से पुत्ररूप में प्रकट हुए। कहते हैं पितामह ब्रह्म ने ही उस बालक का नाम गृहपति रखा था।


8- ऋषि दुर्वासा


भगवान शंकर के विभिन्न अवतारों में ऋषि दुर्वासा का अवतार भी प्रमुख है। धर्म ग्रंथों के अनुसार सती अनुसूइया के पति महर्षि अत्रि ने ब्रह्मा के निर्देशानुसार पत्नी सहित ऋक्षकुल पर्वत पर पुत्रकामना से घोर तप किया। उनके तप से प्रसन्न होकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों उनके आश्रम पर आए। उन्होंने कहा- हमारे अंश से तुम्हारे तीन पुत्र होंगे, जो त्रिलोक में विख्यात तथा माता-पिता का यश बढ़ाने वाले होंगे। समय आने पर ब्रह्माजी के अंश से चंद्रमा हुए, जो देवताओं द्वारा समुद्र में फेंके जाने पर उससे प्रकट हुए। विष्णु के अंश से श्रेष्ठ संन्यास पद्धति को प्रचलित करने वाले दत्त उत्पन्न हुए और रुद्र के अंश से मुनिवर दुर्वासा ने जन्म लिया। शास्त्रों में इसका उल्लेख है-
अत्रे: पत्न्यनसूया त्रीञ्जज्ञे सुयशस: सुतान्।
दत्तं दुर्वाससं सोममात्मेशब्रह्मïसम्भवान्॥         
-भागवत 4/1/15

अर्थ- अत्रि की पत्नी अनुसूइया से दत्तात्रेय, दुर्वासा और चंद्रमा नाम के तीन परम यशस्वी पुत्र हुए। ये क्रमश: भगवान विष्णु, शंकर और ब्रह्मा के अंश से उत्पन्न हुए थे।


9- हनुमान


भगवान शिव का हनुमान अवतार सभी अवतारों में श्रेष्ठ माना गया है। इस अवतार में भगवान शंकर ने एक वानर का रूप धरा था। शिवमहापुराण के अनुसार देवताओं और दानवों को अमृत बांटते हुए विष्णुजी के मोहिनी रूप को देखकर लीलावश शिवजी ने कामातुर होकर वीर्यपात कर दिया।
सप्तऋषियों ने उस वीर्य को कुछ पत्तों में संग्रहीत कर लिया। समय आने पर सप्तऋषियों ने भगवान शिव के वीर्य को वानरराज केसरी की पत्नी अंजनी के कान के माध्यम से गर्भ में स्थापित कर दिया, जिससे अत्यंत तेजस्वी एवं प्रबल पराक्रमी श्री हनुमानजी उत्पन्न हुए।


10- वृषभ अवतार


भगवान शंकर ने विशेष परिस्थितियों में वृषभ अवतार लिया था। इस अवतार में भगवान शंकर ने विष्णु पुत्रों का संहार किया था। धर्म ग्रंथों के अनुसार जब भगवान विष्णु दैत्यों को मारने पाताल लोक गए तो उन्हें वहां बहुत सी चंद्रमुखी स्त्रियां दिखाई पड़ी। विष्णु जी ने उनके साथ रमण करके बहुत से पुत्र उत्पन्न किए, जिन्होंने पाताल से पृथ्वी तक बड़ा उपद्रव किया। उनसे घबराकर ब्रह्माजी ऋषिमुनियों को लेकर शिवजी के पास गए और रक्षा के लिए प्रार्थना करने लगे। तब भगवान शंकर ने वृषभ रूप धारण कर विष्णु पुत्रों का संहार किया।


11- यतिनाथ अवतार


भगवान शंकर ने यतिनाथ अवतार लेकर अतिथि के महत्व का प्रतिपादन किया है। उन्होंने इस अवतार में अतिथि बनकर भील दम्पत्ति की परीक्षा ली थी।  भील दम्पत्ति को अपने प्राण गंवाने पड़े। धर्म ग्रंथों के अनुसार अर्बुदाचल पर्वत के समीप शिवभक्त आहुक-आहुका भील दम्पत्ति रहते थे। एक बार भगवान शंकर यतिनाथ के वेष में उनके घर आए। उन्होंने भील दम्पत्ति के घर रात व्यतीत करने की इच्छा प्रकट की। आहुका ने अपने पति को गृहस्थ की मर्यादा का स्मरण कराते हुए स्वयं धनुषबाण लेकर बाहर रात बिताने और यति को घर में विश्राम करने देने का प्रस्ताव रखा।
इस तरह आहुक धनुषबाण लेकर बाहर चला गया। प्रात:काल आहुका और यति ने देखा कि वन्य प्राणियों ने आहुक को मार डाला है। इस पर यतिनाथ बहुत दु:खी हुए। तब आहुका ने उन्हें शांत करते हुए कहा कि आप शोक न करें। अतिथि सेवा में प्राण विसर्जन धर्म है और उसका पालन कर हम धन्य हुए हैं। जब आहुका अपने पति की चिताग्नि में जलने लगी तो शिवजी ने उसे दर्शन देकर अगले जन्म में पुन: अपने पति से मिलने का वरदान दिया।


12- कृष्णदर्शन अवतार


भगवान शिव ने इस अवतार में यज्ञ आदि धार्मिक कार्यों के महत्व को बताया है। इस प्रकार यह अवतार पूर्णत: धर्म का प्रतीक है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इक्ष्वाकुवंशीय श्राद्धदेव की नवमी पीढ़ी में राजा नभग का जन्म हुआ। विद्या-अध्ययन को गुरुकुल गए। जब बहुत दिनों तक न लौटे तो उनके भाइयों ने राज्य का विभाजन आपस में कर लिया। नभग को जब यह बात ज्ञात हुई तो वह अपने पिता के पास गया। पिता ने नभग से कहा कि वह यज्ञ परायण ब्राह्मणों के मोह को दूर करते हुए उनके यज्ञ को सम्पन्न करके उनके धन को प्राप्त करे।
तब नभग ने यज्ञभूमि में पहुंचकर वैश्य देव सूक्त के स्पष्ट उच्चारण द्वारा यज्ञ संपन्न कराया। अंगारिक ब्राह्मण यज्ञ अवशिष्ट धन नभग को देकर स्वर्ग को चले गए। उसी समय शिवजी कृष्णदर्शन रूप में प्रकट होकर बोले कि यज्ञ के अवशिष्ट धन पर तो उनका अधिकार है। विवाद होने पर कृष्णदर्शन रूपधारी शिवजी ने उसे अपने पिता से ही निर्णय कराने को कहा। नभग के पूछने पर श्राद्धदेव ने कहा-वह पुरुष शंकर भगवान हैं। यज्ञ में अवशिष्ट वस्तु उन्हीं की है। पिता की बातों को मानकर नभग ने शिवजी की स्तुति की।


13- अवधूत अवतार


भगवान शंकर ने अवधूत अवतार लेकर इंद्र के अंहकार को चूर किया था। धर्म ग्रंथों के अनुसार एक समय बृहस्पति और अन्य देवताओं को साथ लेकर इंद्र शंकर जी के दर्शन  के लिए कैलाश पर्वत पर गए। इंद्र की परीक्षा लेने के लिए शंकरजी ने अवधूत रूप धारण कर उसका मार्ग रोक लिया। इंद्र ने उस पुरुष से अवज्ञापूर्वक बार-बार उसका परिचय पूछा तो भी वह मौन रहा।
इस पर क्रुद्ध होकर इंद्र ने ज्यों ही अवधूत पर प्रहार करने के लिए वज्र छोडऩा चाहा त्यों ही उसका हाथ स्तंभित हो गया। यह देखकर बृहस्पति ने शिवजी को पहचान कर अवधूत की बहुविधि स्तुति की। इससे प्रसन्न होकर शिवजी ने इंद्र को क्षमा कर दिया।


14- भिक्षुवर्य अवतार


भगवान शंकर देवों के देव हैं। संसार में जन्म लेने वाले हर प्राणी के जीवन के रक्षक भी ही हैं। भगवान शंकर का भिक्षुवर्य अवतार यही संदेश देता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार विदर्भ नरेश सत्यरथ को शत्रुओं ने मार डाला। उसकी गर्भवती पत्नी ने शत्रुओं से छिपकर अपने प्राण बचाए। समय पर उसने एक पुत्र को जन्म दिया। रानी जब जल पीने के लिए सरोवर गई तो उसे घडिय़ाल ने अपना आहार बना लिया। तब वह बालक भूख-प्यास से तड़पने लगा। इतने में ही शिवजी की प्रेरणा से एक भिखारिन वहां पहुंची।
तब शिवजी ने भिक्षुक का रूप धर उस भिखारिन को बालक का परिचय दिया और उसके पालन-पोषण का निर्देश दिया तथा यह भी कहा कि यह बालक विदर्भ नरेश सत्यरथ का पुत्र है। यह सब कह कर भिक्षुक रूपधारी शिव ने उस भिखारिन को अपना वास्तविक रूप दिखाया। शिव के आदेश अनुसार भिखारिन ने उसे बालक का पालन पोषण किया। बड़ा होकर उस बालक ने शिवजी की कृपा से अपने दुश्मनों को हराकर पुन: अपना राज्य प्राप्त किया।


15- सुरेश्वर अवतार


भगवान शंकर का सुरेश्वर (इंद्र) अवतार भक्त के प्रति उनकी प्रेमभावना को प्रदर्शित करता है। इस अवतार में भगवान शंकर ने एक छोटे से बालक उपमन्यु की भक्ति से प्रसन्न होकर उसे अपनी परम भक्ति और अमर पद का वरदान दिया। धर्म ग्रंथों के अनुसार व्याघ्रपाद का पुत्र उपमन्यु अपने मामा के घर पलता था। वह सदा दूध की इच्छा से व्याकुल रहता था। उसकी मां ने उसे अपनी अभिलाषा पूर्ण करने के लिए शिवजी की शरण में जाने को कहा। इस पर उपमन्यु वन में जाकर ऊँ नम: शिवाय का जाप करने लगा।
शिवजी ने सुरेश्वर (इंद्र) का रूप धारण कर उसे दर्शन दिया और शिवजी की अनेक प्रकार से निंदा करने लगा। इस पर उपमन्यु क्रोधित होकर इंद्र को मारने के लिए खड़ा हुआ। उपमन्यु को अपने में दृढ़ शक्ति और अटल विश्वास देखकर शिवजी ने उसे अपने वास्तविक रूप के दर्शन कराए तथा क्षीरसागर के समान एक अनश्वर सागर उसे प्रदान किया। उसकी प्रार्थना पर कृपालु शिवजी ने उसे परम भक्ति का पद भी दिया।


16- किरात अवतार


किरात अवतार में भगवान शंकर ने पाण्डुपुत्र अर्जुन की वीरता की परीक्षा ली थी। महाभारत के अनुसार कौरवों ने छल-कपट से पाण्डवों का राज्य हड़प लिया व पाण्डवों को वनवास पर जाना पड़ा। वनवास के दौरान जब अर्जुन भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए तपस्या कर रहे थे, तभी दुर्योधन द्वारा भेजा हुआ मूड़ नामक दैत्य अर्जुन को मारने के लिए शूकर( सुअर) का रूप धारण कर वहां पहुंचा।
अर्जुन ने शूकर पर अपने बाण से प्रहार किया। उसी समय भगवान शंकर ने भी किरात वेष धारण कर उसी शूकर पर बाण चलाया। शिव की माया के कारण अर्जुन उन्हें पहचान न पाया और शूकर का वध उसके बाण से हुआ है, यह कहने लगा। इस पर दोनों में विवाद हो गया। अर्जुन ने किरात वेषधारी शिव से युद्ध किया। अर्जुन की वीरता देख भगवान शिव प्रसन्न हो गए और अपने वास्तविक स्वरूप में आकर अर्जुन को कौरवों पर विजय का आशीर्वाद दिया।


17- सुनटनर्तक अवतार


पार्वती के पिता हिमाचल से उनकी पुत्री का हाथ मागंने के लिए शिवजी ने सुनटनर्तक वेष धारण किया था। हाथ में डमरू लेकर जब शिवजी हिमाचल के घर पहुंचे तो नृत्य करने लगे। नटराज शिवजी ने इतना सुंदर और मनोहर नृत्य किया  कि सभी प्रसन्न हो गए।
जब हिमाचल ने नटराज को भिक्षा मांगने को कहा तो नटराज शिव ने भिक्षा में पार्वती को मांग लिया। इस पर हिमाचलराज अति क्रोधित हुए। कुछ देर बाद नटराज वेषधारी शिवजी पार्वती को अपना रूप दिखाकर स्वयं चले गए। उनके जाने पर मैना और हिमाचल को दिव्य ज्ञान हुआ और उन्होंने पार्वती को शिवजी को देने का निश्चय किया।


18- ब्रह्मचारी अवतार


दक्ष के यज्ञ में प्राण त्यागने के बाद जब सती ने हिमालय के घर जन्म लिया तो शिवजी को पति रूप में पाने के लिए घोर तप किया। पार्वती की परीक्षा लेने के लिए शिवजी ब्रह्मचारी का वेष धारण कर उनके पास पहुंचे। पार्वती ने ब्रह्मचारी  को देख उनकी विधिवत पूजा की।
जब ब्रह्मचारी ने पार्वती से उसके तप का उद्देश्य पूछा और जानने पर शिव की निंदा करने लगे तथा उन्हें श्मशानवासी व कापालिक भी कहा। यह सुन पार्वती को बहुत क्रोध हुआ। पार्वती की भक्ति व प्रेम को देखकर शिव ने उन्हें अपना वास्तविक स्वरूप दिखाया। यह देख पार्वती अति प्रसन्न हुईं।


19- यक्ष अवतार


यक्ष अवतार शिवजी ने देवताओं के अनुचित और मिथ्या अभिमान को दूर करने के लिए धारण किया था। धर्म ग्रंथों के अनुसार देवताओं व असुरों द्वारा किए गए समुद्रमंथन के दौरान जब भयंकर विष निकला तो भगवान शंकर ने उस विष को ग्रहण कर अपने कंठ में रोक लिया। इसके बाद अमृत कलश निकला। अमृतपान करने से सभी देवता अमर तो हो गए, साथ ही उन्हें अभिमान भी हो गया कि वे सबसे बलशाली हैं।
देवताओं के इसी अभिमान को तोड़ने के लिए शिवजी ने यक्ष का रूप धारण किया व देवताओं के आगे एक तिनका रखकर उसे काटने को कहा। अपनी पूरी शक्ति लगाने पर भी देवता उस तिनके को काट नहीं पाए। तभी आकाशवाणी हुई कि यह यक्ष सब गर्वों के विनाशक शंकर भगवान हैं। सभी देवताओं ने भगवान शंकर की स्तुति की तथा अपने अपराध के लिए क्षमा मांगी।

08  मार्च 2013

प्रथम पूज्या मातृशक्ति स्वरुपा अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस की बधाई एवं शुभकामनाए 

जब नारी में शक्ति सारी , फिर क्यों नारी हो बेचारी 


नारी का जो करे अपमान ,जान उसे नर पशु समान

हर आंगन की शोभा नारी , उससे ही बसे दुनिया प्यारी 


राजाओं की भी जो माता , क्यों हीन उसे समझा जाता

अबला नहीं नारी है सबला,  करती रहती जो सबका भला 


नारी को जो शक्ति मानो , सुख मिले बात सच्ची जानो

क्यों नारी पर ही सब बंधन वह मानवी, नहीं व्यक्तिगत 


धन सुता-बहू कभी माँ बनकर , सबके ही सुख-दुख को सहकर


अपने सब फर्ज़ निभाती , है तभी तो नारी कहलाती है 


आंचल में ममता लिए , हुए नैनों से आंसु पिए हुए

सौंप दे जो पूरा जीवन , फिर क्यों आहत हो उसका मन 


नारी ही शक्ति है नर की , नारी ही है शोभा घर की


जो उसे उचित सम्मान मिले , घर में खुशियों के फूल खिलें 


नारी सीता नारी काली,  नारी ही प्रेम करने वाली


नारी कोमल नारी कठोर , नारी बिन नर का कहाँ छोर 


नर सम अधिकारिणी है नारी,  वो भी जीने की अधिकारी


कुछ उसके भी अपने सपने क्यों , रौंदें उन्हें उसके अपने क्यों 


त्याग करे नारी केवल , क्यों नर दिखलाए झूठा बल


नारी जो जिद्द पर आ जाए , अबला से चण्डी बन जाए

उस पर न करो कोई अत्याचार , तो सुखी रहेगा घर-परिवार

जिसने बस त्याग ही त्याग किए , जो बस दूसरों के लिए जिए

फिर क्यों उसको धिक्कार , दो उसे जीने का अधिकार दो 

नारी दिवस बस एक दिवस क्यों नारी के नाम मनाना है,

हर दिन हर पल नारी उत्तम मानो , यह नया ज़माना है |
18.02.2013

महासभा का निर्वाचन शांति पूर्वक संपन्न

नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई एवं शुभकामनाए

नव निर्वाचित पदाधिकारी

अध्यक्ष                   :-   श्री भूपेन्द्र सिंह

वरिष्ठ उपाध्यक्ष         :-   श्री रमेश सिंह

कनिष्ठ उपाध्यक्ष       :-   श्री उधम सिंह

कोषाध्यक्ष               :-   श्री बजरंग सिंह

महासचिव               :-    श्री होरी सिंह

सह सचिव               :-   श्री अशोक सिंह

संगठन सचिव          :-    डा . आनंद सिंह गौतम

प्रचार सचिव             :-   श्री अश्वनी सिंह लवायन

उप सचिव                :-   श्री महेश सिंह

महिला अध्यक्ष         :-    डा . श्रीमति  मंजू सिंह

महिला सचिव           :-   श्रीमती सुलोचना सिकरवार

युवा अध्यक्ष             :-   श्री अश्वनी राजपूत

युवा सचिव               :-   श्री ज्वाला सिंह

सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को महासभा स्थल में शपथ ग्रहण कराया गया .

