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38 Comments

Reply bsbaghel
11:35 AM on December 6, 2012 
भगवान् कहते है --
उदास न हो क्यों की मै तेरे साथ हूँ
सामने नहीं पर आस - पास हूँ
पलको को बंद कर , दिल से याद कर
मै और कोई कोई नहीं तेरा विश्वास हूँ
Reply bsbaghel
12:08 PM on December 4, 2012 
अजीब है ना
गरीब को देना हो तो रु . 10 का नोट ज्यादा लगता है,
होटल में टिप देना हो तो बहुत कम लगता है ।
भगवान को याद करने के लिए 3 मिनट कितना मुश्किल लगता है,
पर 3 घंटे का का फिल्म देखना आसान लगता है।
दिन भर मेहनत के बाद शाम को जिम जाने में नहीं थकते ,
परन्तु माता - पिता का पैर दबाना हो तो हम थक जाते है।
वैलेंटाईन डे के लिए साल भर इंतजार करते है ,
मातृ दिवस कब है हमें याद ही नहीं है।
इस संदेश को पढने / आगे बढ़ाना मुश्किल है ,
फिजूल के संदेश भेजना हमारा फर्ज बन जाता है
Reply glass insulators value
12:45 AM on September 15, 2012 
सोचा था कि मैं टिप्पणी और साफ विषय कहूंगा, आप खुद के लिए बना था? यह वास्तव में भयानक है!
Reply Dashrath Bhuwal
3:27 PM on September 7, 2012 
Dashrath Bhuwal
03:02 PM on September 07, 2012
पेनल ऐसी समस्या ,जो सब समस्यओं का है मूल ।
जब हम जागे तब सबेरा , और जो हो गया उसे भूल ।


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Reply Edit Delete Dashrath Bhuwal
02:56 PM on September 07, 2012
"यहाँ कोई गैर नही , सब हैं एक दुसरे के रिश्तेदार ।
अगर किसी ने किया गलत, तो होगा कड़ा प्रहार ।"
Reply Dashrath Bhuwal
3:11 PM on September 7, 2012 
|| महाराणा प्रताप जी की आरती ||

जय प्रताप महाराणे, जय प्रताप महाराणे |
जय प्रताप महाराणे, जय प्रताप महाराणे ||

मातृभूमि रक्षा को ठाने, विजय पताका को फहराने |
निकल पड़े चेतक पर जाने, हाथ में लिये भाले || जय........

दुश्मन बस मेवाड़ को पाने, बार बार आये टकराने |
किये लड़ाई जंग में डटकर, गज भर सीना ताने || जय.......

तेजतेज से तुम्हरे बाणा, बड़े प्रतापी तुम महाराणा |
शत्रु को पड़ गये युद्ध भूमि में, लोहे के चने चबाने || जय........

वीर पूत चवड़े छाती के, रण भूमि हल्दी घाटी के |
कर्ज़ चूकाने को माटी के, बैरी को लगाये ठिकाने || जय.......

तनमनधन सबकुछ लुटाके, माँ के दूधका कर्ज़ चुकाने |
देश का स्वाभिमान बचाने, पड़े घास की रोटी खाने || जय......

सुनसुन के तुम्हरी गाथा, हिन्दोस्तानी नवावय माथा |
देशभक्त आज़ादी के सब, हो गये बड़े दीवाने || जय.......

इतिहास रचे निजबल बूतों पे, आदर्श बने राजपूतों के |
गर्व तुम पे करता समूचा, देश भर के राजपूताने || जय.......


रचनाकार
ठा . दशरथ सिंह भुवाल
Reply Dashrath Bhuwal
10:23 AM on September 4, 2012 
ON THE OCCASION OF TEACHERS DAY 5th SEPT


ज्ञान एकत्र होये जो, बुद्धि बने बलवान।
और जब समझ बढ़े, विवेक होए सुजान।

"शिक्षक दिवस"
पर
समस्त गुरु शिष्य जगत को शुभकामनायें
Reply Dashrath Bhuwal
3:32 PM on September 1, 2012 
Shri Baghel ji,
Namaskar,
At first our BY-LAWS and the name of founder members must be discribed in the structure , before discribing any other matters. plese make it approbate.
Thank you.
Reply Dashrath Bhuwal
3:14 PM on September 1, 2012 
अम्बर सिंह भरद्वाज को राष्ट्रीय कराते प्रतियोगिता में कास्य पदक प्राप्त होने पर बहुत बहुत बधाई
Reply Dashrath Bhuwal
1:55 PM on August 30, 2012 
आदरणीय,श्री बघेल जी,
नमस्कार ,
shakti sarvatra poojyate को अंग्रेजी के बजाय हिन्दी में लिखें तो ज्यादा अच्छा होगा .आशा करता हूं आप मेरे इस सुझाव को भी सहजता से स्वीकार करेंगे .
धन्यवाद.
Reply Dashrath Bhuwal
11:51 AM on August 19, 2012 
Shri Baghel ji

Your email adress is unable to send the messages,please convey me the correct email adress so that i may send some suggesions.