श्री राम नवमी की बधाई एवं शुभकामनाएं
रामनवमी के अवसर पर आप प्रभू श्रीराम से अपनी मनोकामना के लिए निम्नानुसार निवेदन करे  
प्रभु से अनुपम प्रेम भक्ति मांगे- 
परमानंद कृपानयन मन परिपूरन काम। 
प्रेम भगति अनपायनी देहु हमहि श्रीराम।। 
सिन्दूर लगे हनुमान जी की मूर्ति का सिन्दूर लेकर सीता जी के चरणों में लगाएं। फिर माता सीता से एक सांस में अपनी कामना निवेदित कर भक्तिपूर्वक प्रणाम कर वापस आ जाएं।
इस प्रकार खास तौर पर  मंगलवार, शनिवार या हनुमान जयंती अथवा रामनवमी के दिन तीन बार (सुबह, दोपहर, शाम) ऐसा करने पर सभी प्रकार की बाधाओं का निवारण होता है। श्रीराम को प्रसन्न करने का यह सरल विधि है। भगवान श्री राम आअपकी मनोकामना पूर्ण करे 
भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी ।  
हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी ।। 
लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी ।  . 
भूषन वनमाला नयन बिसाला सोभासिन्धु खरारी .।। 
कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता । 
माया गुन ग्यानातीत अमाना वेद पुरान भनंता ।। 
करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता। 
सो मम हित लागी जन अनुरागी भयौ प्रकट श्रीकंता ।। 
ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै । 
मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर मति थिर न रहै ।। 
उपजा जब ग्याना प्रभु मुसुकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै । 
कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै ।। 
माता पुनि बोली सो मति डोली तजहु तात यह रूपा । 
कीजे सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा ।। 
सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा । 
यह चरित जे गावहि हरिपद पावहि ते न परहिं भवकूपा .।। 
बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार । 
निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार .।। 

नमामि भक्त वत्सलं  
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नमामि भक्त वत्सलं . कृपालु शील कोमलं । 
भजामि ते पदांबुजं . अकामिनां स्वधामदं ।। 
निकाम श्याम सुंदरं . भवाम्बुनाथ मंदरं । 
प्रफुल्ल कंज लोचनं . मदादि दोष मोचनं .।। 
प्रलंब बाहु विक्रमं . प्रभोऽप्रमेय वैभवं । 
निषंग चाप सायकं . धरं त्रिलोक नायकं ।। 
दिनेश वंश मंडनं . महेश चाप खंडनं । 
मुनींद्र संत रंजनं . सुरारि वृन्द भंजनं .।। 
मनोज वैरि वंदितं . अजादि देव सेवितं । 
विशुद्ध बोध विग्रहं . समस्त दूषणापहं ।। 
नमामि इंदिरा पतिं . सुखाकरं सतां गतिं । 
भजे सशक्ति सानुजं . शची पति प्रियानुजं ।। 
त्वदंघ्रि मूल ये नराः . भजंति हीन मत्सराः। 
पतंति नो भवार्णवे . वितर्क वीचि संकुले ।। 
विविक्त वासिनः सदा . भजंति मुक्तये मुदा .। 
निरस्य इंद्रियादिकं . प्रयांति ते गतिं स्वकं ।। 
तमेकमद्भुतं प्रभुं . निरीहमीश्वरं विभुं । 
जगद्गुरुं च शाश्वतं . तुरीयमेव केवलं ।। 
भजामि भाव वल्लभं . कुयोगिनां सुदुर्लभं । 
स्वभक्त कल्प पादपं . समं सुसेव्यमन्वहं ।। 
अनूप रूप भूपतिं . नतोऽहमुर्विजा पतिं । 
प्रसीद मे नमामि ते . पदाब्ज भक्ति देहि मे ।। 
पठंति ये स्तवं इदं . नरादरेण ते पदं। 
व्रजंति नात्र संशयं . त्वदीय भक्ति संयुताः।। 

कह मुनि प्रभु सुन बिनती मोरी  ।   अस्तुति करौं कवन बिधि तोरी ।। 
महिमा अमित मोरि मति थोरी  । रबि सन्मुख खद्योत अंजोरी।। 

श्याम तामरस दाम शरीरं  । जटा मुकुट परिधन मुनिचीरं।। 
पाणि चाप शर कटि तूणीरंव ।  नौमि निरंतर श्री रघुवीरं ।। 
मोह विपिन घन दहन कृशानुः  । संत सरोरुह कानन भानुः ।। 
निशिचर करि बरूथ मृगराजः । त्रातु सदा नो भव खग बाजः।। 
अरुण नयन राजीव सुवेशं ।  सीता नयन चकोर निशेशं ।। 
हर हृदि मानस बाल मरालं । नौमि राम उर बाहु विशालं ।। 
संसय सर्प ग्रसन उरगादः । शमन सुकर्कश तर्क विषादः ।। 
भव भंजन रंजन सुर यूथः ।  त्रातु नाथ नो कृपा वरूथः ।। 
निर्गुण सगुण विषम सम रूपं  । ज्ञान गिरा गोतीतमनूपं ।। 
अमलमखिलमनवद्यमपारं  । नौमि राम भंजन महि भारं ।। 
भक्त कल्पपादप आरामः । तर्जन क्रोध लोभ मद कामः ।। 
अति नागर भव सागर सेतुः  । त्रातु सदा दिनकर कुल केतुः ।। 
अतुलित भुज प्रताप बल धामः । कलि मल विपुल विभंजन नामः।। 
धर्म वर्म नर्मद गुण ग्रामः  । संतत शं तनोतु मम रामः ।। 
जदपि बिरज ब्यापक अबिनासी । सब के हृदयं निरंतर बासी ।। 
तदपि अनुज श्री सहित खरारी । बसतु मनसि सम काननचारी ।। 
जे जानहिं ते जानहुं स्वामी । सगुन अगुन उर अंतरजामी .।। 
जो कोसलपति राजिव नयना । करौ सो राम हृदय मम अयना ।। 
अस अभिमान जाइ जनि भोरे . मैं सेवक रघुपति पति मोरे ।। 
सबके गृह-गृह होही पुराना।
राम चरित पावन विधि नाना।।
नर अरु नारि राम गुन गावंहि।
करहि दिवस निसि जात न जानहि॥
एक राम अवधेस कुमारा।
तिन्ह कर चरित विदित संसारा।।
नारि विरह दु:ख लहेउ अपारा।
भयेउ रोष रन रावण मारा।।
नाथ एक वर मांगऊं राम कृपा करि देहु। 
जन्म-जन्म प्रभु पद कमल कबहुं घटै जनि नेहु।। 
हे प्रभु राम! मैं आपसे केवल एक ही वर मांगता हूं, इसे देने की कृपा करें। प्रभु आपके चरण कमलों में मेरा प्रेम जन्म-जन्मांतर में कभी न घटे।।