49 वां अधिवेशन ध्वज अवरोहण  के साथ  समाप्ति  तथा आगामी अधिवेशन

.स्वर्ण जयंती (50 वां ) समारोह दुर्ग जोन में होने की घोषणा की गई .

17 फरवरी 2013


महासभा के सभी मतदाताओं से सादर आग्रह मतदान में अवश्य भाग लेवे एवं अपने मनपसंद उम्मीदवार जो महासभा की गरिमा एवं पद की प्रतिष्ठा को बरकरार रखे तथा महासभा को नई  उचाई में ले जाए ऐसे  सभ्य  , सुशिल तथा सभी को अपने साथ ले कर  चले ऐसे  प्रत्याशी को चुन कर महासभा  में भेजे जो   महासभा के लिए निर्वाचित प्रतिनिधि  सभी आम सदस्यों की भावनाओं एवं आकांक्षाओ को पूरा करने में खरा उतरे . उपसमिति के सामान्य  सदस्यों ने आप सभी मतदाताओ के ऊपर विशवास कर महासभा के पदाधिकारी चयन का महती जिम्मेदारी आपके कंधो में डाल दिया . जिसका सही ढंग से निर्वहन करे 

.

16 फरवरी 2013

महासभा के 49 वें अधिवेशन का उद्घाटन 

मुख्य अतिथि     श्री धरम लाल कौशिक विधान सभा अध्यक्ष 

अध्यक्षता          श्री उजियार सिंह पवार  अध्यक्ष महासभा 

विशिष्ट अतिथि   नगर पंचायत अध्यक्ष पथरिया 

मौसम के मिजाज बिगड़ने के कारण  अधिवेशन का उद्घाटन फीका रहा 

सदस्यों की उपस्थिति बहुत कम रही 

मतदान 17 फरवरी 2013 को 

प्रात: 9 बजे से  अपरान्ह 3 बजे तक 

मतदान पश्चात तत्काल मतगणना 

10 फरवरी 2013

महासभा निर्वाचन 

नामांकन की प्रक्रिया पूर्ण 

सभी नामांकन सही पाए गए चुनाव के लिए तीन पेनल मैदान में दो प्रत्याशी स्वतन्त्र रूप से चुनाव मैदान में 

28 जनवरी 2013


उप समिति बिलासपुर के चुनाव परिणाम घोषित ठा . द्वारिका सिंह पेनल का भारी बहुमत के साथ  एकतरफा


जीत16 प्रत्याशी विजयी घोषित ठा . द्वारिका सिंह अध्यक्ष बने . निर्वाचित पदाधिकारी निम्नानुसार है 


अध्यक्ष                :-   ठा . द्वारिका सिंह


उपाध्यक्ष               :-  डा राघवेन्द्र सिंह 


सचिव                  : - ठा .मनोज सिंह 


कोषाध्यक्ष              :- ठा .शिव कुमार सिंह 


सहसचिव              :-  ठा .विवेक सिंह 


केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्य  :- ठा .अनिरुद्ध सिंह 


केन्द्रीय निर्णायक सदस्य    :- ठा .जगदीश सिंह 


कार्यकारिणी सदस्य :- 1. ठा .बीरबल सिंह , 2.ठा .अमोल सिंह , 3. ठा .पुरषोत्तम सिंह , 


                               4. ठा .बसंत सिंह    5. ठा .गोर सिंह ,   6. ठा .दिनेश सिंह


महिला अध्यक्ष         :-  श्रीमती  शकुंतला सिंह 


महिला सचिव          :-  श्रीमति संध्या सिंह 


युवा अध्यक्ष            :-  ठा .रणजीत सिंह


युवा  सचिव के उम्र पर आपत्ति दर्ज की गई है , फलस्वरूप निर्वाचन की घोषणा लंबित रखी गई है


सभी नव निर्वाचित पदाधिकारियों को महासभा की ओर  से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए , महासभा 


नव निर्वाचित पदाधिकारियों से आशा करता है की वे उप समिति बिलासपुर को एकता के सूत्र में बांधते 


हुए उप समिति बिलासपुर को नई  उंचाई में पहुचाएगे


27 जनवरी 2013


उप समिति बिलासपुर में मतदान संपन्न 


मतगणना की तैयारी देर रात तक परिणाम प्राप्त होने की संभावना 

महासभा पदाधिकारी निर्वाचन प्रक्रिया प्रारम्भ 


मतदाता सूची का प्रकाशन आज

.

20 जनवरी 2013


15 उप समिति में निर्वाचन संपन्न 


उप समिति बिलासपुर में पदाधिकारी निर्वाचन 27 जनवरी 2013 को होगा

16 जनवरी 2013


द्वितीय चरण निर्वाचन नामांकन प्रक्रिया पूर्ण 


मतदान 20 जनवरी 2013 रविवार को

 
उपसमिति राजनांदगांव में निर्विरोध निर्वाचन सभी पदों के लिए केवल एक एक नामांकन पत्र प्राप्त 


विधिवत घोषणा रविवार को


उप समिति भिलाई


पद                              नाम                                प्राप्त मत     विजित मत /   अंतर


अध्यक्ष                       पवन सिंह राजपूत                 594            232


उपाध्यक्ष                     लिलाम्बर सिंह                     581             247


सचिव                        संतोष सिंह                          545             191


कोषाध्यक्ष                   मनोज सिंह                         587             263


सह सचिव                   प्रवीण सिंह                          595             275


केन्द्रीय कार्यकारिणी      भुनेश्वर सिंह                        567             240


केन्द्रीय निर्णायक          नंदू पवार                           581             255


महिला अध्यक्ष             संध्या बैस                          298             131


महिला सचिव               अलका राजपूत                     281            108


युवा अध्यक्ष                 देवजीत सिंह                      101               46


युवा सचिव                  चमन सिंह                           96               39


इसी पेनल से कार्यकारिणी के सभी छै:  सदस्य भी अपने प्रतिद्वन्दियो से भारी  मतों के अंतर से विजय हुए है

14.01.2013


प्रथम चरण का चुनाव संपन्न 


दुर्ग में श्री दिलीप सिंह भुवाल अध्यक्ष एवंभिलाई उप समिति में  श्री पवन सिंह राजपूत अध्यक्ष चुने गए


13 उप समितियों में  पदाधिकारियों का निर्विरोध निर्वाचन संपन्न हुआ . दुर्ग  एवं भिलाई उप समिति में निर्वाचन की स्थिति निर्मित  होने के कारण  मतदान कराया गया . 


दुर्ग उप समिति में श्री दिलीप सिंह भुवाल अध्यक्ष एवं  राजेन्द्र सिंह  सचिव निर्वाचित हुए .दुर्ग उप समिति में  भुवाल पेनल के सभी 17 प्रत्याशी निर्वाचित घोषित किये गए 


सबसे ज्यादा कसमकस की स्थिति उप समिति भिलाई में निर्मित हो गया था मतगणना पुरे रात भर  चलते रहा आखिर में आज सुबह श्री पवन सिंह राजपूत पेनल के सभी 17 प्रत्याशी निर्वाचित घोषित किये गए  . भिलाई में श्री पवन सिंह राजपूत अध्यक्ष के लिए एवं श्री संतोष सिंह सचिव के लिए भारी बहुमत से  निर्वाचित हुए . 


सभी नव निर्वाचित प्रत्याशियों को  महासभा की और से बधाई एवं महासभा उनसे आशा करता  है  की समाज हित में नव निर्वाचित पदाधिकारियों के  द्वारा अच्छा कार्य जावेगा


13. 01.2013

प्रथम चरण निर्वाचन संपन्न

उपसमिति डोंगरगांव सभी पदाधिकारी निर्विरोध निर्वाचित

श्री अमर सिंह  अध्यक्ष , श्री पवन ठाकुर सचिव एवं श्रीमती पदमिनी  ठाकुर  महिला अध्यक्ष बनी

09 जनवरी 2013



महासभा का निर्वाचन प्रक्रिया प्रारम्भ 

   
उप समितियों में प्रथम चरण का नामांकन आज 09 जनवरी 2013 को संपन्न 


प्रथम चरण का मतदान 13 जनवरी 2013 को
द्वितीय चरण नामांकन 16 जनवरी 2013 को
द्वितीय चरण मतदान  20  जनवरी 2013 को

तृतीय चरण नामांकन  23  जनवरी 2013 को  
तृतीय चरण मतदान  27  जनवरी 2013 को केवल बिलासपुर उपसमिति में 

महासभा निर्वाचन
मतदाता सुची प्रकाशन  तिथि 27 जनवरी 2013

06 जनवरी 2013


उप समिति राजनांदगांव में नए नए पदाधिकारियों का चयन सर्वसम्मति से किया गया
उप समिति राजनांदगांव  के नवनिर्मित महाराणा प्रताप  भवन का लोकार्पण एवं आमजलसा 27 जनवरी 2013 को
प्रस्तावित
सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं नि:शुल्क स्वास्थ्य परिक्षण शिविर का आयोजन

28.12.2012

महासभा  की केन्द्रीय कार्यकारिणी , केन्द्रीय निर्णायक समिति एवं निर्वाचक मंडल की संयुक्त बैठक

दिनांक        :-    06 जनवरी  2013
स्थान         :-    महाराणा प्रताप मंगल भवन दुर्ग
समय         :-   दोपहर  12 बजे  से
अध्यक्षता      :-  श्री  उजियार सिंह पवार अध्यक्ष महासभा

विषय  सूची

संयुक्त बैठक

01.  संयुक्त बैठक दिनांक 09.12.2012 को केन्द्रीय पदाधिकारियों के निर्वाचन अनुक्रम में नामांकन स्थल ग्राम रहटादाह तय किया गया है ,. जिस पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा स्थान परिवर्तन कर दुर्ग में नामांकन करने का  सुझाव दिया है . चर्चा / निर्णय

02. समाज का निर्वाचन पैनल के आधार पर न होकर , स्वतन्त्र चुनाव कराने हेतु ठा दशरथ सिंह भुवाल भिलाई का पत्र अवलोकनार्थ , चर्चा / निर्णय

केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक

01 . केन्द्रीय कोषाध्यक्ष द्वारा वार्षिक आय ब्यय पर चर्चा / निर्णय

02 . केन्द्रीय  महासचिव के  वार्षिक प्रतिवेदन पर  चर्चा / निर्णय

निर्वाचक मंडल द्वारा उपसमितियों के निर्वाचन अधिकारियो का प्रशिक्षण
 
दिनांक         :-    06 जनवरी  2013

स्थान          :-    महाराणा प्रताप मंगल भवन दुर्ग

समय          :-   11 बजे से  12 बजे तक

21.12.2012 


    छत्तीसगढ़ में सहकारिता  के जनक , भूदान आन्दोलन के प्रथम शहीद , प्रखर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी


त्यागमूर्ति स्व . ठाकुर  प्यारे लाल सिंह की 121 वीं जयंती


एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सम्मान समारोह  संपन्न


ठा प्यारेलाल सिंह का जन्म 21 दिसंबर 1891 को ग्राम दैहान में हुआ था .


वे श्रमिक आन्दोलन के प्रथम नेता थे , उनके नेतृत्व में सन 1920 में बंगाल नागपुर काटन मिल्स राजनांदगांव में प्रथम हड़ताल हुआ था जो पुरे भारत में श्रमिको का पहला सफल हड़ताल था। इस अवधि में ठाकुर साहब को राजनांदगांव रियासत से बहिष्कृत कर दिया गया था , तब ठाकुर साहब  राजनांदगांव के रेलवे स्टेशन में रहकर श्रमिक आन्दोलन का नेतृत्व कर रहे थे . ठा प्यारेलाल सिंह रायपुर नगर पालिका के तीन  बार अध्यक्ष रहे तथा रायपुर  से दो बार विधायक चुने गए थे .


ब्रिटिश शासन काल में आतंरिक शासन में  शिक्षा मंत्री भी थे . मध्यप्रदेश राज्य के गठन  पर  विधान सभा के प्रथम विपक्ष के नेता चुने गए थे . ठाकुर प्यारेलाल सिंह छत्तीसगढ़  राज्य के प्रथम पक्षधर  थे . ठाकुर प्यारेलाल सिंह  सहकारिता के जनक के रूप में  जाते है . छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा ठाकुर साहब के नाम पर सहकारिता के क्षेत्र में  अच्छे कार्य करने वाले ब्यक्ति को प्रतिवर्ष प्यारेलाल सिंह सम्मान से सम्मानित करती है . वर्ष 2012 में श्री रघुराज सिंह अध्यक्ष भोरमदेव शक्कर कारखाना को  प्यारेलाल सिंह सम्मान से सम्मानित किया गया है।


स्थान                :-  ग्राम दैहान  ( सेम्हरा ) 


समय                :-  दोप 1 बजे 


मुख्य अतिथि      :-  श्री मधुसुदन यादव सांसद राजनांदगांव 


स्वतंत्रता संग्राम सेनानी


                              श्री कन्हैया लाल अग्रवाल जी राजनांदगांव 


                              श्री दामोदर दास जी टावरी डोंगरगांव 


                              श्री केयूर भूषण जी रायपुर 


                              पदमश्री डा .महादेव प्रसाद पाण्डेय जी रायपुर 


                             श्री दामोदर प्रसाद त्रिपाठी छुइखदान


का सम्मान किया गया


ठा रघुराज सिंह ( ठाकुर  प्यारे लाल सिंह सम्मान 2012) से सम्मानित का


विशिष्ट सम्मान किया गया


 19 दिसंबर  2012 


उप समिति राजनांदगांव सामान्य सभा की बैठक 


25 दिसंबर 2012      समय दोपहर 1 बजे से 


स्थान  महाराणा प्रताप मंगल भवन चिखली राजनंदगांव


9 दिसंबर 2012


महासभा  का संयुक्त बैठक संपन्न


महासभा के केन्द्रीय कार्यकारिणी एवं निर्णायक समिति का संयुक्त बैठक.देवकी नंदन दीक्षित सभा भवन ,


लाल बहादुर शास्त्री स्कूल बिलासपुर में श्री उजियार सिंह पवांर की अध्यक्षता में महाराणा प्रताप के तैल चित्र में माल्यार्पण से प्रारम्भ हुआ . बैठक में  सभी बिन्दुओ पर चर्चा कर निम्नानुसार निर्णय लिया गया

49 वां वार्षिक अधिवेशन  बेमेतरा जोन के उपसमिति मारो के ग्राम पथरिया में 16,17,एवं 18 फरवरी 2013 को होना निश्चित  किया गया  ,

निर्वाचक मंडल द्वारा बनाये गए निर्वाचक नियमावली अवलोकन  पश्चात   विचार पश्चात कुछ संशोधन सहित स्वीकृति प्रदान  की गई आगामी निर्वाचन हेतु महासभा के संविधान की धारा 20 उप धारा 13 के तहत निर्वाचन मंडल गठन किया गया .

नवगठित  निर्वाचन मंडल के द्वारा महासभा के पदाधिकारियों का निर्वाचन कराया जावेगा ..
उपसमिति के निर्वाचन हेतु तिथि निर्धारण एवं पर्यवेक्षको की  नियुक्ति निर्वाचन मंडल के द्वारा किया जावेगा  .
 वैवाहिक एवं सगाई कार्यक्रम की समीक्षात्मक चर्चा एवं चालू सत्र में सामूहिक विवाह के आयोजन पर उपसमिति में चर्चा कर निर्णय महासभा को प्रेषित करने का निर्देश  गया  .
 महासभा के विरुद्ध न्यायालयीन प्रकरण विचाराधीन है ,  संतोष सिंह रायपुर - जिला एवं सत्र न्यायालय रायपुर के प्रकरण में सम्बंधित सदस्यों को पेशी उपस्थित होने के लिए निर्देशित किया गया . ठा . गोपेन्द्र सिंह दीक्षित करगी रोड कोटा - माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट कार्यवाही में भाग लेने कहा गया .
उपसमिति राजनांदगांव के अध्यक्ष का पत्र  " विधुर श्री रमेश सिंह दीवान पारा राजनांदगांव के उपस्थित नहीं  होने के कारन आगामी बैठक में प्रकरण रखने के लिए निर्देशित  किया गया  .
 ठा .  हीरा सिंह निवासी मर्रा के विरुद्ध ठा . संतोष सिंह गहलोत बिलासपुर का शिकायत पत्र पर श्री हिरा सिंह के द्वारा खेद ब्यक्त कर छमा मांगने पर प्रकरण समाप्त किया गया .
अध्यक्ष महासभा के खिलाफ उपसमिति  जगदलपुर का निंदा प्रस्ताव  श्री उजियार सिंह  तथा वीरेंद्र  सिंह के द्वारा खेद ब्यक्त करने पर समाप्त किया गया 

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       महासभा  का संयुक्त बैठक 


महासभा के केन्द्रीय कार्यकारिणी एवं निर्णायक समिति का संयुक्त बैठक श्री उजियार  सिंह पवार

की  अध्यक्षता में रखी गई है . बैठक में निम्नांकित विषय में चर्चा एवं  विचार कर निर्णय लिया जावेगा .


बैठक दिनांक :-     9 दिसंबर 2012


बैठक स्थान   :-    देवकी नंदन दीक्षित सभा भवन , लाल बहादुर शास्त्री स्कूल 

                          गोल बाजार के पास बिलासपुर 

समय         :-   दोपहर 12 बजे से 


                                                   विषय सूची 


1. 49 वां वार्षिक अधिवेशन  बेमेतरा जोन के उपसमिति मारो के ग्राम पथरिया में होना है ,

वास्ते जोन की बैठक ,  कार्यक्रम , तिथि निर्धारण चर्चा एवं निर्णय 


2. निर्वाचक मंडल द्वारा बनाये गए निर्वाचक नियमावली अवलोकनार्थ चर्चा एवं निर्णय .


3. आगामी निर्वाचन हेतु महासभा के संविधान की धारा 20 उप धारा 13 के तहत निर्वाचन मंडल

गठन चर्चा एवं निर्णय .


4. उपसमिति के निर्वाचन हेतु तिथि निर्धारण एवं पर्यवेक्षक नियुक्ति बाबत चर्चा एवं निर्णय .


5. विगत सत्र में हुए वैवाहिक एवं सगाई कार्यक्रम की समीक्षात्मक चर्चा एवं चालू सत्र में

सामूहिक विवाह के आयोजन पर चर्चा एवं निर्णय .


6. महासभा के विरुद्ध न्यायालयीन प्रकरण विचाराधीन है , की अद्यतन जानकारी 


            1. संतोष सिंह रायपुर - जिला एवं सत्र न्यायालय रायपुर 


                  2.  ठा . गोपेन्द्र सिंह दीक्षित करगी रोड कोटा - माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट

                    प्रथम श्रेणी बिलासपुर 


7 . उपसमिति राजनांदगांव के अध्यक्ष का पत्र  " विधुर श्री रमेश सिंह दीवान पारा राजनांदगांव 

का विवाह ग्राम  मोहंदी उपसमिति राजिम निवासी ठा धन्नू सिंह की पुत्री परित्यक्ता

श्रीमती सुमन राजपूत के साथ दिनांक 10.04.2011 को संपन्न हुई जो  सामाजिक

मर्यादा /  अनुशासन के खिलाफ है " चर्चा एवं निर्णय .


8. ठा .  हीरा सिंह निवासी मर्रा के विरुद्ध ठा . संतोष सिंह गहलोत बिलासपुर का शिकायत पत्र

" दहेज़ मांगने एवं सगाई  तोड़ने  " संबंधी पत्र अवलोकनार्थ चर्चा एवं निर्णय हेतु .


9. अध्यक्ष महासभा के खिलाफ उपसमिति  जगदलपुर का निंदा प्रस्ताव अवलोकनार्थ

चर्चा एवं निर्णय .

.
महासचिव


26.11.2012


राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ रहटादाह उप समिति  राजनांदगांव सामान्य सभा की बैठक

02.12.2012 को रखा गया है . उप समिति  राजनांदगांव के सभी सम्मानीय सदस्यों से आग्रह

है की बैठक में उपस्थित होवे .

बैठक की कार्य सूची सभी सदस्यों को पृथक से  भेजी  जा चुकी  है .

बैठक दिनांक :- 02.12.2012

बैठक स्थान :- महाराणा प्रताप मंगल भवन चिखली 

बैठक समय :- अपरान्ह 2 बजे से 


25.11.2012

दुर्ग में  दिपावली मिलन  समारोह संपन्न

स्थान :- मिलन रेस्टारेंट धमधा रोड दुर्ग

समय :-  सुबह 10 बजे से सांय 5 बजे तक 


श्री  दशरथ सिंह भुवाल के द्वारा राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ रहटादाह के सदस्यों की दुर्ग में

 दिपावली मिलन समारोह का आयोजन किया गया .

कार्यक्रम का सुभारम्भ महाराणा प्रताप के तैल चित्र पर  माल्यार्पण एवं महाराणा प्रताप की आरती से किया गया

कार्यक्रम में  श्री भूपेंद्र सिंह बोरतरा ( पूर्व अध्यक्ष महासभा ) के मुख्य आतिथ्य तथा श्री टीकम सिंह की अध्यक्षता

में संपन्न हुआ , ड़ा आनन्द सिंह बेरला , श्री रामानुज सिंह , डा . राजेश्वर सिंह ठाकुर धमतरी डा . चंद्रशेखर सिंह  

एवं  डा . राजेंद्र सिंह अनुयोगी  विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे .   

कार्यक्रम में सर्व प्रथम महासभा के वेब साईट के संबंध में  श्री बी . एस . बघेल के द्वारा  प्रोजेक्टर के

माध्यम से विस्तृत जानकारी एवं सुविधाओं की जानकारी   दी गई तथा  स्थल में ही समाजिक सदस्यों के द्वारा

मेम्बरशिप ग्रहण किया गया . 

कार्यक्रम में पुरे छत्तीसगढ़ के सभी  उपसमिति से सदस्यों के साथ ही युवाओं एवं महिलाओं की अच्छी उपस्थिति

रही कार्यक्रम में विभिन्न बिन्दुओ पर उपस्थित सदस्यों के द्वारा अपने विचार  खुलकर रखा गया .

चर्चा मुख्य नौ बिन्दुओ पर केन्द्रित रहा .

1 . वर्तमान परिवेश में राजपूतो कि गरिमा का रक्षा 

2 .छत्तीसगढ़ में सामाजिक सदस्यों की राजनीतिक स्थिति 

3 . संविधान एवं संविधान में संशोधन 

4 . सांघटनिक ढ़ाचा में महिलाओं एवं युवाओं की उपस्थिति 

5 . प्रधान / मुख्य कार्यालय की स्थापना 

6 . समाज की संपत्ति एवं भवनों का  रखरखाव 

7 . महासभा द्वारा लिए गए निर्णय का नियमन 

8 . समाज की सदस्यता एवं परिक्षेत्र की ब्याख्या

9 .  पेनल के माध्यम से चुनाव एवं उसके दुष्परिणाम  

उपरोक्त सभी बिन्दुओ पर सभी वक्ताओं के द्वारा विस्तृत चर्चा एवं विचार रखा गया . श्री भूपेंद्र सिंह बोरतरा

( पूर्व अध्यक्ष महासभा )  मुख्य अतिथि ने अपने उदबोधन   में आज के कार्यक्रम की महत्ता को   स्वीकार करते

हुए भविष्य में अतिशीघ्र एक और विचार / चिन्तन गोष्टी आयोजित करने की  घोषणा किया .

कार्यक्रम के सफल आयोजन में डा आर . के . भुवाल ठा बलदेव सिंह गौतम , अनिल सिंह राजपूत , मनोज सिंह

राजपूत , डा  संतोष सिंह ,  डा . श्रीमती मंजू सिंह रायपुर , श्रीमती वर्षा सिंह भिलाई का विशेष  सहयोग रहा .

कार्यक्रम के अंत में  दिलीप सिंह भुवाल के द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया  तथा   कार्यक्रम के सफल आयोजन

के लिए श्री दशरथ सिंह भुवाल का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कार्यक्रम समापन की घोषणा की गई .

14.11.2012

बाल दिवस पर फूटपाथ पर सब्जियाँ बेचते एक मासूम बच्चे से 


ग्राहक ने  पूछा--- " पालक है क्या...? "


बच्चे ने मासूमियत से ज़वाब दिया---" पालक होता, तो मैं सब्जी क्यों बेचता...!!! "


 क्षत्रिय शासित भारत का स्वर्णिम अतीत

 आर्य क्षत्रियों ने ही सर्ब प्रथम कृषि की खोज  की.अँग्रेजो के आगमन से पहले की भारत में कृषि व्यवस्था बहुत उन्नत थी .भारत में कृषि व्यवस्था के बारे में "लेस्टर" नाम का अंग्रेज़ कहता है की "भारत में कृषि उत्पादन दुनिया में सर्वोच्च है। अंग्रेजों की संसद में भाषण देते समय वह  कहता है, भारत में एक एकड़ में सामान्य रूप से 56 कुंटल धान पैदा होता है। ये उत्पादन औसतन है, भारत के कुछ इलाकों में तो 70-75 कुंटल धान होता है और कुछ इलाकों में 45-50 कुंटल धान पैदा होता है। भारत में एक एकड़ में सामान्य रूप से 120 मीट्रिक टन गन्ना पैदा होता है। कपास का उत्पादन सारी दुनिया में सबसे ज्यादा भारत में है।

"जबकि आज भारत में "यूरिया, डीएपी, फॉस्फेट" डालने के बाद औसतन एक एकड़ में 30 कुंटल से ज्यादा धान पैदा नहीं होता है। जबकि 250 साल पहले सिर्फ गाय के गोबर और गौमूत्र की खादसे एक एकड़ में औसतन 56 कुंटल धान पैदा होता था। आज भारत में "यूरिया, डीएपी, फॉस्फेट" के बोरे के बोरे डालने के बाद एक एकड़ में औसतन उत्पादन 30-35 मीट्रिक टन   पैदावार है।
एक अंग्रेज़ कहता है की: 'भारत में फसलों की विविधता दुनिया में सबसे ज्यादा है। भारत में धान के कम से कम 1 लाख प्रजाति के बीज हैं। भारत में दुनिया में सबसे पहला 'हल' बना। जो दुनिया को भारत की अदभूत देंन है। इसके अलावा खुरपी, खुरपा, हसिया, हथौड़ा, बेल्ची, कुदाल, फावड़ा आदि सब चीज़ें भारत में ये सैकड़ों साल पहले ही बन चुकी थी । दुनिया में यह बाद में आई है बीज को एक पंक्ति में बोने की परंपरा भी हजारों साल पहले भारत में विकसित हुई है।"
आज भी धान की 50,000 प्रजातियाँ पूरे देश में मौजूद हैं। दुनिया ने सन् 1750 में खेती करना भारत से ही सीखा है। इससे पहले ये यूरोप के लोग जंगली फलों और पशुओं को शिकार करके ही हजारों साल यही खाते रहे हैं। जिस समय इंग्लैंड और यूरोप के लोग दो ही चीज़ें खाते थे या तो जंगली फल या मांस, उस समय भारत में 1 लाख किस्म के चावल होते थे, बाकी चीजों की तो बात ही छोड़ दीजिये। हजारों साल तक भारत ने दुनिया को चावल, गुड, दालें उत्पादित करके खिलाई है। और खाने पीने की हजारों चीज़ें दुनियाभर के देश हमसे खरीदते थे और हमें बदले में सोना, चाँदी, हीरे, जवाहरात देते थे। जिससे भारत सोने का महा समुद्र बना
आओ  बनाए भारत को पुन्:  महान एवं संपन्न क्षत्रिय ऱाष्ट्र
जय क्षात्र धर्म

            व्रत ,पर्व  /  त्यौहार                                                         
1.  पुरषोत्तम  / मल मास प्रारम्भ              18 अगस्त 2012
2 . कमला / पद्मा एकादशी                     12 सितम्बर 2012
3 . पुरषोत्तम  / मल मास समापन             16 सितम्बर 2012

4 . हरितालिका / तीजा व्रत                     18 सितम्बर 2012

5 . गणेश चतुर्थी                                   19 सितम्बर 2012  
6 .  ऋषि पंचमी                                  20 सितम्बर 2012

7 . अनंत चतुर्दशी / गणेश विसर्जन             29 सितम्बर 2012
8 . पितृ पक्ष / महालया प्रारम्भ                30 सितम्बर 2012
9 . इंदिरा एकादशी व्रत                         11 अक्टूबर 2012
10 . सोमवती एवं पितृ मोक्ष अमावस्या      15 अक्टूबर 2012
11 .
शारदीय
नवरात्र आरम्भ                  16 अक्टूबर 2012
12 . दुर्गाष्टमी , महाष्टमी                         22 अक्टूबर 2012        
13 . विजया दशमी / दशहरा                   24 अक्टूबर 2012
14 . शरद पूर्णिमा                                 29 अक्टूबर 2012
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24  जुलाई  2012                           
                             केन्द्रीय निर्णायक समिति की बैठक  
दिनांक      :-    05 . 08 . 2012 
स्थान       :-  महाराणा प्रताप मंगल भवन साजा 
समय        :-  दोपहर 01 बजे से 
अध्यक्षता   :- उदय सिंह वरिष्ठ उपाध्यक्ष महासभा 
                   सभी उपसमिति के अध्यक्षों एवं केन्द्रीय निर्णायक समिति के सदस्यों को बैठक की सूचना पत्र एवं कार्य सूची प्रेषित कर दिया गया है , सभी आमंत्रितो से आग्रह है की बैठक में निर्धारित समय  में उपस्थित होवे .
22  जुलाई  2012 
श्री प्रणब मुखर्जी भारत के 13 वें राष्ट्रपति निर्वाचित 
महासभा की और से बधाई एवं शुभकामनाए       
श्री प्रणब मुखर्जी भारत के 13 वें राष्ट्रपति के रूप में 25  जुलाई  2012  को सुबह  11.30 बजे शपथ ग्रहण करेंगे  
03  जुलाई  2012  
गुरु पूर्णिमा 
03  जून 2012 
ठा . मनमोहन  सिंह प्रथम अध्यक्ष  के  मूर्ति  का  अनावरण समारोह  मुख्य अतिथि श्रीमती वीणा सिंह  के कर कमलो से  संपन्न
31  मई  2012   निर्जला एकादशी   
महाराणा प्रताप जयंती 
ज्येष्ठ शुक्ल 3  दिनांक 24  मई 2012 
                       महाराणा प्रताप का जन्म  ज्येष्ठ शुक्ल  3  विक्रम   संवत   1597
                                    तदनुसार ( 09 मई 1540 ) को हुआ था
                          श्रद्ध्येय  प्रताप  का जन्म दिवस भारतीय तिथि के अनुसार 
                                विक्रम   संवत  ज्येष्ठ शुक्ल  3  को मनाया जाता है 
                        महाराणा प्रताप जयंती ज्येष्ठ शुक्ल 3  दिनांक 24  मई 2012  
महाराणा प्रताप की  472 वीं जयंती की सभी राजपूतो  को बधाई एवं शुभकामनाए     Maharana Pratap Jayanti Jyeshth Shukl    03  ( Thursday  24 May 2012)        20 मई  2012
                    
20 मई  2012   वट  सावित्री ज्येष्ठ कृष्ण 30  अमावस्या  

16  मई 2012  अचला  ( अपरा ) एकादशी  

30.04..2012  

मार्च 2012  :-   पर्व , जयंती ,दिवस

04 मार्च राष्ट्रिय सुरक्षा दिवस ,

07 मार्च गोविन्द वल्लभ पन्त दिवस

08 मार्च अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस

14 मार्च  विकलांग दिवस

21मार्च  विश्व वानिकी दिवस

23 मार्च नवसंवत्सर २०६९ प्रारम्भ ,

     शहीद दिवस  :-  सरदार भगत सिंह , राजगुरु एवं सुखदेव शहादत दिवस

24 मार्च  झूले लाल जयंती

25 मार्च  गणेश शंकर विद्यार्थी दिवस

31 मार्च सम्राट अशोक मौर्य जयंती 

 28 फरवरी 2012


                          ध्वज अवरोहण के साथ 48 वां अधिवेशन का रंगारंग समापन

 

                        मुख्य अतिथि -  डा रमन सिंह 


अधिवेशन के दुसरे दिन मेहंदी रचाओ एवं रंगोली सजाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया .

महासचिव श्री होरी सिंह दौड़ महासचिव के द्वारा  वर्ष 2011 - 2012 का  प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया जिसमे महासभा के विगतवर्ष के दौरान विभिन्न क्रिया कलापों , कार्यकारिणी एवं निर्णायक समिति के द्वारा लिए गए विभिन महत्वपूर्ण निर्णय कीजानकारी सारगर्भित रूप में प्रस्तुत किया गया .