             भारतीय नववर्ष का ऐतिहासिक महत्व 
1. यह दिन सृष्टि रचना का पहला दिन है :-आज से एक अरब 97 करोड़ 29 लाख 49 हजार 116 वर्ष पूर्व इसी दिन के सूर्योदय से ब्रह्मा जी ने जगत की रचना प्रारंभ की
2. वेदानुसार मानव अवतरण वर्ष :- एक अरब 95 करोड़ 58 लाख 85 हजार116 वां वर्ष
3. कलियुग आरम्भ :- 5112 वां वर्ष
4. विक्रमी संवत का पहला दिन :-  सम्राट विक्रमादित्य ने 2072 वर्ष पहले इसी दिन राज्य स्थापित किया था | उसी राजा के नाम पर संवत् प्रारंभ होता था जिसके राज्य में चोर,.  अपराधी, भिखारी न हो साथ ही राजा चक्रवर्ती सम्राट भी हो | 
5.  श्री राम का राज्याभिषेक  :- लंका विजय के बाद अयोध्या में श्री राम का राज्याभिषेक किया गया |
6. शालिवाहन संवत्सर का प्रारंभ दिवस :- विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में  राज्य स्थापित किया |
7. युगाब्द संवत्सर :- 5112 वर्ष पूर्व महाराज युधिष्ठिर का राज्यभिषेक  हुआ था |
                    आश्चर्य जनक किन्तु. सत्य 
(1) क्यो "नासा-के-वैज्ञानीको ने माना एवं स्वीकार किया है कि सूरज से " ॐ " की आवाज निकलती है? 
(2) क्यो 'अमेरिका' ने  "भारतीय - देशी - गौमुत्र"  पर 4 Patent लिया ,व, कैंसर और दूसरी बिमारियो के लिये दवाईया बना रहा है ? जबकी हम " गौमुत्र" का महत्व
हजारो साल पहले से जानते है, 
(3) क्यो अमेरिका के 'सेटन-हाल-यूनिवर्सिटी' मे  "गीता" पढाई जा रही है?
(4) क्यो इस्लामिक देश 'इंडोनेशिया'. के Aeroplane का नाम"भगवान नारायण के वाहन गरुड" के नाम पर "Garuda Indonesia" है, जिसमे गरुड का प्रतिक चिन्ह है ?
(5) क्यो इंडोनेशिया के मुद्रा रुपए पर "भगवान गणेश" की फोटो है ?
(6) क्यो 'बराक-ओबामा' हमेशा अपनी जेब मे "हनुमान-जी" की फोटो रखते है ?
(7) क्यो आज पूरी दुनिया "योग एवं प्राणायाम" की दिवानी है?
(8)"भारतीय-हिंदू-वैज्ञानिको एवं मनिषियों" ने ' हजारो साल पहले ही ' बता दिया था कीधरती गोल है ?
(9) क्यो जर्मनी के Aeroplane वायुसेवा का नाम  संस्कृत ("Luft-hansa") लुफ्थांसा है ? 
(10) क्यो हिंदुओ के नाम पर 'अफगानिस्तान ' के पर्वत का नाम"हिंदूकुश" है? 
(11) क्यो हिंदुओ के नाम पर हिंदी भाषा,  हिन्दुस्तान,  हिंद महासागर ये सभी नाम है? 
(12) क्यो 'वियतनाम मे 
विष्णु भगवान" की 4000-साल पुरानी मूर्ति पाई गई ? 
(13) क्यो अमेरिकी-वैज्ञानिक Haward ने, शोध के बाद माना - की  110000 freqके कंपन है ? 
(14) क्यो 'बागबत की बडी मस्जिद के इमाम' ने "सत्यार्थ-प्रकाश"  पढने के बाद हिंदू-धर्म अपनाकर,"महेंद्रपाल आर्य" बनकर, हजारो मुस्लिमो को हिंदू बनाया,और वे कई-बार'जाकिर-नाईक' सेशास्त्रर्थ ( Debate)  के लिये कह चुके है,मगर जाकिर की हिम्म्त नही हुइ, 
(15) अगर हिंदू-धर्म मे "यज्ञ" करना अंधविश्वास है, तो क्यो भोपाल-गैस-कांड' मे जो "कुशवाहा -परिवार" एक मात्र बचा, जो उस समय यज्ञ कर रहा था,
(16) 'गोबर-पर-घी जलाने से' १०-लाख-टन आक्सीजन गैस" बनती है, 
(17) क्यो "Julia Roberts" अमेरिकन नायिका (American actress) ने हिंदू-धर्म 🔔अपनाया और वह प्रति दिन "मंदिर" जाती है,
(18) 
अगर "रामायण" झूठा है,तो क्यो दुनिया भर मे केवल "राम-सेतू" के ही पत्थर आज भी पानी में तैरते है ? 
(19) अगर "महाभारत" झूठा है, तो क्यो भीम के पुत्र , ''घटोत्कच'' का विशालकाय कंकाल,वर्ष 2007 में 'नेशनल-जिओग्राफी' की टीम ने,'भारतीय-सेना की सहायता से' उत्तर-भारत के इलाके में खोजा ? 
(20) क्यो अमेरिका के सैनिकों को,अफगानिस्तान (कंधार) की एकअफगानिस्तान (कंधार) की एक गुफा में ,5000 साल पहले का,महाभारत-के-समय-का "विमान" मिला है? 
भारतीय नववर्ष विक्रम संवत् 2072 और नवरात्री के पावन पर्व पर हार्दिक मंगल कामनाएं |

          पाश्चात्य संस्कृति के नकल मे हम अपने संस्कृति को भुलाते जा रहे है , मेरा आपसे सादर आग्रह है कि हम अपनी भारत की संस्कृति को पहचाने. तथा  ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुचाये. खासकर अपने बच्चो को बताए क्योकि ये बातें उन्हें कोई नहीं बताएगा... और सच  तो ये है हमे  भी थोड़ी सी जानकारी है और हमारे साथ ही ये सब बाते ख़तम होती चली जाएगी....
              इसको आगे अपने बच्चो को  जरुर भेजे और बताये अगर आप के पास भी कोई जानकारी हो तो उसे भी इसमें जोड़ दे। आप अपने  आगे आने वाली पीढी को इतना तो अवश्य दे ही सकते है.... 
( ०१ )    दो पक्ष :- कृष्ण पक्ष , शुक्ल पक्ष !
( ०२ )    तीन ऋण : -देव ऋण , मातृ-पितृ ऋण , गुरु ऋण !
( ०३ )    चार युग :-सतयुग , त्रेतायुग ,द्वापरयुग , कलियुग !
( ०४ )    चार धाम : -द्वारिका , बद्रीनाथ ,जगन्नाथ पुरी , रामेश्वरम धाम !
( ०५ )   चारपीठ :-शारदा पीठ ( द्वारिका ),ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम ) ,गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) , शृंगेरीपीठ !
( ०६ )  चार वेद :-ऋग्वेद , अथर्वेद , यजुर्वेद , सामवेद !
( ०७ )  चार आश्रम :-ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , वानप्रस्थ , संन्यास !
( ०८ )  चार अंतःकरण : -मन , बुद्धि , चित्त , अहंकार !
( ०९ )  पञ्च गव्य : -गाय का  दूध , दही ,घी,गोमूत्र , गोबर !
( १० )  पञ्च देव : -गणेश , ब्रम्हा, विष्णु , शिव ,सूर्य !
( ११ )  पंच तत्त्व : -पृथ्वी ,जल , अग्नि , वायु , आकाश !
( १२ )  छह दर्शन :-वैशेषिक , न्याय , सांख्य ,योग , पूर्व मिसांसा , दक्षिण मिसांसा !( १३ )   सप्त ऋषि :-विश्वामित्र ,जमदाग्नि ,भरतद्वाज , गौतम , अत्री , वशिष्ठ , कश्यप! 
( १४ )   सप्त पुरी :-अयोध्या पुरी ,मथुरा पुरी , माया पुरी ( हरिद्वार ) , काशी ,कांची ( शिन कांची - विष्णु कांची ) , अवंतिका ,द्वारिका पुरी !
( १५ )   आठ योग  :- यम , नियम , आसन ,प्राणायाम , प्रत्याहार , धारणा , ध्यान , समाधी !
( १६ )   आठ लक्ष्मी :-आध्य, विद्या , सौभाग्य ,अमृत , काम , सत्य , भोग , योग लक्ष्मी !
( १७ )   नव दुर्गा : --शैल पुत्री , ब्रह्मचारिणी ,चंद्रघंटा , कुष्मांडा , स्कंदमाता , कात्यायिनी ,कालरात्रि , महागौरी ,सिद्धिदात्री !
( १८ )   दस दिशाएं : -पूर्व , पश्चिम , उत्तर , दक्षिण ,आग्नेय ,ईशान , नैऋत्य , वायव्य , आकाश , पाताल !
( १९ )   मुख्य ११ अवतार :- मत्स्य , कच्छप , वराह ,नरसिंह , वामन , परशुराम ,श्री राम , श्री कृष्ण ,  बलराम ,   बुद्ध ,  कल्कि !
( २० )   बारह मास  :- चैत्र , वैशाख , ज्येष्ठ ,अषाढ , श्रावण , भाद्रपद , अश्विन , कार्तिक ,मार्गशीर्ष , पौष , माघ , फाल्गुन !
( २१ )   बारह राशी : - मेष , वृषभ , मिथुन ,कर्क , सिंह , कन्या , तुला , वृश्चिक , धनु , मकर , कुंभ , कन्या !
( २२ )   बारह ज्योतिर्लिंग : - सोमनाथ ,मल्लिकार्जुन ,महाकाल , ओमकारेश्वर , बैजनाथ , रामेश्वरम ,विश्वनाथ , त्र्यंबकेश्वर , केदारनाथ , घृष्नेश्वर भीमाशंकर , नागेश्वर !
( २३ )   पंद्रह तिथियाँ : - प्रतिपदा ,द्वितीया ,तृतीया ,चतुर्थी , पंचमी , षष्ठी , सप्तमी , अष्टमी , नवमी ,दशमी , एकादशी , द्वादशी , त्रयोदशी , चतुर्दशी , पूर्णिमा / अमावास्या !
( २४ )   स्मृतियां : - मनु , विष्णु , अत्री , हरीत ,याज्ञवल्क्य ,उशना , अंगीरा , यम , आपस्तम्ब , सर्वत ,कात्यायन , ब्रहस्पति , पराशर , व्यास , शांख्य ,लिखित , दक्ष , शातातप , वशिष्ठ !
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संविधान मे द्वितीय संशोधन (प्रस्तावित) पर विचार आमंत्रित

संविधान में व्दितीय संशोधन

महासभा के संविधान का निर्माण 26 फरवरी 1969  को किया गया तत्पश्चात 28 अगस्त 1998 को प्रथम संशोधन  किया गया जिसका वेबसाईट में प्रकाशन किया गया है , संविधान के अध्ययन के लिए वेबसाईट के  constitution  में जाकर देखे . पुन: संविधान संशोधन समिति  के द्वारा 27 जनवरी  2007 को संशोधन किया गया .

व्दितीय संशोधन में जिस धारा / उप धारा में परिवर्तन / संशोधन किया गया है . उन धारा / उपधाराओ का यहाँ उल्लेख कर रहे है. महासभा के द्वारा सभी उपसमितियों को संशोधित संविधान की प्रतिलिपि भेजी गई है .  जहा सभी सदस्य  अवलोकन कर अपने विचार अथवा ,  संशोधन लिखित में अध्यक्ष महासभा को भेज सकते है . 