खुला मंच :-  द्वितीय सत्र में सचिव प्रतिवेदन के पश्चात खुला मंच का आयोजन किया गया जिसमे समाज के विभिन्न  गणमान्यसदस्यों के द्वारा अपना विचार महासभा के समक्ष रखा गया तथा कुछ जानकारी की मांग भी की गई . खुला मंच आम सदस्यों कीभावनाओं का प्रतिबिम्ब होता जिसमे सामान्य  सदस्य महासभा से क्या अपेक्षा रखता है तथा किस प्रकार की परिवर्तन की  चाहरखते है तथा समाज में आधुनिक परिवेश में किन बिन्दुओ पर अधिक बल देना चाहते है .महासभा में पधारे अतिथियों का महासभा के पदाधिकारियों के द्वारा पुष्प हार से स्वागत किया गया एवं उनका सम्मान कियागया तत्पश्चात अतिथियों का उद्बोधन हुआ .

महासभा के समापन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा. रमन सिंह मुख्य मंत्री छत्तीसगढ़ शासन  थे . विशेष अतिथि के रूप में श्री राजेशमूणत  उपस्थित थेडा. रमन सिंह मुख्य मंत्री का श्री उजियार सिंह पवार अध्यक्ष महासभा एवं श्री राजेश मूणत का पवन सिंह लवायण संयोजक   केद्वारा पुष्प हार से स्वागत किया गया . डा रमन सिंह ने अपने उद्बोधन में राजपूत क्षत्रियो के बलिदानी स्वभाव तथा देश रक्षा केलिए अपने प्राण निक्षावर करने वाले राजपूत समाज के प्रेरणा स्र्तोत  महाराणा प्रताप की बलिदान को प्रतिबिंबित किया . डा रमन सिंह ने विगत  महासभा में शामिल नहीं हो पाने के लिए खेद ब्यक्त किया तथा भविष्य में राजपूत समाज के महासभा में शामिल

होने के लिए आश्वस्त किया . उनके द्वारा समाज के द्वारा किये जा रहे कार्यो की प्रशंसा की खासकर सामूहिक विवाह जिसमेआर्थिक रूप से कमजोर सदस्यों की पूर्तियो की विवाह पर विशेस जोर दिया इसी कड़ी में राजनांदगाँव उपसमिति की महिलामंडल के द्वारा विगत वर्ष संपन्न  कराये गए सामूहिक विवाह को उत्कृष्ट  प्रयास बताया . डा साहब के द्वारा राजपूत क्षत्रिय समाज को एक सूत्र में बंध कर समाज को मजबूती प्रदान करने का आग्रह किया .डा. रमन सिंह ने प्रतिभावान छात्र - छात्राओ , विभिन्न क्षेत्रो में   उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रतिभावान सदस्यों एवं रंगोली  तथामेहंदी प्रतियोगिता के विजेताओं का प्रमाण पत्र देकर सम्मान किया .

कार्यक्रम के अंत में सहसंयोजक ठा. बलदाऊ सिंह भुवाल ने आभार प्रदर्शन किया . आभार प्रदर्शन के पश्चात ध्वज अवरोहन केसाथ 48 वां अधिवेशन का समापन हुआ . आगामी 49 वां अधिवेशन फरवरी 2013 में  बेमेतरा में होगा .

 27 फरवरी 2012

                                          48 वे अधिवेशन का रंगारंग  शुभारम्भ

          महाराणा प्रताप की कर्मभूमि हल्दीघाटी की पवित्र मिटटी एवं ज्योति रथ यात्रा का रायपुर पहुचने पर भव्य स्वागत किया गया . आतिशबाजी एवं पुरे सम्मान के साथ पवित्र मिटटी एवं ज्योति रथ  को महासभा स्थल जरवाय ले जाया गया . श्री उजियार सिंह पवार अध्यक्ष  के द्वारा ध्वजा रोहण  के साथ दो दिवसीय  अधिवेशन का रंगारंग  शुभारम्भ हुआ .

कार्यक्रम के उदघाटन के पश्चात शोभा यात्रा निकाली  गई  . शोभा यात्रा में हजारो की तादात में महिलाए , बच्चे , बड़े बुजुर्ग भी शामिल हुए . शोभा यात्रा जरवाय से आरम्भ होकर मोहबा बाजार एवं मोहबा बाजार से वापस जरवाय में सभा स्थल में जाकर समाप्त हुआ .

अतिथियों एवं महासभा के पदाधिकारियों का जोन  क्र दो एवं उप समिति रायपुर के पदाधिकारियों के द्वारा स्वागत किया गया . स्वागत के पश्चात श्री पवन सिंह लवायन के द्वारा स्वागत भाषण दिया गया . स्वागतभाषण के पश्चात् श्री उजियार सिंह पवार द्वारा उद्बोधन दिया गया .

      रात्रि 9 .30 बजे से संस्कृतिक कार्यक्रम , कवी सम्मलेन एवं  केन्द्रीय कार्यकारिणी की बैठक प्रारम्भ हुआ जो देर रात्रि तक चलते रहा जिसमे विभिन्न महत्वपूर्ण बिन्दुओ पर निर्णय लिया गया .

14 फरवरी 2012

मातृदेवो भव  , पितृदेवो भव , आचार्य देवो भव

छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा 14 फरवरी  को मातृ , पितृ  पूजन दिवस के रूप में मनाने का निर्णय एक अच्छा पहल है .सभी नवयुवक , नवयुवती , छात्र , छात्राओ से हम अपेक्षा करते है की वे अपने माता - पिता अभिभावक एवं गुरुजनों का आज के दिन प्राणाम कर अपने अच्छे भविष्य के लिए आशीर्वाद प्राप्त करे .

राजपूत चात्रिय महासभा की ओर से बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाए

12 फरवरी 2012

                     उप समिति राजनांदगाँव का वार्षिक आम जलसा

                             तिथि :- 15 अप्रेल 2012

                             स्थान :- महाराणा प्रताप मंगल भवन चिखली राजनांदगाँव

                             समय :- प्रात : 09  बजे से सांय 05 बजे तक

                             संयोजक :- ठाकुर मोहन सिंह

 07 फरवरी 2012

                            48  वां महाधिवेशन परिवर्तित तिथि

        26  फरवरी रविवार एवं 27 फरवरी 2012 सोमवार को संपन्न होगा
       स्थान  - वीर सावरकर सभा भवन  एवं स्कूल मैदान जरवाय हीरापुर
                                                        
कार्यक्रम 26  फरवरी रविवार

1 . पंजीयन  :- प्रात :  08 बजे से

2 .महाराणा प्रताप ज्योति रथ यात्रा  स्वागत:- सुबह 10 बजे नवीन बाजार फुल चौक हाटल नटराज केपास

3 अधिवेशन उदघाटन :- दोपहर 12 बजे ध्वजारोहण के साथ

4 .शोभा यात्रा :- दोपहर 01 बजे  अधिवेशनस्थल से

5 . केन्द्रीय पदाधिकारियों का स्वागत

6 . संयोजक का स्वागत भाषण

7 . महासभा अध्यक्ष का उद्बोधन

8 . वार्षिक पत्रिका शौर्य का विमोचन

9 . उप समितियों के सचिवों का प्रतिवेदन

10 . केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति एवं उप समिति के सचिवों का संयुक्त बैठक रात्रि 09.30 बजे से

11 . सांस्कृतिक कार्यक्रम , युवक / युवती परिचय सम्मेलन , कवी सम्मेलन रात्रि 09.30 बजे से


                                                   कार्यक्रम 27 फरवरी सोमवार

 

1 . रंगोली एवं मेहंदी प्रतियोगिता प्रात : 09 बजे से

2 . खुला अधिवेशन :- महासचिव एवं कोषाध्यक्ष का वार्षिक प्रतिवेदन एवं उस पर चर्चा - सुबह 10 बजे से

3 . अतिथियों का उद्बोधन, स्मृति चिन्ह भेंट

4 . प्रतिभावान छात्र छात्राओ का सम्मान

5 .विविध क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालो का सम्मान

6 . रंगोली एवं मेहंदी प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार वितरण

7. सहसंयोजक द्वारा आभार प्रदर्शन

8. ध्वज अवरोहण के साथ अधिवेशन समापन की घोषणा

 संयोजक - ठा. पवन सिंह लवायन जरवाय

उप संयोजक - ठा. बलदाऊ सिंह भुवाल रायपुर

सहसंयोजक - रायपुर जोन के सभी उप समितियों  के सभी अध्यक्ष

अधिवेशन स्थल में आने - जाने के लिए टाटीबंध एवं महोबा बाजार से ऑटो की नि:शुल्क ब्यवस्था  रहेगी

अधिवेशन के प्रथम दिवस शोभा यात्रा एवं महाराणा प्रताप ज्योति रथ यात्रा का स्वागत

श्री उदय सिंह वरिष्ठ उपाध्यक्ष महासभा  के द्वारा शोभा यात्रा के लिए दो बस की ब्यवस्था

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05 फरवरी 2012

उप समिति राजनांदगाँव के कार्यकारिणी , महिला मंडल , युवा मंडल का संयुक्त बैठक महाराणा प्रताप मंगल भवन चिखली में 12 फरवरी 2012  को अपरान्ह 02 बजे से श्री राम सेवक सिंह की अध्यक्षता में रखी गई है

व्रत एवं त्यौहार

28 जनवरी 2012 बसंत पंचमी बसंत उत्सव प्रारम्भ

01  फरवरी 2012 महानंदा नवमी / गुप्त नवमी

26 जनवरी 2012

गणतंत्र दिवस की ६३ वीं जयंती पर

समस्त भारतीयों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए

15 जनवरी 2012 

मकर संक्रांति की बधाई एवं शुभकामनाए ,

पुन्य काल साँय 4.15  बजे तक

 14 जनवरी 2012 

इतिहास ( स्थापना 1886)

स्टेट हाई स्कूल राजनांदगाँव  का 125 वीं वर्ष गाँठ

दो द्विवसीय कार्यक्रम का रंगा रंग शुभारम्भ राज्यपाल महामहिम शेखर दत्त के करकमलो से हुआ

समापन कार्यक्रम 15 जनवरी 2012 को मुख्यमंत्री डा. रमण सिंह के मुख्य आत्तिथ्य में संपन्न होगा

09 जनवरी 2012 
छत्तीसगढ़ में नौ नए जिलो का विधिवत शुभारम्भ डा . रमन सिंह मुख्य मंत्री के द्वारा

1 . बालोद                   10 जनवरी 2012

2 . गरियाबंद               11 जनवरी 2012

3 . मुंगेली                   12 जनवरी 2012

4 . बेमेतरा                  13 जनवरी 2012

5 . सुकमा                  16 जनवरी 2012

6 . बलरामपुर             17 जनवरी 2012

7 . बलौदा बाजार         18 जनवरी 2012

8 . सूरजपुर                19 जनवरी 2012

9 . कोंडागांव               25 जनवरी 2012


सभी नवगठित जिलो के निवासियों को बधाई एवं शुभकामनाए

केन्द्रीय  निर्णायक समिति की विशेष बैठक  25 दिसंबर 2011 संपन्न

स्थान        :-          महाराणा प्रताप मंगल भवन सुपेला भिलाई

समय        :-          दोपहर 1 बजे से

अध्यक्षता  :-          ठा. उदय सिंह वरिष्ठउपाध्यक्ष महासभा


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22 दिसंबर 2011


            22 दिसंबर 2011 वर्ष का आज सबसे छोटा दिन एवं सबसे बड़ी रात

                             दिन 10.30 घंटे का एवं रात 13.30 घंटे का


16 दिसंबर 2011

डा.रमन सिंह

मुख्य मंत्री छत्तीसगढ़ शासन

कुशल नेतृत्व एवं स्वच्छ प्रशासन का सफलता पूर्वक आठ वर्ष पूर्ण करने पर

हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए

 20.11.2011

10  नवम्बर 2011

उप समिति भिलाई के नव निर्मित सामाजिक भवन का लोकार्पण , आम जलसा एवं स्नेह सम्मलेन

26 नवम्बर 2011 को  उप समिति भिलाई  के नव निर्मित सामाजिक भवन का लोकार्पण  अवसर पर उपसमिति भिलाई में आम जलसा एवं स्नेह सम्मलेन का आयोजन किया गया है
 
प्रात: 10 बजे  से   - कार्यक्रम उदघाटन , महाराणा प्रताप के छाया चित्र माल्यार्पण पूजा एवं आरती

मुख्य  अतिथि   -  श्री भजन   सिंह  निरंकारी   विधायक  वैशाली  नगर विधान सभा

विशेष  अतिथि  -  श्रीमति निर्मला यादव महापौर भिलाई
                     श्री संतोष श्रीरंगे पार्षद
                     श्री अरुण वोरा जी पूर्व विधायक दुर्ग

प्रात:        11 बजे से 1.30 बजे तक          -  महिला मंडल द्वारा रामायण
दोपहर   
1.30 बजे से 2.30 बजे तक          -  भोजन
दोपहर 2 .30 बजे  से 4 .30 बजे तक          - बच्चो, महिला एवं पुरुषो का  खेल प्रतियोगिता
  
4 .30 बजे से 5.30 बजे  भवन लोकार्पण - मुख्य अतिथि  श्रीमति वीणा सिंह
                                                               
विशेष  अतिथि  - श्रीमति
इला दीदी
रात्रि   9 बजे से

केन्द्रीय निर्णायक समिति  की बैठक 26 नवम्बर 2011 रात्रि  में  एवं
 
केन्द्रीय कार्यकारिणी की 27 नवम्बर 2011  को उप समिति भिलाई के आत्तिथ्य में

01 नवम्बर 2011
             
12 वां छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस ,
                            छत्तीसगढ़ निर्माण के ग्यारह वर्ष पूर्ण होने पर ,
                                       समस्त छत्तीसगढ़ वासियों को बधाई एवं शुभकामनाए .

दुनिया सात अरब की

ख़ुशी या गम

उन्नति या अवनति
 
परवरिश , शिक्षा ,स्वास्थ्य , भोजन , आवास , रोजगार की गारंटी कौन देगा

31 अक्टूबर 2011

  
                स्व. इंदिरा गांधी की 27 वीं पुण्य तिथि
 
भारत की पूर्व प्रधान मंत्री स्व. इंदिरा गांधी की  निर्वाण दिवस पर राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है .
 
30 अक्टूबर 2011

विश्व बचत दिवस
अन्तराष्ट्रीय बचत बैंक दिवस 


दिनांक                  दिन             तिथि   विक्रम संवत 2068                   पर्व

20 अक्टूबर 2011     गुरूवार           कार्तिक कृष्ण  अष्टमी                   राधाष्टमी गुरुपुष्य नक्षत्र

21 अक्टूबर 2011     शुक्रवार           कार्तिक कृष्ण  नवमी                  आजाद हिंद दिवस

24 अक्टूबर 2011     सोमवार          कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी                  धनतेरस

25 अक्टूबर 2011     मंगलवार         कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी                  हनुमान जयंती ,नरकचतुर्दशी
                                                                                     रूप चतुर्दशी

26 अक्टूबर 2011     बुधवार           कार्तिक  अमावस्या                     लक्ष्मी पूजा , दीपावली , दिवाली

27 अक्टूबर 2011      गुरूवार          कार्तिक शुक्ल एकम                    गोवर्धन पूजा

28 अक्टूबर  2011    शुक्रवार          कार्तिक शुक्ल द्वितीया                   यम द्वितीया भाई द्विज

06 नवम्बर 2011     रविवार           कार्तिक शुक्ल एकादशी                 देव उठनी एकादशी

07 नवम्बर  2011    सोमवार          कार्तिक शुक्ल द्वादशी                   तुलसी विवाह , ईद अज्जहा
                                                                                    ( बकरीद )

10 नवम्बर 2011     गुरूवार           कार्तिक पूर्णिमा                         गुरु नानक जयंती  ,
                                                                                    मोहारा मेला राजनांदगाव
 
15 अक्टूबर 2011

माटी पुत्र 
छत्तीसगढ़ के मुखिया 
निर्मल  छवि, उदार ह्रदय ,
सहज ,सरल ,सॉम्य ब्यकतित्व , मिलनसार, विवेकशील
विकास के लिए  कृत संकल्पित, यशश्वी मुख्यमंत्री
आदरणिय  डा. रमन सिंह को जन्म दिन की कोटिशः बधाई
एवं शुभकामनाए आप शतायु हो  यही कामना करते है .

28 सितम्बर 2011 
  सरदार भगत सिंह की जयंती. भारत माता के वीर सपूत  और महान देशभक्त को भावपूर्ण

     श्रद्धांजलि इन शब्दों के साथ...