व्दितीय संशोधन में किये गए परिवर्तन को बड़े एवं  मोटे अक्षर से उल्लेखित कर रहे है
धारा 06 के  उप धारा 3 , 4 , 5 , एवं 6 में निम्नानुसार कुछ अंश शामिल किया गया है .
  उपधारा (3) शैक्षणिक विकास :- अज्ञान अन्धकार है . समाज में सद विद्या की व्यवस्था करना , होनहार छात्राओं को छात्रवृति देना . बोर्ड की परीक्षाओ में प्रावीण्य सूचि में आने वाले को तथा विश्व-विद्यालय परीक्षा में प्रथम श्रेणी प्राप्त करने वाले छात्र - छात्राओ को सम्मानित करना . शिक्षा के विकास के लिए शैक्षणिक संस्थाए खोलना एवं संचालन करना .औपचारिक शिक्षण संस्थाओं , विद्यालयो , महाविध्यालायो  आदि की स्थापना करना . तकनीकी , ब्यवसायिक  तथा औद्योगिक शिक्षण / प्रशिक्षण संस्थाओं की स्थापना करना

     उपधारा (4) सांस्कृतिक विकास :- समाज का रहन-सहन , आचार - विचार , कला कौशल,एवं आमोद प्रमोद इस प्रकार हो की समाज के दुर्गुण दूर होकर स्वस्थ परम्परा का निर्माण हो सके . साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना और अच्छे साहित्य का प्रकाशन करना .
   
उपधारा (5) आर्थिक विकास :- भौतिकवादी वैज्ञानिक युग में आर्थिक विकास समस्त विकास की आधारशिला है . बेरोजगारी दूर करना तथा आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वतंत्र रोजगार के अवसर जुटाने का प्रयास करना
  
   उपधारा (6) राष्ट्रीयता :- ब्यक्ति पहले राष्ट्र की संपत्ति है अत: राष्ट्र हित ब्याक्तिगत तथा सामाजिक हित से श्रेष्ठ है . समाज में राष्ट्र प्रेम तथा भातृत्व भावना का विकास करना . इस हेतु सक्रीय राजनैतिक चेतना जागृत करना . समाज को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करना

धारा 7  के उपधारा 3 में सदस्यता शुल्क अब वर्त्तमान में 10 / रुपया कर दिया गया है .
उप धारा (3) सामान्य सदस्यता के लिए 5/- मात्र वार्षिक शुल्क लिया जावेगा . परन्तु केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति समय-समय पर सदस्यता शुल्क में संशोधन कर सकेगी .
उप धारा (6)  केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति के पदाधिकारियों के चुनाव के लिए समस्त क्षेत्रीय उप समितियों के निर्वाचित पदाधिकारी गण मतदाता होंगे
धारा 08  के उपधारा 01
   उप धारा (1)  केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति के निम्न लिखित पदाधिकारी होंगे .  अध्यक्ष , वरिष्ठ  उपाध्यक्ष ,उपाध्यक्ष ,महासचिव , सहसचिव , उप सचिव ,संगठन सचिव , प्रचार सचिव , कोषाध्यक्ष तथा प्रत्येक उपसमिति से एक निर्वाचित प्रतिनिधि सदस्य होंगे इनके अतिरिक्त पिछले अनुभव तथा सेवाओं के आधार पर अध्यक्ष द्वारा  केन्द्रीय कार्यकारिणी की अनुशंसा पर मनोनीत चार सदस्य होंगे जिसमे से एक महिला होगी . मनोनीत सदस्यों की संख्या में वृद्धि या कमी करने का अधिकार केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति को होगा .
  धारा (10 )          निर्वाचन प्रक्रिया :-  उपधारा 3  एवं  उपधारा 7
उप धारा (3 ) निर्वाचक मंडल का सदस्य केन्द्रीय  पदाधिकारी पद के लिए उम्मीदवार नहीं हो सकता . गठन से पूर्व सदस्यों से अभिस्वीकृति केन्द्रीय कार्यकारिणी समीती  को प्राप्त  करनी होगी एवं नामजद की भी पात्रता नहीं होगी .
  उप धारा (7) संस्थापक समिति के सदस्य आजीवन सम्मानीय सदस्य होंगे .केन्द्रीय कार्यकारिणी एवं केन्द्रीय निर्णायक समिति की बैठक में इन्हें आमंत्रित करना होगा .
       धारा ( 11 )  निर्णायक समिति :-
      
उप धारा(1 ) सामाजिक विवादो के  निपटारे के लिए एक निर्णायक समिति का गठन किया जावेगा जिसमे केन्द्रीय पदाधिकारी गण प्रत्येक उप समिति के एक एक निर्वाचित प्रतिनिधि तथा अध्यक्ष द्वारा केन्द्रीय कार्यकारिणी  समिति  की अनुशंसा पर मनोनीत चार सदस्य होंगे जिसमे से एक महिला होगी .
     
उप धारा(3 ) वरिष्ठ उपाध्यक्ष इस समिति का अध्यक्ष होगा इनका कार्यकाल 3 वर्ष का होगा . वरिष्ठ उपाध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष के द्वारा बैठक की अध्यक्षता की जावेगी

उपधारा ( 4 ) निर्णायक समिति समाज का एक न्यायालय है इसलिए इसकी गरिमा एवं गंभीरता को बनाए रखने के लिए जब भी निर्णायक समिति की बैठक हो वहा निर्णायक समिति के पदाधिकारी एवं सदस्यों को छोड़कर कोई भी अन्य ब्यक्ति उपस्थित न हो और पक्षकारो को उनके प्रकरण आने पर एवं बुलाये जाए पर ही प्रवेश दिया जावेगा .

उपधारा ( 5 ) किसी विषय पर निर्णय करते समय सहमती एवं असहमति ब्यक्त करने वाले सदस्यों के हां या नहीं में लिपिबद्ध किया जावे एवं उनका हस्ताक्षर लिया जावे .

उपधारा ( 6 ) जांच समिति के सदस्यों की नियुक्ति निर्णायक समिति के सदस्यों के बहुमत के आधार पर किया जावे .

धारा ( 12 ) अध्यक्ष का अधिकार व कर्तब्य :- उप धारा (4) , (6), (7),(8) ,(11),(12),(13)
   

     
उप धारा(4) निर्णायक समिति के निर्णयों को अपनी स्वीकृति देगा किन्तु आवश्यक होने पर किसी निर्णय पर पुनर्विचार के लिए निर्णायक समिति के पास वापस भेज सकता है .पुनर्विचार के बाद लिया गया निर्णय अध्यक्ष को मान्य होगा . निर्णायक समिति के निर्णय के विरुद्ध आवेदक यदि अपील करना चाहता है तो आवेदन के साथ एक माह के अंदर रु . 500 / कोषाध्यक्ष के पास जमा कर रसीद की छाया प्रति आवेदन पत्र के साथ संलग्न करे .
   

     
उप धारा (6) महासभा के कोष से कोषाध्यक्ष का महासचिव के साथ संयुक्त हस्ताक्षर से 10000 .00  दस हजार तक राशि निकाल सकेगा . इससे अधिक की राशि निकालने के लिए कार्यकारिणी की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी .
     
उप धारा (7) केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति या महासभा की बैठक में किसी सदस्य या ब्यक्ति का ब्यवहार अशोभनीय / आपत्तिजनक पाया गया तो अध्यक्ष उसे वहां से उठाकर जाने के लिए कह सकता है.
     
उप धारा (8) केन्द्रीय निर्णायक समिति तथा कार्यकारिणी समिति में चार चार सदस्य मनोनीत कर सकता जिसमे एक - एक महिला प्रतिनिधि होगी .चार - चार सदस्य कार्यकारिणी के सदस्यों की सहमति पर ही मनोनीत कर सकता है .
    

     
उप धारा (11) दो  हजार रुपये तक खर्च की स्वीकृति प्रदान करेगा . इससे अधिक की राशि खर्च करने के लिए कार्यकारिणी की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी .
     
उप धारा (12) किसी अपरिहार्य कारणों से किसी क्षेत्रीय समिति के भंग होने पर उसके स्थान पर तदर्थ समिति गठित कर सकेगा . तदर्थ समिति का गठन दो माह के अंदर होना चाहिए   .
     
उप धारा (13) केन्द्रीय कार्यकारिणी  समिति महासभा के वार्षिक  आय - ब्याय के लेखा परिक्षण हेतु  समाज के तिन सक्षम ब्यक्तियो को आतंरिक अंकेक्षण हेतु नियुक्त करेगी तथा 31 मार्च की स्थिति में 30 अप्रेल तक प्रतिवर्ष परिक्षण कराएगी तथा चार्टर्ड एकाउंटेट द्वारा भी प्रतिवर्ष परिक्षण करवाकर उसकी प्रति पंजीयक छत्तीसगढ़ फार्म एवं सोसायटी को भेजेगी .
उपसमितियों के आय- ब्यय के परिक्षण हेतु प्रतिवर्ष केंद्र द्वारा निर्धारित प्रपत्र तैयार किया जावेगा .
31 मार्च की स्थिति में 30 अप्रेल तक एक उपसमिति के कोषाध्यक्ष एवं सचिव द्वारा दूसरी उपसमिति में भेजकर परिक्षण करवाएगा एवं 15 मई तक प्रतिवेदन केन्द्रीय कोषाध्यक्ष को प्रेषित करेगा .

     
धारा (13)   उपाध्यक्ष के अधिकार और कर्तब्य :- उप धारा (4), ( 5 )

      उप धारा (4)  उपाध्यक्ष  को अध्यक्ष एवं  वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनुपस्थिति में सम्पूर्ण अधिकार प्राप्त होंगे .
      उप धारा ( 5 ) उपाध्यक्ष  को धारा 20 के अंतर्गत आने वाले केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति के अधिकार एवं कर्तब्य के निष्पादन के लिए समस्त संगठनात्मक तथा रचनात्मक कार्य सहसचिव तथा संगठन सचिव के सहयोग एवं अध्यक्ष के मार्ग दर्शन में संपादित करेगा

      धारा  14   महासचिव के अधिकार व कर्तब्य :-
उप धारा (5 ) ,(6 )
      उप धारा (5 ) महासभा द्वारा पारित संकल्पों प्रस्तावों तथा आदेशो का पालन करना तथा कराना ,एवं संबंधित सदस्यों तथा उपसमिति को सभा की कार्यवाही का विवरण 15 दिनों के अन्दर भेजना
      उप धारा (6 ) महासभा के कोष से  रु. 2000 . 00  दो  हजार अग्रिम ले सकता है  तथा स्व विवेक से रु. 500 .00  ब्यय कर सकता है . इससे अधिक खर्च के लिए पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी .
     धारा   15   सहसचिव के अधिकार और कर्तब्य :-
उप धारा ( 1 )
     उप धारा ( 1 ) अध्यक्ष के अनुमति से केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति से संबंधित रिपोर्ट तैयार करना एवं महासचिव के कार्यो में सहयोग प्रदान करना .
        धारा  16   उपसचिव के अधिकार और कर्तब्य :-
उप धारा ( 2 )
      उप धारा ( 2 ) बैठक  में उपस्थिति पंजी तथा सदस्यों की राय जो निर्णय के आधार बनते  है , संक्षिप्त विवरण तैयार लरना .
     धारा   17    संगठन सचिव के कर्तब्य :-
उप धारा ( 3) ,(4 )
    उप धारा ( 3)  उप समितियों  की सदस्यता बढाने , साहित्यिक , सांस्कृतिक एवं क्रीडा के कार्यक्रम उप समितियों में आयोजित करना , महिला मंडल एवं युवा मंडल को सक्रीय करना .

    उपधारा (4 ) केन्द्रीय कार्यकारिणी एवं निर्णायक समिति के बैठक में संबंधित सदस्य ही उपस्थित रहे इसकी ब्यवस्था करना .