    सदियों तक रहती सूनि कोख धरा की है,
    तब कहीं एक कोई अलबेला आता है .
    इतिहास पढ़े या नहीं पढ़े कोई बात नहीं,
    इतिहास रक्त से लिखकर वह दे जाता है.
       श्री मती रंजना ठाकुर
     ओजस्वी नर्सिंग होम धमतरी

22 सितम्बर 2011
 
        केन्द्रीय कार्यकारिणी की बैठक 
       महासभा के केन्द्रीय कार्यकारिणी की बैठक 9 अक्टूबर 2011 को बेरला में रखी गई है .
          सभी केन्द्रीय पदाधिकारी ,  कार्यकारिणी सदस्य गण एवं उपसमिति के सचिव से आग्रह है की वे बैठक में  अनिवार्यतः उपस्थित होवे .

14 सितम्बर 2011 

        हिंदी दिवस


       हिंदी हमारी मातृभाषा है
  • आप जानते हैं,हिंदी आसान है, प्रयोग सरल है, और तो और, जो आप बोलते हैं, वही लिख भी सकते हैं, अर्थात हिंदी एकलौती ध्वनिप्रधान (फ़ोनेटिक) भाषा है. फिर इसके इस्तेमाल में हिचक कैसी और क्यूँ? आइये, हिंदी दिवस पर शपथ लें कि, राष्ट्रभाषा के प्रयोग में कोई कोताही नहीं करेंगे. दूसरी भाषाओँ का पूरा सम्मान करेंगे  पर हिंदी का अपमान नहीं होने देंगे ..
  • हिंदी दिवस पर एक बेहद सुन्दर आलेख के लिए यहाँ  क्लिक करें

तीजा उत्सव
राजपूत क्षत्रिय महासभा  छत्तीसगढ़  रहटादाह महिला मंडल रायपुर के द्वारा  तीजा उत्सव का आयोजन किया गया है .
पसमिति रायपुर के सभी महिलाओं से आग्रह ,  तीजा उत्सव में शामिल होने के लिए आप सभी सादर आमंत्रित है  .
दिन - रविवार 4 सितम्बर 2011

स्थान -  छात्रावास भवन कोटा
समय -  दोपहर  2 बजे   से
29 अगस्त 2011
राष्ट्रीय खेल दिवस 29 अगस्त
हाकी के जादूगर के नाम से प्रसिद्द मेजर ध्यान चंद सिंह  का जन्म 29 अगस्त 1905 को पंजाब में हुआ था . मेजर ध्यान चंद के जन्म दिन को उनके सम्मान में राष्ट्रीय खेल दिवस के नाम से जाना जाता है . मेजर ध्यान चंद भारतीय हाकी के स्वर्णिम समय में भारतीय हाकी के सदस्य रहे  . मेजर ध्यान चंद लगातार तीन बार ( 1928 एमस्टरडम, 1932 लास एंजेल्स  एवं  1936 बर्लिन    ) ओलम्पिक के स्वर्ण पदक जितने वाली भारतीय टीम के सदस्य रहे है .   मेजर ध्यान चंद  को भारत सरकार के द्वारा प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मभूषण से 1956 में सम्मानित किया गया था .  भारत के समस्त हाकी प्रेमियों खासकर राजनांदगाँव वासियों को हाकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद सिंह  का जन्म दिन पर हार्दिक शुभकामनाए .
04 अगस्त 2011

जोन क्रमांक 02 का संयुक्त बैठक  07  अगस्त 2011
जोन क्रमांक 02 के सभी उपसमितियों का संयुक्त बैठक  रविवार   07  अगस्त 2011 को छात्रावास भवन कोटा  रायपुर में आयोजित की गई है . जोन दो के सभी उपसमितियों के सभी कार्यकारिणी सदस्यों से आग्रह है कि वे उक्त बैठक में अवश्य शामिल होवे .

01 अगस्त 2011
  केन्द्रीय कार्यकारिणी की बैठक जगदलपुर में 21 अगस्त 2011 को
महासभा के केन्द्रीय कार्यकारिणी की बैठक उपसमिति जगदलपुर के आतिथ्य में  21 अगस्त 2011 को जगदलपुर में रखी  गई है . सभी केन्द्रीय पदाधिकारियों एवं  केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्यों तथा सभी उपसमिति के सचिव को सूचना एवं कार्यसूची की जानकारी भेजी जा चुकी है . सभी आमंत्रितो से अनुरोध है की बैठक में अनिवार्यतः उपस्थित होवे .

15 जून 2011
      राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ उपसमिति महिला मंडल राजनांदगाँव के द्वारा लोहाना महाजन बाड़ी में सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया जिसमे समाज के 17 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे . सामूहिक विवाह का कार्यक्रम 14जून 2011 को प्रात; 6 बजे से प्रारम्भ हो गया था .कार्यक्रम में पुरे छत्तीसगढ़ से लगभग चार हजार से अधिक सामाजिक सदस्य गण शामिल हुए . महिलाओं एवं बच्चो की संख्या अधिक थी .सांय 4 बजे सभी . 17 जोड़ो की बरात निकाली गई . वैवाहिक कार्यक्रम संपन्न के  मुख्य अतिथि  ठाकुर रघुराज सिंह अध्यक्ष भोरमदेव शक्कर कारखाना थे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री उजियार सिह पवार अध्यक्ष महासभा के द्वारा किया गया  श्री अनिल सिंह अध्यक्ष नगर पालिका कवर्धा एवं होरी सिंह दौड़ महासचिव   महासभा  विशिष्ठ अतिथि थे . श्री अनिल सिंह ने अपने उद्बोधन में सामूहिक विवाह के आयोजन को एक अच्छा प्रयास बताया तथा भविष्य में भी सामूहिक विवाह को अधिक से अद्धिक बढ़ावा देने का आव्हान किया . श्री रघुराज सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा की सामूहिक विवाह के आयोजन से धन एवं समय दोनों की बचत होती है तथा गरीब एवं कमजोर आर्थिक स्थिति के परिवार को सहारा मिल जाता उपसमिति राजनांदगाँव एवं महिला मंडल को लगातार दुसरे वर्ष सामूहिक विवाह आयोजित करने के लिए बधाई दिया . श्री उजियार सिंह ने उपसमिति  एवं महिला मंडल राजनांदगाँव को  सामूहिक विवाह के लगातार आयोजन करने के लिए   बधाई  एवं शुभकामनाए दिया तथा उनके द्वारा भविष्य में महासभा के द्वारा आगामी वर्ष में नि:शुल्क सामूहिक विवाह आयोजित करने की मंशा प्रगट की गई .सभी नव विवाहित जोड़ो को श्रीमती वीणा सिंह ( धर्म पत्नी रमण सिंह मुख्यमंत्री ) के द्वारा सिलाई मशीन दिया गया . उक्त कार्यक्रम में श्रीमती सरला दौड़ अध्यक्ष महिला मंडल पंडरिया तथा भिलाई एवं दुर्ग की महिला मंडल अध्यक्ष भी शामिल हुई .
श्री रामसेवक सिंह अध्यक्ष उपसमिति राजनांदगाँवके द्वारा आभार ब्यक्त किया गया . श्रीमत्री नर्बादा ठाकुर अध्यक्ष महिला मंडल के द्वारा कार्यक्रम में शामिल मुख्य अतिथि विशिष्ठ अतिथि , अध्यक्ष महासभा . महासचिव , सभी केन्द्रीय पदाधिकारी महिलाओं एवं बच्चो तथा सभी सामजिक सदस्यों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए धन्यवाद दिया . सामूहिक विवाह कार्यक्रम के संयोजक श्री मोहन सिंह , कार्यक्रम निदेशक श्री अश्वनी सिंह  लावायन प्रचार सचिव महासभा थे . श्री अशोक सिंह संगठन सचिव का विशेष योगदान रहा . उधम सिंह  सहसचिव  महासभा , श्री शेषनारायण सिंह उपसचिव भी कार्यक्रम में पुरे समय तक उपस्थित रहकर सहयोग प्रदान करते रहे . श्रीमती वीणा ठाकुर सचिव महिला मंडल राजनांदगाँव के कनिष्ठ पुत्र का विवाह भी संपन्न हुआ .

 13 जून 2011 

       प्रदेश स्तरीय सर्व राजपूत संम्मेलन महाराणा प्रताप जयंती समारोह संपन्न

सर्व राजपूत समाज छत्तीसगढ़ के द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय राजपूत क्षत्रिय सम्मलेन एवं महाराणा प्रताप जयंती  समारोह में सभी आमंत्रित अतिथि गण शामिल हुए
मुख्य अतिथि  :-    डा. रमसिंह जी           मुख्य मंत्री छत्तीसगढ़  
                         श्रीमती वीणा सिंह
अध्यक्षता       :-   श्री उजियार सिंह पवार    अध्यक्ष राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़  
विशेष अतिथि :-   श्री दिलीप सिंह जूदेव       सांसद बिलासपुर
                         श्री बृजमोहन अग्रवाल      मंत्री लोनि , शिक्षा , संस्कृति , पर्यटन

                        
श्री धर्मजीत सिंह             विधायक लोरमी
                         श्री राजू  क्षत्रिय               विधायक  तखतपुर
                         श्री  सौरभ सिंह               विधायक  अकलतरा
                         श्री किरण देवजी              महापौर जगदलपुर
                         श्री रघुराज सिंह              अध्यक्ष भोरमदेव शक्कर कारखाना कवर्धा
                        
री अनुराग सिंहदेव          अध्यक्ष भा. ज. पा . युवा मोर्चा छत्तीसगढ़
                         श्रीमती ईला कलचुरी        अध्यक्ष महिला मंडल नि:स्वार्थ सेवा संघ

के गरिमामय उपस्थिति में 12 जून 2011  रविवार को इनडोर स्टेडियम , बूढा तलाब के पास रायपुर में संपन्न हुआ सर्व प्रथम अतिथियों का पुष्प हार एवं पुष्प गुच्छ से स्वागत किया गया कार्यक्रम के आयोजन में राजपूत नि:स्वार्थ सेवा संघ रायपुर , राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़   रहटादाह 1282 .क्षत्रिय कल्याण सभा भिलाई सर्व राजपूत संगठन छत्तीसगढ़ विशेष सहयोग रहा

ज्येष्ठ शुक्ल 3 विक्रम संवत 2068  ( 4 जून 2011 )
                           महाराणा प्रताप की 472 वीं जयंती की  शुभकामनाए
   
भारत वर्ष में एक से एक चक्रवर्ती सम्राट हुए . आज से 471 वर्ष पूर्व  एक नए सूर्य का जन्म हुआ जिन्होंने  राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम की अलख जगाकर जन जन के ह्रदय एवं  जंगल में निवास करने वाले महान प्रतापी सम्राट  महाराणा प्रताप का जन्म ज्येष्ठ शुक्ल 3 विक्रम संवत 1597 दिन गुरूवार  (  9 मई 1940  ) को हुआ था .
राष्ट्र के स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपने सुखो की चिता जला दी इसे वीर को पाकर वसुंधरा भी पावन एवं धन्य हुई .

             राजपूत क्षत्रिय समाज अपने प्रेरणा पुरुष एवं आराध्य को सत सत नमन करता है .

15 मई  2011
डा. रमन सिंह मुख्य मंत्री से मुलाक़ात
श्री उजियार सिंह पवार अध्यक्ष राजपूत क्षत्रिय महासभा के नेतृत्व में मुख्यमंत्री आवास में दिनांक 15 मई  2011 को डा. रमन सिंह मुख्य मंत्री छत्तीसगढ़ शासन से सौजन्य मुलाक़ात किया गया . मुलाक़ात के दौरान श्री पवार ने डा. रमन सिंह को राजपूत समाज की गतिविधियों से अवगत कराया तथा महाराणा प्रताप जयंती के आयोजन के संबंध में  चर्चाकिया . उक्त अवसर पर श्री पवार ने डा. साहब को  सर्व राजपूत समाज की बैठक दिनांक 12 जून 2011 में आमंत्रित किया . डा. रमन सिंह ने आमंत्रण स्वीकार कर सर्व राजपूत समाज की बैठक दिनांक 12 जून 2011 में शामिल होने की सहमती प्रदान की  .
सर्व राजपूत समाज की बैठक
दिनांक 12 जून 2011 रविवार
मुख्य अतिथि डा. रमन सिंह मुख्य मंत्री छत्तीसगढ़ शासन
संयोजक श्री उजियार सिंह पवार अध्यक्ष राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ रहटादाह
स्थान - इनडोर स्टेडियम रायपुर

14 मई 2011

       केन्द्रीय कार्यकारिणी एवं केन्द्रीय  निर्णायक समिति की संयुक्त बैठक
महासभा की केन्द्रीय कार्यकारिणी एवं केन्द्रीय निर्णायक समिति की संयुक्त बैठक   दुर्ग में श्री उजियार सिंह पवार अध्यक्ष महासभा की अध्यक्षता में रखी गई है .
दिनांक  - 
22  मई 2011
दिन     -  रविवार
स्थान  - महाराणा प्रताप मंगल भवन एवं छात्रावास शंकर नगर दुर्ग
समय - दोपहर 12 बजे
बैठक की सूचना एवं कार्यसूची सभी
केन्द्रीय कार्यकारिणी एवं केन्द्रीय निर्णायक समिति के सदस्यों तथा उपसमिति के अध्यक्षों एवं सचिवो को पृथक से भेजी जा चुकी है .
14 मई 2011             

                          केन्द्रीय निर्णायक समिति की बैठक
महासभा के केन्द्रीय निर्णायक  समिति की बैठक माननीय श्री उदय सिंह  वरिष्ठ उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में धमतरी में संपन्न होगी .
दिनांक  -  29  मई 2011
दिन     -  रविवार
स्थान  -गुजराती  भवन देवश्री टाकिज रोड बनिया पारा धमतरी
समय - दोपहर 12 बजे 
बैठक  की सूचना  एवं विषय सूचि
सभी केन्द्रीय निर्णायक समिति के सदस्यों एवं उपसमिति के अध्यक्षों को पृथक से भेजी जा चुकी है .
13 मई 2011

                आदर्श सामूहिक विवाह राजनांदगाँव 14 जून 2011
आदर्श सामूहिक विवाह राजनांदगाँव 14 जून 2011 आयोजन के संबंध में उपसमिति राजनांदगाँव के  कार्यकारिणी समिति , महिला मंडल एवं युवा मंडल की आवश्यक बैठक 15 मई 2011  को महाराणा प्रताप मंगल भवन चिखली में प्रात : 9 .30 बजे से रखी गई है .

महासभा की वर्ष 2011 - 2012 में प्रस्तावित   बैठक एवं कार्यक्रम  की सूची
क्र.     बैठक  / कार्यक्रम विवरण        दिनांक                       स्थान

1 .    सामूहिक विवाह समारोह               11 . 05 . 2011           तुला  राम आर्य क. महा . दुर्ग
2 .    केन्द्रीय कार्यकारिणी एवं निर्णायक  22 . 05 . 2011           महाराणा प्रताप भवन दुर्ग
        समिति  की संयुक्त बैठक

3 . केन्द्रीय निर्णायक समिति की बैठक    29 . 05 . 2011             धमतरी
4 . प्रदेश स्तरीय महाराणा प्रताप जयंती 05 . 06 . 2011             रायपुर
 
5 . सामूहिक विवाह समारोह                14. 06 . 2011              महाजन बाड़ी राजनादगाँव
 
6 . केन्द्रीय कार्यकारिणी एवं रायपुर      21. 08 . 2011             रायपुर जोन
      जोन की संयुक्त बैठक
7 .  केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति           09. 10 . 2011              धमधा  / बेरला
8 .  केन्द्रीय निर्णायक समिति की बैठक  13 . 11 . 2011              भिलाई
9 . केन्द्रीय कार्यकारिणी एवं रायपुर     25. 12 . 2011               राजिम 
     जोन की संयुक्त बैठक
10 . 48 वाँ वार्षिक अधिवेशन              फरवरी 2012                 रायपुर जोन
11 . केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक 48 वाँ वार्षिक अधिवेशन  स्थल में प्रथम दिवस रात्रि 9 बजे
 
नोट :-              1 .   यह सूची अनंतिम है , परिस्थितिवश स्थान / तिथि परिवर्तिनिय है .
                        2 .  क्रमांक 6 , 9 एवं 10  में स्थान रिक्त है , इच्छुक उपसमिति से प्रस्ताव अपेक्षित  है .
                        3 . बैठक की विषय सूची बैठक तिथि के पूर्व प्रेषित की जावेगी .
                        4 . उपसमितियों से वार्षिक बैठक एवं कार्यक्रम की सूचि अपेक्षित है .


02 मई 2011

महिला मंडल उपसमिति राजनांदगाँव के द्वारा आगामी 14 जून 2011 को उपसमिति राजनांदगाँव में आदर्श  सामूहिक विवाह का आयोजन किया जा रहा है . विस्तृत जानकारी के लिए महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती नर्बदा ठाकुर , श्री रामसेवक सिंह अध्यक्ष उपसमिति , श्री लोकेन्द्र भुवाल सचिव से संपर्क करे .
स्थान :- महाजन बाड़ी राजनांदगाँव
आयोजक  :- महिला मंडल उपसमिति राजनांदगाँव

24 अप्रेल 2011
आज से ठीक एक वर्ष पूर्व महासभा के 46 वां अधिवेशन स्थल डोंगरगाँव में वेब साईट का विधिवत शुभारम्भ किया गया . तब से अब तक वेब साईट के निरंतर विकास एवं आवश्यकतानुसार परिवर्तन एवं परिवर्धन का लगातार प्रयास जारी रखा गया है .   वेबसाईट में  हमने महासभा के गठन से लेकर वर्तमान तक के सभी पदाधिकारियों की जानकारी , संविधान का निर्माण , उद्देश्य  , प्रथम संशोधित संविधान को यथावत प्रस्तुत किया  है . साथ ही वेब साईट में आधुनिक परिवेश में उपयोगिता को देखते हुए समाचार पत्र , ब्लॉग , इवेंट्स , सदस्यता आदि उपलब्ध कराया है . वेबसाईट में  महासभा की सभी बैठकों , सभाओं एवं विभिन्न घटनाओं की जानकारी के  साथ ही उपसमिति से लेकर देश - विदेश की महत्वपूर्ण घटनाओं को तत्काल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है . वेबसाईट में शीघ्र विज्ञापन प्रकाशन का कार्य भी प्रारम्भ किया जाना प्रस्तावित है , जिसके लिए प्रयास जारी है . समाज के ब्यावसायियो  को अपने ब्यवसाय , उद्योग की सफलता एवं विकास के लिए एक अच्छा मंच देने का प्रयास किया जावेगा . समय समय पर रोचक , शिक्षा प्रद   जानकारी दी जाती है . हम आपसे आग्रह करते है  की महासभा के वेबसाईट से अपने साथ अपने नजदीकीयो को भी जोड़ने का प्रयास करे . साथ ही वेबसाईट को और अधिक रोचक एवं शिक्षा प्रद बनाने में अपना अमूल्य   सहयोग एवं योगदान देवे , हमें आपके सुझाव का भी इंतजार रहेगा . महासभा के द्वारा वर्तमान संविधान में द्वितीय संशोधन के पश्चात पुन : संशोधन की आवश्यकता महसूस किया जा  रहा  है , तदनुसार सभी उप समितियों को द्वितीय संशोधित संविधान की प्रतिलिपि भेजी जा चुकी है एवं उपसमिति के जो भी सदस्य संविधान की किसी भी धारा , उप धारा में कोई सुधार , संशोधन चाहते है तो अपना सुझाव  एवं संशोधन को महासभा के अध्यक्ष को भेज सकते है .

11 अप्रेल 2011

संविधान संशोधन  विचार आमंत्रित
संविधान का निर्माण सर्व प्रथम 26  फरवरी 1969  को किया गया था . संविधान में28 अगस्त 1998 को 
प्रथम संशोधन किया गया था जिसे वेबसाईट में यथावत प्रकाशित किया  है    देखे   constitution . संविधान संशोधन समिति के द्वारा 27 जनवरी 2007 को संविधान में द्वितीय संशोधन  किया गया है .द्वितिय  संशोधन  में जिन धाराओ , उप धाराओ में संशोधन / सुधार किया गया  अथवा नया धारा / उप धारा जोड़ा गया है उन अंशो को  यहाँ प्रकाशित किया  गया है .------

संविधान में द्वितीय संशोधन
महासभा के संविधान का निर्माण 26 फरवरी 1969  को किया गया तत्पश्चात 28 अगस्त 1998 को प्रथम संशोधन  किया गया जिसका वेबसाईट में प्रकाशन किया गया है , संविधान के अध्ययन के लिए वेबसाईट के  constitution  में जाकर देखे . पुन: संविधान संशोधन समिति  के द्वारा 27 जनवरी  2007 को संशोधन किया गया . द्वितीय संशोधन में जिस धारा / उप धारा में परिवर्तन / संशोधन किया गया है . उन धारा / उपधाराओ का यहाँ उल्लेख कर रहे है. महासभा के द्वारा सभी उपसमितियों को संशोधित संविधान की प्रतिलिपि भेजी गई है .  जहा सभी सदस्य  अवलोकन कर अपने विचार अथवा ,  संशोधन लिखित में अध्यक्ष महासभा को भेज सकते है .  द्वितीय संशोधन में किये गए परिवर्तन को बड़े एवं  मोटे अक्षर से उल्लेखित कर रहे है .
धारा 06 के  उप धारा 3 , 4 , 5 , एवं 6 में निम्नानुसार कुछ अंश शामिल किया गया है .
  उपधारा (3) शैक्षणिक विकास :- अज्ञान अन्धकार है . समाज में सद विद्या की व्यवस्था करना , होनहार छात्राओं को छात्रवृति देना . बोर्ड की परीक्षाओ में प्रावीण्य सूचि में आने वाले को तथा विश्व-विद्यालय परीक्षा में प्रथम श्रेणी प्राप्त करने वाले छात्र - छात्राओ को सम्मानित करना . शिक्षा के विकास के लिए शैक्षणिक संस्थाए खोलना एवं संचालन करना .औपचारिक शिक्षण संस्थाओं , विद्यालयो , महाविध्यालायो  आदि की स्थापना करना . तकनीकी , ब्यवसायिक  तथा औद्योगिक शिक्षण / प्रशिक्षण संस्थाओं की स्थापना करना

     उपधारा (4) सांस्कृतिक विकास :- समाज का रहन-सहन , आचार - विचार , कला कौशल,एवं आमोद प्रमोद इस प्रकार हो की समाज के दुर्गुण दूर होकर स्वस्थ परम्परा का निर्माण हो सके . साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना और अच्छे साहित्य का प्रकाशन करना .
   
उपधारा (5) आर्थिक विकास :- भौतिकवादी वैज्ञानिक युग में आर्थिक विकास समस्त विकास की आधारशिला है . बेरोजगारी दूर करना तथा आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वतंत्र रोजगार के अवसर जुटाने का प्रयास करना
  
   उपधारा (6) राष्ट्रीयता :- ब्यक्ति पहले राष्ट्र की संपत्ति है अत: राष्ट्र हित ब्याक्तिगत तथा सामाजिक हित से श्रेष्ठ है . समाज में राष्ट्र प्रेम तथा भातृत्व भावना का विकास करना . इस हेतु सक्रीय राजनैतिक चेतना जागृत करना . समाज को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करना

धारा 7  के उपधारा 3 में सदस्यता शुल्क अब वर्त्तमान में 10 / रुपया कर दिया गया है .
उप धारा (3) सामान्य सदस्यता के लिए 5/- मात्र वार्षिक शुल्क लिया जावेगा . परन्तु केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति समय-समय पर सदस्यता शुल्क में संशोधन कर सकेगी .
उप धारा (6)  केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति के पदाधिकारियों के चुनाव के लिए समस्त क्षेत्रीय उप समितियों के निर्वाचित पदाधिकारी गण मतदाता होंगे
धारा 08  के उपधारा 01
   उप धारा (1)  केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति के निम्न लिखित पदाधिकारी होंगे .  अध्यक्ष , वरिष्ठ  उपाध्यक्ष ,उपाध्यक्ष ,महासचिव , सहसचिव , उप सचिव ,संगठन सचिव , प्रचार सचिव , कोषाध्यक्ष तथा प्रत्येक उपसमिति से एक निर्वाचित प्रतिनिधि सदस्य होंगे इनके अतिरिक्त पिछले अनुभव तथा सेवाओं के आधार पर अध्यक्ष द्वारा  केन्द्रीय कार्यकारिणी की अनुशंसा पर मनोनीत चार सदस्य होंगे जिसमे से एक महिला होगी . मनोनीत सदस्यों की संख्या में वृद्धि या कमी करने का अधिकार केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति को होगा .
  धारा (10 )          निर्वाचन प्रक्रिया :-  उपधारा 3  एवं  उपधारा 7
उप धारा (3 ) निर्वाचक मंडल का सदस्य केन्द्रीय  पदाधिकारी पद के लिए उम्मीदवार नहीं हो सकता . गठन से पूर्व सदस्यों से अभिस्वीकृति केन्द्रीय कार्यकारिणी समीती  को प्राप्त  करनी होगी एवं नामजद की भी पात्रता नहीं होगी .
  उप धारा (7) संस्थापक समिति के सदस्य आजीवन सम्मानीय सदस्य होंगे .केन्द्रीय कार्यकारिणी एवं केन्द्रीय निर्णायक समिति की बैठक में इन्हें आमंत्रित करना होगा .
       धारा ( 11 )  निर्णायक समिति :-
      
उप धारा(1 ) सामाजिक विवादो के  निपटारे के लिए एक निर्णायक समिति का गठन किया जावेगा जिसमे केन्द्रीय पदाधिकारी गण प्रत्येक उप समिति के एक एक निर्वाचित प्रतिनिधि तथा अध्यक्ष द्वारा केन्द्रीय कार्यकारिणी  समिति  की अनुशंसा पर मनोनीत चार सदस्य होंगे जिसमे से एक महिला होगी .
        
उप धारा(3 ) वरिष्ठ उपाध्यक्ष इस समिति का अध्यक्ष होगा इनका कार्यकाल 3 वर्ष का होगा . वरिष्ठ उपाध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष के द्वारा बैठक की अध्यक्षता की जावेगी

उपधारा ( 4 ) निर्णायक समिति समाज का एक न्यायालय है इसलिए इसकी गरिमा एवं गंभीरता को बनाए रखने के लिए जब भी निर्णायक समिति की बैठक हो वहा निर्णायक समिति के पदाधिकारी एवं सदस्यों को छोड़कर कोई भी अन्य ब्यक्ति उपस्थित न हो और पक्षकारो को उनके प्रकरण आने पर एवं बुलाये जाए पर ही प्रवेश दिया जावेगा .

उपधारा ( 5 ) किसी विषय पर निर्णय करते समय सहमती एवं असहमति ब्यक्त करने वाले सदस्यों के हां या नहीं में लिपिबद्ध किया जावे एवं उनका हस्ताक्षर लिया जावे .

उपधारा ( 6 ) जांच समिति के सदस्यों की नियुक्ति निर्णायक समिति के सदस्यों के बहुमत के आधार पर किया जावे .

धारा ( 12 ) अध्यक्ष का अधिकार व कर्तब्य :- उप धारा (4) , (6), (7),(8) ,(11),(12),(13)
   

     
उप धारा(4) निर्णायक समिति के निर्णयों को अपनी स्वीकृति देगा किन्तु आवश्यक होने पर किसी निर्णय पर पुनर्विचार के लिए निर्णायक समिति के पास वापस भेज सकता है .पुनर्विचार के बाद लिया गया निर्णय अध्यक्ष को मान्य होगा . निर्णायक समिति के निर्णय के विरुद्ध आवेदक यदि अपील करना चाहता है तो आवेदन के साथ एक माह के अंदर रु . 500 / कोषाध्यक्ष के पास जमा कर रसीद की छाया प्रति आवेदन पत्र के साथ संलग्न करे .
   

     
उप धारा (6) महासभा के कोष से कोषाध्यक्ष का महासचिव के साथ संयुक्त हस्ताक्षर से 10000 .00  दस हजार तक राशि निकाल सकेगा . इससे अधिक की राशि निकालने के लिए कार्यकारिणी की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी .
     
उप धारा (7) केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति या महासभा की बैठक में किसी सदस्य या ब्यक्ति का ब्यवहार अशोभनीय / आपत्तिजनक पाया गया तो अध्यक्ष उसे वहां से उठाकर जाने के लिए कह सकता है.
     
उप धारा (8) केन्द्रीय निर्णायक समिति तथा कार्यकारिणी समिति में चार चार सदस्य मनोनीत कर सकता जिसमे एक - एक महिला प्रतिनिधि होगी .चार - चार सदस्य कार्यकारिणी के सदस्यों की सहमति पर ही मनोनीत कर सकता है .
    

      उप धारा (11) दो  हजार रुपये तक खर्च की स्वीकृति प्रदान करेगा . इससे अधिक की राशि खर्च करने के लिए कार्यकारिणी की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी .
      उप धारा (12) किसी अपरिहार्य कारणों से किसी क्षेत्रीय समिति के भंग होने पर उसके स्थान पर तदर्थ समिति गठित कर सकेगा . तदर्थ समिति का गठन दो माह के अंदर होना चाहिए   .
      उप धारा (13) केन्द्रीय कार्यकारिणी  समिति महासभा के वार्षिक  आय - ब्याय के लेखा परिक्षण हेतु  समाज के तिन सक्षम ब्यक्तियो को आतंरिक अंकेक्षण हेतु नियुक्त करेगी तथा 31 मार्च की स्थिति में 30 अप्रेल तक प्रतिवर्ष परिक्षण कराएगी तथा चार्टर्ड एकाउंटेट द्वारा भी प्रतिवर्ष परिक्षण करवाकर उसकी प्रति पंजीयक छत्तीसगढ़ फार्म एवं सोसायटी को भेजेगी .
उपसमितियों के आय- ब्यय के परिक्षण हेतु प्रतिवर्ष केंद्र द्वारा निर्धारित प्रपत्र तैयार किया जावेगा . 31 मार्च की स्थिति में 30 अप्रेल तक एक उपसमिति के कोषाध्यक्ष एवं सचिव द्वारा दूसरी उपसमिति में भेजकर परिक्षण करवाएगा एवं 15 मई तक प्रतिवेदन केन्द्रीय कोषाध्यक्ष को प्रेषित करेगा .
      धारा (13)   उपाध्यक्ष के अधिकार और कर्तब्य :- उप धारा (4), ( 5 )

      उप धारा (4)  उपाध्यक्ष  को अध्यक्ष एवं  वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनुपस्थिति में सम्पूर्ण अधिकार प्राप्त होंगे .
      उप धारा ( 5 ) उपाध्यक्ष  को धारा 20 के अंतर्गत आने वाले केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति के अधिकार एवं कर्तब्य के निष्पादन के लिए समस्त संगठनात्मक तथा रचनात्मक कार्य सहसचिव तथा संगठन सचिव के सहयोग एवं अध्यक्ष के मार्ग दर्शन में संपादित करेगा
      धारा  14   महासचिव के अधिकार व कर्तब्य :- उप धारा (5 ) ,(6 )

      उप धारा (5 ) महासभा द्वारा पारित संकल्पों प्रस्तावों तथा आदेशो का पालन करना तथा कराना ,एवं संबंधित सदस्यों तथा उपसमिति को सभा की कार्यवाही का विवरण 15 दिनों के अन्दर भेजना
      उप धारा (6 ) महासभा के कोष से  रु. 2000 . 00  दो  हजार अग्रिम ले सकता है  तथा स्व विवेक से रु. 500 .00  ब्यय कर सकता है . इससे अधिक खर्च के लिए पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी .
     धारा   15   सहसचिव के अधिकार और कर्तब्य :- उप धारा ( 1 )

     उप धारा ( 1 ) अध्यक्ष के अनुमति से केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति से संबंधित रिपोर्ट तैयार करना एवं महासचिव के कार्यो में सहयोग प्रदान करना .
        धारा  16   उपसचिव के अधिकार और कर्तब्य :-
उप धारा ( 2 )
     
उप धारा ( 2 ) बैठक  में उपस्थिति पंजी तथा सदस्यों की राय जो निर्णय के आधार बनते  है , संक्षिप्त विवरण तैयार लरना .
     धारा   17    संगठन सचिव के कर्तब्य :- उप धारा ( 3) ,(4 )
    उप धारा ( 3)  उप समितियों  की सदस्यता बढाने , साहित्यिक , सांस्कृतिक एवं क्रीडा के कार्यक्रम उप समितियों में आयोजित करना , महिला मंडल एवं युवा मंडल को सक्रीय करना .

    उपधारा (4 ) केन्द्रीय कार्यकारिणी एवं निर्णायक समिति के बैठक में संबंधित सदस्य ही उपस्थित रहे इसकी ब्यवस्था करना .