       धारा   18   प्रचार सचिव के दायित्व :-  उपधारा (2 )
             
उपधारा (2 ) राष्ट्रीय स्टार पर अपने महासभा के क्रिया कलापों का प्रचार एवं प्रसार करेगा तथा  अन्य राजपूत संगठनो से भी संपर्क करने का प्रयास करना ., तथा उनकी विभिन्न मान्यताओ एवं क्रियाकलापों तथा सामाजिक गतिविधियों की जानकारी प्राप्त करना 

  धारा   19  कोषाध्यक्ष के अधिकार और कर्तब्य :- उप धारा ( 3 )  ,  ( 5 ),  (6 ) , (7 ), (8 ) ,(9 )
     उप धारा ( 3 )  अध्यक्ष या महासचिव के साथ संयुक्त हस्ताक्षर से महासभा के कोष से राशि निकालना . एक बार में रु. 10000 .00   दस  हजार रुपये तक निकाला जा सकता है , इससे अधिक की राशि निकालने के लिए केन्द्रीय कार्य कारिणी की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी .
     उप धारा ( 5 ) केन्द्रीय कोषाध्यक्ष , महासचिव को महासभा के कोष का छै:मासिक विवरण देगा .
     उप धारा (6 ) महासभा के केन्द्रीय कोष का  वार्षिक आंतरिक अंकेक्षण ( आडिट ) कराना अनिवार्य होगा तथा प्राप्त आपत्तियों का निराकरण वार्षिक अधिवेशन के पूर्व कराना अनिवार्य होगा
     उप धारा (7 )उपसमिति के आय - ब्यय का वार्षिक अंकेक्षण ( आडिट ) कराना  होगा .
     उप धारा (8 ) उपसमितियों के अंकेक्षण कराने के नियमो का निर्धारण करेगा .
     उप धारा (9 ) महासभा के आय - ब्यय के एनी श्रोत जैसे भवन , दूकान का आडिट करा सकेगा . 
      धारा   20   केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति के अधिकार और कर्तब्य :- उप धारा ( 6 )( 8 )(11 ) (12 ) उप धारा (16)  से उप धारा (22)  नया जोड़ा गया है

      उप धारा ( 6 ) निर्णायक समिति द्वारा किसी सदस्य का आचरण भ्रष्ट साबित होने पर उसे  पद मुक्त कर सकती है एवं आगामी कार्यकाल तक पदाधिकारी होने से रोक सकती है.
      उप धारा ( 8 ) किसी मद में रु. 10000 .00   दस    हजार रुपये से अधिक की राशि खर्च करने की  अध्यक्ष को अनुमति देगी .
      उप धारा (11 ) महासभा के केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति ,निर्णायक समितियो  , क्षेत्रीय उपसमिति के किसी पदाधिकारी का आचरण संविधान , सामाजिक हित का अनुशासन के विरुद्ध होने  पर पदमुक्त कर सकेगी .
      उप धारा (12 ) आतंरिक अंकेषण हेतु न्यूनतम तीन अंकेक्षक  -गणों की नियुक्ति करेगी एवं उनकी कार्यप्रणाली तय करेगी .
  
       उप धारा (16)  संविधान की धारा 6 में वर्णित आदर्श ( लक्ष्य ) की प्राप्ति एवं सामाजिक विकास को गति प्रदान करने पांच विभिन्न समितियों का गठन करेगी , जो निम्नानुसार है -  ( 1 ) शिक्षा विकास समिति , ( 2 ) स्वास्थ विकास समिति , ( 3 ) महाराणा प्रताप साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिषद् , ( 4 ) उद्योग एवं ब्यवसाय विकास समिति , ( 5 ) नवयुवक मंडल विकास समिति

   उप धारा (17) प्रत्येक विकास समिति के निम्नलिखित पदाधिकारी गण प्रभारी होंगे

      ( 1 ) शिक्षा विकास समिति में                            - केन्द्रीय उपाध्यक्ष

      ( 2 ) स्वास्थ विकास समिति में                          - केन्द्रीय सहसचिव

      ( 3 ) महाराणा प्रताप साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिषद् - केन्द्रीय प्रचार सचिव

      ( 4 ) उद्योग एवं ब्यवसाय विकास समिति              - केन्द्रीय उपसचिव

      ( 5 ) नवयुवक मंडल विकास समिति                     - केन्द्रीय संगठन सचिव

    उप धारा (18)  प्रत्येक विकास समिति के न्यूनतम 6  सदस्य  होंगे जो केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्यों में से मनोनीत किए जायेंगे .

    उप धारा (19) विकास समितियां अपने विषय से संबंधित कार्य योजना तैयार करेंगी और स्वीकृति हेतु केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति के पास भेजेगी . स्विक्र्यती मिलाने के पश्चात कार्य करेगी .

   उप धारा (20) विकास समिति के प्रभारी / अध्यक्ष गण महासभा के वार्षिक अधिवेशन में अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे .

   उप धारा (21) महासभा का कार्यक्षेत्र सभी उपसमितियों में विभाजित है जो पांच जोनो में बांटे गए है , जों प्रभारी अपने उपसमितियों का वार्षिक प्रतिवेदन महासभा के वार्षिक अधिवेशन के पूर्व प्राप्त कर लेंगे और अपना प्रतिवेदन महासभा के वार्षिक अधिवेशन में प्रस्तुत करेंगे .

उप धारा (22) उपसमितियों के वार्षिक प्रतिवेदन के लिए एक प्रारूप केन्द्रीय कार्यकारिणी  समिति द्वारा स्वीकृत करेगा और वह प्रारूप उपसमितियों के पास नामुनार्थ भेजेगा . उपसमितिया उसी प्रारूप में अपना वार्षिक प्रतिवेदन अपने जों प्रभारी के पास प्रस्तुत करेंगे .

      धारा    21  निर्णायक समिति के अधिकार   उप धारा ( 1 ), ( 1 0) नया जोड़ा गया

       उप धारा ( 1 ) विवाह , मृत्यु तथा आचरण संबंधी विवादों से संबंधित प्राप्त आवेदनों को जांच हेतु संबंधित उप समिति में भेज सकेगी . सदस्यता संबंधी विवाद में सभी नियमो का पालन करते हुए निर्णय लेगी .
       उप धारा (10)  सामाजिक सदस्यता प्राप्ति के लिए कोई एसा आवेदन आता है जो अभी तक हमारे समाज के सदस्य नहीं है , इसे प्रकरणों पर केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति द्वारा लिए गए पूर्व निर्णयो के आधार पर ही निर्णायक समिति निर्णय लेगी . इस प्रकार के प्रकरण सीधे केंद्र में स्वीकार किए जायेंगे .