       धारा   18   प्रचार सचिव के दायित्व :-  उपधारा (2 )
              उपधारा (2 ) राष्ट्रीय स्टार पर अपने महासभा के क्रिया कलापों का प्रचार एवं प्रसार करेगा तथा  अन्य राजपूत संगठनो से भी संपर्क करने का प्रयास करना , तथा उनकी विभिन्न मान्यताओ एवं क्रियाकलापों तथा सामाजिक गतिविधियों की जानकारी प्राप्त करना .
    धारा   19  कोषाध्यक्ष के अधिकार और कर्तब्य :- उप धारा ( 3 )  ,  ( 5 ),  (6 ) , (7 ), (8 ) ,(9 )
     उप धारा ( 3 )  अध्यक्ष या महासचिव के साथ संयुक्त हस्ताक्षर से महासभा के कोष से राशि निकालना . एक बार में रु. 10000 .00   दस  हजार रुपये तक निकाला जा सकता है , इससे अधिक की राशि निकालने के लिए केन्द्रीय कार्य कारिणी की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी .
     उप धारा ( 5 ) केन्द्रीय कोषाध्यक्ष , महासचिव को महासभा के कोष का छै:मासिक विवरण देगा .
     उप धारा (6 ) महासभा के केन्द्रीय कोष का  वार्षिक आंतरिक अंकेक्षण ( आडिट ) कराना अनिवार्य होगा तथा प्राप्त आपत्तियों का निराकरण वार्षिक अधिवेशन के पूर्व कराना अनिवार्य होगा
     उप धारा (7 )उपसमिति के आय - ब्यय का वार्षिक अंकेक्षण ( आडिट ) कराना  होगा .
     उप धारा (8 ) उपसमितियों के अंकेक्षण कराने के नियमो का निर्धारण करेगा .
     उप धारा (9 ) महासभा के आय - ब्यय के एनी श्रोत जैसे भवन , दूकान का आडिट करा सकेगा . 
      धारा   20   केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति के अधिकार और कर्तब्य :- उप धारा ( 6 )( 8 )(11 ) (12 ) उप धारा (16)  से उप धारा (22)  नया जोड़ा गया है

      उप धारा ( 6 ) निर्णायक समिति द्वारा किसी सदस्य का आचरण भ्रष्ट साबित होने पर उसे  पद मुक्त कर सकती है एवं आगामी कार्यकाल तक पदाधिकारी होने से रोक सकती है.
      उप धारा ( 8 ) किसी मद में रु. 10000 .00   दस    हजार रुपये से अधिक की राशि खर्च करने की  अध्यक्ष को अनुमति देगी .
      उप धारा (11 ) महासभा के केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति ,निर्णायक समितियो  , क्षेत्रीय उपसमिति के किसी पदाधिकारी का आचरण संविधान , सामाजिक हित का अनुशासन के विरुद्ध होने  पर पदमुक्त कर सकेगी .
      उप धारा (12 ) आतंरिक अंकेषण हेतु न्यूनतम तीन अंकेक्षक  -गणों की नियुक्ति करेगी एवं उनकी कार्यप्रणाली तय करेगी .
  
       उप धारा (16)  संविधान की धारा 6 में वर्णित आदर्श ( लक्ष्य ) की प्राप्ति एवं सामाजिक विकास को गति प्रदान करने पांच विभिन्न समितियों का गठन करेगी , जो निम्नानुसार है -  ( 1 ) शिक्षा विकास समिति , ( 2 ) स्वास्थ विकास समिति , ( 3 ) महाराणा प्रताप साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिषद् , ( 4 ) उद्योग एवं ब्यवसाय विकास समिति , ( 5 ) नवयुवक मंडल विकास समिति

   उप धारा (17) प्रत्येक विकास समिति के निम्नलिखित पदाधिकारी गण प्रभारी होंगे

            ( 1 ) शिक्षा विकास समिति में                                                  - केन्द्रीय उपाध्यक्ष

            ( 2 ) स्वास्थ विकास समिति में                                               - केन्द्रीय सहसचिव

           ( 3 ) महाराणा प्रताप साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिषद्          - केन्द्रीय प्रचार सचिव

           ( 4 ) उद्योग एवं ब्यवसाय विकास समिति                                - केन्द्रीय उपसचिव

           ( 5 ) नवयुवक मंडल विकास समिति                                       - केन्द्रीय संगठन सचिव

    उप धारा (18)  प्रत्येक विकास समिति के न्यूनतम 6  सदस्य  होंगे जो केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्यों में से मनोनीत किए जायेंगे .

    उप धारा (19) विकास समितियां अपने विषय से संबंधित कार्य योजना तैयार करेंगी और स्वीकृति हेतु केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति के पास भेजेगी . स्विक्र्यती मिलाने के पश्चात कार्य करेगी .

   उप धारा (20) विकास समिति के प्रभारी / अध्यक्ष गण महासभा के वार्षिक अधिवेशन में अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे .

   उप धारा (21) महासभा का कार्यक्षेत्र सभी उपसमितियों में विभाजित है जो पांच जोनो में बांटे गए है , जों प्रभारी अपने उपसमितियों का वार्षिक प्रतिवेदन महासभा के वार्षिक अधिवेशन के पूर्व प्राप्त कर लेंगे और अपना प्रतिवेदन महासभा के वार्षिक अधिवेशन में प्रस्तुत करेंगे .

उप धारा (22) उपसमितियों के वार्षिक प्रतिवेदन के लिए एक प्रारूप केन्द्रीय कार्यकारिणी  समिति द्वारा स्वीकृत करेगा और वह प्रारूप उपसमितियों के पास नामुनार्थ भेजेगा . उपसमितिया उसी प्रारूप में अपना वार्षिक प्रतिवेदन अपने जों प्रभारी के पास प्रस्तुत करेंगे .

      धारा    21  निर्णायक समिति के अधिकार   उप धारा ( 1 ), ( 1 0) नया जोड़ा गया

       उप धारा ( 1 ) विवाह , मृत्यु तथा आचरण संबंधी विवादों से संबंधित प्राप्त आवेदनों को जांच हेतु संबंधित उप समिति में भेज सकेगी . सदस्यता संबंधी विवाद में सभी नियमो का पालन करते हुए निर्णय लेगी .
       उप धारा (10)  सामाजिक सदस्यता प्राप्ति के लिए कोई एसा आवेदन आता है जो अभी तक हमारे समाज के सदस्य नहीं है , इसे प्रकरणों पर केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति द्वारा लिए गए पूर्व निर्णयो के आधार पर ही निर्णायक समिति निर्णय लेगी . इस प्रकार के प्रकरण सीधे केंद्र में स्वीकार किए जायेंगे .

       धारा    22   सभा संचालन एवं सामान्य नियम :- उप धारा  (5) , (8)  , ( 12 ),  ( 16),  ( 19) , ( 22)
       उप धारा  (5) केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति तथा निर्णायक समिति को भेजे  जाने वाले सुझाव , प्रस्ताव , अर्जी या शिकायत अध्यक्ष को संबोधित होंगे .
       उप धारा (8) अपील या शिकायत करने वाले को अपने लिखित पत्र के साथ 100 /  ( सौ रुपये ) आवेदन शुल्क कोषाध्यक्ष के पास जमा करना होगा . केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति आवश्यकतानुसार इसमे परिवर्तन कर सकेगी .
      उप धारा ( 12 ) अध्यक्ष का अपमान गंभीर अपराध माना जावेगा तथा उस पर निर्णायक समिति विचार कर निर्णय ले सकती है , इस तरह का ब्यवहार करने वाला ब्यक्ति किसी क्षेत्रीय उप समिति या समिति का पदाधिकारी बनने की पात्रता खो देगा . केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति चाहे तो एक अवधि निश्चित कर ऐसे सदस्यों की सदस्यता निलंबित कर सकता है .
       उप धारा ( 16)  महासभा या समिति के किसी भी कार्यवाही को किसी पत्र पत्रिका में अध्यक्ष की बिना अनुमति के प्रकाशित होने पर अध्यक्ष जिम्मेदार नहीं होगा . ऐसे गैर जिम्मेदार सदस्य के विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति द्वारा की जावेगी.
       उप धारा ( 19) महासभा को प्राप्त होने वाले किसी भी प्रकार की रकम लेने पर देने वाले को अधिकृत रसीद देनी होगी .
       उप धारा ( 22) महासभा द्वारा किसी भी मद में प्राप्त सम्पूर्ण राशि किसी राष्ट्रीयकृत  बैंक में जमा किया जावेगा .
       धारा    23  गणपूर्ति ( कोरम ) :- उप धारा ( 1) , ( 2) ,  ( 3)
       उप धारा ( 1) केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति के समस्त पदाधिकारियों की कुल सदस्यों की 50 प्रतिशत उपस्थिति होने पर गणपूर्ति  मानी जावेगी . कम होने पर बैठक स्थगित हो जावेगी .गणपूर्ति केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्यों की उपस्थिति  को ही मानी जावेगी . कम होने पर बैठक स्थगित हो जावेगी .
       उप धारा ( 2) निर्णायक समिति के कुल सदस्यों की 50 प्रतिशत उपस्थित होने पर  गणपूर्ति  मानी जावेगी . कम होने पर बैठक स्थगित हो जावेगी ..गणपूर्ति केन्द्रीय निर्णायक सदस्यों की उपस्थिति  को ही मानी जावेगी . कम होने पर बैठक स्थगित हो जावेगी .
       उप धारा ( 3) महासभा की बैठक में केन्द्रीय पदाधिकारी एवं समस्त क्षेत्रीय उपसमितियों के पदाधिकारियों के दो तिहाई उपस्थिति में गणपूर्ति  मानी जावेगी. यदि बैठक का कोरम पूर्ण नहीं होता तो बैठक 1 घंटे के लिए स्थगित की जाकर उसी स्थान पर उसी दिन पुन: की जा  सकेगी ,जिसके लिए  गणपूर्ति  (कोरम)  का कोई शर्त नहीं होगी .
       धारा    25  महासभा की संपत्ति  और उसकी ब्यवस्था :- उप धारा ( 2),  (3) नया जोड़ा गया
              उप धारा ( 2)  यदि महासभा का समापन या विघटन होता है तो उस परिस्थिति में सभी ऋणों या दायित्वों का भुगतान करने के पश्चात भी कोई संपत्ति चाहे वह कुछ भी हो बच जावे तो उसे महासभा के सदस्यों को वितरित नहीं की जावेगी . किन्तु उसके संबंध में कार्यवाही छ.ग. समिति पंजीयन अधिनियम 1973 एव 1998  के अंतर्गत की जावेगी .

  उप धारा (3) महासभा को जो भी चल या अचल संपत्ति जहा से प्राप्त हो और जहा भी स्थित  हो वह पूर्णतया महासभा की संपत्ति कहलाएगी . संपत्ति / भवन के निर्माण  एवं ब्यवस्था के लिए पृथक ब्यवस्था ( समिति ) जो निर्मित होगी . सामयिक होते हुए उपसमिति के अधीन होगी .

       धारा    26  संवैधानिक विवादों का निपटारा :-
               इस संविधान की किसी धारा या उपधारा की परिभाषा संबंधी या अन्य किसी प्रकार का कोई विवाद उत्पन्न होता है तो श्रीमान पंजीयक फर्म्स एवं संस्थाए छत्तीसगढ़ रायपुर का निर्णय अंतिम रूप से मान्य होगा .
       धारा    30   महासभा के इस संविधान की धाराओं की प्रतियां प्रमाणित है जैसा की छ.ग.समिति पंजीयन अधिनियम 1973  ( 1960  का ) क्रमांक 1 की धारा 5 की उप धारा 2  के अधीन अपेक्षित है .एवं नियम 1998  के   अधीन अपेक्षित है जो अधिसूचना क्रमांक 293/ 2000 दिनांक 25.04. 2001 द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में प्रवृत हो गयी है .

                                                       -:  खंड 2  :-
                                                     निर्वाचन प्रक्रिया
                                                            भाग   1
     संविधान की धारा  -09  एवं धारा  -10  के अनुसार केन्द्रीय पदाधिकारीयो की चुनाव प्रक्रिया
धारा 01 :- निर्वाचन मंडल का गठन
उपधारा 01 :- संविधान की धारा  -10   उप धारा 02 के अनुसार निर्वाचक मंडल में तिन सदस्य होंगे इनमे से एक मुख्य निर्वाचन एवं दो सहायक निर्वाचन अधिकारी होंगे . इनका कार्यकाल तिन वर्षो का होगा .
उपधारा 02 :- केन्द्रीय पदाधिकारियों के निर्वाचन मंडल का गठन केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति द्वारा किया जावेगा . चुनाव प्रक्रिया के लिए केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति नियमावली बनाएगी .
उपधारा 03 :- निर्वाचक मंडल के सदस्य केन्द्रीय पदाधिकारी पद के लिए उम्मीदवार नहीं हो सकता . इस बात की लिखित घोषणा उसे देनी होगी तथा उन्हें नामजद होने की पात्रता नहीं होगी . गठन के पूर्व सदस्यों से अभिस्वीकृति केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति को प्राप्त करनी  होगी .
उपधारा 04 :-निर्वाचक मंडल के सदस्यों की आयु 35   (पैंतीस ) वर्ष से कम नहीं होगी तथा शैक्षणिक योग्यता स्नातक से कम नहीं होगी .
उपधारा 05 :- निर्वाचक मंडल के सदस्य निर्वाचन काल में तथा अपने तिन वर्ष के कार्यकाल में निष्पक्ष रहेंगे . चुनाव प्रक्रिया से प्रारंभ होकर चुनाव परिणाम निकलते तक तथा तिन वर्ष के कार्यकाल में क्घुनाव संबंधी संदर्भ आने पर निर्वाचक मंडल का निर्णय अंतिम व मानी होगा .
उपधारा 06:-  निर्वाचन तिथि के 15 दिन पूर्व या केन्द्रीय कार्यकारिणी द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार निश्चित स्थान एवं समय पर निर्वाचक मंडल प्रत्याशियों से आवेदन पत्र स्वीकार कर सकेंगे .
उपधारा 07:-  प्रत्याशियों से आवेदन पत्र करना , सूक्ष्म जांच करना तथा प्रत्याशियों की अंतिम सूचि का प्रकाशन एक दिन में पूरा करना होगा .
उपधारा 08:-  आवेदन पत्र प्राप्त करने के दिन अंतिम सूचि प्रकाशन तक की संपूर्ण प्रक्रियाओं का समय आदि आवेदन प्राप्त करने के पूर्व लिखित रूप में विज्ञापित करना होगा .
उपधारा 09:-  प्रत्याशियों को अपना आवेदन निर्धारित प्रपत्र में तथा 100  ( सौ ) रुपया अमानत राशि के साथ नियत दिनांक को स्वयम उपस्थित होकर या प्रस्तावक या समर्थक द्वारा मुख्य निर्वाचन अधिकारी को प्रस्तुत करना होगा .  ( प्रारूप संलग्न )
उपधारा 10:- आवेदन में अमानत राशि जमा करने की रसीद क्रमांक तथा सक्रीय सदस्यता संबंधी प्रमाण पत्र एवं केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति द्वारा इस संदर्भ में लिए गए निर्णय आदि का पालन करते हुए प्रमाण भी देना होगा .
उपधारा 11:-  आवेदक को इस बात की घोषणा करनी होगी की प्रत्याशी किसी प्रकार के मादक वास्तु का सेवन नहीं करेगा .
उपधारा 12:-  निर्वाचक मंडल निर्वाचित प्रत्याशियों को निर्धारित प्रारूप में प्रमाण पत्र देगा . प्रामन पत्र में निर्वाचक मंडल के सभी सदस्यों का हस्ताक्षर एवं दिनांक  रहेगा .
                                          धारा -  02 पदाधिकारियों की योग्यता
उपधारा 01:-  महासभा का कोई भी सक्रीय सदस्य जिसकी आयु 35 वर्ष दसे कम न हो तथा किसी क्षेत्रीय उपसमिति या केन्द्रीय समिति का कम से कम एक कार्यकाल तक पदाधिकारी रहा हो तथा प्रत्याशी होने के ठीक पहले पदाधिकारी रहा हो तथा प्रत्याशी होने के ठीक पहले लगातार एक कार्यकाल तक अनिवार्यतः सक्रीय सदस्य रहा हो , अध्यक्ष , वरिष्ठ उपाध्यक्ष , उपाध्यक्ष  तथा महासचिव पद का उम्मीदवार हो सकेगा . उपधारा 02 :- कोषाध्यक्ष , सहसचिव, प्रचार सचिव,संगठन सचिव तथा उप सचिव के लिए प्रत्याशी होने के ठीक पहले एक कार्यकाल तक सक्रीय सदस्य रहना आवश्यक है .
उपधारा 03 :- कोई भी उम्मीदवार एक से अधिक पद के लिए प्रत्याशी नहीं हो सकता .
उपधारा 04 :- यदि कोई प्रत्याशी केन्द्रीय पदाधिकारियों के किसी पद पर निर्वाचित हो जाता है तथा निर्वाचित ब्यक्ति किसी उप समिति का पदाधिकारी है इसी स्थिति में उप समिति का पद रिक्त माना जाएगा .
 उपधारा 05 :- केन्द्रीय पदाधिकारियों के निर्वाचन हेतु प्रकाशित मतदाता सूची में प्रत्याशी का नाम होना चाहिए .
 उपधारा 06 :- प्रकाशित मतदाता सूची के दो मतदाता संबंधित उपसमिति से प्रस्तावक एवं समर्थक के रूप में प्रत्याशी के आवेदन पात्र में हस्ताक्षर करेंगे .
 उपधारा 07 :- मतदाता जो किसी प्रत्याशी का प्रस्तावक या समर्थक है उसी पड़ा के लिए किसी एनी प्रत्याशी का प्रस्तावक या समर्थक नहीं होगा ऐसी त्रुटी पाए जाने पर उनके द्वारा हस्ताक्षरित प्रथम आवेदन पात्र को छोड़कर शेष आवेदन अवैध माने जायेंगे .
 उपधारा 08 :- प्रत्याशियों को केन्द्रीय बैठकों के लिए समय निकालने एवं निष्ठा बनाए रखने बाबत स्पष्ट घोषणा करनी होगी .
                                   धारा - 03  सामान्य प्रक्रिया
उपधारा 01 :- केन्द्रीय पदाधिकारियों का निर्वाचन बहुमत के आधार पर होगा एवं गुप्त मतदान प्रणाली से होगा .
उपधारा 02 :- कुल प्रदत्त मतों के 25 प्रतिशत से कम मत प्राप्त होने पर प्रत्याशी की अमानत राशि राजसात होगी तथा राशि केन्द्रीय कोष में जमा कर दी जावेगी  .
उपधारा 03 :- 25 प्रतिशत से अधिक मत पाने  वाले प्रत्याशीयो की अमानत राशि वापस कर दी जायेगी तथा प्रतिपर्ण पर प्रत्याशी का हस्ताक्षर लिया जावेगा . राशी प्राप्ति का उल्लेख प्रतिपर्ण पर होगा
उपधारा 04 :- निर्वाचक मंडल के द्वारा चुनाव के लिए स्थान , तारीख तथा समय का निर्धारण केन्द्रीय कार्यकारिणी के निर्णय एवं महासचिव के माध्यम से करना होगा .
 उपधारा 05 :-प्रत्याशी की अंतिम सूची के प्रकाशन के बाद आवश्यक संख्या में मतपत्रो की छपाई  का कार्य  निर्वाचक मंडल करेंगे तथा इसका पूर्ण विवरण एक पंजी में रखा जावेगा .
 उपधारा 06 :-मतपत्र में प्रत्याशी का पूरा नाम जो आवेदन पात्र में तथा मतदाता सूची में है लिखा जावेगा तथा यदि निर्वाचक मंडल  आवश्यक समझे तो चुनाव चिन्ह आदि छापे जायेंगे .
उपधारा 07 :- मतपत्र में  प्रत्याशीयो के नाम देवनागरी वर्णमाला के अनुसार होगा
 उपधारा 08 :- निर्वाचक मंडल निर्वाचन तिथि के एक दिन पूर्व मतदान के लिए एनी ब्यवस्था के अतिरिक्त संपूर्ण आवश्यक सामग्री की पूर्ण ब्यवस्था कर लेगा .