       धारा    22   सभा संचालन एवं सामान्य नियम :- उप धारा  (5) , (8)  , ( 12 ),  ( 16),  ( 19) , ( 22)
       उप धारा  (5) केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति तथा निर्णायक समिति को भेजे  जाने वाले सुझाव , प्रस्ताव , अर्जी या शिकायत अध्यक्ष को संबोधित होंगे .
       उप धारा (8) अपील या शिकायत करने वाले को अपने लिखित पत्र के साथ 100 /  ( सौ रुपये ) आवेदन शुल्क कोषाध्यक्ष के पास जमा करना होगा . केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति आवश्यकतानुसार इसमे परिवर्तन कर सकेगी .
      उप धारा ( 12 ) अध्यक्ष का अपमान गंभीर अपराध माना जावेगा तथा उस पर निर्णायक समिति विचार कर निर्णय ले सकती है , इस तरह का ब्यवहार करने वाला ब्यक्ति किसी क्षेत्रीय उप समिति या समिति का पदाधिकारी बनने की पात्रता खो देगा . केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति चाहे तो एक अवधि निश्चित कर ऐसे सदस्यों की सदस्यता निलंबित कर सकता है .
       उप धारा ( 16)  महासभा या समिति के किसी भी कार्यवाही को किसी पत्र पत्रिका में अध्यक्ष की बिना अनुमति के प्रकाशित होने पर अध्यक्ष जिम्मेदार नहीं होगा . ऐसे गैर जिम्मेदार सदस्य के विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति द्वारा की जावेगी.
       उप धारा ( 19) महासभा को प्राप्त होने वाले किसी भी प्रकार की रकम लेने पर देने वाले को अधिकृत रसीद देनी होगी .
       उप धारा ( 22) महासभा द्वारा किसी भी मद में प्राप्त सम्पूर्ण राशि किसी राष्ट्रीयकृत  बैंक में जमा किया जावेगा .
       धारा    23  गणपूर्ति ( कोरम ) :-
उप धारा ( 1) , ( 2) ,  ( 3)
       उप धारा ( 1) केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति के समस्त पदाधिकारियों की कुल सदस्यों की 50 प्रतिशत उपस्थिति होने पर गणपूर्ति  मानी जावेगी . कम होने पर बैठक स्थगित हो जावेगी .गणपूर्ति केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्यों की उपस्थिति  को ही मानी जावेगी . कम होने पर बैठक स्थगित हो जावेगी .
       उप धारा ( 2) निर्णायक समिति के कुल सदस्यों की 50 प्रतिशत उपस्थित होने पर  गणपूर्ति  मानी जावेगी . कम होने पर बैठक स्थगित हो जावेगी .
.गणपूर्ति केन्द्रीय निर्णायक सदस्यों की उपस्थिति  को ही मानी जावेगी . कम होने पर बैठक स्थगित हो जावेगी .
       उप धारा ( 3) महासभा की बैठक में केन्द्रीय पदाधिकारी एवं समस्त क्षेत्रीय उपसमितियों के पदाधिकारियों के दो तिहाई उपस्थिति में गणपूर्ति  मानी जावेगी. यदि बैठक का कोरम पूर्ण नहीं होता तो बैठक 1 घंटे के लिए स्थगित की जाकर उसी स्थान पर उसी दिन पुन: की जा  सकेगी ,जिसके लिए  गणपूर्ति  (कोरम)  का कोई शर्त नहीं होगी .
       धारा    25  महासभा की संपत्ति  और उसकी ब्यवस्था :-
उप धारा ( 2),  (3) नया जोड़ा गया
              उप धारा ( 2)  यदि महासभा का समापन या विघटन होता है तो उस परिस्थिति में सभी ऋणों या दायित्वों का भुगतान करने के पश्चात भी कोई संपत्ति चाहे वह कुछ भी हो बच जावे तो उसे महासभा के सदस्यों को वितरित नहीं की जावेगी . किन्तु उसके संबंध में कार्यवाही छ.ग. समिति पंजीयन अधिनियम 1973 एव 1998  के अंतर्गत की जावेगी .

  उप धारा (3) महासभा को जो भी चल या अचल संपत्ति जहा से प्राप्त हो और जहा भी स्थित  हो वह पूर्णतया महासभा की संपत्ति कहलाएगी . संपत्ति / भवन के निर्माण  एवं ब्यवस्था के लिए पृथक ब्यवस्था ( समिति ) जो निर्मित होगी . सामयिक होते हुए उपसमिति के अधीन होगी .

       धारा    26  संवैधानिक विवादों का निपटारा :-
               इस संविधान की किसी धारा या उपधारा की परिभाषा संबंधी या अन्य किसी प्रकार का कोई विवाद उत्पन्न होता है तो श्रीमान पंजीयक फर्म्स एवं संस्थाए छत्तीसगढ़ रायपुर का निर्णय अंतिम रूप से मान्य होगा .
       धारा    30   महासभा के इस संविधान की धाराओं की प्रतियां प्रमाणित है जैसा की छ.ग.समिति पंजीयन अधिनियम 1973  ( 1960  का ) क्रमांक 1 की धारा 5 की उप धारा 2  के अधीन अपेक्षित है .एवं नियम 1998  के   अधीन अपेक्षित है जो अधिसूचना क्रमांक 293/ 2000 दिनांक 25.04. 2001 द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में प्रवृत हो गयी है .

                                                          -:  खंड 2  :-
                                                        निर्वाचन प्रक्रिया
                                                              भाग   1
       संविधान की धारा  -09  एवं धारा  -10  के अनुसार केन्द्रीय पदाधिकारीयो की चुनाव प्रक्रिया
धारा 01 :- निर्वाचन मंडल का गठन
उपधारा 01 :- संविधान की धारा  -10   उप धारा 02 के अनुसार निर्वाचक मंडल में तिन सदस्य होंगे इनमे से एक मुख्य निर्वाचन एवं दो सहायक निर्वाचन अधिकारी होंगे . इनका कार्यकाल तिन वर्षो का होगा .
उपधारा 02 :- केन्द्रीय पदाधिकारियों के निर्वाचन मंडल का गठन केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति द्वारा किया जावेगा . चुनाव प्रक्रिया के लिए केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति नियमावली बनाएगी .
उपधारा 03 :- निर्वाचक मंडल के सदस्य केन्द्रीय पदाधिकारी पद के लिए उम्मीदवार नहीं हो सकता . इस बात की लिखित घोषणा उसे देनी होगी तथा उन्हें नामजद होने की पात्रता नहीं होगी . गठन के पूर्व सदस्यों से अभिस्वीकृति केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति को प्राप्त करनी  होगी .
उपधारा 04 :-निर्वाचक मंडल के सदस्यों की आयु 35   (पैंतीस ) वर्ष से कम नहीं होगी तथा शैक्षणिक योग्यता स्नातक से कम नहीं होगी .
उपधारा 05 :- निर्वाचक मंडल के सदस्य निर्वाचन काल में तथा अपने तिन वर्ष के कार्यकाल में निष्पक्ष रहेंगे . चुनाव प्रक्रिया से प्रारंभ होकर चुनाव परिणाम निकलते तक तथा तिन वर्ष के कार्यकाल में क्घुनाव संबंधी संदर्भ आने पर निर्वाचक मंडल का निर्णय अंतिम व मानी होगा .
उपधारा 06:-  निर्वाचन तिथि के 15 दिन पूर्व या केन्द्रीय कार्यकारिणी द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार निश्चित स्थान एवं समय पर निर्वाचक मंडल प्रत्याशियों से आवेदन पत्र स्वीकार कर सकेंगे .
उपधारा 07:-  प्रत्याशियों से आवेदन पत्र करना , सूक्ष्म जांच करना तथा प्रत्याशियों की अंतिम सूचि का प्रकाशन एक दिन में पूरा करना होगा .
उपधारा 08:-  आवेदन पत्र प्राप्त करने के दिन अंतिम सूचि प्रकाशन तक की संपूर्ण प्रक्रियाओं का समय आदि आवेदन प्राप्त करने के पूर्व लिखित रूप में विज्ञापित करना होगा .
उपधारा 09:-  प्रत्याशियों को अपना आवेदन निर्धारित प्रपत्र में तथा 100  ( सौ ) रुपया अमानत राशि के साथ नियत दिनांक को स्वयम उपस्थित होकर या प्रस्तावक या समर्थक द्वारा मुख्य निर्वाचन अधिकारी को प्रस्तुत करना होगा .  ( प्रारूप संलग्न )
उपधारा 10:- आवेदन में अमानत राशि जमा करने की रसीद क्रमांक तथा सक्रीय सदस्यता संबंधी प्रमाण पत्र एवं केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति द्वारा इस संदर्भ में लिए गए निर्णय आदि का पालन करते हुए प्रमाण भी देना होगा .
उपधारा 11:-  आवेदक को इस बात की घोषणा करनी होगी की प्रत्याशी किसी प्रकार के मादक वास्तु का सेवन नहीं करेगा .
उपधारा 12:-  निर्वाचक मंडल निर्वाचित प्रत्याशियों को निर्धारित प्रारूप में प्रमाण पत्र देगा . प्रामन पत्र में निर्वाचक मंडल के सभी सदस्यों का हस्ताक्षर एवं दिनांक  रहेगा .
                                       धारा -  02 पदाधिकारियों की योग्यता
उपधारा 01:-  महासभा का कोई भी सक्रीय सदस्य जिसकी आयु 35 वर्ष दसे कम न हो तथा किसी क्षेत्रीय उपसमिति या केन्द्रीय समिति का कम से कम एक कार्यकाल तक पदाधिकारी रहा हो तथा प्रत्याशी होने के ठीक पहले पदाधिकारी रहा हो तथा प्रत्याशी होने के ठीक पहले लगातार एक कार्यकाल तक अनिवार्यतः सक्रीय सदस्य रहा हो , अध्यक्ष , वरिष्ठ उपाध्यक्ष , उपाध्यक्ष  तथा महासचिव पद का उम्मीदवार हो सकेगा .

   उपधारा 07 :- मतदाता जो किसी प्रत्याशी का प्रस्तावक या समर्थक है उसी पड़ा के लिए किसी एनी प्रत्याशी का प्रस्तावक या समर्थक नहीं होगा ऐसी त्रुटी पाए जाने पर उनके द्वारा हस्ताक्षरित प्रथम आवेदन पात्र को छोड़कर शेष आवेदन अवैध माने जायेंगे .
 उपधारा 08 :- प्रत्याशियों को केन्द्रीय बैठकों के लिए समय निकालने एवं निष्ठा बनाए रखने बाबत स्पष्ट घोषणा करनी होगी .
                                   धारा - 03  सामान्य प्रक्रिया
उपधारा 01 :- केन्द्रीय पदाधिकारियों का निर्वाचन बहुमत के आधार पर होगा एवं गुप्त मतदान प्रणाली से होगा .
उपधारा 02 :- कुल प्रदत्त मतों के 25 प्रतिशत से कम मत प्राप्त होने पर प्रत्याशी की अमानत राशि राजसात होगी तथा राशि केन्द्रीय कोष में जमा कर दी जावेगी  .
उपधारा 03 :- 25 प्रतिशत से अधिक मत पाने  वाले प्रत्याशीयो की अमानत राशि वापस कर दी जायेगी तथा प्रतिपर्ण पर प्रत्याशी का हस्ताक्षर लिया जावेगा . राशी प्राप्ति का उल्लेख प्रतिपर्ण पर होगा
उपधारा 04 :- निर्वाचक मंडल के द्वारा चुनाव के लिए स्थान , तारीख तथा समय का निर्धारण केन्द्रीय कार्यकारिणी के निर्णय एवं महासचिव के माध्यम से करना होगा .
 उपधारा 05 :-प्रत्याशी की अंतिम सूची के प्रकाशन के बाद आवश्यक संख्या में मतपत्रो की छपाई  का कार्य  निर्वाचक मंडल करेंगे तथा इसका पूर्ण विवरण एक पंजी में रखा जावेगा .
 उपधारा 06 :-मतपत्र में प्रत्याशी का पूरा नाम जो आवेदन पात्र में तथा मतदाता सूची में है लिखा जावेगा तथा यदि निर्वाचक मंडल  आवश्यक समझे तो चुनाव चिन्ह आदि छापे जायेंगे .
उपधारा 07 :- मतपत्र में  प्रत्याशीयो के नाम देवनागरी वर्णमाला के अनुसार होगा
 उपधारा 08 :- निर्वाचक मंडल निर्वाचन तिथि के एक दिन पूर्व मतदान के लिए एनी ब्यवस्था के अतिरिक्त संपूर्ण आवश्यक सामग्री की पूर्ण ब्यवस्था कर लेगा .

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