04 अप्रेल 2011

    नव वर्ष विक्रम संवत 2068  की बधाई एवं शुभकामनाए

चैत्र  प्रतिपदा से ही हिन्दू नव वर्ष की शुरुआत  होती है . आज के दिन से ही नवगुण संपन्न नवरात्रि भी प्रारम्भ होता है , माता देवालय एवं मंदिर में आज से नव दिन तक विशेस पूजा अर्चना होती है ,  छत्तीसगढ़ में चैत्र  प्रतिपदा से जंवारा बोया जाता है , जिसमे  कुल देवी की विशेस पूजा का महत्त्व होता ,सर्व हिन्दू समाज एवं भारत वाशियों  को बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाए

02 अप्रेल 2011

           सर्व राजपूत समाज का बैठक
            बैठक दिनांक -  3 अप्रेल 2011

            स्थान - ग्राम ठेंगा भाट

           समय 12 बजे दोपहर से

  24 मार्च 2011
केन्द्रीय युवा एवं महिला मंडल का बैठक
स्थान         :-  महाराणा प्रताप भवन शंकर नगर दुर्ग

दिनांक        :-  27 मार्च 2011 

समय         :-  दोपहर १२ बजे से

मुख्य अतिथि   :- श्री उजियार सिंह पवार ( अध्यक्ष महासभा ) 

  उपसमिति  राजनादगाँव  होली मिलन समारोह एवं  सामान्य सभा  की बैठक  27   मार्च  2011 को
      
उप समिति राजनादगाँव की कार्यकारिणी समिति की बैठक दिनांक 13   मार्च   2011 महाराणा प्रताप मंगल भवन चिखली में   संपन्न हुआ . कार्यकारिणी समिति के द्वारा मई / जून 2011 में सामूहिक विवाह आयोजित करने का निर्णय लिया गया .
     कार्यकारिणी समिति के द्वारा सामाजिक सामूहिक विवाह 2011 के आयोजन हेतु दिनांक 27 मार्च 2011 को   उपसमिति की सामान्य सभा  की बैठक  रखी  गई है .  जिसमे 
सामाजिक सामूहिक विवाह 2011  की तिथि , स्वरूप निर्धारण एवं आयोजन स्थल के संबंध में चर्चा  कर निर्णय लिया जावेगा .
      उप समिति राजनादगाँव की होली मिलन समारोह भी संपन्न होगा .

फरवरी पर्व ,  जयंती /  दिवस
  
19 फरवरी 2011    छत्रपति शिवा जी जयंती
   22 फरवरी 2011    मौलाना आजाद दिवस एवं कस्तूरबा गांधी जयंती

   26 फरवरी 2011    वीर सावरकर दिवस

   27 फरवरी 2011    चन्द्रशेखर आजाद दिवस , दयानंद सरस्वती जयंती

   28 फरवरी 2011    डा .राजेन्द्र प्रसाद दिवस ( विज्ञान दिवस )
मार्च
पर्व ,  जयंती /  दिवस
  
02  मार्च 2011      महाशिवरात्रि , बैद्यनाथ जयंती , सरोजनी नायडू दिवस
   04  मार्च 2011      राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस

   06  मार्च 2011      रामकृष्ण परमहंस जयंती

   07  मार्च 2011      पं . गोविन्द वल्लभ पंत दिवस

   08  मार्च  2011     अंतराष्ट्रीय महिला दिवस

   14  मार्च 2011      विकलांग दिवस

   15  मार्च  2011     विश्व उपभोक्ता संरक्षण दिवस

   19  मार्च  2011     होलिका दहन , चैतन्य महा प्रभु  जयंती
      

 47 वें  अधिवेशन पंडरिया

 20 फरवरी 2011
                कार्यक्रम के प्रारम्भ में कृषि , उद्योग , कानून , शिक्षा , प्रतियोगी परीक्षा , कैरियर से संबंधित काउंसलिंग कराया गया , तथा प्रतिभावान छात्र  - छात्राओ को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया .  कार्यक्रम में उपस्थित लोरमी विधायकश्री धर्मजीत सिंह एवं पंडरिया विधायक श्री मोहम्मद अकबर का स्वागत किया गया .  श्री धर्मजीत सिंह विधायक लोरमी ने अपने उद्बोधन में समाज का हर स्तर पर सहयोग करने का आश्वासन दिया .  विशिष्ट अतिथि श्री मोहम्मद अकबर विधायक पंडरिया ने अपने उद्बोधन में राजपूतो की गौरवशाली इतिहास का स्मरण किया , राजपूत कभी किसी से माँगते नहीं और नहीं झुकते है , राजपूत हमेशा अपने पराक्रम के लिए जाने जाते है . माननीय विधायक मोहम्मद अकबर ने कहा कि  किसी प्रकार की मांग नहीं होने पर भी मै राजपूत समाज की सेवा करना चाहता हूँ  तथा पंडरिया में राजपूत समाज के सामाजिक भवन के लिए रु. पांच लाख देने की घोषणा किया . समाज के केन्द्रीय पदाधिकारियों का सम्मान किया गया तथा सहसंयोजक के द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया . अंत में ध्वज अवरोहण के साथ कार्यक्रम समापन की घोषणा की गई . आगामी 48  वां वार्षिक अधिवेशन जोन क्रमांक दो में वर्ष 2012 में आयोजित किया जावेगा .

19 फरवरी 2011 
          सुबह सर्व प्रथम महिलाओं का रंगोली एवं मेहंदी सजाओ प्रतियोगिता , महाराणा प्रताप  क्विज संपन्न हुआ .  दोपहर भोजन पश्चात श्री भूपेन्द्र सिंह मुख्य संयोजक के अगुवाई में विशाल शोभा यात्रा निकाला गया जो पुरे  पंडरिया नगर का भ्रमण कर अधिवेशन स्थल में समाप्त हुआ . पुरे पंडरिया नगर  केशरिया ध्वज  , तोरण  एवं पताको  से सजा हुआ सुंदर दिख रहा है.  खुला मंच में समाज के सामान्य  सदस्यों को अपने विचार को महासभा के सामने रखने का अवसर दिया जाता है , जिसमे अनेक सदस्यों के द्वारा अपना विचार ब्यक्त किया गया . श्री होरी सिंह महासचिव एवं  श्री हीरा सिंह  कोषाध्यक्ष के द्वारा वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया .

ठा.महेश सिंह अध्यक्ष  केन्द्रीय युवा मंडल के द्वारा युवक युवती परिचय सम्मलेन कराया गया . रात्रि में आदर्श विवाह का कार्यक्रम रखा गया जिसमे एक जोड़े परिणय सूत्र में बंधे , आदर्श विवाह के समस्त खर्च को श्री शत्रुहन सिंह  भुवाल दुर्ग के द्वारा वहन कर एक आदर्श मिशाल प्रस्तुत किया गया , महासभा उनके  इस पुनीत कार्य के लिए बधाई एवं धन्यवाद ज्ञापित करता है .
18 फरवरी 2011
पंडरिया में 47 वें  अधिवेशन का रंगारंग  शुभारम्भ
           ज्योति रथ यात्रा एवं हल्दीघाटी की पवित्र मिटटी का पंडरिया पहुचने  पर श्री उजियार सिंह पवार अध्यक्ष एवं होरी सिंह  महासचिव के द्वारा  स्वागत किया गया . तत्पश्चात  श्री उजियार सिंह पवार अध्यक्ष  के द्वारा ध्वजा रोहण  के साथ महासभा के तीन दिवसीय अधिवेशन का रंगारंग  शुभारम्भ हुआ . सर्व प्रथम महाराणा प्रताप के चित्र की पूजा एवं आरती के पश्चात महासभा के पदाधिकारियों का स्वागत किया गया . अधिवेशन के मुख्य संयोजक श्री भूपेन्द्र  सिंह पूर्व विधायक  के  द्वारा स्वागत भाषण  एवं महासभा के अध्यक्ष श्री पवार  का उद्बोधन हुआ . सभी उप अमितियो के सचिवो के द्वारा अपने -  अपने उप समिति का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया . रात्रि  में बच्चो , महिलाओं के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया . रात्रि  9 . 30 बजे से केन्द्रीय कार्यकारिणी का बैठक  प्रारम्भ  हुआ कोषाध्यक्ष एवं महासचिव के   प्रतिवेदन  का अनुमोदन तथा  विभिन्न महत्वपूर्ण विषयो में चर्चा कर निर्णय लिया गया . जानकारी के अनुसार महासभा एवं उप समिति के पदाधिकारियों के कार्यकाल को पूर्ववत तीन वर्ष का ही रखा गया है.

 सौ . काँ  डा . अस्मिता सिंह परिणय सूत्र में बंधी
        मुख्य मंत्री दंपत्ति डा . रमन सिंह एवं वीणा सिंह  की  पुत्री डा . अस्मिता सिंह  का विवाह डा . पुनीत गुप्ता के साथ मुख्यमंत्री निवास में सादे समारोह में संपन्न हुआ . महासभा की ओर से नवयुगल को दाम्पत्य जीवन में प्रवेश करने पर बधाई  एवं हार्दिक शुभकामनाए .

15 फरवरी 2011
  अम्बर भारद्वाज ने कराते के राष्ट्रीय चैंपियन को परास्त कर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया
           झारखंड में आयोजित 34 वें  नॅशनल गेम्स  में राजनांदगाँव निवासी ठा .  अम्बर सिंह भारद्वाज ने
छत्तीसगढ़ का कराते में अकेले प्रतिनिधित्व कर  छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद कराते में पहली बार स्वर्ण पदक जीता है . कराते के  84 किलो ग्राम वर्ग में अम्बर ने महाराष्ट्र के अनूप साहू को कड़े मुकाबले में  5  -  3 से परास्त कर स्वर्ण पदक को अपने नाम में कर लिया . सेमीफायनल में अम्बर ने मध्यप्रदेश के कुशल थापा ( राष्ट्रीय चैंपियन ) को एक तरफा मुकाबला में 6 - 1 से शिकस्त दिया तथा क्वार्टर फायनल  में अरुणाचल प्रदेश के खिलाड़ी को भी 6 - 1 से हराया .अम्बर भारद्वाज 2004 से 2006 तक जूनियर कराते का राष्ट्रीय चैम्पियन रहे है .

     अम्बर सिंह भारद्वाज  को वर्ष 2006  में छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा शहीद कौशल यादव पुरस्कार से सम्मानित किया गया था . अम्बर वर्ष 2007 से 2009 तक सीनियर चैम्पियन रहा है . अम्बर भारद्वाज के पिता श्री मुरली सिंह भारद्वाज 84 किलो ग्राम वर्ग में वर्ष 2003 से 2005 तक नेशनल चैम्पियन रहे है . श्री मुरली सिंह भारद्वाज उप समिति राजनांदगाँव के सक्रीय सदस्य है . महासभा की ओर से श्री अम्बर सिंह भारद्वाज को उनकी सफलता पर हार्दिक बधाई  एवं शुभकामनाए 

14 फरवरी 2011
     भारत माता के सपूतो , अमर शहीदों को सत -  सत नमन
     लाहोर में 14 फरवरी 1931 को अल - सुबह  अमर शहीद  क्रांतिकारी भगत सिंह , राजगुरु एवं सुखदेव

     को फांसी के फंदे में लटकाया गया था . भारत माता के वीर सपूतों ने वन्दे मातरम एवं भारत माता की जय 

     बोलते हुए , हँसते  हँसते मौत को गले लगाया .
     वीर  शहीदों को सत - सत नमन .

     इन्कलाब जिंदाबाद .

महासभा का 47  वां वार्षिक अधिवेशन   

 दिनांक 18 , 19 एवं 20 फरवरी 2011  को पंडरिया में

 सभा स्थल - शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर पंडरिया , जिला कबीरधाम

 कार्यक्रम

 18 फरवरी 2011 शुक्रवार 

     1 .   पंजीयन प्रात: 8 बजे से

     2 .   ध्वजारोहण एवं अधिवेशन उदघाटन दोपहर 12 बजे

     3 .   महाराणा ज्योति रथ यात्रा का स्वागत

     4 .   केन्द्रीय पदाधिकारियों का स्वागत

     5 .   संयोजक का स्वागत भाषण

     6 .   महासभा के अध्यक्ष का स्वागत भाषण      7 .   उप समितियों  के सचिवो का प्रतिवेदन      8 .  केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति  एवं सचिवो का संयुक्त बैठक रात्रि 9.30  बजे से     9 .  सांस्कृतिक कार्यक्रम रात्रि 9.30  बजे से

19 फरवरी 2011 शनिवार

    1 .  रंगोली , मेंहदी , महाराणा क्विज प्रात: 9 बजे से ( महिला मंडल द्वारा )

    2 .  शोभा यात्रा दोपहर 12 बजे से

    3 .  खुला अधिवेशन , महासचिव एवं कोषाध्यक्ष का वार्षिक प्रतिवेदन एवं चर्चा

    4 .  वर्ष भर के सामाजिक विकास हेतु कार्य योजना हेतु विचार आमन्त्रण

    5 .  युवक - युवती परिचय सम्मलेन ( युवा मंडल द्वारा )

    6 .  सामूहिक विवाह , पाणिग्रहण रात्रि 11.40 बजे से ( आयोजन नि:शुल्क )

    7 .  सांस्कृतिक कार्यक्रम - कवि सम्मलेन

20 फरवरी 2011 रविवार

    1 . कैरियर कांउसलिंग - कृषि ,कानून , उद्योग ,प्रतियोगी परीक्षा , शिक्षा , महिला अधिकार सशक्तिकरण

   2 .  बिलासपुर जों के वरिष्ठजनों का सम्मान एवं विविध क्षेत्र में कार्य करने वाले अग्रणीजनों का सम्मान

   3 .  प्रतिभावान छात्र - छात्राओ का सम्मान

   4 .  अतिथियों का आगमन , स्वागत , उद्बोधन एवं स्मृति चिन्ह भेंट  - दोपहर 12 बजे से

   5 .  केन्द्रीय पदाधिकारियों का सम्मान

   6 .  सहा संयोजक द्वारा आभार प्रदर्शन

   7 .  ध्वज अवरोहण के साथ समापन की घोषणा

  नि: शुल्क सामूहिक विवाह

महासभा में नि:शुल्क सामूहिक  विवाह   के लिए श्री अशोक ठाकुर संगठन सचिव से संपर्क करे सेल. 9424101282 , 4924101414